हरड़J
एक बहुत बड़ा नामी गिरामी वैद्य था । उसने अपने उपचार से असाध्य से असाध्य रोगियों को ठीक किया था । उसके विषय में कहा जाता था कि वह जिस भी रोगी को मात्र अगर एक बार छू भी ले तो वह रोगी बिल्कुल ठीक हो जाता था । उसका एक बेटा था । वह अपने पिता के पैसों में खेलता ही रहा और अपने पिता वैद्य से कुछ नहीं सीख पाया । उसके पिता उसे बोलते रहते थे कि कुछ तो सीख ले , पर वह जवानी के नशे में उनको टालता रहा कि बाद में सीख लूँगा , अपने घर की ही तो खेती है । उस वैद्य का जब अंत समय आया तो उसके बेटे को चटकना हुई कि वह तो अपने पिता से कुछ भी नहीं सीख पाया और अब आगे उसका गुजारा कैसे चलेगा !!! वह रोते हुए अपने पिताजी के पास पहुँचा और उनसे कहा कि पिताजी कुछ तो बता दीजिए । वैद्य ने कहा कि बेटा यह इतना अथाह सागर है कि पूरा जीवन निकल जायेगा और मेरे पास समय बहुत कम है , तुमने बहुत देर कर दी । वैद्य ने कहा कि लेकिन मैं तुम्हें एक उपाय बताता हूँ जिससे तुम्हारा कार्य चलता रहेगा । वैद्य ने बताया कि बेटा जो भी रोगी तुम्हारे पास आये , तो एक काम अवश्य करना । अपने हर रोगी को "हर्र" या "हरड़" या "हर...