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Showing posts from August, 2024

नुकसानदायक है दर्द निवारक का ज्यादा प्रयोंग

 आज छोटी छोटी परेशानियों में हम दर्द निवारक दवाओं का प्रयोग करते हैं जो हमारे तंत्रिका तंत्र को नुक्सान पहुंचा सकता है । आहार तंत्र को बाधित कर गैस बदहजमी करता है लिवर को प्रभावित करता है किडनी को नुक्सान पहुंचा था है ह्रदय की स्वभाविक क्रया को प्रभावित कर अति रक्त चाप या न्युन रक्त चाप का रोगी बना सकता है। इस लिए छोटे-छोटे दर्द में दर्द निवारक दवाओं के प्रयोग से बचें  सिर में दर्द होने पर तेज गरम पानी घुंट घुंट कर पियेंगे तो सिर दर्द ठीक होता है। पेट दर्द में 4लौंग पीस कर गरम पानी से लें पेट दर्द ठीक होता है कान दर्द में आधा चम्मच मेथी 20मिली पानी में उबाल कर छान कर वह पानी कान में डाल ने से कान दर्द ठीक होता है। हाइपर एसिडिटी होने पर एक चम्मच जीरा चबाकर खाएं उपर से गुनगुना पानी पीलें एसिडिटी शांत हो जाती है। मासिक चक्र में होने वाले दर्द में एक चम्मच हल्दी गरम पानी से सेवन करने से आराम मिलता है तथा ब्रांडी या किसी भी अंग्रेजी शराब का फहा भिगोकर नाही में रखने से आराम होता है। श्री सिद्ध आयुर्वेदा के अनुसार हमारी  उंगलियों में छिपा है दर्द का इलाज । तर्जनी उंगली का संबंध ...

चिकित्सा में भी उपभोगवाद की हकीकत

सर में भयंकर दर्द था सो अपने परिचित केमिस्ट की दुकान से सर दर्द की गोली लेने रुका। दुकान पर उन का पोता था, उसने मुझे गोली का पत्ता दिया तो उससे मैंने पूछा सिंह साहब कहाँ गए हैं, तो उसने कहा दादाजी के सर में दर्द था सो सामने वाली दुकान में चाय पीने गये हैं अभी आते होंगे! मैं अपने हाथ मे लिए उस दवाई के पत्ते को देख रहा था ? *माँ का ब्लड प्रेशर और शुगर बढ़ा हुआ था, सो सवेरे सवेरे उन्हें लेकर उनके पुराने डॉक्टर के पास गया, क्लिनिक से बाहर उनके गार्डन का नज़ारा दिख रहा था जहां डॉक्टर साहब योग और व्यायाम कर रहे थे मुझे करीब 45 मिनिट इंतज़ार करना पड़ा।  कुछ देर में डॉक्टर साहब अपना नींबू पानी लेकर क्लिनिक आये और माँ का चेकअप करने लगे। उन्होंने मम्मी से कहा आपकी दवाइयां बढ़ानी पड़ेंगी और एक पर्चे पर करीब 5 या 6 दवाइयों के नाम लिखे। उन्होंने माँ को दवाइयां रेगुलर रूप से खाने की हिदायत दी। बाद में मैंने उत्सुकता वश उनसे पूछा कि क्या आप बहुत समय से योग कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि पिछले 15 साल से वो योग कर रहे हैं और ब्लड प्रेशर व अन्य बहुत सी बीमारियों से बचे हुए हैं! ** मैं अपने हाथ मे लिए हुए म...

आहार तंत्र की शुद्धि शरीर की गंदगी निकालने का उपाय

भोजन में फल- साग, क्षारीय उत्पादक चीज़ो का खाने में  कम प्रयोग करने से और, अधिक अम्लीय पदार्ध एवं नमक खाने से मैदा से बने आहार और अधिक आयली मिर्च मसालेदार अनुचित खान- पान और कब्ज रहने से रक्त दूषित हो जाता है। रक्त अशुद्ध होने पर किसी भी रूप में नमक ना खाएं। चीनी के स्थान पर गुड का सेवन करना चाहिए। विटामिन ‘सी’, लोहा, कैल्शियम ये सभी रक्तशोधक है। रक्त या खून शरीर के करोड़ों सेल्स को ऑक्सीजन मिनरल्स और अन्य पोषक तत्व पहुँचाने का काम करता है और यही सेल्स हमारे स्वस्थ शरीर का निर्माण करते हैं। हमारे गलत खानपान से अधिक अम्लीय पदार्थ और नमक के सेवन से ये धीरे धीरे दूषित होता रहता है। शरीर से विजातीय पदार्थ जैसे मल मूत्र आदि अगर सही से ना निकले तो भी ये गंदगी शरीर के रक्त में घुल जाती है। जिस कारण से अनेक रोग उत्पन्न हो जाते हैं जिनमे चर्म रोग विशेष हैं इसलिए स्वस्थ और सुन्दर शरीर की कामना रखने वालों को अपने रक्त की शुद्धि पर विशेष ध्यान देना चाहिए। खून को प्राकृतिक तरीके से साफ़ करने और शरीर के अंदर की गंदगी को बाहर निकालने के लिए इन आहारो को अपने भोजन में ज़रूर शामिल करें। रक्त या खून स...

