तेल

 " तेल"

 

**आयुर्वेद सरल चिकित्सा*

*--------------------------------*

मानव स्वास्थ्य और खाने को स्वादिष्ट बनाने के लिए भारतीय उपमहाद्वीप में विभिन्न तेलों का प्रयोग किया जाता है विशेष रूप से सब्जियों और दालों के पकाने में मांसाहारी भोजन में तो शरीर के लिए फैट की पूर्ति मांस की चर्बी से हो जाती है परंतु शाखा हारी भोजन में इसकी पूर्ति हमें घी विभिन्न तेलों और तैलीय बीजों (बादाम अखरोट आदि) से करते हैं तेलों में पाया जाने वाला फैटी एसिड कैल्शियम मैग्नीशियम विटामिन ए ई और डी पाया जाता है जो शरीर के विकास और स्वस्थ के लिए जरूरी है विभिन्न क्षेत्रों में वहां उपलब्ध होने वाले सरसों मूंगफली तारामीरा सुरजमुखी नारियल जैतून तैलीय बीजों से निकाले गये तेलों का खाने में प्रयोग किया जाता है  वैज्ञानिक शोध से यह ज्ञात हुआ है कच्ची घानी का तेल खाने में स्वास्थ वर्धक और हानी रहित है उसमें भी तिल का तेल।

 

*आयुर्वेद के विद्वानों का कहना हैं पृथ्वी का अमृत है - तिल का तेल।

 

      *यदि आज पृथ्वी पर उपलब्ध सर्वोत्तम (खाद्य पदार्थ) अमृत की बात की जाए तो तिल के तेल का नाम अवश्य आएगा !*

 

    *दोस्तो , तिल और तिल तेल के इतने ज्यादा गुण है कि मेरे लिए ये पोस्ट छोटी पड़ जाएगी और आप इस पोस्ट को पढ़ते - पढ़ते बोर हो जाओगे परंतु पढ़ना आवश्य , फिर भी मैं  पोस्ट को मैं छोटी से छोटी बना कर तिल तेल के फ़ायदे एवं गुणों के बारे में सूक्ष्म रूप से लिख रहा हूँ !*

 

     *और यही सर्वोत्तम खाद्य तेल बाजार में ढूंढने पर बड़ी मुश्किल से मिलता हैं !*

 

     *और आने वाली पीढ़ियों को इसके गुणों का पता भी नहीं हैं !*

 

     *क्योंकि नई पीढ़ी तो टी वी के इश्तिहार देख कर ही सारा सामान ख़रीदती है !*

 

     *और तिल के तेल का प्रचार कंपनियाँ इसलिए नहीं करती क्योंकि इसके गुण जान लेने के बाद आप उन द्वारा बेचा जाने वाला तरल चिकना पदार्थ जिसे वह तेल कहते हैं लेना बंद कर देंगे !*

 

    *तिल के तेल में इतनी ताकत होती है कि यह पत्थर को भी चीर देता है !*

 

    *प्रयोग करके देखें....!*

 

     *आप पर्वत का पत्थर लिजिए और उसमे कटोरी के जैसा खडडा बना लिजिए, उसमे पानी, दुध, धी या तेजाब संसार में कोई सा भी कैमिकल, ऐसिड डाल दीजिए, पत्थर में वैसा की वैसा ही रहेगा..... कही नहीं जायेगा...!*

 

     *लेकिन... अगर आप ने उस कटोरी नुमा पत्थर में तिल का तेल डाल दीजिए , उस खड्डे में भर दिजिये.. 2 दिन बाद आप देखेंगे कि, तिल का तेल... पत्थर के अन्दर भी प्रवेश करके, पत्थर के नीचे आ जायेगा. यह होती है तेल की ताकत, इस तेल की मालिश करने से हड्डियों को पार करता हुआ, हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है. तिल के तेल के अन्दर फास्फोरस होता है जो कि हड्डियों की मजबूती का अहम भूमिका अदा करता है !*

 

    *और तिल का तेल ऐसी वस्तु है जो अगर कोई भी भारतीय चाहे तो थोड़ी सी मेहनत के बाद आसानी से प्राप्त कर सकता है तब उसे किसी भी कंपनी का तेल खरीदने की आवश्यकता ही नही होगी तिल खरीद लीजिए और किसी भी तेल निकालने वाले से उनका तेल निकलवा लीजिए !*

 

      *लेकिन सावधान तिल का तेल सिर्फ कच्ची घाणी (लकडी की बनी हुई) का ही प्रयोग करना चाहिए !*

 

     *तैल शब्द की व्युत्पत्ति तिल शब्द से ही हुई है , जो तिल से निकलता वह है तैल, अर्थात तेल का असली अर्थ ही है "तिल का तेल" !*

 

     *तिल के तेल का सबसे बड़ा गुण यह है की यह शरीर के लिए आयुषधि का काम करता है.. चाहे आपको कोई भी रोग हो यह उससे लड़ने की क्षमता शरीर में विकसित करना आरंभ कर देता है , यह गुण इस पृथ्वी के अन्य किसी खाद्य पदार्थ में नहीं पाया जाता !*

 

     *100 ग्राम (सौ ग्राम) सफेद एवं काले तिल से 1000 मिलीग्राम कैल्शियम प्राप्त होता हैं !*

 

     *बादाम की अपेक्षा तिल में छः गुना से भी अधिक कैल्शियम है !*

 

    *काले और लाल तिल में लौह तत्वों की भरपूर मात्रा होती है जो रक्तअल्पता के इलाज़ में कारगर साबित होती है !*

 

    *तिल में उपस्थित लेसिथिन नामक रसायन कोलेस्ट्रोल के बहाव को रक्त नलिकाओं में बनाए रखने में मददगार होता है !*

 

    *तिल के तेल में प्राकृतिक रूप में उपस्थित सिस्मोल एक ऐसा एंटी ऑक्सीडेंट है जो इसे ऊँचे तापमान पर भी बहुत जल्दी खराब नहीं होने देता !*

 

     *आयुर्वेद ॠषि चरक ने अपनी चरक संहिता में इसे पकाने के लिए सबसे अच्छा तेल माना  है !*

 

    *तिल में विटामिन  सी छोड़कर वे सभी आवश्यक पौष्टिक पदार्थ होते हैं जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं !*

 

    *तिल में Vitamin B ( विटामिन बी) और आवश्यक फैटी एसिड्स से भरपूर है !*

 

    *इसमें  मीथोनाइन और ट्रायप्टोफन नामक दो बहुत महत्त्वपूर्ण एमिनो एसिड्स होते हैं जो चना, मूँगफली, राजमा, चौला और सोयाबीन जैसे अधिकांश शाकाहारी खाद्य पदार्थों में नहीं होते !*

 

    *ट्रायोप्टोफन को शांति प्रदान करने वाला तत्व भी कहा जाता है , जो गहरी नींद लाने में सक्षम है , यही त्वचा और बालों को भी स्वस्थ रखता है , मीथोनाइन लीवर को दुरुस्त रखता है और कॉलेस्ट्रोल को भी नियंत्रित रखता है !*

 

    *तिल बीज स्वास्थ्यवर्द्धक वसा का बड़ा स्त्रोत है जो चयापचय को बढ़ाता है !*

 

    *यह कब्ज भी नहीं होने देता , तिल बीजों में उपस्थित पौष्टिक तत्व जैसे कैल्शियम और आयरन त्वचा को कांतिमय बनाए रखते हैं !*

 

    *तिल में न्यूनतम सैचुरेटेड फैट होते हैं इसलिए इससे बने खाद्य पदार्थ उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकता है , सीधा अर्थ यह है की यदि आप नियमित रूप से स्वयं द्वारा निकलवाए हुए शुद्ध तिल के तेल का सेवन करते हैं तो आप के बीमार होने की संभावना ही ना के बराबर रह जाएगी !*

 

   *इसलिए इसे कहा गया है पृथ्वी का अमृत !*

 

     *जब शरीर बीमार ही नही होगा तो उपचार की भी आवश्यकता नही होगी , यही तो आयुर्वेद है.. आयुर्वेद का मूल सीधांत यही है की उचित आहार विहार से ही शरीर को स्वस्थ रखिए ताकि शरीर को आयुषधि की आवश्यकता ही ना पड़े !*

 

    *एक बात का ध्यान अवश्य रखिएगा की बाजार में बहुत से लोग तिल के तेल के नाम पर अन्य कोई तेल बेच रहे है , जिसकी पहचान करना मुश्किल होगा , ऐसे में अपने सामने निकाले हुए तिल के तेल पर ही भरोसा करें या फिर अपने कोई निजी एवं ख़ास विश्वशनीय भाई से ख़रीदे !*

 

      *यह काम थोड़ा सा मुश्किल ज़रूर है किंतु पहली बार की मेहनत के प्रयास स्वरूप यह शुद्ध तेल आपकी पहुँच में हो जाएगा जब चाहें जाएँ और तेल निकलवा कर ले आएँ या ख़रीद ले !*

 

      *तिल तेल में मोनो सैचुरेटेड फैटी एसिड होता है जो शरीर से बैड कोलेस्ट्रोल को कम करके गुड कोलेस्ट्रोल यानि एच.डी.एल. को बढ़ाने में मदद करता है !*

 

     *यह हृदय रोग , दिल का दौरा और धमनीकलाकाठिन्य ( atherosclerosis) के संभावना को कम करता है !*

 

     *कैंसर से सुरक्षा प्रदान करता है !*

 

     *तिल में सेसमीन (sesamin) नाम का एन्टीऑक्सिडेंट (antioxidant) होता है जो कैंसर के कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ है और उसके जीवित रहने वाले रसायन के उत्पादन को भी रोकने में मदद करता है !*

 

     *यह फेफड़ों का कैंसर , पेट के कैंसर , ल्यूकेमिया , प्रोस्टेट कैंसर , स्तन कैंसर और अग्नाशय के कैंसर के प्रभाव को कम करने में बहुत मदद करता है !*

 

    *तनाव को कम करता है , इसमें नियासिन (niacin) नाम का विटामिन होता है जो तनाव और अवसाद को कम करने में मदद करता है !*

 

    *हृदय के मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है , तिल में ज़रूरी मिनरल जैसे कैल्सियम , आयरन, मैग्नेशियम , जिन्क , और सेलेनियम होता है , जो हृदय के मांसपेशियों को सुचारू रूप से काम करने में मदद करता है और हृदय को नियमित अंतराल में धड़कने में मदद करता है !*

 

    *शिशु की हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है !*

 

    *तिल में डायटरी प्रोटीन और एमिनो एसिड होता है जो बच्चों के हड्डियों के विकसित होने में और मजबूती प्रदान करने में मदद करता है !*

