आहार विज्ञान भाग-४
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*मानव आहार हजारों वर्षों से शोध का विषय रहा है जितना शोध और खोज इस विषय पर हुई है किसी और विषय पर नहीं हुई । वास्तव में हमारे स्वास्थ्य का संबंध हमारे खान-पान से है मानव को होने वाले 99%रोग का संबंध हमारे आहार से ही है आयुर्वेद में भी आहार के विषय में एक अलग विज्ञान है जानते हैं आहार के विषय में क्या कहता है आयुर्वेद।
*आयुर्वेद के विद्वानों ऋषियों ने हजारों वर्षों के शोध औरअनुभव से जो जाना है वहीं भारतीय आहार विज्ञान है जिसे आधार बनाकर ही आधुनिक रिसर्च हो रही है। भोतिक संसाधन तभी किसी व्यक्ति के लिए उपयोगी है वह उन का भोग करसकता हो- जब वह स्वस्थ हो बीमार के लिए सभी निरर्थक और बेकार हैं स्वास्थ का संबंध हमारे आहार से है आहार विज्ञान स्वस्थ .बलिष्ठ रोग रहितशरीर तथा विचार शील रचनात्मक तेज स्मरण शक्ति नवीन उत्साहऔरउर्जा को प्राप्त करने के लिये बनाये रखने के लियेआहार विज्ञान का ज्ञानहोना अतिआवश्यक है ।आहार पथ्य परहेज परआयूर्वेद विशेष जोर देता है और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान पथ्य और परहेज को निर्थक मानता है आहार विज्ञान को समझने के लिये इन तीन शब्दो का अर्थ समझ ना तथा उस का पालन करनाआवश्यक है।
हितभुक_,मितभुक_,रितभुक
हितभुक.यानि वह खाद्य पदार्थ जो हमारे मानव शरीर
के लिये हितकारी हों सुपाच्य हो आप की प्रकृति के अनुकूल हो निर्रथक चर्बी मांस मजजा मधुमेह न बढ़ायें अधिक नमक ना हो प्रोटीन संतुलित हो वात पित कफ का संतुलन बनाये रक्खे बिगाडे नहीं जिसमें रस प्रधान हो अधिक ऐसीटिक (अमलिय) ना हो क्षारीय हो आवश्यक पोषक तत्व विटामिन्स मिनरल्स प्रोटीन्स खनिज भोजन में विद्यमान हों|
ऐसा आहार स्वस्थ और निरोग रखता है।
मितभुक..यानि मर्यादित खाना मिठा अधिक
खाने से शुगर नमक अधिकखाने से हर्दय
त्वचा रोग आदि शीतल पेय के पीने से गठीया
जोडो में दर्द तिक्त चरपरा खाने से आमाश्य
के रोग चर्बी युक्त चिकने पदार्थ से धमनियों
तथा दिल के रोग हो जाते हैं|कहने का अभिप्राय यह है
किसी भी खाद्य पदार्थ का मर्यादा से अधिक सेवन विष
का काम करता है चाहे वह कितना स्वादिष्ट व शरीर के लिये अमृत ही क्यों ना हो ।
ऋत भुक यानिऋतू अनुसार भोजन करना
हम मानसूनी प्रदेश में निवास करते हैं योरोप तथा विषवत प्रदेश की तरह भोजन करना हमारे स्वस्थ पर विपरित प्रभाव डालता है प्रतिएक मौसम मे पैदा होने वाले फल सब्जी प्रकृति का वरदान है तथा सेवन स्वस्थ रहने की गारंटी देता है जैसे खीरा ककड़ी तरबूज खरबूजा लौकी शुषक ऋतु में पैदा होता है जब हमें तरल यानी पानी की हमारे शरीर को स्वस्थ रहने के लिएआवश्यकता अधिक होती है खाना लाभकारी है तथा- यही सब्जी और फल यदि वर्षा ऋतु में खाते जाते हैं तो स्वास्थ्य के लिए हानी कारक हैं बर्षा ऋतु में वातावरण में नमी की मात्रा अधिक होने के कारणयह पाचक तन्त्र को कमजोर करते है वात पित को बढाते है अनेक रोग होने का कारण बन सकता है यही सब्जी और बेल कुल के फल यदि शीत ऋतु में खाये जाते हैं तब यह कफ तथा वात को बढाकर रोगों को निमंत्र देता है यह एक उदाहरण है इसी प्रकार जिस ऋतु में जो भी फल सब्जी पैदा होती हैं उसीऋतु में उनका भरपूर उपयोग करना चाहिये विपरीत ऋतु में सेवन स्वास्थ को लाभ से अधिक हानी पहुंचाहता है चाहे वह कितना भी स्वादिष्ट और पोषटिकता से परिपूर्ण क्यों ना हो।
कहने का अभिप्राय यह है आयूर्वेद के हित भुक ,मित भुक,ऋत भुक के सिधांत को अपना कर 99प्रतिश्त रोगों से बचा जा सक्ता है आप के शारीरिक तथा मानसिक रोगों से बचाव का राज खाने की थाली में छिपा है ।
यशपाल सिंह आयूर्वेद रत्न
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