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Showing posts from July, 2024

*विरुद्ध आहार*

*परस्पर विरुद्ध आहार का कभी सेवन न करें (अमल करें)* *-------------------------------* 1 दूध  के साथ कोई भी फल नमक कटहल  करेला भिन्डी मूली सलजम प्याज नींबू जामुन का कभी भी एक साथ सेवन नहीं करना चाहियेl 2. दूध और कुलत्थी भी कभी एक साथ नहीं लेना चाहिएl 3. नमक और दूध दूध और सभी प्रकार की खटाइयां, दूध और मूँगफली,  तिल दूध और मछली, एक साथ प्रयोग ना करें। 4. दही गर्म करके नहीं खाना चाहिये हानि पहुँचती है, कढ़ी बनाकर खा सकते हैं। 5. शहद और घी समान परिमाण में मिलाकर खाना  विष के समान है। 6. जौ का आटा कोर्इ और (गेहूं चना आदि) अन्न मिलाये बिना नहीं लेना चाहिए। 7. रात्रि के समय सत्तू का प्रयोग वर्जित है, बिना जल मिलाये सत्तू ना खायें। 8. तेज धूप में चलकर आने के बाद थोड़ा आराम करके ही पानी पियें, व्यायाम या शारीरिक परिश्रम के तुरन्त बाद पानी ना पियें या थोड़ी देर बाद पानी पियें और भोजन के प्रारम्भ में पानी पीना वर्जित है। 9. प्रात:काल भोजन के पश्चात तेज गति से चलना हानिकारक है। 10. शाम को खाने के बाद थोड़ी देर चलना आवश्यक है, खाना खाकर तुरन्त सो जाना हानिकारक है। 11. रात्रि में द...

आहार विज्ञान के महत्वपूर्ण सूत्र" * *

 (३७) * भारतीय आहार विज्ञान काश ये सब हमारी अनिवार्य शिक्षा   में शामिल होता जो ज्ञान हमारे पुर्वजों ने हजारों वर्ष के अनुभव से प्राप्त किया है । *----------------------------------* दूध ना पचे तो ~ सोंफ दही ना पचे तो ~ सोंठ छाछ ना पचे तो ~जीरा व काली मिर्च अरबी व मूली ना पचे तो ~ अजवायन कड़ी ना पचे तो ~ कड़ी पत्ता, तैल, घी, ना पचे तो ~  कलौंजी... पनीर ना पचे तो ~ भुना जीरा, भोजन ना पचे तो ~ गर्म जल केला ना पचे तो  ~ इलायची              ख़रबूज़ा ना पचे तो ~ मिश्री का उपयोग करें आम ना पचे तो जामुन और जामुन ना पचे तो काला नमक केला ना पचे तो बड़ी इलायची का चूर्ण गेंहू की रोटी से एलर्जी होतो सेब का सिरका  मीठा ना पचे तो मिटा सोडा * पेट दर्द मे अजवायन चूर्ण में नमक मिलाकर गरम पानी से खायें, चक्कर आने पर सौंफ और मिश्री खायें दस्त होने पर अजवायन और सोंठ पाउडर का मिलाकर सेवन करें कब्ज़ होने पर हरड़ का सेवन करें गांव होने पर हल्दी पाउडर को तेल में मिलाकर लगाएं दांत दर्द होने पर अदरक का अर्क और लौंग चूर्ण गर्म करके लगायें पेशाब में जलन ...

दोबारा नहीं गरम करना* *आयुर्वेद सरल चिकित्सा*

*----------------------------------* इन चीजों को दोबारा गर्म करके खाने से हो सकता है कैंसर कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें गर्म करने पर उनमें मौजूद प्रोटीन खत्म हो जाता है और उसमें मौजूद कुछ तत्व कैंसर के कारकों में बदल जाते हैं। अक्सर हम एक वक्त के खाने को दूसरे वक्त गर्म करके खा लेते हैं। लेकिन आपको ये जानकर हैरत हो सकती है कि हर खाने को गर्म नहीं करना चाहिए। खाने-पीने की कुछ चीजें ऐसी भी होती हैं जिन्हें गर्म करने से वो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो जाती हैं। कई बार इससे कैंसर होने का खतरा भी बढ़ जाता है। कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें गर्म करने पर उनमें मौजूद प्रोटीन खत्म हो जाता है और उसमें मौजूद कुछ तत्व कैंसर के कारकों में बदल जाते हैं। आइए जानें, ऐसी ही कुछ चीजों के बारे में जिन्‍हें दोबारा गर्म करके नहीं खाना चाहिए 1. आलू आलू स्वास्थ्यवर्धक होते हैं, लेकिन अगर इन्हें बनाकर बहुत अधिक देर तक रख दिया जाए तो इनमें मौजूद पोषक तत्व समाप्त हो जाते हैं। इसे दोबारा गर्म करके खाने से पाचन क्रिया पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। 2. अंडा अंडे को दोबारा गर्म करके खाना हमेशा नुकसानदेह होता है।...