पंचकर्म क्या है, करने का तरीका, फायदे और नुकसान

पंचकर्म आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने की आयुर्वेदिक चिकित्सा है। पंचकर्म चिकित्सा में पांच प्रक्रियाएं होती हैं - वमन, विरेचन, नस्य, रक्तमोक्षण और अनुवासनावस्ती। इन पांचों का संयोजन पंचकर्म कहलाता है। इन पांचों का उद्देश्य आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना और स्वस्थ व संतुलित बनाना होता है। इस लेख में आपको सरल शब्दों में बताया गया है कि आयुर्वेद कि पंचकर्म चिकित्सा क्या होती है, इसके लाभ क्या-क्या हैं और इसको करने से पहले और बाद क्या सावधानियां रखनी हैं पंचकर्म क्या है आयुर्वेद विज्ञान आपको इस बात का संकेत देता है कि अधिक तनाव आपके आंत की नली या जठरांत्र मार्ग के लिए बहुत अधिक नुकसानदायक होता है। जठरांत्र मार्ग में असंतुलन की वजह से सूजन होता है और पाचन क्रिया भी प्रभावित होती है। सूजन और पाचन क्रिया सही न होने की वजह से आपके शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा होने लगता है और शरीर बीमारियों का शिकार होने लगता है। इसके साथ ही साथ कई प्रकार की बीमारियां भी जन्म लेती हैं। पंचकर्म के माध्यम से आपके शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलता है और आपका शरीर अधिक सक्रिय हो जाता है। व...

कुल्ला करने के लाभ

आयुर्वेद वैकल्पिक चिकित्सा में  कंडूष क्रिया, कुंजल क्रिया ,वमन, विरेचन ,स्वेदन ,पंचकर्म ,योग, व्यायाम , लेपन ,स्पर्श ,विच्छेदन , ताडन ,आदि तथा बैठने उठने का सही और उचित आसन बताया गया है वैसे ही कुल्ला करना एक सामान्य सी प्रक्रिया है जिसे व्यक्ति रोज करता है परंतु शायद आप नहीं जानते कुल्ला कुछ विशेष पानी दूध और तेल से कुल्ला करने से होने वाले फायदे और रोगों का निदान और निवारण। कुल्ला : एक प्राकृतिक क्रिया जानिये पानी तेल या दूध का कुल्ला करने के चमत्कारिक फायदे*     हमारी परम्पराएँ और घरेलु ज्ञान जो हजारों वर्षों के हमारे पुरखों के अनुभव और शोध पर आधारित है इतना विस्तृत और स्वास्थ्य के लिए लाभ कारी है यदि हम इन पर थोडा भी ध्यान देवें तो बिना दवा के भी स्वस्थ रह सकते हैं.  आज आपको ऐसी ही एक विधि से परिचित करवा रहें हैं जिसका नाम है कुल्ला।  कुल्ला एक ऐसी विधि है जिससे आप बिना दवा के जुकाम, खांसी, श्वांस रोग, गले के रोग, मुंह के छाले, शरीर को डी टोक्सिफाय करने, गर्दन के सर्वाइकल जैसे रोगों से मुक्ति पा सकते हैं. आइये जानते हैं कुल्ला करने की सही विधि और इसके चमत्क...

​नंगे पैर चलने के स्वास्थ्य लाभ

-------------------------------- *आयुर्वेद   मात्र चिकित्सा  पद्धति ही नहीं है इस के साथ ही पथ्य और निषेध आहार-विहार दैनिक दिनचर्या योग व्यायाम मालिश (एक्यूप्रेशर) विच्छेदन (एक्यूपंक्चर)चलना और बैठना निद्रा निशेचन सभी सामान्य और अ सामान्य मानव शरीर की गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डालता है जिससे हम स्वस्थ रहें और बीमार होने पर जल्दी और स्थाई रूप से रोग मुक्त हों।   *नंगे पांव चलना मतलब मिट्टी तथा वनस्पतियों से संपर्क मतलब जीवनी शक्ति का स्पर्श नंगे पांव चलना जिसे अंगेजी में Barefoot Walking या Earthing भी कहते है, शरीर को स्वस्थ रखने का एक आसान उपाय हैं।आधुनिक होने की होड़ में हम आज नंगे पाँव चलना भले ही शर्म की बात मानते हो, लेकिन पश्चिम देशों में स्वास्थ विषेशज्ञ इस की सलाह दे रहे हैं विदेशों में बेयर फुट वाकिंग इन दिनों खासी चलन में हैं। यकीन मानिए सप्ताह में औसतन कुछ घंटे नंगे पाव चलकर कई बिमारियों को दूर किया जा सकता हैं। यदि हम नंगे पाव चलना भूल रहे है तो कई बिमारियों को मानो न्योता दे रहे हैं। *नंगे पाव चलने से होने वाले विविध स्वास्थ्य लाभ _ 1. ​मानसिक लाभ​ ...

