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Showing posts from February, 2025

जब ओम प्रकाश रो पड़े किस्सा tv से साभार

 ओम प्रकाश जी की आंखों से टप टप आंसू बह रहे थे। उनके हाथ में एक चिट्ठी थी जो उन्होंने अभी खोली भी नहीं थी। उस चिट्ठी में क्या लिखा था अभी तक उन्हें पता भी नहीं चला था। लेकिन चूंकि वो चिट्ठी लाहौर से आई थी तो वो उनके लिए बहुत खास थी। उनके आस-पास कई लोग मौजूद थे। और सभी बड़े हैरान थे। क्योंकि किसी ने भी ओम प्रकाश जी को पहले कभी ऐसे रोते नहीं देखा था। ये चिट्ठी वाली कहानी आपको पसंद आएगी साथियों। कल जैसा कि मैंने कहा था कि ओम प्रकाश की एक कहानी मैं आपसे अगले दिन(आज) शेयर करूंगा, जो आपको अच्छी लगेगी। तो ये वही कहानी है। कल ओम प्रकाश जी की पुण्यतिथि थी। चलिए आप और हम ओम प्रकाश जी को इस कहानी के बहाने याद कर लेते हैं। बहुत अच्छे अदाकार थे ओम प्रकाश जी। ये कहानी भी उतनी ही अच्छी है। ये 1980 का किस्सा है। मशहूर पाकिस्तानी गज़ल गायक गुलाम अली खान उस साल पहली दफ़ा भारत में कॉन्सर्ट करने आए थे। उनके साथ उनकी टीम के भी कुछ लोग थे, जिनमें से एक थे अब्दुल सत्तार तारी। अब्दुल सत्तार तारी बहुत प्रतिभाशाली तबला वादक थे।(हैं अभी भी वो) लोग उन्हें तारी भाई कहा करते थे। आगे चलकर वो तारी खान के नाम से म...

तिल का तेल

 तिल का तेल ... पृथ्वी का अमृत, यदि इस पृथ्वी पर उपलब्ध सर्वोत्तम खाद्य पदार्थों की बात की जाए तो तिल के तेल का नाम अवश्य आएगा और यही सर्वोत्तम पदार्थ बाजार में उपलब्ध नहीं है. और ना ही आने वाली पीढ़ियों को इसके गुण पता हैं. 🔹 क्योंकि नई पीढ़ी तो टी वी के इश्तिहार देख कर ही सारा सामान ख़रीदती है. और तिल के तेल का प्रचार कंपनियाँ इसलिए नहीं करती क्योंकि इसके गुण जान लेने के बाद आप उन द्वारा बेचा जाने वाला तरल चिकना पदार्थ जिसे वह तेल कहते हैं लेना बंद कर देंगे. 🔹तिल के तेल में इतनी ताकत होती है कि यह पत्थर को भी चीर देता है. प्रयोग करके देखें....  🔹आप पर्वत का पत्थर लिजिए और उसमे कटोरी के जैसा खडडा बना लिजिए, उसमे पानी, दुध, धी या तेजाब संसार में कोई सा भी कैमिकल, ऐसिड डाल दीजिए, पत्थर में वैसा की वैसा ही रहेगा, कही नहीं जायेगा...  🔹लेकिन... अगर आप ने उस कटोरी नुमा पत्थर में तिल का तेल डाल दीजिए, उस खड्डे में भर दिजिये.. 2 दिन बाद आप देखेंगे कि, तिल का तेल... पत्थर के अन्दर भी प्रवेश करके, पत्थर के नीचे आ जायेगा. यह होती है तेल की ताकत, इस तेल की मालिश करने से हड्डियों...