 

     *उदाहरण स्वरूप 100 ग्राम तिल में लगभग 18 ग्राम प्रोटीन होता है, जो बच्चों के विकास के लिए बहुत ज़रूरी होता है !*

 

    *गर्भवती महिला और भ्रूण (foetus) को स्वस्थ रखने में मदद करता है ,तिल में फोलिक एसिड होता है जो गर्भवती महिला और भ्रूण के विकास और स्वस्थ रखने में मदद करता है !*

 

    *अध्ययन के अनुसार तिल के तेल से शिशुओं को मालिश करने पर उनकी मांसपेशियाँ सख्त होती है साथ ही उनका अच्छा विकास होता है !*

 

    *आयुर्वेद के अनुसार इस तेल से मालिश करने पर शिशु आराम से सोते हैं !*

 

    *अस्थि-सुषिरता (osteoporosis) से लड़ने में मदद करता है , तिल में जिन्क और कैल्सियम होता है जो अस्थि-सुषिरता से संभावना को कम करने में मदद करता है , मधुमेह के दवाईयों को प्रभावकारी बनाता है !*

 

    *"डिपार्टमेंट ऑफ बायोथेक्सनॉलॉजी विनायक मिशन यूनवर्सिटी , तमिलनाडु" ("Department of Biothechnology at the Vinayaka Missions University, Tamil Nadu") के अध्ययन के अनुसार यह उच्च रक्तचाप को कम करने के साथ-साथ इसका "एन्टी ग्लिसेमिक" प्रभाव रक्त में ग्लूकोज़ के स्तर को 36% कम करने में मदद करता है !*

 

     *जब यह मधुमेह विरोधी दवा "ग्लिबेक्लेमाइड" ("glibenclamide") से मिलकर काम करता है। इसलिए टाइप-2 मधुमेह (type 2 diabetic) रोगी के लिए यह मददगार साबित होता है !*

 

     *दूध की तुलना में तिल में तीन गुना कैल्शियम रहता है। इसमें कैल्शियम, विटामिन बी और ई, आयरन और ज़िंक, प्रोटीन की भरपूर मात्रा रहती है , और कोलेस्टरोल बिल्कुल नहीं रहता है , तिल का तेल ऐसा तेल है, जो सालों तक खराब नहीं होता है, यहाँ तक कि गर्मी के दिनों में भी वैसा की वैसा ही रहता है , तिल का तेल कोई साधारण तेल नहीं है। इसकी मालिश से शरीर काफी आराम मिलता है। यहां तक कि लकवा जैसे रोगों तक को ठीक करने की क्षमता रखता है !*

 

      *सर्दी के मौसम में इस तेल से शरीर की मालिश करें, तो ठंड का एहसास नहीं होता। इससे चेहरे की मालिश भी कर सकते हैं। चेहरे की सुंदरता एवं कोमलता बनाये रखेगा। यह सूखी त्वचा के लिए उपयोगी है !*

 

      *तिल का तेल - तिल विटामिन A (ए) व E (ई) से भरपूर होता है। इस कारण इसका तेल भी इतना ही महत्व रखता है। इसे हल्का गरम कर त्वचा पर मालिश करने से निखार आता है। अगर बालों में लगाते हैं, तो बालों में निखार आता है, लंबे होते हैं ,जोड़ों का दर्द हो, तो तिल के तेल में थोड़ी सी सोंठ पावडर, एक चुटकी हींग पावडर डाल कर गर्म कर मालिश करें। तिल का तेल खाने में भी उतना ही पौष्टिक है विशेषकर पुरुषों के लिए , इससे मर्दानगी की ताकत मिलती है , हमारे धर्म में भी तिल के बिना कोई कार्य सिद्ध नहीं होता है, जन्म, मरण, परण, यज्ञ, जप, तप, पित्र, पूजन आदि में तिल और तिल का तेल के बिना संभव नहीं है अतः इस पृथ्वी के अमृत को अपनायें और जीवन निरोग बनायें !*

*तिल का तेल,*

 


*-------------------------------*

ऐसा शास्त्रों से ज्ञात होता है मानव सभ्यता में सबसे पहले तेल तिल से ही निकाला गया है तिल को दबाकर निकाले गये द्रव्य को तेल कहा गया है जितने भी तेल हैं उन सभी में त्वचा में समाहित हो जाने का और खाने के बाद सुगमता से पाचन में आजाने का गुण  तिल  के तेल में सबसे अधिक है।

एक पत्थर में आप छेनी हथौड़ी से गड्ढा बनाकर उसमें तिल का तेल भरदें २४घंटे बाद आप देखेंगे पत्थर में समाहित होकर तेल का निसान पत्थर के निचे नजर आयेगा यह विषेश गुण केवल तिल के तेल में ही है ।

. तिल का सेवन 10-15 मिनट तक मुँह में रखकर कुल्ला करने (कंडूस क्रिया) मुंह आमाशय शुद्ध होता है शरीर पुष्ट होता है, होंठ नहीं फटते, कंठ नहीं सूखता, आवाज सुरीली होती है, जबड़ा व हिलते दाँत मजबूत बनते हैं और पायरिया दूर होता है तिल के तेल में खाना पकाने से आयरन कैल्शियम मैग्नीशियम फास्फोरस विटामिन बी१२तथा विटामिन डी प्रचूर मात्रा में मिलता है कोलेस्ट्रॉल और रक्त दाब नियंत्रित रहता है |

 

. 50 ग्राम तिल के तेल में 1 चम्मच पीसी हुई सोंठ और मटर के दाने बराबर हींग डालकर गर्म किये हुए तेल की मालिश करने से कमर का दर्द, जोड़ों का दर्द, अंगों की जकड़न, लकवा आदि वायु के रोगों में फायदा होता है |

 

. 20-25 लहसुन की कलियाँ 250 ग्राम तिल के तेल में डालकर उबालें | इस तेल की बूँदे कान में डालने से कान का दर्द दूर होता है |

 

. प्रतिदिन सिर में काले तिलों के शुद्ध तेल से मालिश करने से बाल सदैव मुलायम, काले और घने रहते हैं, बाल असमय सफेद नहीं होते |

 

. 50 मि.ली. तिल के तेल में 50 मि.ली. अदरक का रस मिला के इतना उबालें कि सिर्फ तेल रह जाय | इस तेल से मालिश करने से वायुजन्य जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है |

 

. तिल के तेल में सेंधा नमक मिलाकर कुल्ले करने से दाँतों के हिलने में लाभ होता है |

 

. घाव आदि पर तिल का तेल लगाने से वे जल्दी भर जाते हैं |

 

.तिल के तेल में आंवला सिकाकाई  बालछड भंगराज औषधियों को पकाकर लगाने से  बालों के सभी लोग ठीक होते हैं बालों का झड़ना टुटना दोमुंहे 9.होना ठीक हो जाते हैं यहां तक देखा गया है गंजो के सिर पर भी बाल जाते हैं।

 

तिल के तेल में आंवला, ब्रह्ममी, मुंडी, गाजबां ,चूकखा औषधियों के साथ पका कर बना तेल सिर पर लगाने से दिमाग को ठंडक मिलती है  थकान मिटती है व्यक्ति ताजगी का अनुभव करता है याद दासत बढ़ती है मानसिक रोगों में लाभ कारी है बुद्धि का विकास होता है छोटे बच्चों के भैंगा पन ठीक होता है।

 

.तिल के तेल को लाख के साथ मिलकर पकाने से जो तेल बनता है उसे लाक्षादि तेल कहते हैं यह छोटे बच्चों की तारीफ करने से हड्डियां मजबूत होती है सुबह की सुनहरी धुप में लेटाकर बच्चों की मालिस इस तेल से करने से सूरज की धुप के साथ क्रया करके विटामिन डी का तेजी से निर्माण करता है जो बच्चों के विकास के लिए आवश्यक है।

 

तिल के तेल में चूने का पानी मिलाकर लगाने से जले हुए में ठंडक पड़ती है घाव जल्दी ठीक हो जाता है और जले का निसान भी नहीं रहता।

 

 

*सरसों का तेल है अत्यंत लाभकारी, जानिए इसके बेहतरीन फायदे*

*----------------------------------*

सरसों का तेल mustard oil जिसे कड़वा तेल भी कहते हैं सरसों तेल का प्रयोग उत्तर भारत के सभी घरों में असम बंगाल बिहार उत्तर प्रदेश हरियाणा पंजाब राजस्थान हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू कश्मीर में खाने में किया जाता है सरसों का कच्ची घानी का तेल हमारे पूर्वज हजारों वर्षों से करते आ रहे हैं पहले के समय में तो घरों में रोशनी करने के लिए सरसों तेल का दीपक जलाया जाता था । बंगाल असम में खिचड़ी में सरसों का तेल खाया जाता है बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में चना चबेना जिसमें भूने चावल भूना चना प्याज हरी मिर्च नमक डाल कर बनाया जाता है सरसों का तेल मिलाकर खाने से उसकी पोषटिकता और स्वाद दोनों बढजाते हैं स्वादिष्ट अचार बनाने के लिए सरसों का तेल मिलाया जाता है।

सरसों के तेल में ओलिक एसिड और लिनोलिक एसिड विटामिन ए, , बी 6आयरन मैग्निशियमऔर फैटिएसिड होता है जो मानम शरीर के विकास और पोषण के लिए आवश्यक तत्व हैं।

तेल को बार बार गरम करके नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे उसमें ट्रांसफेट हानी कारक तत्व में बदल जाता है जो हमारे लीवर और ह्रदय के लिए हानी कारक है इसलिए रिफाइंड तेल का प्रयोग खाने में ना करें सरसों के कच्ची घानी तेल का ही उपयोग करना लाभकारी होता है।

 

1 सरसों के तेल को बहुत पौष्टिक माना जाता है, इसलिए इसका प्रयोग खाना बनाने के लिए भी किया जाता है। इसकी तासीर गर्म होने से सर्दियों में यह अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

 

2 सरसों के तेल की मालिश करने से शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और रक्त संचार भी बेहतर होता है। यह शरीर में गर्माहट पैदा करने में भी मददगार होता है।

 

3 दांतों की तकलीफ में सरसों के तेल में नमक मिलाकर रगड़ने से फायदा होता है, साथ ही दांत पहले से अधिक मजबूत हो जाते हैं।

 

4 त्वचा संबंधी समस्याओं में भी बेहद फायदेमंद होता है। यह शरीर के किसी भी भाग में फंगस को बढ़ने से रोकता है और त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाता है।

 