कुंजल क्रिया

 कुंजल क्रिया  ​ कुंजल क्रिया भारतीय स्वास्थ विज्ञान की प्राचीन तय योगिक क्रियाओं में से एक है यह हठयोग की प्रारंभिक क्रिया है कुंजल क्रिया के बारे में सबसे पहले हठयोग से संबंधी एक प्रदीपिका ग्रंथ में दिया गया था। इस ग्रंथ में ही इसे शरीर की सफाई करने की तकनीक के रूप में बताया गया है। कुंजल क्रिया न केवल आपके शरीर को साफ करती है बल्कि यह आपके मन को भी नियंत्रित करने में भी सहायता प्रदान करती है। कुंजल क्रिया करने से कफ, एसिडिटी, पित्त आदि के लिए बहुत ही उपयोगी योग शुद्धिकरण क्रिया है कुंजल क्रिया करने से कफ, एसिडिटी, पित्त आदि नियंत्रण में रहते हैं. स्वस्थ व्यक्ति को भी 7-15 दिन में एक बार ये क्रिया .करें तो पेट (आमाशय)के रोग नहीं होते  थायराइड के रोगी यदि कुंजल प्रतिदिन करते हैं और आयुर्वेदिक दवाये अयोग्य वरधनि वटी पुनर्नवा दि मंडूर  काचनार गूगल का धनिया के स्वरस अथवा क्वाथ से  आयुर्वेद आचार्य की देखरेख में सेवन करते हैं तो रोगी रोग मुक्त होता है  थायराइड ग्रंथि के दोष ठीक होजाते है विष मुक्ति   किसी भी प्रकार के विष को निगल लेने पर नमक का पानी प...

गण्डूष-क्रिया*

आयुर्वेद में तेल को मुख में भरकर 15-20 मिनट तक रखने के बाद उस तेल को थूक देने की क्रिया को गण्डूष- क्रिया कहते हैं।। यह क्रिया हमारे सारे शरीर की गंदगी को बाहर निकलती है। करने की विधि:- *सुबह-सुबह शौच आदि से निवृत होकर मुँह धोने से पहले (खाली पेट) मुँह में 3-4 चम्मच सरसों का तेल या तिल का तेल या नारियल का तेल डालें।। और डालकर 5 मिनट-20 मिनट तक मुँह में डालकर रखें रहें।। यही गण्डूष-क्रिया है।। बीच-बीच में अपने जीभ से ही दाँतों की मालिश भी कर सकते हैं।। गण्डूष_क्रिया के लाभ:- गंडुश-क्रिया में जब आप मुँह में तेल को रखते हैं,तो जुबान के रास्ते तेल Toxins (शरीर में बनने बाले हानिकारक तत्व) को खींच लेता है। गण्डूष-क्रिया के द्वारा मुँह में विद्दमान Toxins, गले में विद्दमान Toxins, आँतों में विद्दमान Toxins सभी को  गण्डूष- क्रिया के द्वारा तेल खींच लेता है।। अर्थात हमारे जुबान की नसें शरीर में जहाँ तक फैली हुई है उन सभी जगहों से गण्डूष-क्रिया के द्वारा Toxins खींच लिया जाता है और वो सारे के सारे Toxins तेल में आ जाता है।। और फिर अंततः 15-20 मिनट बाद(जब आंख में,नाक में, मुंह में पानी आ जाय...

"शुद्धि क्रिया"कल्प का संकल्प"*

द्राक्ष कल्प या फल कल्प क्या होता है?* ---------------------------------- शरीर शुद्धि के लिए  सनातन वांग्मय तथा आयुर्वेद में वायु कल्प जल कल्प फल कल्प का विधान है वसंत और शरद नवरात्र के उपवास का विधान भी भारतीय वांग्मय में इसी लिए किया गया है भारत ६ॠतुएं और३मौसम। होते हैं वैसे तो आयुर्वेद में अलग अलग ऋतु में अलग-अलग अलग आहार का विधान है परंतु आयुर्वेद के विद्वानों(  अक्टूबर से मार्च तक तथा अप्रेल से सितंबर तक) ने शरद ऋतु के मध्य से शिसिर हेमन्त और वसंत ऋतु के मध्य तक एक सोपन और वसंत ऋतु के मध्य से ग्रीष्म वर्षा और शरद ऋतु के मध्य तक दुसरा सोपान एक में सर्दियों की अधिकता और दुसरे में अधिक गर्म मौसम दोनों में आहार और दिनचर्या अलग अलग  शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आहार तंत्र का शुद्ध और क्रियाशील होना आवश्यक है।  इसीलिए लिए ऋग्वेद के उप वेद में वर्ष में दो बार  शरीर शुद्धि का विधान है बाद के ब्राह्मण ग्रंथों में शरीर शुद्धि को धर्म से जोड़ दिया गया जिससे प्रतिएक व्यक्ति शरीर शुद्धि को धार्मिक कर्तव्य समझ कर करें और स्वास्थ्य रहे (भारतीय वांग्मय की रचना हजारों वर्षों ...

उपवास*शुद्धि क्रिया

*उपवास के विषय में विस्तरत जान कारी उपवास से स्वास्थ्य लाभ उपवास करने का यम और नियम * ---------------------------- उपवास का सही अर्थ क्या है?उपवास क्यों करना चाहीये?उपवास कैसे करना चाहीये और उपवास करने से क्या लाभ होता?   * उपवास कोई धार्मिक कर्मकांड नहीं मन मस्तिष्क और शरीर को शुद्ध करने की एक क्रिया है उपवास के विषय में सनातन वांग्मय में विस्तार से वर्णन मिलता है आयुर्वेद मे  बहुत से रोगों के निदान और चिकित्सा में भी उपवास और लंघन बताया गया है सनातन वांग्मय में उपवास को धार्मिक आस्था से जोड़ा गया है जिससे मनुष्य धार्मिक आस्था के चलते उपवास करें और स्वस्थ रहे वैदिक वांग्मय के अनुसार उपवास के नियम और उपवास करने के लाभ क्या हैं जानते है। 1.सभी रोग का मूल कारण है हमारे आंत (पेट) में और शरीर की करोड़ो कोसिकाओ में जमा (दूषित वात,पित और कफ) दूषित मल (याने की टॉक्सिंस। 2.हम सभी को एक अनुभव है।जब हम 500/1000 किलोमीटर की यात्रा करने हमारे चार पहिए के वाहन से बाहर घूमने निकलते है तब हम अपने वाहन को बीच बीच में रोक कर आराम देते है।गाड़ी गर्म हो जाने से उसके मशीन पर पानी छिड़कते है,...

