भारतीय आहार विज्ञान * भाग-३
आयुर्वेद विद्वानों ने स्वास्थ रहने के संबंध में दो नियम बताए हैं
१.रोगी होकर रोग का उपचार करें
२ .आरोग्य की रक्षा करें ,
अर्थात ऐसा भोजन करें जिससे रोगी हों ही नहीं और अपनी दैनिक दिनचर्या को व्यवस्थित करें कि शरीर मे रोग का जन्म ही न हो
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वांग भट्ट जी कहते हैं स्वास्थ्य का संबंध आहार से है हम जो भी खाते हैं उससे ओज बनता है ओज से रस बनता है और रस ही है जो शरीर को पोषण देता है 90%रोग हमारी गलत दिनचर्या तथा विरुद्ध आहार तथा गलत खान पान के *गलत समय *मौसम और व्यक्ति की प्रकृति के विपरित आहार सेवन के करण होते हैं।
वांग भट्ट जी लिखते है दिनचर्या को ठीक और व्यवस्थित कर के, योग और प्राणायाम को अपनाकर आयुर्वेद के विद्वानों द्वारा बताते आहार को अपनाकर विरुद्ध आहार का विचार करें मौसम के अनुसार फल सब्जी अनाजों का सेवन कर के स्वास्थ्य रहा जा सकता है ।
आयुर्वेद में स्वास्थ का दुसरा नियम है रोग होने पर रोग के अनुसार विभिन्न औषधियों का सेवन करके रोग मुक्त होना दिॆर्ध आयु के लिए ॠग वेद में स्वास्थ के पहले नियम के बारे में बताया गया है। यदि व्यक्ति रोगी होने पर अपनी दिनचर्या और आहार ठीक करले तो रोगी जल्दी स्वस्थ हो जाता है ऋग्वेद वेद में दूसरे नियम को सर्वोत्तम बताया गया है अच्छा हो हम रोगी ही ना हों भारतीय आहार व्यवहार दिन चर्या यम नियम योग और व्यायाम का पालन करें।
- 90 प्रतिशत रोग केवल पेट से(आहार से) होते है, पेट में कब्ज नहीं रहना चाहिए अन्यथा रोगों की कभी कमी नहीं रहेगी ।।
- 103 प्रकार के रोग भोजन के बाद जल पीने से होते हैं, भोजन के आधे से पौन घंटे बाद या पहले ही जल पीना चाहिये कुछ आहार विशेषज्ञ का यह भी कहना है यदि आप पानी के वगैर भोजन में दिक्कत है तब आप भोजन के बीच में एक बार पानी पीना भी उचित है भोजन के बाद कभी नहीं ।।
- 80 प्रकार के रोग चाय पीने से होते हैं ।।
- 48 प्रकार के रोग ऐलुमिनियम के बर्तन या कुकर के खाने से होते हैं ।।
108 प्रकार के रोग मांस खाने से होते हैं ।।
- शराब, कोल्डड्रिंक और चाय के सेवन से हृदय रोग होता है ।।
- अण्डा खाने से हृदयरोग, पथरी और गुर्दे खराब होते हैं ।।
- ठंडे जल {फ्रिज} आइसक्रीम से बड़ी आंत सिकुड़ जाती है ।।
- मैगी, गुटका, शराब, पिज्जा, बर्गर, बीड़ी, सिगरेट, पेप्सी, कोक से बड़ी आंत सड़ती है ।।
11-- भोजन के पश्चात् स्नान करने से पाचनशक्ति मन्द हो जाती है, और शरीर कमजोर हो जाता है ।।
- बाल रंगने वाले द्रव्यों हेयरकलर से आँखों को हानि पहुंचती है {अंधापन भी} हो सकता है ।।
13-- दूध, चाय के साथ नमक {नमकीन पदार्थ}खाने से चर्म रोग हो जाता है, फटे हुये दूध न खायें,
पनीर खाने के फैशन से बचें ।।
- शैम्पू, कंडीशनर और विभिन्न प्रकार के सुगंधित तेलों से बाल पकने, झड़ने और दोमुहें होने लगते हैं ।।
- गर्म जल से स्नान करने पर, शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है, गर्म जल सिर पर डालने से आँखें कमजोर हो जाती हैं ।
- टाई बांधने से आँखों और मस्तिष्कश को हानि पहुँचती है ।।
- खड़े होकर जल पीने से घुटनों {जोड़ों} में पीड़ा होती है,
- खड़े होकर मूत्र-त्याग करने से रीढ़ की हड्डी कमजोर होती है ।।
भोजन बन जाने के बाद उसमें नमक डालने से, रक्तचाप {ब्लडप्रेशर} बढ़ता है ।।
मुँह से साँस लेने वालों की आयु कम होती है, कुत्ते इसके उदाहरण हैं ।।
- अधिक झुककर पढ़ने से या झुककर कोई काम करने से, फेफड़े खराब हो जाते हैं और क्षयरोग {टीबी} होने की समभावना होती है ।।
- नीम के पत्ते से अक्सर मुख तीता कर लेना चाहिए, चैत्र माह में नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध हो जाता है ।।
- नित्य तुलसी के सेवन से मलेरिया नहीं होता ।।
- मूली प्रतिदिन खाने से व्यक्ति अनेक रोगों से मुक्त रहता है सायंकाल मूली खाने से बचें ।।
