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अर्जुन की छाल

  अर्जुन वृक्ष भारत में होने वाला एक औषधीय वृक्ष है। इसे घवल, ककुभ तथा नदीसर्ज भी कहते हैं। कहुआ तथा सादड़ी नाम से बोलचाल की भाषा में प्रख्यात यह वृक्ष एक बड़ा सदाहरित पेड़ है। लगभग 60 से 80 फीट ऊँचा होता है तथा हिमालय की तराई, शुष्क पहाड़ी क्षेत्रों में नालों के किनारे तथा बिहार, मध्य प्रदेश में काफी पाया जाता है। इसकी छाल पेड़ से उतार लेने पर फिर उग आती है। छाल का ही प्रयोग होता है अतः उगने के लिए कम से कम दो वर्षा ऋतुएँ चाहिए। एक वृक्ष में छाल तीन साल के चक्र में मिलती हैं। छाल बाहर से सफेद, अन्दर से चिकनी, मोटी तथा हल्के गुलाबी रंग की होती है। लगभग 4 मिलीमीटर मोटी यह छाल वर्ष में एक बार अपने आप निकलकर नीचे गिर पड़ती है। स्वाद कसैला, तीखा होता है तथा गोदने पर वृक्ष से एक प्रकार का दूध निकलता है। अर्जुन के वृक्ष सामान्यतः राजस्थान में भवानी मंडी झालावाड़ में बहुतायत रूप से पाए जाते है। अर्जुन का पेड़ हमारे आस-पास की कई जगहों पर दिख सकता है लेकिन बहुत लोगों को इसके औषधीय गुणों के बारे में जानकारी ही नहीं है। अर्जुन की छाल को एक आयुर्वेदिक औषधी के रूप में देखा जाता है, जिसका उपयोग ...

बृहती वर्ति

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  बृहती (Brhat) आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण जड़ी-बूटी है, जिसे आमतौर पर बृहती वर्ति के रूप में जाना जाता है। यह विभिन्न औषधीय गुणों से भरपूर होती है और कई स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार में उपयोगी होती है। दर्द निवारक: बृहती में विरोधी गुण होते हैं, जो शरीर में सूजन और दर्द को कम करने में मदद करते हैं। यह गठिया और मांसपेशियों के दर्द में राहत देने के लिए इस्तेमाल की जाती है। पाचन तंत्र को सुधारना: बृहती का सेवन पाचन शक्ति को बढ़ाता है और कब्ज, अपच जैसी समस्याओं का इलाज करता है। यह आंतों के मार्ग को साफ करने में मदद करता है। खांसी और जुकाम में सहायक: बृहती का उपयोग सर्दी, खांसी और ब्रोन्काइटिस जैसी समस्याओं में आराम देने के लिए किया जाता है। यह श्वसन मार्ग को साफ करता है और कफ को बाहर निकालने में मदद करता है। त्वचा के रोगों में उपयोग: बृहती को त्वचा पर होने वाली सूजन, संक्रमण और फुंसियों के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है। यह एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर होती है, जो त्वचा को ठीक करने में सहायक होती है। रक्त शोधक: यह रक्त को शुद्ध करने के लिए भी प्रयोग की जाती है। बृहती का सेवन रक्त को स...