नंगें पैर चलना

*आयुर्वेद   मात्र चिकित्सा  पद्धति ही नहीं है इस के साथ ही पथ्य और निषेध आहार-विहार दैनिक दिनचर्या योग व्यायाम मालिश (एक्यूप्रेशर) विच्छेदन (एक्यूपंक्चर)चलना और बैठना निद्रा निशेचन सभी सामान्य और अ सामान्य मानव शरीर की गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डालता है जिससे हम स्वस्थ रहें और बीमार होने पर जल्दी और स्थाई रूप से रोग मुक्त हों।   *नंगे पांव चलना मतलब मिट्टी तथा वनस्पतियों से संपर्क मतलब जीवनी शक्ति का स्पर्श नंगे पांव चलना जिसे अंगेजी में Barefoot Walking या Earthing भी कहते है, शरीर को स्वस्थ रखने का एक आसान उपाय हैं।आधुनिक होने की होड़ में हम आज नंगे पाँव चलना भले ही शर्म की बात मानते हो, लेकिन पश्चिम देशों में स्वास्थ विषेशज्ञ इस की सलाह दे रहे हैं विदेशों में बेयर फुट वाकिंग इन दिनों खासी चलन में हैं। यकीन मानिए सप्ताह में औसतन कुछ घंटे नंगे पाव चलकर कई बिमारियों को दूर किया जा सकता हैं। यदि हम नंगे पाव चलना भूल रहे है तो कई बिमारियों को मानो न्योता दे रहे हैं। *नंगे पाव चलने से होने वाले विविध स्वास्थ्य लाभ _ 1. ​मानसिक लाभ​ / Mental : आपको याद है पिछले दिनो...

आहार तंत्र की शुद्धि

  आयुर्वेद सरल चिकित्सा* शरीर की गंदगी निकालने का उपाय ----------------------------------- भोजन में फल- साग, क्षारीय उत्पादक चीज़ो का खाने में  कम प्रयोग करने से और, अधिक अम्लीय पदार्ध एवं नमक चीनी अधिक मात्रा में खाने से मैदा से बने आहार और अधिक आयली मिर्च मसालेदार अनुचित खान- पान और कब्ज रहने से शारीरिक श्रम कम करने से रक्त दूषित हो जाता है। रक्त अशुद्ध होने पर किसी भी रूप में नमक ना खाएं। चीनी के स्थान पर गुड का सेवन करना चाहिए। विटामिन ‘सी’, लोहा, कैल्शियम ये सभी रक्तशोधक है। रक्त या खून शरीर के करोड़ों सेल्स को ऑक्सीजन मिनरल्स और अन्य पोषक तत्व पहुँचाने का काम करता है और यही सेल्स हमारे स्वस्थ शरीर का निर्माण करते हैं। हमारे गलत खानपान से अधिक अम्लीय पदार्थ और नमक के सेवन से ये धीरे धीरे दूषित होता रहता है। शरीर से विजातीय पदार्थ जैसे मल मूत्र आदि अगर सही से ना निकले तो भी ये गंदगी शरीर के रक्त में घुल जाती है। जिस कारण से अनेक रोग उत्पन्न हो जाते हैं जिनमे चर्म रोग विशेष हैं इसलिए स्वस्थ और सुन्दर शरीर की कामना रखने वालों को अपने रक्त की शुद्धि पर विशेष ध्यान देना चाहिए। ...

बन्दर कभी बिमार नहीं होता*

----------------------------- * जैसा आज हमारी आदतें खाने पीने की है हमेशा से ऐसी नहीं थी आज से 50साल पहले मुझे याद है गांव में नास्ते का कोई चलन नहीं था नाही चाय का चलन था। सुबह उठकर दैनिक क्रिया से निवृत होकर छाछ पीते थे जिन के घर दूध नहीं होता था वह सर्द मौसम में गुड़ का शरबत तुलसी की पत्ती डालकर पीलेते थे इसके 2घंटे बाद तक अमुमन ७बजे तक भरपेट कलेवा   खा लिया जाता था। आज नास्ते का चलन है वह भी सूरज निकलने के 3-4घंटे बाद और मैदा से बना चिकनाई युक्त  जिससे महा स्रोत (अमाशय गृहणी और आंत) दुषित हो जाते हैं और अनेक रोगों को जन्म देते हैं। *बन्दर कभी बीमार नहीं होता *? किसी भी चिड़िया को डायबिटीज नहीं होती।  किसी भी बन्दर को हार्ट अटैक नहीं आता । कोई भी जानवर न तो आयोडीन नमक खाता है और न ब्रश करता है, फिर भी किसी को थायराइड नहीं होता और न दांत खराब  होता है । बन्दर शरीर संरचना में मनुष्य के सबसे नजदीक है, बस बंदर और आप में यही फर्क है कि बंदर के पूँछ है आप के नहीं है, बाकी सब कुछ समान है।  तो फिर बंदर को कभी भी हार्ट अटैक, डायबिटीज , high BP , क्यों नहीं होता ह...