5 यह बालों की जड़ों को पोषण देकर रक्तसंचार बढ़ाता है जिससे बालों का झड़ना बंद हो जाता है। इसमें ओलिक एसिड और लीनोलिक एसिड पाया जाता है, जो बालों की ग्रोथ बढ़ाने के लिए अच्छे होते हैं।

 

6 सरसों तेल को कई लोग एक टॉनिक के रूप में भी प्रयोग करते हैं। यह शरीर की कार्य क्षमता बढ़ा कर शरीर की कमजोरी को दूर करने में सहायता करता है।इस तेल की मालिश के बाद स्नान करने से शरीर और त्वचा दोनों स्वस्थ रहते हैं।

 

7, सरसों तेल लगा कर सप्ताह में सुबह के समय सर्दियों में 10-से 11बजेतक और गर्मीयों में 8से9 बजे तक केवल एक घंटा सुर्य की धूप में बैठने से आपके शरीर में कभी विटामिन डी की कमी नहीं होगी सरसों का कच्ची घानी का तेल त्वचा पर लगाकर सूरज की धूप से मिलकर तेजी से विटामिन डी का निर्माण करता है।

 

8,सरसों का तेल नाक के दोनों नथुनों में डालने से किसी भी वायरस के नाक से श्वास के साथ प्रवेश करने का खतरा 80%तक कम हो जाता है कोविड काल में तो आप जब भी घर से बाहर जायें नाक के नथुनों के अंदर तेल लगा कर ही जायें और जब बाहर से आयें नथुनों में दो दो बूंद तेल आवश्य डालें नाक में तेल डालने से श्वास नली में जमा कफ निकल जाता है ‌ सिर का दर्द भी ठीक होता है।

 

9,सरसों के तेल से कंडूस क्रिया करने से मुंह और गले और दांतों को Didox शुद्ध किया जा सकता है।

 

10, सरसों के तेल में कपूर मिलाकर दिया जलाने से घर के मच्छर भाग जाते हैं मच्छरों को भगाने का यह सबसे सस्ता और सुरक्षित विधिः है।

 

11,शरीर के खुले अंगों पर सरसों+नीम का तेल लगाने से मच्छर नहीं लगते यह odomas से अधिक सुरक्षित है।

 

*सोते समय नाभि में बस 2 बूंद तेल डालें और सेहत के 17 फायदे पाएं*

नाभि शरीर का केंद्र बिंदु होता है। ह र रात सोने से पहले अगर आप मात्र दो बूंद तेल भी नाभि में डालते हैं तो सेहत के कई आश्चर्यजनक फायदे मिल सकते हैं। यह त्वचा, प्रजनन, आंखों और मस्तिष्क के लिए अत्यंत उपयोगी है। आइए जानते हैं नाभि में तेल डालने से क्या और कौन से फायदे मिलते हैं...

 

नाभि में रोजाना तेल लगाने से फटे हुए होंठ नर्म और गुलाबी हो जाते हैं।

 

इससे आंखों की जलन, खुजली और सूखापन भी ठीक हो जाता है।

 

नाभि में तेल लगाने से शरीर के किसी भी भाग में सूजन की समस्या खत्म हो जाती है।

 

सरसों का तेल नाभि पर लगाने से घुटने के दर्द में राहत मिलती है।

 

नाभि पर सरसो तेल लगाने से हमारे चेहरे की रंगत बढ़ जाती है, इसलिए आपको रोजाना नाभि पर सरसो तेल लगाना चाहिए।

 

नाभि पर सरसो तेल लगाने से पिंपल्स और दाग-धब्बे ठीक होते है।

 

नाभि पर सरसो तेल लगाने से हमारा पाचन तंत्र भी मजबूत होता है।

 

बादाम का तेल लगाने से त्वचा की रंगत निखर जाती है।

 

नाभि में तेल लगाने से पेट का दर्द कम होता है।

 

इससे अपच, फ़ूड पॉइजनिंग, दस्त, मतली जैसी बीमारियों से भी राहत मिलती है।

 

इस तरह की समस्याओं के लिए पिपरमिंट आइल और जिंजर आइल को सरसों तेल के साथ पतला करके नाभि में लगाना चाहिए।

 

अगर आप मुहांसों की समस्या से परेशान हैं तो आपको नीम के तेल को नाभि में लगाना चाहिए। इससे आपके कील-मुहांसे दूर होने लगेंगे।

 

अगर आपके चेहरे पर कई तरह के दाग की समस्या है तो नीम का तेल नाभि में डालने से ये दाग दूर होंगे। नाभि में लेमन आयल लगाने से भी दाग धब्बे भी दूर होते हैं।

 

नाभि प्रजनन तंत्र से जुड़ी हुई होती है। इसलिए नाभि में तेल लगाने से प्रजनन क्षमता विकसित होती है।

 

कोकोनट या ऑलिव आइल को नाभि में लगाने से महिलाओं के हार्मोन संतुलित होते हैं और गर्भधारण की संभावना बढ़ती है।

 

नाभि में तेल लगाने से पुरुषों के शरीर में शुक्राणुओं की वृद्धि और सुरक्षा होती है।

 

माहवारी से संबंधित समस्याओं से आजकल हर दूसरी-तीसरी महिला ग्रस्त मिलती है। अगर पीरियड्स के दौरान ज्यादा दर्द हो तो रूई के फाहे में थोड़ी सी ब्रांडी लगाकर नाभि में लगाने से ये दर्द तुरंत दूर हो जाता है। 

 

नाभि की नियमित रूप से सफाई बहुत जरूरी है इसके लिए कुसुम, जोजोबा, ग्रेप्स सीड, या इसी तरह के अन्य हल्के तेलों को रूई में लगाकर नाभि में लगायें और धीरे-धीरे मैल साफ़ करें।

 

नाभि में मौजूद मैल के कारण बैक्टीरिया और फंगस के पनपने की संभावना होती है। इसलिए कोई भी संक्रमण बढ़ सकता है। ऐसे में यह जरूरी है कि आप संक्रमण को दूर करने वाले असरदार तेलों का प्रयोग करके नाभि को नम बनाकर रखें। इन तेलों में टी ट्री आइल और मस्टर्ड आइल सबसे असरदार हैं सरसों भी दो तरह की होती है एक काली सरसों जिसे राई कहते हैं एक पीली सरसों जिसे बंगा कहते हैं दोही तरह का सरसों का तेल मिलता है यद्यपि दोनों सरसों से निकाले तेल के गुण धर्म लगभग समान ही हैं फिर भी पीली सरसों का तेल खाने में उत्तम होता है।

 

     *नारियल तेल*

 


 

अपने पैरों के तलवों पर नारियल तेल  (Coconut oil) लगाएं*।

 

*------------------------**

 

यह पोस्ट मैने नहीं लिखी है  मैनै तो नारियल तेल से मालिश करने के अलग-अलग व्यक्तियों के अनुभव को संकलन  किया है मेरा मानना है यह संकलन आप के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

 

   नारियल तेल अनेक शारीरिक व्याधियों में उपयोगी है अल्जाइमर (मोनो भ्रंस)के रोगी को यदि एक चम्मच नारियल तेल छाछ में मिलाकर दिया जाये तो याददाश्त दुरुस्त करने में मदद करता है सभी मानसिक रोगों में अन्य औषधि के साथ सहायक का काम करता है त्वचा रोगों में कपूर के साथ मिलकर लगाने से लाभकारी है ।

 

  1. एक शेट्टी महिला ने लिखा कि मेरे दादाजी का 87 वर्ष की आयु में निधन । कोई पीठदर्द नहीं, कोई जोड़ों का दर्द नहीं, कोई सिरदर्द नहीं, कोई दांत खराब नहीं हुआ।

*एक बार जब उन्होंने कहा कि वह एक बूढ़े आदमी को जानते हैं ; जब वह मैंगलोर में रहते थे। सलाह दी थी कि मैं सोते समय अपने पैरों के तलवों पर तेल लगाने के लिए कोंकण रेलवे लाइन पर पत्थर बिछा रहा था। यह मेरे उपचार और फिटनेस का एकमात्र स्रोत है।

 

  2. मणिपाल के एक छात्र ने कहा कि मेरी माँ ने मेरे तलवों के नीचे नारियल तेल लगाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि एक बच्चे के रूप में, उनकी दृष्टि कमजोर हो गई थी। जब उसने यह प्रक्रिया जारी रखी, तो मेरी आंख की रोशनी धीरे-धीरे पूरी तरह से स्वस्थ हो गई।

 

  3. उडुपी के एक सज्जन श्री कामथ जो एक व्यापारी हैं, ने लिखा है कि मैं छुट्टी मनाने केरल गया था।

मैं वहाँ एक होटल में सोया था। मैं सो नहीं सका। मैं बाहर चलने लगा। रात को बाहर बैठे पुराने चौकीदार ने मुझसे पूछना शुरू किया, "क्या बात है ?"

मैंने कहा मैं सो नहीं सकता! वह मुस्कुराया और कहा, "क्या आपके पास कोई नारियल तेल है ?"

मैंने कहा नहीं, वह गया और नारियल तेल लाया और कहा, "कुछ मिनट के लिए अपने पैरों के तलवों की मालिश करें।"

फिर मैंने खर्राटे लेना शुरू कर दिया। अब मैं वापस सामान्य हो गया हूं।

 

  4. मैंने रात को सोने से पहले अपने पैरों के तलवों पर नारियल के तेल की मालिश करने की कोशिश की। इससे मुझे नींद अच्छी आती है ; और थकान दूर होती है।

 

  5. मुझे पेट की समस्या थी। मेरे तलवों पर नारियल के तेल से मालिश करने के बाद, 2 दिनों में मेरे पेट की समस्या ठीक हो गई।

 

  6. दरअसल! इस प्रक्रिया का जादुई असर होता है। मैंने रात को सोने जाने से पहले नारियल के तेल से अपने पैरों के तलवों की मालिश की। इस प्रक्रिया ने मुझे बहुत सुकून की नींद दी।

 

  7. मैं यह ट्रिक पिछले 15 सालों से कर रहा हूं। इससे मुझे बहुत नींद आती है। मैं अपने छोटे बच्चों के पैरों के तलवों की भी नारियल के तेल से मालिश करता हूं । जिससे वे बहुत खुश और स्वस्थ रहते हैं।

 

  8. मेरे पैर दर्द करते थे। मैंने रात को सोने जाने से पहले रोजाना 2 मिनट नारियल के तेल से अपने पैरों के तलवों की मालिश करनी शुरू की। इस प्रक्रिया से मेरे पैरों में दर्द से राहत मिली।

 