- अनार - आंव, संग्रहणी, पुरानी खांसी व हृदय रोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ फल है ।।
- हृदय-रोगी के लिए अर्जुन की छाल, लौकी का रस, तुलसी, पुदीना, मौसमी, सेंधा नमक, गुड़, - चोकर-युक्त आटा, छिलके-युक्त अनाज औषधियां हैं ।।
- भोजन के पश्चात् पान, गुड़ या सौंफ खाने से पाचन अच्छा होता है ।। अपच नहीं होता है ।।
ध्यान रहे- पान इलायची सुपारी चूना, मुलेठी ही एकसाथ लें तम्बाकू नही।।
- कफ दूर करने के लिए, मुलहठी चूसें, इससे आवाज मधुर होती है ।।
- जल सदैव ताजा पीना चाहिये, बोतलबंद फ्रिजका पानी, आर ओ का पानी, बासी पानी अनेक रोगों के कारण होते हैं हां मटके का पानी पीना लाभकारी है।।
- फल, मीठा और घी या तेल से बने पदार्थ खाने से पहले जल - पीकर प्यास बुझायें, बाद में जल पीने से बचें ।।
- भोजन बनने के एक घंटे के भीतर अवश्य खालें ।।
भोजन बनाने हेतु एक नं. मिट्टी के बर्तन, दो नं. कांसे के बर्तन तीन नं. पीतल के बर्तन हैं ।। सम्भव हो तो,अल्युमिनियम के बर्तन और प्रेशर कुकर से बचें ।।
- स्वास्थ्य हेतु 15 दिन तक गेहूँ का आटा, और चना, ज्वार, बाजरा, मक्का का आटा 7 दिनों से अधिक हो तो प्रयोग न करें ।। आटा मोटा ही पिसवाएं चोकर सहित खाने का आनंद ही कुछ और है ।।
- किसी भी उम्र के लोगों को मैदा {बिस्कुट, बे्रड, समोसा आदि} कभी भी नहीं खिलाएं ।।
- भोजन में सेंधा नमक सर्वश्रेष्ठ होता है, उसके बाद काला नमक का स्थान आता है, सफेद नमक जहर समान है ।।
- शरीर, जल जाने पर आलू का रस, हल्दी, शहद, घृतकुमारी में से कुछ भी लगाने पर जलन ठीक हो जाती है, फफोले नहीं पड़ते ।।
- सरसों, तिल, मूंगफली या नारियल का तेल देशी घी ही खायें, रिफाइंड तेल और वनस्पति घी {डालडा} जहर समान है ।।
पैर के अंगूठे के नाखूनों में सरसों तेल से भिगोने से आँखों की खुजली, लाली और जलन ठीक हो जाती है ।।
- प्रति दिन गेहूं के दाने के बराबर खाने का चूना को खाने से अनेक रोग ठीक होते हैं ।।
- चोट, सूजन, दर्द, घाव, फोड़ा होने पर, बरसाती कागज मे लपेटकर लगभग 20 मिनट तक घावपर चुम्बक रखने से जल्दी ठीक होता है ।। हड्डी टूटने पर भी चुम्बक का लाभ लें ।।
- मीठे में चीनी की जगह , गुड़, शहद, शक्कर खांड{गुड़ का बूरा} प्रयोग करें ।।
-सप्ताह मे नीम के दातून अवश्य करना चाहिए ।।
सूर्यास्त के पश्चात् लिखना, पढ़ना से अच्छा है, ब्रह्म मुहूर्त मे जगकर अध्ययन करना ।।
नाभी मानव शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है नाभी रात को सोते समय में देशी गाय का घी लगाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है नाभी में सरसों का तेल लगाने से सिर का दर्द ठीक होता है बाल सफेद नहीं होते नाभी में नारियल का तेल लगाने से चेहरे पर ग्लो आता है किल मुंहासे नहीं निकलते मौसमी सुखी खाज खारीस ठीक होती है नाभी में अरंडी का तेल लगाने से जोड़ों के दर्द को आराम मिलता है नाभी में महुआ का तेल लगाने से वात दर्द को आराम मिलता है नाभी में हींग का तेल लगाने से पेट का दर्द ठीक होता है।।
- निरोग रहने के लिए ताजा भोजन तथा 6से8, घंटा नींद अति आवश्यक है ।।
- देर रात तक जागने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, भोजन का पाचन भी ठीक से नहीं हो पाता, आँखों मे रोग उत्पन्न होते हैं ।।
- प्रातः का भोजन पूरा , दोपहर मे थोड़ा कम, और रात्रि मे सोने से दो घंटे पहले, अल्प भोजन लें ।।
विश्वास के साथ प्रकृति से जुड़कर योग और प्राणायाम यम और नियम मौसम के अनुसार भोजन विरुद्ध आहार का त्याग कर आप स्वस्थ रहेंगे ।।
यह पोस्ट आयुर्वेद और आहार विज्ञान पर आधारित सामान्य जानकारी उपलब्ध कराती है किसी भी चिकित्सा अथवा आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह अथवा चिकित्सा का विकल्प नहीं है।
यशपाल सिंह आयुर्वेद रत्न
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