रागी या मंडुआ
रागी को हिन्दी में मडुआ या मंडुआ भी कहते हैं.
रागी के अन्य नाम: नाचनी, फिंगर मिलेट, केझवरगु
(तमिल)
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रागी एक मोटा अनाज है जो भारत के ५०-६०,
वर्ष पहले के मुख्य अनाजों में से एक हुआ करता था यह दिखने में सरसों
जैसा होता है रागी मूल रूप से इथियोपिया के ऊंचे क्षेत्रों का पौधा है ऐसा समझा
जाता है
भारत
में इसे करीब चार हज़ार साल पहले लाया गया थारागी की फसलें सूखे में भी उग सकती
हैं.
रागी में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन,
चीनी फ़ाइबर, वसा, और ऊर्जा
होती है 100 ग्राम रागी से 354 कैलोरी ऊर्जा मिलती है रागी के दानों से आटा बनाया
जाता है.
रागी
का आटा गर्म तासीर का होता है गर्मियों में रागी खाने से बचना चाहिए
रागी आटे का दूसरा नाम मंडुआ है रागी खनिजों का
भी एक अच्छा स्रोत है। दूसरे अनाजों की तुलना में इसमें कैल्शियम की मात्रा 5 से
30 गुना ज्यादा होती है। इसमें फॉस्फोरस, पोटैशियम और
लोहा भी अच्छी मात्रा में होता है। हड्डियों की घनता और उनके स्वास्थ्य के लिये
कैल्शियम तो बहुत उपयोगी है सामान्य तौर पर मंडुआ या रागी का उपयोग अनाज के रूप
में होता है क्योंकि यह ना सिर्फ स्वादिष्ट होता है बल्कि बहुत ही पौष्टिक भी होता
है। प्रायः मंडुआ के आटे को गेहूं के आटे में मिलाकर रोटी परांठा आदि बनाया जाता
है
डायबीटीज में फायदेमंद- रागी में पॉलिफिनॉल्स और
फाइबर की अच्छी मात्रा होती है। · एनीमिया दूर करे- जो लोग रागी खाते हैं
उनके शरीर में आयरन की कमी नहीं होती है। · नीद
अच्छी आती है यह रक्त में शर्करा को नियंत्रित करता है यह अग्नाशय को शक्ति प्रदान
करता है
रागी या मड़ुआ अफ्रीका और एशिया के सूखे
क्षेत्रों में उगाया जाने वाला एक मोटा अनाज है। यह ९०से१००दिन में पक कर तैयार हो
जाता है।
रागी (Finger Millet) ... पूर्वी
अफ्रीका एवं एशिया में एक प्रकार का मुख्य अनाज है जिसे भारत (भारत, नेपाल)
में रागी के नाम से जाना जाता है। तने के शीर्ष पर, पौधे में
कई स्पाइक्स या "भाग" होते हैं।
रागी में मौजूद न्यूट्रिएंट्स के कारण, यह
सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। · रागी वजन कम
करने में कारगर है। · इसमें कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है। ·
रागी में कई जरूरी अमीनो एसिड भी होते हैं। · रागी को
अंग्रेजी में फिंगर मिलेट कहते हैं। ये मोटे अनाज में आता है।जो मुख्य रूप से भारत
के ग्रामीण और दक्षिणी भागों में लोगों का
३०, वर्ष पहले तक ग्रामीण और कम आय के लोगों द्वारा खाए जाता था। रागी के
दाने का उपयोग आटा तैयार करने के लिए किया जाता है रागी या मड़ुआ एक मोटा अनाज है,
जिसका सेवन शरीर के बहुत फायदेमंद है। इसकी खास बात ये है कि इसे लोग
कई बीमारियों में खा सकते हैं।
संकलन
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