  9. मेरे पैर हमेशा सूज जाते थे और जब मैं चलता था, मैं थक जाता था। मैंने रात को सोने जाने से पहले अपने पैरों के तलवों पर नारियल के तेल की मालिश की यह प्रक्रिया शुरू की। केवल 2 दिनों में, मेरे पैरों की सूजन गायब हो गई।

 

  10. रात में, बिस्तर पर जाने से पहले, मैंने अपने पैरों के तलवों पर नारियल के तेल की मालिश का प्रयोग किया। इससे मुझे बहुत शांति से नींद आ गई।

 

  11. यह एक अद्भुत बात है। यह टिप आरामदायक नींद के लिए नींद की गोलियों से बेहतर है। अब मैं हर रात अपने पैरों के तलवों की नारियल तेल से मालिश करके  सोती हूं।

 

  12. मेरे दादाजी के पैरों में जलन और सिरदर्द था। जब उन्होने अपने तलवों पर नारियल का तेल लगाना शुरू किया, तब दर्द दूर हो गया।

 

  13. मुझे थायराइड की बीमारी थी। मेरा पैर हर समय दर्द कर रहा था। पिछले साल किसी ने मुझे रात को सोने जाने से पहले पैरों के तलवों पर नारियल तेल की मालिश करने का सुझाव दिया। मैं इसे स्थायी रूप से कर रहा हूं। अब मैं आमतौर पर शांत हूं।

 

  14. मेरे पैर सुन्न हो रहे थे। मैं रात को बिस्तर पर जाने से पहले चार दिनों तक नारियल के तेल से अपने पैरों के तलवों की मालिश कर रहा हूं। बहुत  बड़ा अंतर है।

 

  15. मुझे बारह या तेरह साल पहले बवासीर हुआ था। मेरा दोस्त मुझे एक ऋषि के पास ले गया ; जो 90 साल का था।

*उन्होंने सुझाव दिया कि नारियल के तेल को हाथों की हथेलियों पर, उंगलियों के बीच, नाखूनों के बीच और नाखूनों पर रगड़ें और कहा: नाभि में नारियल के तेल की चार से पाँच बूँदें डालें और सो जाएँ।

 मैं उस ॠषि  की सलाह मानने लगा। मुझे बहुत राहत मिली। इस टिप ने मेरी कब्ज की समस्या को भी हल किया। मेरे शरीर की थकान भी दूर हो जाती है और मैं तनावमुक्त महसूस करता हूं। खर्राटों को रोकता है।

 

  16. पैरों के तलवों पर नारियल के तेल की मालिश एक आजमाई हुई और परखी हुई टिप है।

 

  17. नारियल के तेल से अपने पैरों के तलवों की मालिश करने से मुझे अच्छी नींद आती है।

 

  18. मेरे पैरों और घुटनों में दर्द था। जब से मैंने अपने पैरों के तलवों पर नारियल के तेल की मालिश की टिप पढ़ी है ? अब मैं इसे रोज करता हूं, इससे मुझे निर्बाध नींद आती है।

 

  19. जब से मैंने रात में बिस्तर पर जाने से पहले अपने पैरों के तलवों पर नारियल के तेल की मालिश के इस नुस्खे का उपयोग करना शुरू किया है । पहले  मुझे पीठ में दर्द रहता था । मेरी पीठ दर्द का कम हो गया है ; और भगवान का शुक्र है कि मैं बहुत अच्छी तरह से सोया हूं।

 

  *दक्षिण भारतीय रहस्य इस प्रकार है*:

 

  रहस्य बहुत सरल है, बहुत कम है, हर जगह और सभी के लिए बहुत आसान है।

 

"आपको केवल COCONUT OIL को लागू करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन किसी भी तेल, सरसों, जैतून, आदि को पैरों के तलवों और पूरे पैर पर लगा सकते हैं, खासकर तलवों पर तीन मिनट और दाहिने पैर के तलवे पर तीन मिनट के लिए। सोते समय पैरों के तलवों की मालिश करना और उसी तरह से बच्चों की मालिश करना।

इसे अपने जीवन के लिए एक दिनचर्या बना लें। फिर प्रकृति की पूर्णता को देखें।

 आप जीवन भर कंघी करते हैं। तेल क्यों नहीं लगाना चाहिए ? पैर के तलवे पर ?

 

*प्राचीन चीनी चिकित्सा के अनुसार, पैरों के नीचे लगभग 100 एक्यूप्रेशर बिंदु हैं।

उन्हें दबाने और मालिश करने से मानव अंग भी ठीक हो जाते हैं।

  *पैरों की मालिश रीफ्लैक्स से*

 

  यह कहा जाता है। दुनियाभर में "फुट मसाज थेरेपी" का इस्तेमाल किया जाता है।

*ऐरंड तेल*

 


*जानते है कस्टर  आयल के फायदे और नुकसान*

*-----------------------------------------------*

कंसर्ट आयल(अरंडी का तेल) अखाद्य तेल है परन्तु इसकी उपयोगिता इसके औषधि गुण के कारण है यह विभिन्न शारीरिक व्याधियों को दूर करता है।

*त्वचा की सूजन* का उपचार करने के लिए केस्टर ऑयल एक वरदान है जो सनबर्न, मुँहासे और सूखी त्वचा के कारण हो सकती है। इसके लिए आप केस्टर ऑयल में कॉटन बॉल को डुबोकर प्रभावित त्वचा पर लगाएँ। इसे एक घंटे के बाद धो लें। केस्टर ऑयल में उपचार करने वाले गुण होते हैं जो कि सभी तरह की त्वचा की सूजन दूर करने मे मददगार  है

 

*कैस्टर तेल रोकें त्वचा को बूढ़ा होने से*

त्वचा के लिए अरंडी के तेल के अद्भुत लाभ में से एक है कि यह त्वचा को बूढ़ा होने से रोक सकता है। अरंडी के तेल को जब त्वचा पर लगाया जाता है तो यह त्वचा के अंदर गहराई से प्रवेश करता है और कोलेजन और ईलेस्टिन के उत्पादन को उत्तेजित करता है। यह बदले में त्वचा को नरम करने और हाइड्रेट करने में मदद करता है। यह झुर्रियाँ और फाइन लाइन्स की उपस्थिति को कम करता है और त्वचा को चिकनी, नरम बनाता है।

 

*एरंडेल तेल का उपयोग करे मुहाँसो को दूर*

जिन लोगों की मुँहासे वाले त्वचा होती है वो ज्यादातर तेलों से दूर भागते है क्योंकि तेल रोम छिद्रों और उनकी समस्या को बढ़ाते हैं। अरंडी के तेल का प्रयोग मुँहासे को कम करने में लाभकारी साबित हो सकता है। गर्म पानी के साथ अपना चेहरा धो लें यह आपके छिद्र को खोलने में मदद करेगा। तेल के साथ एक परिपत्र गति में अपने चेहरे की मालिश करें और रातभर लगाने के बाद अगले दिन ठंडे पानी से अपना चेहरा धो लें। अरंडी का तेल राइसिनोलिक एसिड में समृद्ध है जो मुँहासे से उत्पन्न बैक्टीरिया से लड़ता है। यह प्रभावी रूप से त्वचा की परतों में प्रवेश करता है, जिससे यह मुँहासो के लिए यह एक उत्कृष्ट उपाय है।

 

*एरंड का तेल है त्वचा मॉइस्चराइज़र*

अरंडी का तेल आपको चिकनी और कोमल त्वचा प्रदान करता है। इसलिए यदि आप एक सस्ते और प्राकृतिक त्वचा मॉइस्चराइज़र की तलाश में है तो अरंडी का तेल सबसे बेहतर है। आप अच्छी तरह से अपने चेहरे को साफ कर लें और इस तेल के साथ धीरे धीरे मालिश करें। यह तेल एक अद्भुत मॉइस्चराइज़र है जो अत्यधिक सुखी त्वचा को निकालने में मदद करता है।

 

*अरण्डी के तेल का उपयोग मिटाए दाग धब्बों को*-

अरंडी के तेल का उपयोग अक्सर काले धब्बों और निशानों के लिए किया जाता है। यह धीरे-धीरे काम करता है और इसलिए प्रमुख परिणाम देखने के लिए इसे नियमित रूप से इस्तेमाल करने की आवश्यकता होती है।

 

*कैस्टर ऑयल के फायदे हैं स्ट्रेच मार्क्स के लिए*

स्ट्रेच मार्क्स आम तौर पर गर्भावस्था के कारण होते हैं। अधिक लोचदार त्वचा का मतलब है कम स्ट्रेच मार्क्स होना। अरंडी का तेल फैटी एसिड में समृद्ध है। जब यह गर्भावस्था के अंतिम दो महीनों के दौरान प्रयोग किया जाता है, तो यह खिंचाव के निशान को रोक सकता है।

 

*अरंडी के तेल के गुण हैं लंबे बालों के लिए*

केस्टर ऑयल बालों के विकास को बढ़ावा देने के लिए एक उत्कृष्ट उपाय है। इसके साथ सिर की मालिश करने से आपको घने और लंबे बाल मिल सकते हैं। यह तेल रोम के रक्त परिसंचरण को बढ़ा देता है, जिससे बालों का विकास तेज हो जाता है। तेल में ओमेगा -9 आवश्यक फैटी एसिड है जो स्वस्थ बालों के लिए जिम्मेदार होता है। स्कॅल्प संक्रमण बालों के पैच, रूसी और खुजली जैसी प्रमुख बाल समस्याओं का कारण हो सकता है। अरंडी का इस्तेमाल करके इन समस्याओं से छुटकारा पाया सकता ह

 

*अरंडी के तेल के लाभ रोके सफेद बालों को*

यदि आपके बालों ने सफेद होने के संकेत दिखाना शुरू कर दिए हैं, तो एरंड का तेल लगाने से आपके बालों के रंग को खोने से रोका जा सकता है। एरंडर ऑयल का प्रयोग, समय से पहले बालों के सफेद होने को रोकने के लिए एक लोकप्रिय तरीका है। यह आपके बालों का रंग बनाए रखने में मदद करता है। इसके अलावा अरंडी का तेल शुष्क और क्षतिग्रस्त बालों के उपचार में बहुत उपयोगी हो सकता है

 

*अरंडी के तेल का उपयोग करे दाद का इलाज*

अरंडी का तेल प्रभावी ढंग से सभी आयु समूहों में दाद जैसी एक आम और जिद्दी समस्या का इलाज करता है। 2 चम्मच अरंडी तेल और 4 चम्मच नारियल तेल को मिक्स करके दाद वाली जगह पर लगाएँ। अंडरएलेनेनिक एसिड नामक एक सक्रिय यौगिक जो कि इस तेल में पाया जाता है, दाद के उपचार में मदद करता है।

 