परिष्कृत भोजन का प्रयोग कम से कम करें

 ग्रंथ भावप्रवण निरघनटु में बांग भट्ट जी लिखते हैं स्वस्थ रोग रहित शरीर और अधिक जीवन के लिए प्रकृति के साथ रहना प्रकृति के करीब रहना प्रकृति प्रदत्त पदार्थों का ताजा और जैसा जिस रूप में प्रकृति से मिला है उसी रुप में खाद्य अखाद्य का विचार करते हुए सेवन करना स्वास्थ्य के लिए उपयोगी  है । *-----------------------------*      सलाद में जो प्रकृतिक पोषक तत्व होते हैं वह उसे परिष्कृत करने के बाद नही रहते आयुर्वेद कहता है पकने के बाद सब्जी दाल आदि से क्षारीय तत्त्व कम हो जाते हैं और अम्ल की वृद्धि हो जाती है    ।            यही कारण है जो व्यक्ति प्रकृति से दुर रहता है प्रकृति प्रदत पदार्थों का सेवन कम से कम करता है और परिष्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन करता है वह उतनी ही भयंकर और लाईलाज रोग से ग्रस्त हो जाता है फलों की जगह डब्बा बंद जूस कभी नहीं ले सकते जूस को लम्बे समय तक सड़ने से बचाने के लिए ( सोडियम बेंजोएट अथवा वाहिटवेनेगर) मिलाया जाता है यह एक रासायनिक योगिक है जो स्वास्थ्य के लिए हानी कारक है इसलिए स्वस्थ रहने के लिए जो भी ख...

पका हुआ या डब्बा बंद(परिष्कृत) भोजन का प्रयोग कम से कम करें*

 ग्रंथ भावप्रवण निरघनटु में बांग भट्ट जी लिखते हैं स्वस्थ रोग रहित शरीर और अधिक जीवन के लिए प्रकृति के साथ रहना प्रकृति के करीब रहना प्रकृति प्रदत्त पदार्थों का ताजा और जैसा जिस रूप में प्रकृति से मिला है उसी रुप में खाद्य अखाद्य का विचार करते हुए सेवन करना स्वास्थ्य के लिए उपयोगी  है ।      सलाद में जो प्रकृतिक पोषक तत्व होते हैं वह उसे परिष्कृत करने के बाद नही रहते आयुर्वेद कहता है पकने के बाद सब्जी दाल आदि से क्षारीय तत्त्व कम हो जाते हैं और अम्ल की वृद्धि हो जाती है    ।            यही कारण है जो व्यक्ति प्रकृति से दुर रहता है प्रकृति प्रदत पदार्थों का सेवन कम से कम करता है और परिष्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन करता है वह उतनी ही भयंकर और लाईलाज रोग से ग्रस्त हो जाता है फलों की जगह* डब्बा बंद जूस कभी नहीं ले सकते जूस को लम्बे समय तक सड़ने से बचाने के लिए ( सोडियम बेंजोएट अथवा वाहिटवेनेगर) मिलाया जाता है यह एक रासायनिक योगिक है जो स्वास्थ्य के लिए हानी कारक है इसलिए स्वस्थ रहने के लिए जो भी खायें प्राकृतिक खायें संसलिस्ट न...

**स्वास्थ के सूत्र* *आयुर्वेद सरल चिकित्सा

  *स्वास्थ के लिए अमृत समान हैं यह प्रकृतिक पदार्थ और  शरीर मन और बुद्धि को क्रिया शील रखने के लिए  आवश्यक है योगा अभ्यास आपको रोगी होने से बचाते हैं ये 8 चीज़ों का उपयोग यदि आप सही मात्रा और सही समय पर सेवन कराते हैं, । *-------------------------------------* *1 जल -*  यह प्राकृतिक औषधि है। प्रचुर मात्रा में शुद्ध जल के सेवन से शरीर में जमा कई तरह के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। *2 रसदार फल -*  संतरा, मौसमी आदि रसदार फलों में भरपूर मात्रा में खनिज लवण तथा विटामिन सी होता है  गर्मियों में तरबूज खरबूजा । प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में ये महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जूस नहीं फल खायें। *3 गिरीदार फल -* सर्दी के मौसम में बादाम अखरोट काजू पिस्ता चिरोंजी किशमिश छुआरे खजूर गिरीदार फलों का सेवन फायदेमंद होता है। इन्हें रात भर भिगोकर रखने व सुबह   दूध के साथ, खाने से आधे घंटे पहले लेने से बहुत लाभ होता है गर्मियों में इन्हें खाने से बचना चाहिए। *4 अंकुरित अनाज -* अंकुरित अनाज (जैसे मूंग, मोठ, चना आदि) तथा भीगी हुई दालों का भरपूर...