हरड़J

 एक बहुत बड़ा नामी गिरामी वैद्य था । उसने अपने उपचार से असाध्य से असाध्य रोगियों को ठीक किया था ।  उसके विषय में कहा जाता था कि वह जिस भी रोगी को मात्र अगर एक बार छू भी ले तो वह रोगी बिल्कुल ठीक हो जाता था । उसका एक बेटा था । वह अपने पिता के पैसों में खेलता ही रहा और अपने पिता वैद्य से कुछ नहीं सीख पाया । उसके पिता उसे बोलते रहते थे कि कुछ तो सीख ले , पर वह जवानी के नशे में उनको टालता रहा कि बाद में सीख लूँगा , अपने घर की ही तो खेती है ।  उस वैद्य का जब अंत समय आया तो उसके बेटे को चटकना हुई कि वह तो अपने पिता से कुछ भी नहीं सीख पाया और अब आगे उसका गुजारा कैसे चलेगा !!!  वह रोते हुए अपने पिताजी के पास पहुँचा और उनसे कहा कि पिताजी कुछ तो बता दीजिए । वैद्य ने कहा कि बेटा यह इतना अथाह सागर है कि पूरा जीवन निकल जायेगा और मेरे पास समय बहुत कम है , तुमने बहुत देर कर दी ।  वैद्य ने कहा कि लेकिन मैं तुम्हें एक उपाय बताता हूँ जिससे तुम्हारा कार्य चलता रहेगा । वैद्य ने बताया कि बेटा जो भी रोगी तुम्हारे पास आये , तो एक काम अवश्य करना । अपने हर रोगी को "हर्र" या "हरड़" या "हर...

कलौंजी आसिफ मंसूरी शाही की वॉल से साभार

"मौत को छोड कर हर मर्ज की दवाई है कलौंजी" कलयुग में धरती पर संजीवनी है कलौंजी, अनगिनत रोगों को चुटकियों में ठीक करती है। [A] कैसे करें इसका सेवन? कलौंजी के बीजों का सीधा सेवन किया जा सकता है। एक छोटा चम्मच कलौंजी को शहद में मिश्रित करके इसका सेवन करें। पानी में कलौंजी उबालकर छान लें और इसे पिएँ। दूध में कलौंजी उबालें। ठंडा होने दें फिर इस मिश्रण को पिएँ। कलौंजी को ग्राइंड करें व पानी तथा दूध के साथ इसका सेवन करें। कलौंजी को ब्रैड, पनीर तथा पेस्ट्रियों पर छिड़क कर इसका सेवन करें। [B] ये किन-किन रोगों में सहायक है? 1/. टाइप-2 डायबिटीज: प्रतिदिन 2 ग्राम कलौंजी के सेवन के परिणामस्वरूप तेज हो रहा ग्लूकोज कम होता है। इंसुलिन रैजिस्टैंस घटती है,बीटा सैल की कार्यप्रणाली में वृद्धि होती है तथा ग्लाइकोसिलेटिड हीमोग्लोबिन में कमी आती है। 2/. मिर्गी: 2007 में हुए एक अध्ययन के अनुसार मिर्गी से पीड़ित बच्चों में कलौंजी के सत्व का सेवन दौरे को कम करता है। 3/. उच्च रक्तचाप: 100 या 200 मि.ग्रा. कलौंजी के सत्व के दिन में दो बार सेवन से हाइपरटैंशन के मरीजों में ब्लड प्रैशर कम होता है। रक्...

