सत्यानाशी
कल मैंने पालक कि क्यारी के पास उखड़ा हुआ सत्यानाशी (कंडाई) का औषधीय पौधा देखा तो मैं बोला कि रै यो क्यूं पाड़ दिया सत्यानाशी❓ बस इतना ही कहा था कि कन्वेंट एजुकेटिड भड़क उठी। कहने लगी कि मुझे बोलने की तमीज नहीं है। मैं हैरान रह गया। मैंने पूछा कि मैं क्या ग़लत बोला तो कहने लगी कि मैंने उसे सत्यानाशी कहा है। मैं बोला कि अगर मैं तुम्हें बोलता तो सत्यानाशण कहता। मैं तो यह कह रहा हूं कि यह सत्यानाशी का पौधा क्यूं पाड़ दिया❓ पालक कि जगह हम अनेक शाक खा सकते हैं पर सत्यानाशी का कोई और विकल्प नहीं है। तब जाकर बात शांत हुई।
आज आप भी यह पोस्ट ध्यान से पढ़ें व अपने आसपास के औषधीय पौधों को पहचाने।
अमेरिका के नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI)की रिसर्च में सत्यानाशी पौधे को बेहद गुणकारी माना गया है। इस पौधे की जड़, तना, पौधे और पत्तियां तक बेहद फायदेमंद हैं। इसका सेवन करने से बुढ़ापा जल्दी नहीं आता।
सत्यानाशी पौधे के फायदे जान कर आप चौंक जाएंगे। आयुर्वेद में कई ऐसे हर्ब्स और पौधे होते हैं, जिनके कई बेनिफिट्स होते हैं. उन्हीं में से एक है सत्यानाशी का पौधा, जिसे Argemone mexicana या इंडियन पॉपी भी कहा जाता है. इसमें आयुर्वेदिक और मेडिकेटेड गुण पाए जाते हैं. इस पेड़ के बीज, पत्ती, जड़, लेटेस्ट (latex) यानी कि इसका सफेद दूध भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस पौधे से पूरी दुनिया में कई दवाएं बनाई जा रही हैं। सत्यनाशी पौधा कई तरह के संक्रमण रोकने में मददगार है।यह मेटाबॉलिक डिसऑर्डर को भी ठीक करता है।
प्राचीन काल में इस पौधे का इस्तेमाल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में दवाई के तौर पर किया जाता था। इस पौधे के तने और पत्तियों से मेथनॉलिक अर्क भी तैयार किया जा सकता है, जो आपकी सेहत सुधारने में संजीवनी बूटी जैसा काम करने में कारगर साबित हो सकता है।
सत्यानाशी के पौधों में एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं, जो बैक्टीरिया, वायरस और फंगस को खत्म करने में मदद करते हैं ये चमड़ी के संक्रमण, घाव, फोड़े-फुंसियों को भी ठीक कर सकता है।
सत्यानाशी सोरायसिस और एक्जिमा जैसी समस्याओं के लिए फायदेमंद होता है। सत्याना
शी का दूध मुंहासे को कम करने में मदद करते हैं और इसके रस को घाव भरने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
सत्यानाशी लीवर को डिटॉक्सिफाई करने में मदद करता है, खासकर पीलिया जैसी समस्या में इसका उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता है।
सत्यानाशी के पौधे में एंट्री इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो सूजन और दर्द को कम करने में मदद करते हैं। खासकर गठिया या अर्थराइटिस की समस्या में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
अगर आप कब्ज, पाचन, एसिडिटी या अपच जैसी समस्या से परेशान है तो इसके लिए भी सत्यानाशी के बीज या इसकी पत्तियों का इस्तेमाल किया जा सकता है,ये भूख बढ़ाने में भी मदद करता है.
सत्यानाशी का इस्तेमाल अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और खांसी के इलाज में भी किया जा सकता है। इसका अर्क फेफड़ों को साफ करता है और रेस्पिरेटरी सिस्टम को बेहतर बनाता है।
सत्यानाशी का उपयोग ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में भी किया जा सकता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए सत्यानाशी के बीज और इसकी पत्तियों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
सत्यानाशी का उपयोग मलेरिया और बुखार के इलाज में भी किया जाता है, इसमें एंटीपायरेटिक गुण पाए जाते हैं जो बुखार को कम करने में मदद करते हैं।
महिलाओं के लिए भी सत्यानाशी का पौधा बहुत फायदेमंद होता है, दरअसल ये महिलाओं की पीरियड्स की इरेगुलेरिटी को ठीक करता है और फर्टिलिटी को बढ़ाता है।
देखा सत्यानाशी संजीवनी से कम नहीं है।
चित्र में उखड़ा हुआ पौधा सत्यानाशी का है।
APJ= √अणपढ़ जाट✍️

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