बहेड़ा:(विभीतकी) सेहत के लिए बहुत लाभकारी है

बहेड़ा:(विभीतकी) सेहत के लिए बहुत लाभकारी है यह आयुर्वेदिक औषधि। *------------------------------*    भारत में ऐसी कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां हैं, जिनका इस्तेमाल वर्षों से तरह-तरह की बीमारियों को दूर भगाने में किया जा रहा है। ऐसी ही एक जड़ी-बूटी है बहेड़ा। सबसे दिलचस्प बात ये है कि बहेड़ा को संस्कृत में विभीतकी कहा जाता है, जिसे अंग्रेजी में 'फीयरलेस' यानी 'निर्भय' कहते हैं, यानी यह बीमारियों का भय दूर करता है। पेट संबंधी कुछ समस्याओं के उपचार और प्रबंधन के लिए इस जड़ी-बूटी का उपयोग सदियों से किया जा रहा है।  बहेड़ा त्रिफला के तीन प्रमुख अवयवों में से एक है, जबकि अन्य दो में आंवला और हरड़ शामिल हैं। इसमें रोगाणुरोधी, एंटी-ऑक्सीडेंट और प्रतिरक्षा विज्ञानी गुण मौजूद होते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि इसके गुण त्रिदोष, जैसे वात, पित्त और कफ को संतुलित करने में सहायक हैं। इसका इस्तेमाल और भी कई तरह की समस्याओं से निजात पाने में किया जाता है। आइए जानते हैं बहेड़ा के इस्तेमाल से होने वाले फायदों के बारे में... लिवर के लिए फायदेमंद है बहेड़ा  बहेड़ा को लिवर के स्वास्थ्य के लिए अ...

आंवले के गुणकारी फायदे

आंवले को आयुर्वेद में कषाय कहा गया है यह विटामिन सी का भंडार है आंवला ही प्रकृति में एकमात्र ऐसा फल है जिसमें मौजूद विटामिन सी आंवले को उबालने पर भी नष्ट नहीं होता । आयुर्वेद में कायाकल्प औषधियां  चवनप्राश अवलेह या आयुर्वेद की महा औषधि त्रिफला चूर्ण आदि सभी का बेश (मुख्य औषधि घटक)आंवला ही है आयुर्वेद में पित्त नासक जो योग बनायेजाते है उन सभी में आंवला मिलाया जाता है आंवला श्वास तंत्र मानसिक विकास बालों केरोग कब्ज रोगों में लाभ कारी है आंवला यूरिक एसिड को साइट्रिक एसिड में बदलता है इसलिए गठिया जोड़ों का दर्द में उपयोगी है तथा गुर्दे के रोगी में उपयोगी है आंवला  कषाय होने के कारण रकत वाहिकाओं में गंदगी को बाहर निकालता है आंवला रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करता है आंवला आंखकी रोशनी बढ़ाता  है आंवला यकृत के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है ।     किसी भी रूप में थोड़ा सा आंवला हर रोज खाते रहे जीवन भर उच्च रक्तचाप और हार्ट फेल नहीं होगा। इसके साथ चेहरा चमकदार बाल स्वस्थ और काले रहेंगे। चाय पत्ती के पानी में आंवला पाउडर  मिलाकर बालों में लगाने से बाल तेजी ...