चाय और काफी खाली पेट नहीं*

*अगर आप कॉफी या चाय पीने के शौकीन हैं, *   ---------------------------------------------- 1. अगर आप सुबह के वक्त कॉफी या चाय पीते हैं, तो आपको यह जरूर पता होना चाहिए कि इस समय, खास तौर से सुबह 8 से 9 के आसपास स्ट्रेस हार्मोन कार्टीसोल अपने चरम पर होता है। इस समय पर अगर आप कॉफी पीते हैं, तो आपका स्ट्रेस लेवल कम होने के बजाए बढ़ सकता है। 2. एक बार किसी वक्त पर आपको कॉफी पीने की आदत हो गई, तो आपको स्वयं को ऊर्जावान रखने के लिए और ज्यादा कॉफी की आवश्यकता महसूस होगी, और आप ज्यादा मात्रा में कैफीन ग्रहण करेंगे, यह एक प्रकार की लत है। 3. अगर आप दिन के 10 बजे से 11:30 बजे के बीच कॉफी पीना पसंद करते हैं या फिर आपको इसकी आदत है, तो यह सही समय है जब कार्टीसोल का स्तर नीचे होता है। इस वक्त कॉफी पीना आपके लिए सुरक्षित है। 4. अगर आप 12 बजे से 1 बजे के बीच कॉफी पीते हैं, तो यह वो समय है जब कार्टीसोल का स्तर फिर से ऊपर उठता है। इस वक्त कॉफी पीना आपके लिए नुकसानदायक ही है। 5.  इसके बाद, यानि दोपहर 1 बजे के बाद शरीर में कार्टीसोल का स्तर कम होना शुरू होता है, अत: 1 बजे से शाम 5 बजे के बीच ...

स्वास्थ्य और स्वाद के कुछ महत्वपूर्ण सूत्र*

 स्वास्थ्य और स्वाद के कुछ महत्वपूर्ण सूत्र* -------------- बंद गोभी की सब्जी बनाते समय उसमें आधा चम्मच चीनी डाले लें। सब्जी का स्वाद बढ़ेगा तथा रंग प्राकृतिक रहेगा पोषक तत्वों में वृद्धि होगी । भिंडी की सब्जी बनाते समय उसे काटने में बाद थोड़ा नींबू निचोड़ दे तो उसका चिकना पन दूर होगा। सब्जी कुरकुरी बनेगी पाचन जल्दी होगा। जिमीकंद की सब्जी बनाते समय उन्हें काटकर उबालते समय उसमें एक चम्मच हरड़ पाउडर डाल दें। तो जिमिकंद गले में नहीं लगेगा तथा उसका उबला  पानी फेंक दें। कारण वह असर उसमें भी आ जाता है और पाचन ठीक होगा। सूजी का हलवा बनाते समय थोड़ा सा बेसन भी साथ भून ले हलवा ज्यादा स्वादिष्ट बनेगा। मूंग की दाल बनाने से पहले उसे खाली कड़ाही में हल्का से भून लें फिर बनायें। ज्यादा स्वादिष्ट बनेगी। पूरियां बनाने के लिये आटा गूंधते समय थोड़ी सूजी मिला दें तो पूरी अधिक समय तक फूली रहेगी व स्वादिष्ट रहेगी। अगर आप बिल्कुल कम घी तेल की सब्जी बनाना चाहती है तो आप अन्य कड़ाही न बनाकर नॉन स्टिक में बनाये तो जलने चिपकने का डर नहीं रहेगा। अगर आपको अरबी की रसेदार सब्जी पसंद है तो आप उसे बनाने के ब...

मनुष्य शाकाहारी,या मांसाहारी

-------------------------- मनुष्य की संरचना शाकाहारी या मांसाहारी आज यह बहस का विषय है सबके अपने अपने तर्क  हैं शाकाहारी मानव को शाकाहारी की श्रेणी में होने के तर्क देते हैं और मांसाहारी भोजन करने वाले आदिकाल से मनुष्य का विकास मांसाहार से कहते हैं परंतु विज्ञान कहता है।  वास्तव में मानव भोजन भोगोलिक क्षेत्र परिस्थितियों और जलवायु के अनुसार विकसित हुआ है मनुष्य ने आदिकाल से जीवित रहने के लिए सर्वहारी भोजन को अपनाया है जैसे शाकाहारी जानवर गाय भैंस भेड़ बकरी हिरन यदि उन्हें घास ना मिले वह जीवित नहीं रह सकते इसी तरह मांसाहारी जीव शेर चीता तेंदुआ  आदि मांसाहारी जीव हैं यह कभी भी घास नहीं खायेंगे और मांस ना मिलने की स्थिति में समाप्त हो जायेंगे दोनों का आहार तंत्र प्रकृति ने अलग तरह से विकसित किया है कोई जानवर मनुष्य की भांति भोजन नहीं करता है, प्रत्येक जानवर का अपना भोजन होता है। यदि तुम गाय भैंसों को ले जाओ खेतों में और उन्हें वहां छोड़ दो, तो वे सिर्फ एक खास तरह का घास ही खाएंगी। वे हर चीज और कोई भी चीज नहीं खाने लगेंगी - वें बहुत चुन कर खाती हैं। अपने भोजन के प्रति उनकी एक...