लसोड़ा अनामिका शुक्ला की वाल से

 # एक वृक्ष है जो भारतीय उपमहाद्वीप, चीन एवं विश्व के अनेक भागों में पाया जाता है। इसे हिन्दी में 'गोंदी' और 'निसोरा' भी कहते हैं।। इसके फल सुपारी के बराबर होते हैं। कच्चा लसोड़ा का साग और आचार भी बनाया जाता है। पके हुए लसोड़े मीठे होते हैं तथा इसके अन्दर गोंद की तरह चिकना और मीठा रस होता है, जो शरीर को मोटा बनाता है। लसोड़े के पेड़ बहुत बड़े होते हैं इसके पत्ते चिकने होते हैं। दक्षिण, गुजरात और राजपूताना में लोग पान की जगह लसोड़े का उपयोग कर लेते हैं। लसोड़ा में पान की तरह ही स्वाद होता है।  इसके पेड़ की तीन से चार जातियां होती है पर मुख्य दो हैं जिन्हें लमेड़ा और लसोड़ा कहते हैं। छोटे और बड़े लसोडे़ के नाम से भी यह काफी प्रसिद्ध है। लसोड़ा की लकड़ी बड़ी चिकनी और मजबूत होती है। इमारती काम के लिए इसके तख्ते बनाये जाते हैं और बन्दूक के कुन्दे में भी इसका प्रयोग होता है। इसके साथ ही अन्य कई उपयोगी वस्तुएं बनायी जाती हैं। कोई भी पुरुष अपनी खूबसूरती को चेहरे से नहीं अपनी आकर्षक शरीर से दर्शाता है. लेकिन आज कल के खानपान के कारण ही कई लोग बहुत ही ज्यादा दुबले और कमजोर होते है...

सोने से पहले गर्म पानी पीने से क्या होता है

 ? पानी के महत्व के बारे में जितनी बात की जाए, उतना कम है, लेकिन आज हम आपको गर्म पानी के बारे में बताने जा रहे हैं, जी हाँ, अक्सर डॉक्टर बीमार व्यक्ति को गर्म पानी पीने की सलाह देते हैं।गर्म पानी पीने से एक नहीं कई सारी बीमारियां दूर होती है जिसकी वजह से गर्म पानी पीने से आप हैल्दी भी रह सकते हैं।ऐसे में अगर हम आपको कहे कि रोजाना रात को खाने के बाद गर्म पानी पीना है तो आपको शायद थोड़ा हैरानी हो सकती है लेकिन चौकिए मत क्योंकि रात को गर्म पानी पीने से कई लाजवाब फायदे होते हैं। गर्म पानी क्यों पीना चाहिए - अगर आप से कोई कहे कि आपको गर्म पानी पीना चाहिए तो सबसे पहले आप कहेंगे कि क्यों पियें? बता दें कि मेडिकल साइंस के मुताबिक गर्म पानी पीने से शरीर में मौजूद सभी बैक्टीरिया बाहर निकल जाते हैं या फिर मर जाते हैं।इसलिए हर इंसान को गर्म पानी जरूर पीना चाहिए।दरअसल गर्म पानी पीने से बॉडी में फैट भी नहीं जमता है और इन्सान फिट भी रह सकता है लेकिन सवाल यह उठता है कि गर्म पानी कब पीने से ज्यादा लाभ होता है तो हमारा जवाब होगा रात में तो अब जानते हैं कि रात में गर्म पानी पीने से क्या फायदे होते हैं...

गिलोय का काढ़ा कैसे बनाते हैं? हेल्थ टुडे से साभार

  गिलोय की वयस्क बेल (लता) जिसका रंग हरा न हो, व उस पर सफेद रंग की पतली परत बन चुकी हो, उसी का उपयोग किया जाता है। गिलोय काढ़ा के लिए सामग्री :- सादा साफ पीने का पानी - दो कप गिलोय लता के एक-एक इंच के टुकड़े - 5 पिसी हल्दी - एक चम्मच अदरक का टुकड़ा - 2 इंच तुलसी के पत्ते - 6 या 7 गुड - 20 ग्राम (कडवाहट कम करने हेतु) बनाने का तरीका :- सबसे पहले एक पैन में 2 कप पानी को मीडियम आंच पर उबलने के लिए रख दें। अब इसमें बाकी सभी सामग्री को डालें और गिलोय भी डाल दें, अब धीमी आंच पर इसे पकने दें। जब पानी आधा रह जाए और सभी चीजें अच्छे से पक जाएं तो गैस बंद कर दें। 4 किसी कपड़े या छन्नी से इसे छानकर कप में डालें और चाय की तरह पीएं। गिलोय का काढ़ा की पीने योग्य मात्रा :- गिलोय का काढ़ा प्रतिदिन एक कप या आधा कप दो बार से ज्यादा नहीं पीना चाहिए। एक कप से ज्यादा मात्रा में काढ़ा पीने से आपको नुकसान भी हो सकते हैं। अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो आपको डॉक्टर की परामर्श के बाद ही इसे पीना चाहिए। गर्भवती महिलाएं, नवजात बच्चों को काढ़ा देने से पहले भी चिकित्सक की सलाह लें, ऐसे लोगों को ये काढ़ा पीने...