आहार के नियम भारतीय 12 महीनों अनुसार

1:-चैत्र ( मार्च-अप्रैल) – इस महीने में चने का सेवन करे क्योकि चना आपके रक्त संचार और रक्त को शुद्ध करता है एवं कई बीमारियों से भी बचाता है। चैत्र के महीने में नित्य नीम की 4 – 5 कोमल पतियों का उपयोग भी करना चाहिए इससे आप इस महीने के सभी दोषों से बच सकते है। नीम की पतियों को चबाने से शरीर में स्थित दोष शरीर से हटते है। 2:-वैशाख (अप्रैल – मई)- वैशाख महीने में गर्मी की शुरुआत हो जाती है। बेल का इस्तेमाल इस महीने में अवश्य करना चाहिए जो आपको स्वस्थ रखेगा। वैशाख के महीने में तेल का उपयोग बिल्कुल न करे क्योकि इससे आपका शरीर अस्वस्थ हो सकता है। 3:-ज्येष्ठ (मई-जून) – भारत में इस महीने में सबसे अधिक गर्मी होती है। ज्येष्ठ के महीने में दोपहर में सोना स्वास्थ्य वर्द्धक होता है , ठंडी छाछ , लस्सी, ज्यूस और अधिक से अधिक पानी का सेवन करें। बासी खाना, गरिष्ठ भोजन एवं गर्म चीजो का सेवन न करे। इनके प्रयोग से आपका शरीर रोग ग्रस्त हो सकता है। 4:-अषाढ़ (जून-जुलाई) – आषाढ़ के महीने में आम , पुराने गेंहू, सत्तु , जौ, भात, खीर, ठन्डे पदार्थ , ककड़ी, पलवल, करेला, बथुआ आदि का उपयोग करे व आषाढ़ के महीने में भी गर्...

दिनचर्या

 आयुर्वेद के चमत्कार- 1 - दिनचर्या नियम स्वास्थ्य और आयु की रक्षा के लिए मनुष्य को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर मल मूत्रादि त्याग करना चाहिए, जल्दी मल मूत्र त्यागने से पेट के रोग नष्ट होते हैं। 2- मलमूत्र त्याग करके हाथ मुंह धो कर दातुन करनी चाहिए। दातुन करने से मुख संबंधी सभी रोग नष्ट होते हैं। 3 दांतुन के पश्चात स्नान करना चाहिए प्रातः स्नान अग्नि को दीपन करने वाला, शक्ति, आयु और ओज को बढ़ाने वाला तथा उत्साह, बुध्दिबल को देने वाला एवं खुजली, मैल, परिश्रम, पसीना, आलस्य, तृषा तथा पापों को नष्ट कर ईश्वर की भक्ति याद दिलाता है। अतः प्रातः स्नान अवश्य करना चाहिए। 4 स्नान के पश्चात मनुष्य को सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, परमात्मा का ध्यान करना चाहिए क्योंकि वह परमेश्वर ही हमारे हानि, लाभ, जीवन, मरण तथा आरोग्यता और सुख दुखादि का जिम्मेवार तथा फल देता है। दोनों समय प्रभु भजन करने से हमारे सब रोग, शोक नष्ट होते हैं। ईश्वर भजन जन्म, मरण और ज्वरादि सकल रोगों की परमौषधि है। जो रोग किसी दवा से नष्ट न हो, वह ईश्वर स्मरण से नष्ट हो जाता है। अतः ईश्वर भजन अवश्य करना चाहिए। 5 मनुष्य को उचित है कि मात्रा से भ...

संतुलित भोजन (Balanced Diet)

*आज का आधुनिक  विज्ञान जिसे कैलोरी कहता है अथर्ववेद में उसे सुक्ष्म पोषक तत्व कहा गया है या ये कहें खाद्य पदार्थ में शरीर रूपी इंजन को चलाने के लिए मिलने वाली ऊर्जा को कैलोरी कहते हैं जिनकी मात्रा अलग अलग खाद्य पदार्थों में कम या अधिक होती है यदि हम अधिक शारीरिक श्रम नहीं करते तब हमें अधिक ऊर्जा वाले(कैलोरी वाले) खाद्य पदार्थ नहीं खाने चाहिऐं इससे हमारे शरीर में ऊर्जा का संचय होने लगता है जिससे मोटापा दिल की बिमारी मधुमेह किडनी डिजीज आदि हो सकता है। *संतुलित भोजन (Balanced diet) या बैलेंस डाइट वह है जिससे शरीर को सुचारू रूप से चलने के लिए संपूर्ण पोषण मिल सके। संतुलित भोजन के लिए हर रोज शरीर की जरूरत के हिसाब से कैलोरी, विटामिन, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट लेना जरूरी होता है। पोषक तत्वों के अभाव में व्यक्ति का शरीर कमजोर होने लगता है और अलग- अलग बीमारियों से घिर जाता है। अथर्ववेद के विद्वान ऋषि का कहना है हमारे आहार में ३०%, अम्ल और 80%,क्षार की मात्रा होना चाहिए परंतु आज हमारी जीवन शैली बदल गयी है मैदा से बने आहार मैगी चाऊमीन पिज्जा बर्गर समोसे सभी अम्लता बढ़ाते है  वैसे तो सभी...