*अरण्डी का तेल है घावों को भरने में प्रभावी*

अरंडी का तेल कट्स और खरोंच पर एक उत्कृष्ट निस्संक्रामक के रूप में काम करता है। इसके रोगाणुरोधी गुण छोटे कट्स और खरोंच के उपचार के लिए इस प्रभावी बनाते हैं। और क्योंकि इसमें सूजन को कम करने वाले गुण हैं तो यह दर्द को दूर करने में भी मदद करता है।

 

*गठिया का इलाज है अरंडी का तेल*

गठिया के कारण दर्द का इलाज करने के लिए अरंडी का तेल एक बहुत अच्छा उपाय है। अरंडी का तेल जोड़ो और ऊतको के दर्द से राहत प्रदान कर सकता है। एक कपड़े का टुकड़ा लें और उसे अरंडी के तेल में भिगोएँ। अतिरिक्त तेल को दबाकर निकाल दे और प्रभावित जोड़ो पर कपड़ा रखें। एक प्लास्टिक रॅप से इस कवर करें। अब इस पर एक गर्म पानी की बोतल या हीटिंग पैड रखें। इस एक घंटे के लिए लगाकर छोड़ दें। अरंडी तेल में मौजूद सूजन को कम करने वाले गुणों की वजह से यह जोड़ों के दर्द, तंत्रिका सूजन और गले की मांसपेशियों को राहत देता है।

 

*कैस्टर ऑयल बनाए प्रतिरक्षा को मजबूत*

अरंडी तेल प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने में मदद करता है यहां तक कि जब यह बाहरी रूप से प्रयोग किया जाता है,तो यह आपके शरीर के रक्षा तंत्र को बढ़ाता है। बाहरी रूप से इस्तेमाल करने पर टी -11 कोशिकाओं की संख्या बढ़ जाती है, जो शरीर में रक्षा तंत्र में वृद्धि करती है। टी -11 कोशिकाओं में रोगजनकों और विषाक्त पदार्थों के खिलाफ एंटीबॉडी होते हैं, जो बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है।

 

*एरंड के तेल का उपयोग पीठ दर्द के लिए*

पीठ दर्द के इलाज के लिए अरंडी ऑयल सबसे अच्छा प्राकृतिक उपाय है। अपनी पीठ पर अरंडी के तेल से मालिश करना किसी भी दर्द और कठोरता से छुटकारा पाने का एक स्वाभाविक तरीका है। अपनी पीठ के दर्द स्थान पर अरंडी का तेल लगाएँ, इसके बाद एक साफ और मुलायम कपड़े के साथ क्षेत्र को कवर कर लें, इसके अलावा आप इस क्षेत्र को प्लास्टिक के साथ कवर कर सकते हैं। एक घंटे के लिए पीठ पर एक गर्म पानी के थैली को रखें। तीन दिनों के बाद इस प्रक्रिया को फिर दोहराएं। पीठ दर्द के लिए अरंडी ऑयल का उपयोग करना एक आसान और सुरक्षित घरेलू उपाय है। बेशक, इस क्षेत्र को प्लास्टिक के साथ कवर करने में थोड़ी परेशानी होती है और इसे लंबे समय तक आपको शरीर में बांधना पड़ता है, लेकिन इसका परिणाम बहुत ही अच्छा होता है।

 

*अरंडी के तेल के नुकसान*

वैसे तो अरंडी के तेल में भरपूर फ़ायदे हैं लेकिन फिर भी अरंडी के तेल के कुछ नुकसान हो सकते हैं जैसे: - इसकी गर्म प्रकृति के कारण, अरंडी के तेल के अधिक सेवन से दस्त या पेचिश हो सकता है।अरंडी के तेल के साथ अन्य आम साइड इफेक्ट्स हैं - पेट में ऐंठन, मतली, उल्टी, चक्कर आना। - यह गर्भावस्था के दौरान इसके संकेत विपरीत हैं और स्तनपान करने वाली माताओं और बच्चों को यह डॉक्टर की सलाह के अनुसार देना चाहिए। - स्किन पर रैश, खुजली और सूजन इसके मुख्य लक्षण होते हैं। इसलिए यदि आपको इस आयिल से एलर्जी है तो इसे कभी भी उपयोग ना करें अपने गर्म प्रकृति के कारण यह डिलीवरी जल्दी करवा सकता है और इसके अधिक सेवन से कुछ गर्भपात के मामले भी देखे गए हैं।

*मालकांगनी का तेल*

 

ज्योतिष्मती एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है. इसे मालकांगनी के नाम से भी जाना जाता है.

*----------------------------*

मालकांगनी का तेल दर्द नाशक तो है ही यह अर्थराइटिस जोड़ों का दर्द में मालिस करने से दर्द को राहत देता है इसके अतिरिक्त मालकांगनी के तेल का एक बहुत अच्छा प्रयोग याददाश्त बढ़ाने बुद्धि तेज करने और मंद बुद्धि बच्चों की चिकित्सा में भी किया जाता है।

    ज्योतिष्मती के बीज, फल, जड़, और पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है. ज्योतिष्मती के कई फ़ायदे हैं, जैसे कि:

बुद्धि तेज करना: ज्योतिष्मती को खाने से बुद्धि तेज होती है. इसके तेल की 2-3 बूंदें दूध में डालकर सुबह खाली पेट पीने से भी बुद्धि तेज होती है.

सूजन और दर्द को दूर करना: ज्योतिष्मती के अर्क में एंटी-इंफ़्लेमेंटरी गुण पाए जाते हैं, जो सूजन और दर्द को दूर रखते हैं.

सिर दर्द में राहत: ज्योतिष्मती के पत्तों को पीसकर माथे पर लगाने से सिर दर्द में राहत मिलती है.

पेट के रोगों को दूर करना: ज्योतिष्मती का इस्तेमाल कब्ज़, एसिडिटी, पेट फूलना, पेट में गैस बनना जैसी समस्याओं को दूर करने में भी किया जा सकता है.

आंखों की समस्याओं में फ़ायदेमंद: आंखों के आस-पास ज्योतिष्मती तेल से मालिश करने से आंखों की रोशनी में सुधार हो सकता है.

मूत्र विकार को दूर करे: नियमित रूप से ज्योतिष्मती तेल का सेवन करने से यूरिन से जुड़ी समस्याएं दूर हो सकती हैं.

ज्योतिष्मती का तेल वातकफ का इलाज करता है। यह पेट के कीड़ों को खत्म करता है। डायबिटीज में भी मालकांगनी के फायदे मिलते हैं। बहुत सालों से मिर्गी और कुष्ठ रोग के इलाज के लिए ज्योतिष्मती का इस्तेमाल किया जाता है मालकांगनी को ज्योतिष्मती के नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऐसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जो तंत्रिका तंत्र को एक्टिव करती है और शक्ति प्रदान करती है यह नर्व सिस्टम को ठीक करती है डिसस्लिप और सर्वाइकल को ठीक करती है ।

 

ज्योतिष्मती सेलास्ट्रस पैनिकुलैटस  कुल का पौधा है इसके पत्तों की चाय दर्द और स्थानीय सूजन को कम करती है

 

जानिए ज्योतिष्मती तेल के 10 फायदे ||

ज्योतिष्मती तेल और बादामरोगण में कृपया ड्रॉप सिस्टम पैकिंग करवाएं।

मालकांगनी तेल की मालिश से दर्द और सूजन को कम करता है

ज्योतिष्मती तेल नाक एक दो बूंद डालने से बंद नाक खोलता है जमे कफ को निकाता है और तंत्रिका तंत्र को शक्ति देता है

 

नाक में ज्योतिष्मती तेल

मालकांगनी : लाभ, सावधानियां और खुराक

 मालकांगनी तेल की 2-5 बूंदें लें। ख. इसे गुनगुने दूध या पानी में मिलाएं। ग. यौन स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए हल्का भोजन लेने के बाद इसे दिन में एक बार दूध में मिलाकर ब लें। ... मालकांगनी ऑस्टियोआर्थराइटिस में दर्द को कम करने में सहायक है

 

.

बुद्धि तेज करने और सिर का दर्द दूर करने जैसी इन 6 समस्याओं में फायदेमंद है ...

ज्योतिषमती एक औषधिय जड़ी-बूटी है। जिसके बीज, फल, जड़, पत्ते आदि इस्तेमाल में लाए जाते हैं। आयुर्वेद में ...

 

ज्योतिष्मती तेल (Jyotishmati Oil) के अद्भुत फायदे

मालकांगनी या ज्योतिष्मती - एक मेध्य औषधि है

 

ज्योतिष्मती (मालकांगनी) तेल शरीर की इन 8 समस्याओं को दूर करता है

ज्योतिष्मती तेल से शरीर को होने वाले फायदे और इस्तेमाल का तरीका · 1. मूत्र विकार को करे दूर · 2. अर्थराइटिस से करे बचाव · 3. स्किन की समस्याएं करे दूर · 4. बुखार से राहत · 5. खुजली से राहत · 6. आंखों में रक्त संचार बढ़ाकर आंखों की आंतरिक संरचनाओं को शक्ति देता है 7, बुद्धि को बढ़ाता है 8, पौरुष शक्ति को बढ़ाता है

 

ज्योतिष्मती

अति उष्णा: इसकी शक्ति अत्यधिक उच्च है। · -कब्ज से राहत दिलाता है · कुष्ठ रोग का उपचार:में सहायक है मिर्गी रोग की चिकित्सा में एक सहायक औषधि है।

 

ज्योतिष्मती अत्यंत गर्म स्वभाव की औषधि है इसका प्रयोग आयुर्वेद चिकित्सक की देखरेख में ही करना चाहिए यह आर्टिकल किसी भी चिकित्सा अथवा आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह या चिकित्सा का विकल्प नहीं है।


रिफाइंड तेल*

 


सेहत के लिए खतरनाक है रिफाइंड तेल, हो सकती हैं ये घातक बीमारियां

*----------------------------*

खाने को स्वादिष्ट बनाने और सेहत के लिए खाने में तेल और घी का प्रयोग किया जाता है दालों के बाद सबसे ज्यादा प्रोटीन और विटामिन तथा फैट  तेल में होता है खाने में गंध का बहुत महत्व है खाने की यदि गंध मन भावन है तो भूख बढ़ती है और खाने की गंध अच्छी नहीं तो भूख कम करती है स्वाद का स्थान दुसरा है स्वाद का पता तब चलता है जब हम खाना खाते हैं खाने की गंध को ठीक करने के लिए तेल को रिफाइंड किया जाता है गंध तो ठीक हो जाती है परन्तु तेल में स्वास्थ को लाभदायक तत्व विटामिन्स मिनरल्स प्रोटीन्स कम हो जाते हैं इसलिए रिफाइंड तेल तेल के सेवन से बचें और तिल, सरसों, मूंगफली या नारियल के शुद्ध तेल का प्रयोग करें।

