कुंजल क्रिया

 कुंजल क्रिया 




​ कुंजल क्रिया भारतीय स्वास्थ विज्ञान की प्राचीन तय योगिक क्रियाओं में से एक है यह हठयोग की प्रारंभिक क्रिया है कुंजल क्रिया के बारे में सबसे पहले हठयोग से संबंधी एक प्रदीपिका ग्रंथ में दिया गया था। इस ग्रंथ में ही इसे शरीर की सफाई करने की तकनीक के रूप में बताया गया है। कुंजल क्रिया न केवल आपके शरीर को साफ करती है बल्कि यह आपके मन को भी नियंत्रित करने में भी सहायता प्रदान करती है।

कुंजल क्रिया करने से कफ, एसिडिटी, पित्त आदि के लिए बहुत ही उपयोगी योग शुद्धिकरण क्रिया है

कुंजल क्रिया करने से कफ, एसिडिटी, पित्त आदि नियंत्रण में रहते हैं. स्वस्थ व्यक्ति को भी 7-15 दिन में एक बार ये क्रिया .करें तो पेट (आमाशय)के रोग नहीं होते  थायराइड के रोगी यदि कुंजल प्रतिदिन करते हैं और आयुर्वेदिक दवाये अयोग्य वरधनि वटी पुनर्नवा दि मंडूर  काचनार गूगल का धनिया के स्वरस अथवा क्वाथ से  आयुर्वेद आचार्य की देखरेख में सेवन करते हैं तो रोगी रोग मुक्त होता है  थायराइड ग्रंथि के दोष ठीक होजाते है

विष मुक्ति 

 किसी भी प्रकार के विष को निगल लेने पर नमक का पानी पिलाकर या विषहरनी बूटी का चूर्ण मिलाकर पिलाकर कुंजल कराने से रोगी की जान बजाती है कुछ लोग द्रोण गुप्पी के चूर्ण को पानी में मिलाकर कुंजल करा कर सर्प दंश की चिकित्सा करते हैं ।

बिंडार के चूर्ण को जल में मिलाकर कुंजल कराने से यकृत रोगो में लाभ होता है


कुंजल क्रिया का मतलब पेट की शुद्धि करना

दैनिक क्रिया से निवृत्त होकर शांत चित्त से यह हठयोग की क्रिया पहले पहल किसी जानकार की देखरेख में करना चाहिए 

कुंजल क्रिया के लिए 2से3लीटर पानी गरम कर लेें पानी अधिक गरम नहो और इसे धीरे धीरे घुटनों के बल बैठ कर पिएं जबतक वमन न आनेलगे तबतक पियें  फिर उकडु बैठकर हलक में चार उंगलियां डालकर फिर वामन क्रिया (उल्टी) करें जबतक जो पानी आपने पिया है वह निकल न जाए। इससे शरीर में जमा कफ और अमल पित्त का नाश होता है। इसके उपरांत योग साधक जलनेति कर सकते हैं।


सामान्य कुंजल क्रिया के लिए  सुबह सबसे पहले जितना  पी सकते है गुनगुना पानी उकडू बैठकर पिएं  फिर दैनिक क्रिया से निवृत होकर उकडु बैठकर कुंजन क्रिया का अभ्यास करें इससे अमलता नहीं होगी नाभी नहीं गिरेगी आंतों के रोग पेप्टिक अल्सर और हर्निया नहीं होगा , इससे रोगप्रतिरोधकता बढ़ेगी .


एक सप्ताह या दो सप्ताह में की जाने वाली कुंजल क्रिया पाचन तंत्र (पेट से मुंह तक) को साफ करने की एक तकनीक है। इसमें पेट भर जाने तक गुनगुना, नमकीन पानी पीना और फिर उसे निकाल देना।

पेप्टिक अल्सर या जिनकी ह्रदय की सर्जरी होगयी हो फेफड़ों की सिकुड़न पित्ताशय की पथरी  हो तथा गर्भ वती स्त्री  मस्तिष्क रोगी कुंजल क्रिया ना करें ।


कुंजल क्रिया के 1से2घंटा बाद बाद खीर दलिया  खाना श्रेष्ठ है


कुंजल क्रिया: बीमारियों और पेट को साफ़ करने की प्रक्रिया | 

कुंजल क्रिया क्या है, जिससे निकल जाती है शरीर की सारी गंदगी! गंभीर रोगों में भी है उपयोगी चिकित्सक की सलाह से करना चाहिए 

 कुंजल क्रिया करने से आपका शरीर अंदर से साफ होता है। साथ ही मस्तिष्क शांत  रहता है। यह आपके

 डाइजेशन सिस्टम को दुरुस्त करता है .. कुंजल क्रिया एक प्राचीन योगिक क्रिया है जो शरीर को शुद्ध करने और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती ...


कुंजल क्रिया योगः नियमित करेंगे अभ्यास तो नहीं होंगे जल्दी बूढ़े, कफ और एसिडिटी से मिलेंगी राहत

यशपाल सिंह आयुर्वेद रत्न 9837342534

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