भोजन के नियम*

 (३५) * *आयुर्वेद सरल चिकित्सा* *खाना खाते समय अपनाएं ये नियम, कभी नहीं पड़ेंगे बीमार* *----------------------------------------* आयुर्वेद में आहार और भोजन के संबंध में कई नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करने पर बीमारियों से तो बचाव होता ही है, स्वास्थ भी अच्छा रहता है और लंबी उम्र मिलती है। इन नियमों में खाने के समय से लेकर मात्रा और प्रकार के बारे में भी बताया गया है। जानिए ऐसे ही 20 नियमों के बारे में 1 सुबह का नाश्ता पेट भर कर ले, लंच उससे 30% कम और डिनर लंच से 30% कम ले। 2 विपरीत गुण वाले फूड को एक साथ न खाए जैसे दूध के साथ दही, दूध और नमक दूध और मूली या करेला और भिंडी मछली आदि  इससे नुकशान हो सकता है। 3 खाना हमेसा बैठकर ही खाए खड़े होकर या चलते चलते खाने से कई तरह की बीमारियाँ हो सकती है। 4 बगैर भूख के भोजन न करे. इससे खाना डाइजेस्ट नहीं होता ओर गैस, बदहजमी जैसी प्रॉब्लम हो सकती है 5 पहले खाया हुआ पचने के बाद ही दूसरी बार खाए. खाने के बीच 4-5 घंटे का अंतर होना चाहिए 6 जल्दी जल्दी न खाए, खाना अच्छे से चबाकर खाए. इससे लार अच्छी बनती है ओर खाना जल्दी पचता है 7 खाते समय ह...

स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है बहेड़ा

  बहेड़ा:(विभीतकी) सेहत के लिए बहुत लाभकारी है यह आयुर्वेदिक औषधि। *------------------------------*    भारत में ऐसी कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां हैं, जिनका इस्तेमाल वर्षों से तरह-तरह की बीमारियों को दूर भगाने में किया जा रहा है। ऐसी ही एक जड़ी-बूटी है बहेड़ा। सबसे दिलचस्प बात ये है कि बहेड़ा को संस्कृत में विभीतकी कहा जाता है, जिसे अंग्रेजी में 'फीयरलेस' यानी 'निर्भय' कहते हैं, यानी यह बीमारियों का भय दूर करता है। पेट संबंधी कुछ समस्याओं के उपचार और प्रबंधन के लिए इस जड़ी-बूटी का उपयोग सदियों से किया जा रहा है।  बहेड़ा त्रिफला के तीन प्रमुख अवयवों में से एक है, जबकि अन्य दो में आंवला और हरड़ शामिल हैं। इसमें रोगाणुरोधी, एंटी-ऑक्सीडेंट और प्रतिरक्षा विज्ञानी गुण मौजूद होते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि इसके गुण त्रिदोष, जैसे वात, पित्त और कफ को संतुलित करने में सहायक हैं। इसका इस्तेमाल और भी कई तरह की समस्याओं से निजात पाने में किया जाता है। आइए जानते हैं बहेड़ा के इस्तेमाल से होने वाले फायदों के बारे में... लिवर के लिए फायदेमंद है बहेड़ा  बहेड़ा को लिवर के स्वास्थ्य क...

संतुलित भोजन

*-------------------------------* *आज का आधुनिक  विज्ञान जिसे कैलोरी कहता है अथर्ववेद में उसे सुक्ष्म पोषक तत्व कहा गया है या ये कहें खाद्य पदार्थ में शरीर रूपी इंजन को चलाने के लिए मिलने वाली ऊर्जा को कैलोरी कहते हैं जिनकी मात्रा अलग अलग खाद्य पदार्थों में कम या अधिक होती है यदि हम अधिक शारीरिक श्रम नहीं करते तब हमें अधिक ऊर्जा वाले(कैलोरी वाले) खाद्य पदार्थ नहीं खाने चाहिऐं इससे हमारे शरीर में ऊर्जा का संचय होने लगता है जिससे मोटापा दिल की बिमारी मधुमेह किडनी डिजीज आदि हो सकता है। *संतुलित भोजन (Balanced diet) या बैलेंस डाइट वह है जिससे शरीर को सुचारू रूप से चलने के लिए संपूर्ण पोषण मिल सके। संतुलित भोजन के लिए हर रोज शरीर की जरूरत के हिसाब से कैलोरी, विटामिन, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट लेना जरूरी होता है। पोषक तत्वों के अभाव में व्यक्ति का शरीर कमजोर होने लगता है और अलग- अलग बीमारियों से घिर जाता है। अथर्ववेद के विद्वान ऋषि का कहना है हमारे आहार में ३०%, अम्ल और 80%,क्षार की मात्रा होना चाहिए परंतु आज हमारी जीवन शैली बदल गयी है मैदा से बने आहार मैगी चाऊमीन पिज्जा बर्गर समोसे सभी ...