 

आपको जानकर हैरानी होगी कि साधारण तेल को रिफाइंड तेल बनाने के लिए 6-7 और डबल रिफाइंड बनाने के लिए 12-13 रसायनों का उपयोग किया जाता हैऔर बार बार गरम किया जाता है। इस लिए रिफाइंड तेल तेल के सेवन से बचें और तिल, सरसों, मूंगफली या नारियल के शुद्ध तेल का प्रयोग करें।

 

गंध है अहम घटक -

हो सकता है कि शुद्ध तेल में से आपको गंध आए और चिपचिपा भी लगे। लेकिन उसका यही चिपचिपापन, तेल का महत्वपूर्ण घटक होता है। जब तेल में से इस चिपचिपेपन को निकाल दिया जाता है तो वह तेल ही नहीं रहता। इसी तरह तेल की गंध उसका प्रोटीन कंटेंट होती है।

 

दालों के बाद सबसे ज्यादा प्रोटीन तेल में ही होता है। तेल की गंध निकालने पर उसमें से फैटी एसिड की मात्रा भी निकल जाएगी। चिपचिपापन और गंध निकाल देने से तेल महज पानी रह जाता है जो जहर से कम नहीं होता। रिफाइंड तेल खाने से घुटने व कमरदर्द, हृदयाघात, पैरालिसिस, ब्रेन डैमेज और हड्डियों का दर्द हो सकता है। वहीं शुद्ध तेल हृदय रोगों की आशंका को कम करता है

*सबसे ज्यादा मौतें देने वाला भारत में कोई है l तो वह है रिफाईनड तेल*

 भारत के केरल राज्य स्थित आयुर्वेदिक युनिवर्सिटी आंफ रिसर्च केन्द्र के अनुसार, हर वर्ष 20 लाख लोगों की मौतों का कारण बन गया है... *रिफाईनड तेल*

 

रिफाईनड तेल से DNA डैमेज, RNA नष्ट, , हार्ट अटैक, हार्ट ब्लॉकेज, ब्रेन डैमेज, लकवा शुगर(डाईबिटीज), BP नपुंसकता, कैंसर ,हड्डियों का कमजोर हो जाना, जोड़ों में दर्द,कमर दर्द, किडनी डैमेज, लिवर खराब, कोलेस्ट्रोल, आंखों रोशनी कम होना, प्रदर रोग, बांझपन, पाईलस, स्केन त्वचा रोग आदि!. एक हजार रोगों का प्रमुख कारण है।

 

*रिफाईनड तेल बनता कैसे हैं।*

बीजों का छिलके सहित तेल निकाला जाता है, इस विधि में जो भी Impurities तेल में आती है, उन्हें साफ करने वह तेल को स्वाद गंध व कलर रहित करने के लिए रिफाइंड किया जाता है

*वाशिंग*-- वाशिंग करने के लिए पानी, नमक, कास्टिक सोडा, गंधक, पोटेशियम, तेजाब व अन्य खतरनाक एसिड इस्तेमाल किए जाते हैं, ताकि Impurities इस बाहर हो जाएं |इस प्रक्रिया मैं तारकोल की तरह गाडा वेस्टेज (Wastage} निकलता है जो कि टायर बनाने में काम आता है। यह तेल ऐसिड के कारण जहर बन गया है।

 

*Neutralisation*--तेल के साथ कास्टिक या साबुन को मिक्स करके 180°F पर गर्म किया जाता है। जिससे इस तेल के सभी पोस्टीक तत्व नष्ट हो जाते हैं।

 

*Bleaching*--इस विधी में P. O. P{प्लास्टर ऑफ पेरिस} /पी. ओ. पी. यह मकान बनाने मे काम ली जाती है/ का उपयोग करके तेल का कलर और मिलाये गये कैमिकल को 130 °F पर गर्म करके साफ किया जाता है!

 

*Hydrogenation*-- एक टैंक में तेल के साथ निकोल और हाइड्रोजन को मिक्स करके हिलाया जाता है। इन सारी प्रक्रियाओं में तेल को 7-8 बार गर्म व ठंडा किया जाता है, जिससे तेल में पांलीमर्स बन जाते हैं, उससे पाचन प्रणाली को खतरा होता है और भोजन न पचने से सारी बिमारियां होती हैं।

*निकेल* एक प्रकार का Catalyst metal (लोहा) होता है जो हमारे शरीर के Respiratory system,  Liver,  skin,  Metabolism,  DNA,  RNA को भंयकर नुकसान पहुंचाता है।

 

रिफाईनड तेल के सभी तत्व नष्ट हो जाते हैं और ऐसिड (कैमिकल) मिल जाने से यह भीतरी अंगों को नुकसान पहुंचाता है।

 

आप गंदी नाली का पानी पी लें, उससे कुछ भी नहीं होगा क्योंकि हमारे शरीर में प्रति रोधक क्षमता उन बैक्टीरिया को लडकर नष्ट कर देता है, लेकिन रिफाईनड तेल खाने वाला व्यक्ति की अकाल मृत्यु होना निश्चित है!

 

*दिलथाम के अब पढे*

हमारा शरीर करोड़ों Cells (कोशिकाओं) से मिलकर बना है, शरीर को जीवित रखने के लिए पुराने Cells नऐ Cells से Replace होते रहते हैं नये Cells (कोशिकाओं) बनाने के लिए शरीर खुन का उपयोग करता है, यदि हम रिफाईनड तेल का उपयोग करते हैं तो खुन मे Toxins की मात्रा बढ़ जाती है व शरीर को नए सेल बनाने में अवरोध आता है, तो कई प्रकार की बीमारियां जैसे-कैंसर Cancer,  Diabetes ,मधुमेह, Heart Attack हार्ट अटैक, Kidney Problems  किडनी खराब, Allergies,  Stomach Ulcer,  Premature Aging,  Impotence,  Arthritis,  Depression,  Blood pressure आदि हजारों बिमारियां होगी।

 

रिफाईनड तेल बनाने की प्रक्रिया से तेल बहुत ही मंहगा हो जाता है, तो इसमे पांम आंयल मिक्स किया जाता है! (पांम आंयल सवमं एक धीमी मौत है)

 

प्रत्येक तेल कंपनियों को 40 %

खाद्य तेलों में पांम आंयल मिलाना अनिवार्य है, अन्यथा लाईसेंस रद्द कर दिया जाएगा! इससे अमेरिका को बहुत फायदा हुआ, पांम के कारण लोग अधिक बिमार पडने लगे, हार्ट अटैक की संभावना 99 %बढ गई, तो दवाईयां भी अमेरिका की आने लगी, हार्ट मे लगने वाली  स्प्रिंग(पेन की स्प्रिंग से भी छोटा सा छल्ला) , दो लाख रुपये की बिकती हैं,

यानी कि अमेरिका के दोनो हाथों में लड्डू अमेरिकी कम्पनियां इंडोनेशिया मलेशिया जैसे देशों से पाम ख़रीद कर ग़रीब देशों में बेचती हैं, पांम भी उनका और दवाईयां भी उनकी!

 

अब तो कई नामी कंपनियों ने पांम से भी सस्ता,, गाड़ी में से निकाला काला आंयल  (जिसे आप गाडी सर्विस करने वाले के छोड आते हैं)

वह भी रिफाईनड कर के खाद्य तेल में मिलाया जाता है, अनेक बार अखबारों में पकड़े जाने की खबरे आती है।

 

सोयाबीन एक दलहन हैं, तिलहन नही...

दलहन में... मुंग, मोठ, चना, सोयाबीन, व सभी प्रकार की दालें आदि होती है।

तिलहन में... तिल, सरसों, मुमफली, नारियल, बादाम,ओलीव आयल, आदि आती है।

अतः सोयाबीन तेल पेवर पांम आंयल ही होता है। पांम आंयल को रिफाईनड बनाने के लिए सोयाबीन का उपयोग किया जाता है।

सोयाबीन की एक खासियत होती है कि यह,

प्रत्येक तरल पदार्थों को सोख लेता है,

पांम आंयल एक दम काला और गाढ़ा होता है,

उसमे साबुत सोयाबीन डाल दिया जाता है जिससे सोयाबीन बीज उस पांम आंयल की चिकनाई को सोख लेता है और फिर सोयाबीन की पिसाई होती है, जिससे चिकना पदार्थ तेल तथा आटा अलग अलग हो जाता है, आटा से सोया मंगोडी बनाई जाती है!

आप चाहें तो किसी भी तेल निकालने वाले के सोयाबीन ले जा कर, उससे तेल निकालने के लिए कहे!तेल नही निकालेगा, क्योंकि. सोयाबीन का आटा बनता है, तेल नही!

 

फॉर्च्यून.. अर्थात.. आप के और आप के परिवार के फ्यूचर का अंत करने वाला.

 

सफोला... अर्थात.. सांप के बच्चे को सफोला कहते हैं!

5 वर्ष खाने के बाद शरीर जहरीला

10 वर्ष के बाद.. सफोला (सांप का बच्चा अब सांप बन गया है.

15 साल बाद.. मृत्यु... यानी कि सफोला अब अजगर बन गया है और वह अब आप को निगल जायगा.!

 

पहले के व्यक्ति 90.. 100 वर्ष की उम्र में मरते थे तो उनको मोक्ष की प्राप्ति होती थी, क्योंकि.उनकी सभी इच्छाए पूर्ण हो जाती थी।

 

और आज... अचानक हार्ट अटैक आया और कुछ ही देर में मर गया....?

उसने तो कल के लिए बहुत से सपने देखें है, और अचानक मृत्यु..?

 

गलत खान पान के कारण, अकाल मृत्यु हो जाती है!

 

तन मन धन और आत्मा की तृप्ति के लिए सिर्फ ओलीव आयल ,राइस ब्रान ,का तेल ही इस्तेमाल करना चाहिए! पोस्टीकवर्धक और शरीर को निरोग रखने वाला सिर्फ कच्ची घाणी का निकाला हुआ तेल ही इस्तेमाल करना चाहिए!

आज कल सभी कम्पनी.. अपने प्रोडक्ट पर कच्ची घाणी का तेल ही लिखती हैं!

वह बिल्कुल झूठ है.. सरासर धोखा है!

कच्ची घाणी का मतलब है कि,, लकड़ी की बनी हुई, औखली और लकडी का ही मुसल होना चाहिए! लोहे का घर्षण नहीं होना चाहिए. इसे कहते हैं.. कच्ची घाणी.