गुलाब के फायेदे

 गुलाब के फायेदे ---------------- * गुलाब को यों ही फूलों का राजा नहीं कहा जाता। दिखने में यह फूल बेहद खूबसूरत है और इसकी हर पंखुड़ी में समाए हैं अनगिनत गुण। त्वचा को सुंदर बनाने से लेकर शरीर को चुस्त- दुरुस्त रखने में गुलाब कितने काम आता है । *कुछ लोग मिठाई में तथा खाने में भी अर्क गुलाब मिलाते हैं इससे मिठाई और खाने की गंध और स्वाद दोनों अच्छे होजाते है। * सुबह-सबेरे अगर खाली पेट गुलाबी गुलाब की दो कच्ची पंखुड़ियां खा ली जाएं, तो दिन भर ताजगी बनी रहती है। वह इसलिए क्योंकि गुलाब बेहद अच्छा ब्लड प्यूरिफायर है। * अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर, ब्रोंकाइटिस, डायरिया, कफ, फीवर, हाजमे की गड़बड़ी में गुलाब का सेवन बेहद उपयोगी होता है। * गुलाब की पंखुड़ियों का इस्तेमाल चाय बनाने में भी होता है। इससे शरीर में जमा अतिरिक्त टॉक्सिन निकल जाता है। पंखुड़ियों को उबाल कर इसका पानी ठंडा कर पीने पर तनाव से राहत मिलती है और मांसपेशियों की अकड़न दूर होती है। * एक शीशी में ग्लिसरीन, नीबू का रस और गुलाब जल को बराबर मात्रा में मिलाकर घोल बना लें। दो बूंद चेहरे पर मलें। त्वचा में नमी और चमक बनी रहेगी और त्वचा...

कलौंजी आज के समय में धरती पर संजीवनी

 कलौंजी आज के समय में धरती पर संजीवनी है अनगिनत रोगों को चुटकियों मे ठीक करने के अद्भुत गुणों से भरपूर है कलौंजी । ------------------------------- कलौंजी के बीजों का सीधा सेवन किया जा सकता है। एक छोटा चम्मच कलौंजी को शहद में मिश्रित करके इसका सेवन करें। पानी में कलौंजी उबालकर छान लें और इसे पीएं। दूध में कलौंजी उबालें। ठंडा होने दें फिर इस मिश्रण को पीएं। कलौंजी को ग्राइंड करें तथा पानी तथा दूध के साथ इसका सेवन करें। कलौंजी को ब्रैड, पनीर तथा पेस्ट्रियों पर छिड़क कर इसका सेवन करें। कलौंजी  (Nigella) निम्न रोगों में सहायक है टाइप-2 डायबिटीज प्रतिदिन 2 ग्राम कलौंजी के सेवन के परिणामस्वरूप तेज हो रहा ग्लूकोज कम होता है। इंसुलिन रैजिस्टैंस घटती है,बीटा सैल की कार्यप्रणाली में वृद्धि होती है तथा ग्लाइकोसिलेटिड हीमोग्लोबिन में कमी आती है। मिर्गी 2007 में हुए एक अध्ययन के अनुसार मिर्गी से पीड़ित बच्चों में Kalonji के सत्व का सेवन दौरे को कम करता है। उच्च रक्तचाप 100 या 200 मिलीग्राम Kalonji के सत्व के दिन में दो बार सेवन से हाइपरटैंशन के मरीजों में ब्लड प्रैशर कम होता है। अस्थमा Kalon...

: अजवाइन पेट के लिए फायदेमंद

अजवाइन बदहजमी होने या जी घबराने पर नींबू और नमक मिलाकर अजवायन का सेवन करना हमारे देश में एक आम उपाय है। कई बार सौंफ के साथ मिलाकर भी इसे खाया जाता है। पेट की कई समस्याओं में इससे तुरन्त राहत मिलती है। इन नन्हे से दानों में फाइबर से लेकर एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन्स और मिनरल्स भी होते हैं। ये एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण भी रखते हैं और इसलिए ई- कोलाई जैसे बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमणों से बचाव में सक्षम होते हैं जो कि अक्सर फ़ूड पॉइजनिंग का कारण बन सकते हैं। साथ ही अजवायन के दाने बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को घटाने में मदद करते हैं। पेट या छोटी आंत में होने वाले अल्सर (छालों) में राहत देने का काम भी अजवायन के दाने कर सकते हैं। इस तरह करें उपयोग: एक छोटी चम्मच अजवायन के दानों को सेक कर इसमें थोड़ा सी मात्रा काले नमक की डालकर इसे खाया जा सकता है। इसे चबाने की बजाय धीरे-धीरे इसके रस को पेट मे जाने दें। इसके अलावा इसके पाउडर को सौंफ पाउडर के साथ मिलाकर रख लें और भोजन के बाद इसके एक छोटे चम्मच की मात्रा में सेवन करें। यशपाल सिंह आयुर्वेद रत्न 9837342534