*उत्तम स्वास्थ सेहत से बड़ा कोई धन नहीं हैं।*

 (३२) * * * *------------------------------* लोकोक्ति यह भी है स्वस्थ शरीर में स्वस्थ बुद्धि निवास करती है और स्वस्थ बुद्धि और स्वस्थ मन में स्वस्थ और रचनात्मक विचार आते हैं। *उत्तम स्वास्थ्य और रोग रहित बलिष्ठ शरीर तथा प्रखर बुद्धि के लिए सेहत का उत्तम होना आवश्यक है कहते हैं स्वस्थ शरीर में ही सुंदर मन और आत्मा और तर्क शक्ति युक्त बुद्धि निवास करती है। *आधुनिक चिकित्सा विज्ञान जिसे मिनरल्स और विटामिन कहता है आयुर्वेद उन्हें शरीर के लिए आवश्यक धातुऐं और पोषक तत्व कहता है व्यक्ति के विविधता पूर्ण पोष्टिक भोजन और दिन चर्चा को व्यवस्थित करने से उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है तथा अलग से विटामिन लेने की आवश्यकता नहीं होती। *अगर आपकी सेहत अच्छी है तो आप हर काम को दिल से करेंगे, अगर शरीर में किसी तरह की कोई कमजोरी है तो कोई भी काम करनेमें आपकी दिलचस्पी ही नहीं रहेंगी। शरीर सुस्त हो जाएगा। इसके लिए रोज फल, हरी सब्जियां और प्रोटीन युक्त आहार लें लेकिन उससे भी जरूरी बात यह है कि कुछ चीजें सही समय पर ही खाई जाए। * मानव स्वास्थ इस बात पर निर्भर करता है आप के खानै में अम्ल की अपेक्षा क्षा...

मिक्स आटा*

दुनिया की भूक शांत करने में आज गेंहू पहले स्थान पर है  वैज्ञानिक शोध बताते हैं गेंहू खाते जाने वाले सबसे ख़राब अनाजों में से एक है परन्तु प्रति हेक्टेयर गेंहू की उपज और सबसे अधिक और लागत सबसे कम है विश्व की ८००करोड से अधिक आबादी का पेट भरने के लिए गेंहू से बेहतर विकल्प और होही नहीं सकता  गेंहू में ग्लुटेन की मात्रा अधिक होती है जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकर है आज भारत में डायबिटीज के प्रमुख कारणों में एक कारण गेंहू और केवल गेंहू का उपयोग भी है उधर गेंहू उत्पादन में अंधाधुंध फर्टिलाइजर और पेस्टिसाइड का प्रयोग मनुष्य को ह्रदय लिवर और किडनी का रोगी बना रहा है। भारतीय खाद्य परंपरा में मोटे अनाजों का महत्वपूर्ण स्थान प्राचीन काल से रहा है इनमें फायबर और आवश्यक पोषक तत्व (विटामिन्स मिनरल्स खनिज पदार्थ) प्रचूर और संतुलित मात्रा में पायेजाते है जो व्यक्ति को स्वस्थ रखने में सहायक है। बहुत व्यक्तियों ने फोन तथा मैसेज द्वारा पूछा गया मल्टीग्रेन आटा बनाने के लिए किस किस अनाजों को मिलायें और मात्रा क्या हो जिससे रोटी का स्वाद भी ठीक रहे और स्वास्थ वर्धक भी हो। मल्टीग्रेन आटा से बनी रोटी...

आचार्य चाणक्य और आयुर्वेद

*आचार्य चाणक्य(कौटिल्य) अर्थ शास्त्र राजनीति शास्त्र युद्ध विद्या के ही विद्वान नहीं थे अपितु आयुर्वेद के भी आदित्य और अदभुत विद्वान थे। *-----------------------* प्राचीन भारत के महान रणनीतिकार #आचार्य_चाणक्य अपने साथ एक दण्ड लेकर चला करते थे। कहा जाता है कि आचार्य चाणक्य अपने दण्ड में #गुडूची छुपाकर रखते थे ताकि संकट के समय उनकी प्राण रक्षा हो सके। आयुर्वेद की संहिताओं मे दण्ड को भय का नष्ट करने वाला बताया गया है (सु.चि. 24.78, च.सू.5.102) भयघ्नं दण्डधारणम्। लेकिन हम डंडे की बात कभी बाद में करेंगे, आज की चर्चा उस गुडूची पर है जिसे आचार्य चाणक्य अपने डंडे में सदैव रखते थे और जिनका मानना था कि औषधियों में गुडूची सर्वश्रेष्ठ है (बृ.चा.9.4): सर्वौषधीनां अमृता प्रधाना। गुडूची को आब-ए-हयात नाम से भी जाना जाता है।आम बोलचाल में इसे #गिलोय भी कहा जाता है आइये, सबसे पहले आयुर्वेद की संहिताओं में उपलब्ध जानकारी की बात करते हैं। उम्र को रोके रहने वाले या वयःस्थापक द्रव्यों में गुडूची शामिल है। इस वर्ग की अन्य प्रजातियाँ #हरीतकी, #आँवला, रास्ना, अपराजिता, जीवन्ती, अतिरसा #शतावरी, #मंडूकपर्णी, #शाल...