जिसको बैल के द्वारा चलाया जाता हो!

आजकल बैल की जगह मोटर लगा दी गई है!

लेकिन मोटर भी बैल की गती जितनी ही चले! लोहे की बड़ी बड़ी सपेलर (मशिने) उनका बेलन लाखों की गती से चलता है जिससे तेल के सभी पोस्टीक तत्व नष्ट हो जाते हैं और वे लिखते हैं.. कच्ची घाणी.तेल ही स्वास्थ वर्धक है

 

कई शोधों के अनुसार खानपान की चीजों को परिष्कृत करने पर उनमें से पौष्टिक तत्व नष्ट होते हैं आयुर्वेद के अनुसार हमारे खाने में क्षार 80%और अमल20%के परिमाण में होतो स्वास्थ वर्धक है दुर्भाग्यवश हम हाइजीनिक के फेर में आज रिफाइंड खारहे है खाने के पदार्थों को जितनी बार गरम किया जाये गा रिफाइंड किया जायेगा उतना ही उनखादय पदार्थों में क्षारियता कम होती जाती है और अमलता बढ़ती जाती है चाहे वह तेल हो चीनी हो या मैदा सभी हानी कारक है। इसलिए तेल को शुद्ध रूप में प्रयोग करना उचित रहता है चीनी की जगह गुड़ शक्कर खांड खाना और चोकर युक्त आटा खाना  स्वास्थ्य प्रदान करता है रोगों से बचाता है


मूंगफली और तेल

*आयुर्वेद सरल चिकित्सा*

*--------------------------*

मूंगफली है पोषक तत्वों से भरपूर एक तिलहन है जो जमीन के अन्दर आलू की तरह पैदा होती है परन्तु यह कंद नहीं दलहनी और तिलहनी फसल है मूंगफली का कचचीघानी तेल खाने के लिए पोष्टिक और विटामिन मिनरल कैल्सियम से भरपूर है गुजरात राज्य में खाने में मूंगफली का तेल अधिक खाया जाता है मूंगफली को ग़रीब का बादाम भी कहा जाता है कच्ची मूंगफली में प्रोटीन और कैल्शियम मैग्नीशियम फास्फोरस की मात्रा बादाम से भी अधिक होती है।

 

दरअसल मूंगफली ना केवल स्‍वाद में बेहतरीन होती है, ये सेहत (Health) के मामले में भी कई ड्राइफ्रूट्स से आगे है. वेबएमडी के मुताबिक, कई लोग इसे ड्राइफ्रूट समझते हैं लेकिन दरअसल ये फलियों जैसे सोयाबीन, मटर, दाल आदि के वर्गीकरण में आता है. इसका प्रयोग हम भूनकर, चटनी के रूप में या अन्‍य तरीके से भी करते हैं लेकिन अगर आप इसे रात भर पानी में भिगोकर सुबह इसका सेवन करें तो यह सेहत को कहीं ज्‍यादा फायदा पहुंचा सकता है. आइए जानते हैं कि इसके क्‍या क्‍या फायदे हैं.

 

हार्ट को रखता है हेल्‍दी

मूंगफली में कार्डियो प्रोटेक्टिव गुण पाया जाता है. ऐसे में जो लोग इसका नियमित सेवन करते हैं उन्‍हें दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है. यह कोलेस्‍ट्रॉल को ठीक करता है और स्‍मॉल ब्‍लड क्‍लॉट की समस्‍या को होने से रोकता है जिससे हार्ट अटैक और स्‍ट्रोक का खतरा नहीं होता.

 

ब्रेन को रखता है हेल्‍दी

मूंगफली में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है. यह एक ऐसा फैटी एसिड है जो दिमाग की कार्यक्षमता को बढ़ाता है जिससे  मेमोरी अच्‍छी होती है. ऐसे में बच्‍चों को नाश्‍ते में रोज सुबह भीगी हुई मूंगफली नियमित रूप से खिलाना चाहिए.

 

स्किन के लिए अच्‍छा

मूंगफली में एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाई जाती है जो स्किन को एजिंग से बचाता है और स्किन को हेल्‍दी रखने में मदद करता है.

 

बॉडी बिल्डिंग के लिए

जो लोग बॉडी बिल्डिंग करते हैं उन्‍हें रोज सुबह भीगी मूंगफली का सेवन करना काफी फायदेमंद हो सकता है. इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन होता है जो मसल्‍स को बनने में मदद करता है।

 

पाचनतंत्र को रखता है ठीक

इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर होता है जो पाचन क्रिया को सुचारू रूप से चलाने में मददगार  होता है. इसका सेवन करने से आपका पाचन तंत्र ठीक तरह से काम करता है और पेट से जुड़ी कई समस्याएं दूर रहती हैं।

मेरा अनुभव और मूंगफली मेरे पड़ोस में एक गरीब मुस्लिम परिवार रहता है उन के एक लड़के के पैर की पिंडलियों की हड्डियां बाहर को घूमी हुई थी चिकित्सक को दिखाने और जांच कराने के बाद बताया बच्चे में कैल्सियम फास्फोरस की कभी है जिससे हड्डियां  घुम रही है और अब कोई चिकित्सा ही नहीं है चिकित्सा से और विकार न आते इसे रोका जा सकता है जो आगया है ठीक नहीं किया जा सकता मेरे गांव में उससमय मूंगफलीकी बूआई खूब  होती थी  और खुदाई १५अकटुबर से १५, नवंबर के बीच होती है उसके परिवार के लोग मेरे यहां मूंगफली की खुदाई करने जाते थे वह ५, वर्ष का बच्चा उनके साथ जाने लगा और रोज कच्ची नमीदार मूंगफली खाने लगा परिणाम यह हुआ २०ही दिन में पैर की हड्डी यों की विकार बिना किसी औषधि के ठीक हो गया जो चिकित्सा आधुनिक विज्ञान के पास नहीं थी वह मूंगफली ने करदी यह घटना अनुमानित ४०, वर्ष पुरानी है आज वह लड़का जिसका नाम मुस्लिम पुत्र अजिज  निवासी बरमपुर पोस्ट खास परगना कीरतपुर तहसील नजीबाबाद जनपद बिजनौर है सामान्य जीवन जी रहा है ।


बादाम और बादाम का तेल*

आयुर्वेद सरल चिकित्सा*

   

बादाम में इतने गुण होते हैं कि इसे पोषक तत्वों का भंडार कहा जाता है.

 

*---------------------------*

बादाम में कई पोषक तत्व होते हैं और इसके खाने के कई फ़ायदे हैं।

बादाम में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ़्लेमेटरी गुण होते हैं. ये शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले फ़्री रेडिकल्स से बचाते हैं बादाम में मौजूद विटामिन ई और फ़ॉलिक एसिड मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बढ़ाते हैं और स्मरण शक्ति को बढ़ाते हैं  बादाम में मौजूद कैल्शियम, मैग्नीशियम, और फ़ॉस्फ़ोरस हड्डियों की सुरक्षा में मदद करते हैं बादाम में मौजूद मोनो-अनसैटरेटेड फ़ैट और विटामिन ई हृदय के स्वास्थ्य के लिए फ़ायदेमंद होते हैं.

बादाम में मौजूद प्रोटीन, फ़ाइबर, और मस्तिष्क शांति वज़न नियंत्रण में मदद करते हैं बादाम में मौजूद एल-आर्जिनिन और विटामिन ई पुरुषों की यौन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करते हैं बादाम में मौजूद मोनोअनसैचुरेटेड फ़ैट और फ़ाइबर कोलेस्ट्रॉल लेवल कम करने और दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं.

बादाम ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करते हैं बादाम में मौजूद ओमेगा 3 फ़ैटी एसिड और ज़िंक शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता ‌।

 सुबह खाली पेट 5से7बादाम गिरी साम को भिगोकर छिलका उतारकर कर खाली पेट  बादाम खाने के फायदे  * पाचन को आसान बनाता है * एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है। * वजन घटाने में सहायक होता है। * त्वचा के लिए फायदेमंद होता है। * पोषक तत्वों का अवशोषण बढ़ता है। * मस्तिष्क के स्वास्थ को ठीक रखता है बादाम में एंटीऑक्सीडेंट्स औरएंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं जो आपके शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। इसी वजह से बादाम को सुपरफूड कहा जाता है इम्यून सिस्टम को बनाए मज़बूत इसमें मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड (omega 3 fatty acid) और जिंक शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास करते हैं। इसे नियमित तौर पर खाने से शरीर में होने वाले बैक्टिरियल इंफेक्शन से बचा जा सकता है

आधुनिक शोध से भी यह सिद्ध होता है  बादाम में मौजूद मोनोअनसैचुरेटेड फैट और फाइबर कोलेस्ट्रॉल लेवल कम करने और दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। बादाम ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करते हैं, जो डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद है।

 

   बादाम में उच्च मात्रा में प्रोटीन और फाइबर पाया जाता है। ये विटामिन और मिनरल से भी भरपूर होते हैं। बादाम में उच्च मात्रा में वसा पाए जाने से लोग इन्हें वजन बढ़ाने वाला समझते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है इसमें नहीं है वजन बढ़ाने वाले तत्व पुरुषों को बादाम अवश्य खाना चाहिए बादाम में एल-आर्जिनिन और विटामिन ई पाया जाता है. जो पुरुषों की यौन क्रिया को बेहतर बनाने का काम करता है. बादाम खाने से एल-आर्जिनिन पेनिस में रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करता है और विटामिन ई टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाता है

 

  सुबह खाली पेट बादाम खाने के फायदे · पाचन को आसान बनाता है · एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है। · वजन घटाने में सहायक होता है। · त्वचा के लिए फायदेमंद होता है। · पोषक तत्वों का अवशोषण बढ़ता है।

 

1 दिन में 5से7बादाम खाना स्वास्थ के लिए फायदेमंद है

और कड़वा बादाम कभी नहीं खाना चाहिए कड़वा बादाम जहरीले होते हैं इससे आप के स्वास्थ को नुक्सान हो सकता है ।

 

बादाम के फायदे1, पाचनतंत्र को दुरुस्त रखता है - · 2. दिमाग को रखता है हेल्दी · 3. वजन कम करने में भी करता है मदद · 4. हार्ट को बनाता है हेल्‍दी · 5, डायबिटीज को रखता है नियंत्रण में  विटामिन-E का है सबसे बड़ा श्रोत।

तेल बादाम

 बादाम और बादाम के तेल के  सेवन से मस्तिष्क स्वस्थ रहता है। दिमाग से संबंधित विकार होने पर, बादाम से बने महामयूर घी (5 ग्राम) का प्रयोग करें।

बादाम तेल के चमत्कारी फायदे: रोज  बादाम में पोषक तत्वों से भरपूर होता है। बादाम खाने से याददाश्त तेज होती है और कई प्रकार की शारीरिक व मानसिक समस्याएं दूर होती है।

उम्र से पहले बूढ़ी नहीं होना चाहते, तो हर रोज़ खाएं भिगोए हुए बादाम खायेंयहां हैं हर रोज भिगोए हुए बादाम खाने के फायदे · 1. डाइजेशन में सुधार · 2. पीसीओएस की समस्या करे दूर · 3. कोलेस्ट्रॉल के स्तर को घटाएं · 4. मैमोरी में लाएं सुधार ·

 

बादाम के तेल में कई तरह के पोषक तत्व होते हैं और इसके कई फ़ायदे हैं:

दिल के लिए फ़ायदेमंद

बादाम के तेल में ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन ई, और एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं. इससे गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और बैड कोलेस्ट्रॉल कम होता है.

