सिंघाड़ा*



*सुपर फूड है सिंघाड़ा:*

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कच्चा सिंघाड़ा जब हल्की गर्मी होती है तब आता है जो स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है सर्दी में मिलने वाला एक सूपर फूड है पक्का सिंघाड़ा ।

*कच्चा सिंघाड़ा शीतल पित्त शामक रक्तविकार नाशक खाने में रुचि कर मीठा बल वर्धक पोष्टिक  होता है।

*पक्का सिंघाड़ा सख्त तासीर में गर्म पोष्टिक वात नाशक गरिष्ठ  भूख कम करने वाला बिना उबाले खाने में अरुचि कर उबाल कर खाने में रुचि कर होता है*

* सेहत के लिए है 'अमृत तुल्य', व्रत में भी खाते हैं, खेती में भी है खूब कमाई।

*सिंघाड़ा. तालाबों में या रुके हुए पानी में इसकी पैदावार होती है. इसे सुपर फूड के रूप में देखा जाता है. फल होने की वजह से इसे एक तरह से व्रत में भी प्रयोग किया जाता है तो दूसरी तरफ़ इसकी पौष्टिकता हमारी सेहर तो तंदरुस्त रखती है.  ।

*तिकोने आकार का एक फल जिसके सिर पर दो सींग नुमा कांटे होते हैं, अपने पोषक तत्व और स्वाद के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. एक तरफ़ इसे कच्चा भी खाया जाता है तो दूसरी तरफ इसे उबाल कर भी खाया जाता है. वहीं, इसे सुखाकर-पीसकर बनाए गए आटे का भी लोग सेवन करते है।

*कई जगह लोग सिंघाड़े की साग-सब्जी, हलवा और मिठाई भी बनाकर खाते हैं. कई लोग इसकी सब्जी भी बनाकर खाते हैं. हालांकि, इसे ज्यादातर लोग ऐसे ही इसे खाते हैं.।

 

*पौष्टिकता में भरपूर*

*सिंघाड़े को अमृततुल्य मान्या जाता है. सिंघाड़े में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन बी और सी, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सिट्रिक एसिड, टैनिन,बीटा-एमिलेज, मैग्नीज, फॉस्फोरस जैसे मिनरल्स पाए जाते हैं. इसमें रायबोफ्लेबिन भी पाया जाता है. आयुर्वेद में तो यहां तक कहा गया है कि सिंघाड़े में भैंस के दूध की तुलना में 22% अधिक खनिज लवण और क्षार पाए जाते हैं.।

 

*सिंघाड़े की खेती*

*सिंघाड़े की सामान्यतौर पर खेती उष्ट कटिबन्धीय क्षेत्रों में होती है. इसके लिए मई और जून के महीने में गांव के छोटे तालाब, पोखरों और गड्ढो में इसके बीच बोए जाते हैं. एक महीने के अंदर इसके बेल लगने शुरू हो जाते हैं. चूंकि ये फल पानी में होता है, इसलिए इसमें तमाम तरह के कीट-पतंग लगने की आशंका रहती है. इसे देखते हुए समय-समय पर दवाइयों और खाद का छिड़काव होता है.सिघाडे का छिलका मोटा होता है उर उसके अंदर सफेद गिरी निकलती है जो खाई जाती है ।

 

*वहीं, कुछ लोग मिट्टी में भी सिंखाड़े की खेती कर ले रहे हैं. लोग खेत के चारों तरफ 2 से 3 फीट ऊंचा मेढ़ बनाकर 1 फीट की ऊंचाई तक पानी भर देते हैं. इसके बाद इसमें जैविक उर्वरक डालकर सिंघाड़े की रोपाई करते हैं. यहां एक चीज का विशेष ध्यान रखते हैं कि इसके पौधों के बीच 2 मीटर की दूरी हो, जिससे सिंघाड़े के बेल को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिल जाती ।

 

*कुछ आयुर्वेदिक चिकित्सकों का मानना है कि सिंघाड़ा खाने से सांस संबंधी समस्याओं में आराम मिलता है.

पेप्टिक अलसर ठीक होता है वीर्य को गाढ़ा करता है महिलाओं में स्वेत प्रदर को ठीक करता है, कैल्शियम की भरपूर मात्रा होने की वजह से हड्डियों और दांत को भी मजबूत करता है. आंखों की रोशनी के लिए भी फायदेमंद है. ब्लड रिलेटेड और यूरीन रिलेेड प्रॉब्लम को भी ये दूर करता है.इसमें आयोडीन भी पाया जाता है जो गले संबंधी बीमारियों में काफी फायदेमंद होता है।

 

*कहा जाता है सिंघाड़ा कम लागत में पैदा होने वाला पोषटिकता से भरपूर फल है और इससे अच्छी मात्रा में मुनाफा कमाया जा सकता है. सूखे सिंघाड़े की कीमत तो 100-150 रुपये किलो तक होती है. सिंघाड़ा सूखा

 

सिंघाड़े के औषधीय प्रयोग

 

सिंघाड़ा एक ऐसी वनस्पति है जिसका उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता है। इसके फल, पत्तियों और बीजों में कई औषधीय गुण होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं।

 

सिंघाड़े के औषधीय गुण

1. *पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है*: सिंघाड़े के फल में पाचन तंत्र को मजबूत बनाने वाले गुण होते हैं। यह पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है।

2. *रक्तचाप को नियंत्रित करता है*: सिंघाड़े के फल में रक्तचाप को नियंत्रित करने वाले गुण होते हैं। यह उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए लाभदायक होता है।

3. *मधुमेह को नियंत्रित करता है*: सिंघाड़े के फल में मधुमेह को नियंत्रित करने वाले गुण होते हैं। यह मधुमेह के मरीजों के लिए लाभदायक होता है।

4. *प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है*: सिंघाड़े के फल में प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने वाले गुण होते हैं। यह शरीर को रोगों से लड़ने में मदद करता है।

5. *त्वचा को स्वस्थ बनाता है*: सिंघाड़े के फल में त्वचा को स्वस्थ बनाने वाले गुण होते हैं। यह त्वचा संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है।

 

सिंघाड़े का उपयोग

सिंघाड़े का उपयोग विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है:

 

1. *फल का सेवन*: सिंघाड़े का फल सीधे खाया जा सकता है।

2. *जूस*: सिंघाड़े का जूस निकाला जा सकता है और इसका सेवन किया जा सकता है।

3. *पाउडर*: सिंघाड़े का पाउडर बनाया जा सकता है और इसका सेवन किया जा सकता है।

4. *चाय*: सिंघाड़े की पत्तियों से चाय बनाई जा सकती है और इसका सेवन किया जा सकता है।

 

सावधानियां

सिंघाड़े का उपयोग करते समय कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए:

 

1. *गर्भवती महिलाओं को सावधानी से उपयोग करना चाहिए*: सिंघाड़े का उपयोग गर्भवती महिलाओं को सावधानी से करना चाहिए।

2. *स्तनपान कराने वाली महिलाओं को सावधानी से उपयोग करना चाहिए*: सिंघाड़े का उपयोग स्तनपान कराने वाली महिलाओं को सावधानी से करना चाहिए।

3. *अत्यधिक मात्रा में उपयोग न करना चाहिए*: सिंघाड़े का उपयोग अत्यधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए।

 

 अश्वगंधा रासना सोंठ समान भाग लेकर चूर्ण बना लें एक चम्मच सुबह-शाम गरम पानी या गरम दूध के साथ सेवन करने से वात दर्द शांत हो जाता है।

*यशपाल सिंह आयुर्वेद रत्न।  

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