आहार विज्ञान भाग-४

*--------------------------* *मानव आहार हजारों वर्षों से शोध का विषय रहा है जितना शोध और खोज इस विषय पर हुई है किसी और विषय पर नहीं हुई । वास्तव में हमारे स्वास्थ्य का संबंध हमारे खान-पान से है मानव को होने वाले 99%रोग का संबंध हमारे आहार से ही है आयुर्वेद में भी आहार के विषय में एक अलग विज्ञान है जानते हैं आहार के विषय में क्या कहता है आयुर्वेद। *आयुर्वेद के विद्वानों  ऋषियों ने हजारों वर्षों के शोध औरअनुभव से जो जाना है वहीं भारतीय आहार विज्ञान है जिसे आधार बनाकर ही आधुनिक रिसर्च हो रही है। भोतिक संसाधन तभी किसी व्यक्ति के लिए उपयोगी है वह उन का भोग करसकता हो- जब वह स्वस्थ हो बीमार के लिए सभी निरर्थक और बेकार हैं स्वास्थ का संबंध हमारे आहार से है आहार विज्ञान स्वस्थ  .बलिष्ठ रोग रहितशरीर तथा विचार शील रचनात्मक तेज स्मरण शक्ति नवीन उत्साहऔरउर्जा को प्राप्त करने के लिये बनाये रखने के लियेआहार विज्ञान का ज्ञानहोना अतिआवश्यक है ।आहार पथ्य परहेज परआयूर्वेद विशेष जोर देता है और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान पथ्य और परहेज को निर्थक मानता है आहार विज्ञान को समझने के लिये इन तीन शब्दो का अ...

भारतीय आहार विज्ञान * भाग-३

आयुर्वेद विद्वानों ने स्वास्थ  रहने के संबंध में दो नियम  बताए  हैं १.रोगी होकर रोग का उपचार करें  २ .आरोग्य की रक्षा करें ,     अर्थात ऐसा भोजन करें जिससे रोगी हों ही नहीं और अपनी दैनिक दिनचर्या को व्यवस्थित करें कि शरीर मे रोग का जन्म ही न हो  *----------------------------* वांग भट्ट जी कहते हैं स्वास्थ्य का संबंध आहार से है हम जो भी खाते हैं उससे ओज बनता है ओज से रस बनता है और रस ही है जो शरीर को पोषण देता है 90%रोग हमारी गलत दिनचर्या तथा विरुद्ध आहार तथा गलत खान पान के *गलत समय *मौसम और व्यक्ति की प्रकृति के विपरित आहार  सेवन के करण होते हैं। वांग भट्ट जी  लिखते है दिनचर्या को ठीक और व्यवस्थित कर के, योग और प्राणायाम को अपनाकर आयुर्वेद के विद्वानों द्वारा बताते आहार को अपनाकर विरुद्ध आहार का विचार करें मौसम के अनुसार फल सब्जी अनाजों का सेवन कर के स्वास्थ्य रहा जा सकता है । आयुर्वेद में स्वास्थ का दुसरा नियम है रोग होने पर रोग के अनुसार विभिन्न औषधियों का सेवन करके रोग मुक्त होना दिॆर्ध आयु के लिए ॠग वेद में स्वास्थ के पहले नियम के बा...