धतूरा

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 धतूरा एक उपविष जो जीवन दायिनी शक्ति रखता है धूमपान चिकित्सा का मूल..... धतूरा  को अन्य भाषाओं में मदन, उन्मत्त, शिवप्रिय, महामोही, कृष्ण धतूरा, खरदूषण, शिवशेखर, सविष, कनक, धुतूरा, सादा धुतूरा, धोत्रा, काला धतूरी, जन्जेलमापिल, ततूर, दतुरम, (stramonium) आदि नामो से जाना जाता है। ये एक क्षुप जाति की वनस्पति है। इसके पत्ते बड़े डंठल युक्त, नोकदार, अण्डाकृत होते है। इसके फूल घंटे के आकार के होते है, फूल का रंग बीच में सफ़ेद होता है। इनमे पांच पंखुडिया होती है।इसके फल गोल, कांटेदार और भीतर बहुत बीजो वाला होता है। इसके वनस्पति के सूखे पत्ते और बीज औषधि प्रयोग के काम आते है। इसके बीज कालेपन लिए भूरे रंग के, चपटे, खुरदरे और कड़वे होते है। इनमे कोई सुगंध नहीं होती, मगर कूटने पर एक प्रकार की उग्र गंध आती है।  पहले दमा इंहेलर का आविष्कार भी महर्षि सुश्रुत जी ने ही किया यज्ञ में आहुतियां डालते वक्त उठने वाली कपूर लौंग धूर्तर के धूमपान से जब पास बैठे दमा रोगी को राहत मिली तो उन्होंने सूक्ष्म धूणी यानि चिलम बनवाई जिससे रोगी को सीधे धूमपान करवाया जा सके  उन्मत्त (धतूरा)नामक औषधी के गु...

यूफोरबिया हिरटा

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सामान्य स्वास्थ्य के लिए एंटीऑक्सीडेंट में बढ़ती रुचि के साथ, यूफोरबिया हिरटा के संभावित एंटीऑक्सीडेंट गुणों ने ध्यान आकर्षित किया है। ये गुण ऑक्सीडेटिव तनाव से लड़ने में सहायक हो सकते हैं, जो कई पुरानी बीमारियों का कारक है। तैयारी और उपयोग यूफोरबिया हिरटा का उपयोग करने का सबसे आम तरीका इसकी पत्तियों से चाय या काढ़ा तैयार करना है। इसे बनाने के लिए ताजी या सूखी पत्तियों को कुछ मिनटों के लिए पानी में उबाला जाता है और फिर उस तरल को छानकर पीया जाता है। सामयिक अनुप्रयोगों के लिए, पत्तियों को अक्सर पीसकर पेस्ट बनाया जाता है और सीधे त्वचा पर लगाया जाता है। इलाज की स्थिति और स्थानीय पारंपरिक प्रथाओं के आधार पर खुराक और विशिष्ट तैयारी के तरीके भिन्न हो सकते हैं। सुरक्षा एवं सावधानियां जबकि यूफोरबिया हिरता का पारंपरिक उपयोग का एक लंबा इतिहास है, इसके उपयोग में सावधानी बरतना महत्वपूर्ण है। यदि बड़ी मात्रा में सेवन किया जाए तो पौधे के कुछ हिस्से जहरीले हो सकते हैं, और अन्य दवाओं के साथ दुष्प्रभाव या परस्पर क्रिया हो सकती है। यूफोरबिया हिरटा का उपयोग करने से पहले हमेशा एक स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से...

