"शुद्धि क्रिया"कल्प का संकल्प"*
द्राक्ष कल्प या फल कल्प क्या होता है?*
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शरीर शुद्धि के लिए सनातन वांग्मय तथा आयुर्वेद में वायु कल्प जल कल्प फल कल्प का विधान है वसंत और शरद नवरात्र के उपवास का विधान भी भारतीय वांग्मय में इसी लिए किया गया है भारत ६ॠतुएं और३मौसम। होते हैं वैसे तो आयुर्वेद में अलग अलग ऋतु में अलग-अलग अलग आहार का विधान है परंतु आयुर्वेद के विद्वानों( अक्टूबर से मार्च तक तथा अप्रेल से सितंबर तक) ने शरद ऋतु के मध्य से शिसिर हेमन्त और वसंत ऋतु के मध्य तक एक सोपन और वसंत ऋतु के मध्य से ग्रीष्म वर्षा और शरद ऋतु के मध्य तक दुसरा सोपान एक में सर्दियों की अधिकता और दुसरे में अधिक गर्म मौसम दोनों में आहार और दिनचर्या अलग अलग शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आहार तंत्र का शुद्ध और क्रियाशील होना आवश्यक है।
इसीलिए लिए ऋग्वेद के उप वेद में वर्ष में दो बार शरीर शुद्धि का विधान है बाद के ब्राह्मण ग्रंथों में शरीर शुद्धि को धर्म से जोड़ दिया गया जिससे प्रतिएक व्यक्ति शरीर शुद्धि को धार्मिक कर्तव्य समझ कर करें और स्वास्थ्य रहे (भारतीय वांग्मय की रचना हजारों वर्षों पहले की गयी है जब भारत में सनातन संस्कृति के इतर कोई और धर्म या संस्कृति नहीं थी ) आज नवरात्र व्रत के नाम पर व्रती गरिष्ठ भोजन दूध और दूध से बने भोज्य तथा मेवे खा रहा है यह कल्प संकल्प के विपरित आचरण है जिससे आहार तंत्र शुद्ध होने के बजाये दुषित हो जाता है और अनेक रोगों का कारण बनता हैअभी पिछले वर्ष बार एक प्रसिद्ध चिकित्सक से बात हो रही थी वह रोज सुबह जोगिंग व्यायाम योग नियमित रूप से करते थे उन्होंने अपने आप को ६०की आयु में भी चुस्त दुरुस्त और स्लिम बना रक्खा है वह बता रहे थे मेरा वज़न नवरात्र उपवास में बढ़ जाता है मैंने कहा क्यों ऐसा क्यों होता है यह तो उपवास के जो लाभ मिलता है उसके विपरीत है हमने कहा आप उपवास मे आहार क्या लेते हो उन्होंने बताया दूध और दूध से बने भोज्य सूखे मेवे और फल दिन में ४से५बार हमने कहा आप का आचरण ही उपवास के नियमों के विरुद्ध है आप तो सामान्य दिनों से भी अधिक कैलोरी ले रहे हो अपने उपवास के मर्म को समझा ही नहीं उपवास का अर्थ है शुद्धि करण जिसमें करसकते हो आपका संकल्प दृढ़ है तो केवल जल का आहार लो यदि जल आहार पर नहीं रह सकते एक समय फल आहार लें सकते हैं और सबसे कम इच्छा शक्ति वाले व्यक्ति दिन में एक बार सात्विक और हल्के अनाज से बना जिसमें कैलोरी बहुत कम हो कुट्टू_ रागी मंडुआ झिंगोरा से बना भोजन करना चाहिए दूध और दूध से के आहार सूखे मेवे खाना तो उपवास की भावन के विपरित है।
द्राक्ष कल्प हो या कोई भी अन्य फल आपका प्रादेशिक और ऋतु के हिसाब से हो उसे ही आपका दोपहर शाम या पूरे दिन मे भूख प्यास के हिसाब से लेना है, आपके इच्छा शक्ति या मनोबल के मुताबिक एक हफ्ते से 2 महीने तक का एक प्रकार का फ्रूट खाने का या उसका ज्यूस पीने का संकल्प लेना होता है जिसे मोनो फ्रूट diet या उपवास भी बोलते हैं, जिससे detoxification यानी शरीर की सफ़ाई तेजी से होती है।
, प्रकृति ने हर ऋतु और प्रदेश के हिसाब से कोई ना कोई स्थानिक फल दिया हुआ है जिसका कोई न कोई प्रयोजन होता है बिना अर्थ प्रकृति मे कुछ भी नहीं होता है जिससे सफ़ाई और साथ भरपूर पोषण मिलता है जिससे कोई भी रोग हो बहुत ही जल्द राहत मिलती है यही तो कारण है कि दस दिन की शरद ऋतु के हिसाब से सेव अनार, याअनय मौसमी फल तथा वसंत ऋतु के हिसाब से द्रक्ष या ओरेंज कल्प मे कुछ लोग को जोली मे लाया गया हो वो दस दिन बाद खुद के पैरों पर चलकर जाते हैं इतना फायदा होता है क्यूंकि दस दिन तक सिर्फ एक ही प्रकार का फ्रूट खाने से पाचन बहुत आसान हो जाता है जिससे जीवनी शक्ति /vital power /chi power का बचाव होता है जो शरीर की सफ़ाई और मरम्मत मे लग जाती है, बहुत सारे लोगों का अनुभव हैं जैसे कि तीन महीने सिर्फ़ ऑरेंज या एप्पल पर रहकर आंतों का कैंसर ठीक हो गया है अल्जाइमर में सुधार देखा गया है मानसिक रोगी साइकोसिस ठीक हो गये तो किसी का डेढ़ महीने तक सिर्फ़ द्राक्ष कल्प करने से ब्लड कैंसर गया है तीन महिने तक आर्गेनिक गाजर का कल्प करने से महिलाओं का बेस्ट और गर्भाशय कैंसर पूरी तरह ठीक हो गया यहा बता दें की साथ मे एनीमा लेना भी जरूरी होता है।
यशपाल सिंह आयुर्वेद रत्न ९८३७३४२५३४
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