पाचन तंत्र को ऐसे बनाएं बेहतर

 पाचनतंत्र आयुर्वेद सरल चिकित्सा पाचन तंत्र को ऐसे बनाएं बेहतर हमारे घर में अक्सर दादी-नानी कहती रही हैं कि खाना ठीक से पचेगा तो बीमारी नहीं होगी। ---------------------------  विशेषज्ञ भी मानते हैं कि अगर आपका पेट दुरुस्त रहता है तो कई सारी बीमारियां आपसे दूर रह सकती हैं। यही कारण है कि हर बीमारी, हर सर्जरी के साथ विशेष डाइट की सलाह भी दी जाती है, ताकि शरीर को सही और संतुलित पोषण मिल सके। भारतीय रसोईघर इस मामले में बहुत महत्व रखते हैं। एक सामान्य शाकाहारी भारतीय भोजन में कई सारे गुण होते हैं और हमारे किचन में रखा मसाले का डब्बा तो इस मामले में किसी मेडिसिन बॉक्स से कम नहीं होता। हमारी सब्जियों और खासकर छौंक में जो चीजें पारंपरिक रूप से डाली जाती हैं, उनमें पेट को राहत पहुंचाने वाले कई गुण भी होते हैं। जानिए इनमें से तीन ऐसी महत्वपूर्ण चीजों के बारे में जिनका उपयोग हजारों सालों से भारतीय भोजन में हो रहा है और ये हमारे स्वास्थ्य को लाभ पहुंचा पाचन तंत्र को कैसे ठीक करें - गुणकारी भारतीय भोजन एक सामान्य शाकाहारी भारतीय भोजन की थाली में सबकुछ संतुलित और पौष्टिक होता है, बशर्ते उसे...

हेपेटाइटिस जागरुकता दिवस

 ,  हेपेटाइटिस रोग के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। -------------------------------  यह रोग वायरल संक्रमण या अल्कोहल के अधिक सेवन की वजह से होता है। हेपेटाइटिस का अर्थ होता है यकृत की सूजन। हेपेटाइटिस से बचाव और इसका इलाज संभव है। बस जरूरी है कि लोग जागरूक रहें आज सरकार द्वारा हेपेटाइटिस के टीके निशुल्क लगाते जा रहे हैं अपने बच्चों के चिकित्सक के सेडयूल के अनुसार हेपेटाइटिस के टीके अवश्य लगायेंगे । आयुर्वेद में हेपेटाइटिस से बचाव के लिए बेहतर इलाज उपलब्ध है। आयुर्वेद में इसे कामला रोग या पीलिया के नाम से जाना जाता है। इसकी उत्पत्ति पित्त के रक्त में मिलने से होती है। यह कहना  आयुर्वेद के विद्वान पं रामकुमार जी वैद्य  जी का । उन्होंने बताया कि प्रारंभ में इसके लक्षण बहुत सीमित या न के बराबर प्रकट हो सकते हैं। इसमें प्राय: पीलिया, अत्यधिक थकान, भूख कम लगने के लक्षण नजर आते हैं। सबसे घातक हेपेटाइटिस बी होता है। हेपेटाइटिस बी संक्रमित खून चढ़ाने, सीमेन और दूसरे बाडी फ्लूइड के संसर्ग के कारण होता है। हेपे...

(41)आरोग्य रहने के११ सूत्र"

 (41)आरोग्य रहने के११ सूत्र" सही पाचन होने के लिए यह सरल नियमों का पालन करें... ताकि कब्ज, एसिडिटी या गैस से मुक्ति पायें --------------------------------- ग्यारह सामान्य-सरल नियमों का पालन जरूरी है.... 1. खाने से पहले 30 मिनट की अवधि में पानी न पीयें। 2. खाते के बीच में सिर्फ एक दो घुंट ही पानी पीयें..  खाने में रोटी सब्जी खतम होने के बाद और चावल खाने से पहले बीच में एक दो घुंट पी सकते। खाने के समय उधरस या खांसी आने से एक दो घुंट जरूर पीयें।  खाने के अंत में मुंह साफ करते समय एक दो घुंट ही पानी पीयें.. 3. खाने के बाद एक से डेढ़ घंटे (60- मिनट) के बाद पानी पीना उचित है, उसी के बाद जी चाहे ईतना पानी पीयें.. जब भी पेट खाली हो तब याद करके पानी पीयें। खाली पेट (जठर) होने से आंतों का गेस उपर उठकर सिर तक जाने से सिरदर्द होता है।तो उपवास के दिन यादकर के पानी पीयें तो सिरदर्द नहि होगा। 4. सादा पानी या मटके का पानी ही पीयें, परन्तु फ्रिज का पानी गलती से भी न पीयें। सुबह को वासी मुंह जरूर पानी पीये ताकि एसिडीटी से बच पायें। 5. पानी जब भी पीयें तो घुंट घुंट आराम से नीचें बैठकर पीयें,...

आंवले के गुणकारी फायदे

 आंवले के गुणकारी फायदे -------------------------- आंवले को आयुर्वेद में कषाय कहा गया है यह विटामिन सी का भंडार है आंवला ही प्रकृति में एकमात्र ऐसा फल है जिसमें मौजूद विटामिन सी आंवले को उबालने पर भी नष्ट नहीं होता । आयुर्वेद में कायाकल्प औषधियां  चवनप्राश अवलेह या आयुर्वेद की महा औषधि त्रिफला चूर्ण आदि सभी का बेश (मुख्य औषधि घटक)आंवला ही है आयुर्वेद में पित्त नासक जो योग बनायेजाते है उन सभी में आंवला मिलाया जाता है आंवला श्वास तंत्र मानसिक विकास बालों केरोग कब्ज रोगों में लाभ कारी है आंवला यूरिक एसिड को साइट्रिक एसिड में बदलता है इसलिए गठिया जोड़ों का दर्द में उपयोगी है तथा गुर्दे के रोगी में उपयोगी है आंवला  कषाय होने के कारण रकत वाहिकाओं में गंदगी को बाहर निकालता है आंवला रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करता है आंवला आंखकी रोशनी बढ़ाता  है आंवला यकृत के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है ।     किसी भी रूप में थोड़ा सा आंवला हर रोज खाते रहे जीवन भर उच्च रक्तचाप और हार्ट फेल नहीं होगा। इसके साथ चेहरा चमकदार बाल स्वस्थ और काले रहेंगे। चाय पत्ती के पानी म...