ऋतु परिवर्तन*

* ऋतु परिवर्तन होने पर स्वास्थ पर क्या प्रभाव पड़ता है यह भी ऋतुचर्या-का ही विषय है ऋ़तु परिवर्तन एवं स्वास्थ्य सावधानी* *-----------------------*   *अभी तक हमने उत्तरायण एवं दक्षिणायन में आने वाली छह ऋतुओं में किसी व्यक्ति की जीवनचर्या क्या होनी चाहिए, क्या-क्या दोष संभावित हैं, ऋतु विशेष में वातावरण कैसा होता है- इन पर विचार किया। आयुर्वेद पूर्णतः विज्ञानसम्मत है एवं यह बताता है कि शास्त्रोक्त जीवनपद्धति का पालन किया जाए तो किसी प्रकार के रोगों की संभावना नहीं रहती। अभी ऋतु विशेष के अनुसार आहार की हमने विशेष चर्चा नहीं की है। हाँ, ऋतुसंधि एवं ऋतु हरीतकी पर संक्षिप्त टिप्पणी पिछली बार की है। अब मौसम विशेष के अनुसार त्रिदोषों की स्थिति क्या होती है, इस पर इस समापन किस्त में प्रकाश डालेंगे। पंचकर्म प्रकरण की विस्तार से सद्वृत्त के साथ चर्चा बाद में होगी। वातावरण में भिन्न-भिन्न प्रकार के प्रभाव भिन्न-भिन्न ऋतुओं में होते हैं। आहार भी बदलता रहता है। यही दोषों को प्रभावित करता है। आहार तो हम अपने आप नियंत्रित कर सकते हैं, उपवास आदि से शोधन भी कर सकते हैं, ।       * परंत...

ऋतु चर्चा भाग 3

आहार के नियम- भारतीय 12 महीनों अनुसार *----------------------------* भारतीय  काल गणना के अनुसार चैत्र प्रतिपदा से नव वर्ष का आरम्भ होता है । चैत्र ( मार्च-अप्रैल) – इस महीने में गुड का सेवन करे क्योकि गुड आपके रक्त संचार और रक्त को शुद्ध करता है एवं कई बीमारियों से भी बचाता है। चैत्र के महीने में नित्य नीम की 4 – 5 कोमल पतियों का उपयोग भी करना चाहिए इससे आप इस महीने के सभी दोषों से बच सकते है। नीम की पतियों को चबाने से शरीर में स्थित दोष शरीर से हटते है। वैशाख (अप्रैल – मई)- वैशाख महीने में गर्मी की शुरुआत हो जाती है। बेल पत्र का इस्तेमाल इस महीने में अवश्य करना चाहिए जो आपको स्वस्थ रखेगा। वैशाख के महीने में तेल का उपयोग बिल्कुल न करे क्योकि इससे आपका शरीर अस्वस्थ हो सकता है। ज्येष्ठ (मई-जून) – भारत में इस महीने में सबसे अधिक गर्मी होती है। ज्येष्ठ के महीने में दोपहर में सोना स्वास्थ्य वर्द्धक होता है , ठंडी छाछ , लस्सी, ज्यूस और अधिक से अधिक पानी का सेवन करें। बासी खाना, गरिष्ठ भोजन एवं गर्म चीजो का सेवन न करे। इनके प्रयोग से आपका शरीर रोग ग्रस्त हो सकता है। अषाढ़ (जून-जुलाई) – आषा...

*ॠतु चर्चा भाग२* *

 (   *ॠतु चर्चा विषय गूढ़ और विस्तृत है इस लिए एक पोस्ट में लिखना संभव नहीं हुआ आप के लिए प्रस्तुत है ॠतु चर्चा का दूसरा भाग:- *---------------------------------* - * ऋतु परिचयदिनचर्या के पोस्ट सीरीज में जो कुछ भी बताया गया, वह 24 घंटे (अर्थात दिन और रात्रि) में किये जाने वाला आचरण है। मतलब 24 घंटे में क्या क्या करना चाहिए और क्या क्या नही? *यह पूरी जानकारी आपको दिनचर्या सीरीज से मिल गयी है। अब आगे के लिए फिर ऋतु काल मे क्या क्या करना चाहिए? * भिन्न भिन्न ऋतुओं में भिन्न भिन्न नियम का पालन करके स्वस्थ रह सकते है। जैसे शीतकाल में गर्म पानी से स्नान करना और गर्म कपड़े पहनना अच्छा होता है। इसी प्रकार ग्रीष्म काल मे ठंडे पानी से नहाना और हल्के कपड़े पहनना चाहिए ये तो साधारण सी बात है उसी प्रकार इन ऋतुओं के कई नियम है जो आपके लिए अति आवश्यक है उन सभी नियमो को इस “ऋतुचर्या” सीरीज के माध्यम से हम आपको बताएंगे।( नोट- जो लोग दिनचर्या वाले भाग को अभी नही पढ़े है *माघ मास से 2-2 महीने के क्रम से 6 ऋतुये होती है। *ये ऋतुये (1)- शिशिर, (2)- वसन्त, (3)- ग्रीष्म, (4)- वर्षा, (5)- शरद, (6)- हेमन...