चिलगोजा द्रव्य गुणम से साभार

 #चिलगोजा एक ऐसा ड्राई फ्रूट है जिसके बारे में शायद ही आपने इससे पहले देखा और सुना होगा!  चिलगोजा एक ड्राई फूड है जो पिस्ता और बादाम के आकार का होता है लेकिन उससे थोड़ा बड़ा होता है। इसे अंग्रेजी में पाइन नट्स (Pine Nuts) कहते हैं। चिलगोजा को नियोजा भी कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम पाइनस गिरार्डियना है। हिमाचल प्रदेश का एक प्यारा सा शहर है किन्नौर! यही पाये जाते है चिलगोजा के पेड़! खासकर टापरी से लेकर पूह तक केवल सतलुज नदि के किनारे ही पाया जाता है। किन्नौर के अलावा भारत में कश्मीर के छोटे से हिस्से में भी चिलगोजा पाया जाता है। उधर नेपाल, अफगानिस्तान और चीन में भी कुछ सीमित क्षेत्रों में चिलगोजा पाया जाता है।  किन्नौर में नेयोजा के नाम से मशहूर चिलगोजा को किन्नौर में नेयोजा के नाम से जाना जाता है। पाइन नट्स नाम का यह पेड़ चीड़ के पेड़ से मिलता जुलता है। चिलगोजा के पेड़ का तना सफेद होता है जबकि चीड़ की तरह ही इसके कोन्स होते हैं जिसमें बीज लगते है। ऊंची चट्टानों, पहाड़ों और पत्थरों के बीच बड़े पेड़ों से इन कोन्स को निकालना आसान नहीं होता। काफी मेहनत के बाद निकले चिलगोजे ...

सोमेंद्र भदौरिया जी की वॉल से साभार

 हरड़े भरड़े आँवले, लो तीनो सम तोल। कूट पीस कर छानिए,त्रिफला है अनमोल।। पाँच भाँति के नमक से,करो चूर्ण तैयार। दस्तावर है औषधि, कहते पंचसकार।। ताजे माखन में सखी, केसर लेओ घोल। मुख व होठों पर लगा,रंग गुलाब अमोल।। सूखी मेंथी लीजिए, खाएँ मन अनुसार। किसी तरह पहुँचे उदर,मेटे बहुत विकार।। ठंड जुकाम भारी लगे, नाक बंद हो जाय। अजवायन को सेंक कर, सूंघे तो खुल जाय।। चर्म रोग में पीसिए, अजवायन को खूब। लेप लगाओ साथिया,मिलता लाभ बखूब।। फोड़े फुंसी होय तो, अजवायन ले आय। नींबू रस में पीस कर,औषध मान लगाय।। अजवाइन गुड़ घी मिला,हल्का गर्म कराय। वात पित्त कफ संतुलन, सर्दी में हो जाय।। भारी सर्दी पोष की, करती बेदम हाल। अदरक नींबू शहद को,पीना संग उबाल।। मेंथी अजवायन उभय,हरती उदर विकार। पाचन होता संतुलित, खाएँ किसी प्रकार।। अदरक के रस में शहद, लेना सखे मिलाय। पखवाड़े नियमित रखो,श्वाँस कास मिटजाय। मक्का की रोटी भली,खूब लगाओ भोग। पाचन के संग लाभ दे,क्षय में रखे निरोग।। छाछ दही घी दूध ये, शुद्ध हमारा भोज। गाय पाल सेवा करो ,मेवा पाओ रोज।। गाजर रस मय आँवला,पीना पूरे मास। रक्त बने भरपूर तो,नयनन भरे उजास।। बथुआ केंहि...