बहेड़ा:(विभीतकी) सेहत के लिए बहुत लाभकारी है

  बहेड़ा:(विभीतकी) सेहत के लिए बहुत लाभकारी है यह आयुर्वेदिक औषधि। ------------------------------    भारत में ऐसी कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां हैं, जिनका इस्तेमाल वर्षों से तरह-तरह की बीमारियों को दूर भगाने में किया जा रहा है। ऐसी ही एक जड़ी-बूटी है बहेड़ा। सबसे दिलचस्प बात ये है कि बहेड़ा को संस्कृत में विभीतकी कहा जाता है, जिसे अंग्रेजी में 'फीयरलेस' यानी 'निर्भय' कहते हैं, यानी यह बीमारियों का भय दूर करता है। पेट संबंधी कुछ समस्याओं के उपचार और प्रबंधन के लिए इस जड़ी-बूटी का उपयोग सदियों से किया जा रहा है।  बहेड़ा त्रिफला के तीन प्रमुख अवयवों में से एक है, जबकि अन्य दो में आंवला और हरड़ शामिल हैं। इसमें रोगाणुरोधी, एंटी-ऑक्सीडेंट और प्रतिरक्षा विज्ञानी गुण मौजूद होते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि इसके गुण त्रिदोष, जैसे वात, पित्त और कफ को संतुलित करने में सहायक हैं। इसका इस्तेमाल और भी कई तरह की समस्याओं से निजात पाने में किया जाता है। आइए जानते हैं बहेड़ा के इस्तेमाल से होने वाले फायदों के बारे में... लिवर के लिए फायदेमंद है बहेड़ा  बहेड़ा को लिवर के स्वास्थ्य के ...

अमृत समान हैं प्रकृतिक पदार्थ

*स्वास्थ के लिए अमृत समान हैं यह प्रकृतिक पदार्थ और  शरीर मन और बुद्धि को क्रिया शील रखने के लिए  आवश्यक है योगा अभ्यास आपको रोगी होने से बचाते हैं ये 8 चीज़ों का उपयोग यदि आप सही मात्रा और सही समय पर सेवन कराते हैं, । ------------------------------------- 1 जल -  यह प्राकृतिक औषधि है। प्रचुर मात्रा में शुद्ध जल के सेवन से शरीर में जमा कई तरह के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। 2 रसदार फल -  संतरा, मौसमी आदि रसदार फलों में भरपूर मात्रा में खनिज लवण तथा विटामिन सी होता है  गर्मियों में तरबूज खरबूजा । प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में ये महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जूस नहीं फल खायें। 3 गिरीदार फल - सर्दी के मौसम में बादाम अखरोट काजू पिस्ता चिरोंजी किशमिश छुआरे खजूर गिरीदार फलों का सेवन फायदेमंद होता है। इन्हें रात भर भिगोकर रखने व सुबह   दूध के साथ, खाने से आधे घंटे पहले लेने से बहुत लाभ होता है गर्मियों में इन्हें खाने से बचना चाहिए। 4 अंकुरित अनाज - अंकुरित अनाज (जैसे मूंग, मोठ, चना आदि) तथा भीगी हुई दालों का भरपूर मात्रा में सेवन ...

परिष्कृत भोजन का प्रयोग कम से कम करें*

 ग्रंथ भावप्रवण निरघनटु में बांग भट्ट जी लिखते हैं स्वस्थ रोग रहित शरीर और अधिक जीवन के लिए प्रकृति के साथ रहना प्रकृति के करीब रहना प्रकृति प्रदत्त पदार्थों का ताजा और जैसा जिस रूप में प्रकृति से मिला है उसी रुप में खाद्य अखाद्य का विचार करते हुए सेवन करना स्वास्थ्य के लिए उपयोगी  है । -----------------------------      सलाद में जो प्रकृतिक पोषक तत्व होते हैं वह उसे परिष्कृत करने के बाद नही रहते आयुर्वेद कहता है पकने के बाद सब्जी दाल आदि से क्षारीय तत्त्व कम हो जाते हैं और अम्ल की वृद्धि हो जाती है    ।            यही कारण है जो व्यक्ति प्रकृति से दुर रहता है प्रकृति प्रदत पदार्थों का सेवन कम से कम करता है और परिष्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन करता है वह उतनी ही भयंकर और लाईलाज रोग से ग्रस्त हो जाता है फलों की जगह डब्बा बंद जूस कभी नहीं ले सकते जूस को लम्बे समय तक सड़ने से बचाने के लिए ( सोडियम बेंजोएट अथवा वाहिटवेनेगर) मिलाया जाता है यह एक रासायनिक योगिक है जो स्वास्थ्य के लिए हानी कारक है इसलिए स्वस्थ रहने के लिए जो भी खाय...