दिमाग के लिए फ़ायदेमंद

बादाम के तेल में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड दिमाग के लिए फ़ायदेमंद होता है. यह कॉग्नीटिव फ़ंक्शन को बेहतर बनाने में मदद करता है.

इम्यून सिस्टम मज़बूत बनाता है।

बादाम के तेल में विटामिन ई और पॉलीफ़िनॉल जैसे एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं. ये इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाते हैं।

त्वचा के लिए फ़ायदेमंद

बादाम का तेल त्वचा को हाइड्रेट रखता है. इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड त्वचा का रूखापन कम करते हैं. यह झुर्रियों और फ़ाइन लाइन्स को रोकने में भी मदद करता है।

बालों के लिए फ़ायदेमंद

बादाम के तेल में विटामिन ए और ई, फैटी एसिड, प्रोटीन, और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं. ये बालों की जड़ों को मज़बूत करते हैं और बालों का झ

Almond Oil Benefits: बादाम का तेल है सेहत के गुणों का भंडार, है दिल के लिए फायदेमंद बादाम के तेल में ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट पाते जाते हैं।

 

रात में सोने से पहले चेहरे पर लगाएं बादाम का तेल, मिलेंगे ये 5 जबरदस्त फायदे त्वचा को हाइड्रेट रखे बादाम का तेल एक प्राकृतिक मॉइस्चराइजर है। यह त्वचा में नमी को लॉक करता है और त्वचा को हाइड्रेटेड रखता है। इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड त्वचा का रूखापन कम करने में मदद करते हैं। जो लोग ड्राई स्किन की समस्या से पीड़ित हैं वह बादाम तेल की मालिश करना लाभकारी है।

 

दिल को बनाता है स्ट्रॉन्ग बादाम के तेल में मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट की मात्रा अधिक होती है। इसी कारण यह गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने और बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में मदद करते हैं। इसमें पाया जाने वाला विटामिन AऔरE

 बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है बादाम का तेल विटामिन ए और ई, फैटी एसिड, प्रोटीन और पोटेशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होता है। ये पोषक तत्व बालों की जड़ों को मजबूत करते हैं, बालों का झड़ना कम करते हैं और स्वस्थ बालों के जमाने में मदद करते हैं।

चेहरे पर लगाएं 2 बूंद बादाम का तेल, चमकने लगेगी स्किन

 बादाम तेल के फायदे - बादाम तेल स्किन में नमी को लॉक करता है और त्वचा को हाइड्रेटेड रखता है। - तेल लगाने से स्किन में कसाव आता है। - इसके इस्तेमाल से झुर्रियों और फाइन लाइन्स जैसे एजिंग के लक्षणों रोकने में मदद मिलती है। - दाग धब्बों को साफ करता है

 

बादाम के तेल में विटामिन ई, बायोटीन और एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो त्वचा के लिए काफी लाभदायक होते हैं। एंटी-ऑक्सीडेंट्स सन डैमेज को कम करते हैं, जिससे सनबर्न और डार्क स्पॉट्स होने का जोखिम कम होता है। साथ ...

 

बादाम का तेल नाक में डालने से बुद्धि का विकास होता है मानसिक रोगों को ठीक करने में सहायक है।

 बादाम का तेल कब्ज जैसी बीमारी में रामबाण इलाज माना गया है. यदि किसी को लंबे समय से कब्ज की शिकायत हो तो वह इसका एक चम्मच रोजाना सेवन करे, कुछ दिनों में असर दिखाई देगा‌

बादाम का तेल (Almond Oil) हर तरह के बालों के लिए बेहतरीन माना गया है. एक स्टडी के अनुसार, बालों में इस तेल से मसाज करने पर बाल झड़ना कम हो सकते हैं. इससे स्कैल्प में खुजली, डैंड्रफ, रेड स्कैल्प की समस्या से छुटकारा मिलता है

 

 बालों के लिए बादाम तेल के फायदे ... बादाम का तेल विटामिन ए और ई, फैटी एसिड, प्रोटीन और पोटेशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होता है। ये पोषक तत्व बालों की जड़ों को मजबूत करते हैं, बालों का झड़ना कम करता है स्किन के लिए  बादाम का तेल · पोषक तत्व · इन समस्याओं में लाभकारी · डार्क सर्कल को कम करे · दाग दूर करे · रुखी त्वचा में कारगर · झुर्रियों को कम करे · मेकअप हटाने

 

रात में सोने से पहले चेहरे पर लगाएं बादाम का तेल, लगाने से चेहरे की स्किन हेल्दी रहती है दाग़ धब्बे मुंहासों के निसान मिट जाते है।

 

 1. कब्ज-. बादाम के तेल को कब्ज के मरीजों के लिए फायदेमंद माना जाता है. · 2. हीमोग्लोबिन-. जिन लोगों को खून की कमी है, उनके लिए बादाम का तेल फायदेमंद हो सकता है बादाम का तेल आंत्र संक्रमण और आंतों के कार्यों को बेहतर बनाता है। यह प्राकृतिक पेस्टलेटिक कार्यों में मदद करता है और यह मल त्याग में सहायक होता है। इसके सूजन को कम करने वाले प्रभाव आंतों की सूजन और कोलन की जलन को ठीक करता है

 

बादाम के सेवन से व्यक्ति का तमाम बीमारियों से बचाव होता है. लेकिन कुछ लोगों के लिए बादाम का सेवन नुकसानदायक हो सकता है।

 

अगर आप ब्लड प्रेशर के मरीज हैं और दवाओं का सेवन करते हैं तो आपको बादाम का सेवन रोक देना चाहिए.।

 

 दवाओं के साथ बादाम का सेवन नुकसानदायक हो सकता है. बादाम में प्रचुर मात्रा में मैंग्नीज पाए जाते हैं. इसकी अधिकता से ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ सकती है.

अगर आप ब्लड प्रेशर के मरीज हैं और दवाओं का सेवन करते हैं तो आपको बादाम का सेवन रोक देना चाहिए. दवाओं के साथ बादाम का सेवन नुकसानदायक हो सकता है. बादाम में प्रचुर मात्रा में मैंग्नीज पाए जाते हैं. इसकी अधिकता से ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ सकती है.

 

जिन लोगों को माइग्रेन की समस्या है, उन्हें भी बादाम खाने से बचना चाहिए. बादाम में प्रचुर मात्रा में विटामिन ई पाया जाता है. विटामिन ई की अधिकता से सिरदर्द, थकान और चक्कर आने की समस्या होती है. इसलिए माइग्रेन के मरीज इसका सेवन बहुत सीमित मात्रा में ही करें या न करें.

 

जिन लोगों को माइग्रेन की समस्या है, उन्हें भी बादाम खाने से बचना चाहिए. बादाम में प्रचुर मात्रा में विटामिन ई पाया जाता है. विटामिन ई की अधिकता से सिरदर्द, थकान और चक्कर आने की समस्या होती है. इसलिए माइग्रेन के मरीज इसका सेवन बहुत सीमित मात्रा में ही करें या न करें.

 

जिन लोगों को किडनी स्टोन की समस्या होती है, उन्हें बादाम के सेवन से बचना चाहिए. दरअसल किडनी स्टोन की समस्या से पीड़ित लोगों को उन फूड्स को खाने की मनाही होती है, जिसमें ऑक्सलेट मौजूद होता है. बादाम में भी ऑक्सलेट पाया जाता है, ऐसे में ये किडनी स्टोन की समस्या को बढ़ा सकता है.

जिन लोगों को किडनी स्टोन की समस्या होती है, उन्हें बादाम के सेवन से बचना चाहिए. दरअसल किडनी स्टोन की समस्या से पीड़ित लोगों को उन फूड्स को खाने की मनाही होती है, जिसमें ऑक्सलेट मौजूद होता है. बादाम में भी ऑक्सलेट पाया जाता है, ऐसे में ये किडनी स्टोन की समस्या को बढ़ा सकता है.

 

जिन लोगों का पाचन तंत्र कमजोर होता है, उन्हें भी बादाम खाने से परहेज करना चाहिए. बादाम में फाइबर की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, साथ ही इसकी तासीर काफी गर्म होती है. ऐसे में गैस, एसिडिटी, कब्ज, पेट में जलन आदि हो सकती है.

जिन लोगों का पाचन तंत्र कमजोर होता है, उन्हें भी बादाम खाने से परहेज करना चाहिए. बादाम में फाइबर की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, साथ ही इसकी तासीर काफी गर्म होती है. ऐसे में गैस, एसिडिटी, कब्ज, पेट में जलन आदि हो सकती है.।

 

अगर आपका वजन ज्यादा है और आप इसे घटाना चाहते हैं, तो आपको बादाम का सेवन नहीं करना चाहिए. बादाम में कैलरी और वसा ज्यादा होते हैं, जो आपके मोटापे को बढ़ाते हैं. ऐसे में इसके सेवन से परहेज करें या फिर फिजिकल एक्टिविटीज को बढ़ाएं ताकि एक्स्ट्रा कैलरी बर्न हो सके.।

 

अगर आपका वजन ज्यादा है और आप इसे घटाना चाहते हैं, तो आपको बादाम का सेवन नहीं करना चाहिए. बादाम में कैलरी और वसा ज्यादा होते हैं, जो आपके मोटापे को बढ़ाते हैं. ऐसे में इसके सेवन से परहेज करें या फिर फिजिकल एक्टिविटीज को बढ़ाएं ताकि एक्स्ट्रा कैलरी बर्न हो सके।

 

अगर आप को अनिद्रा की शिकायत है रात में नींद कम आती है उन्हें बादाम नहीं खाना चाहिए।


 *जैतून का तेल*

*आयुर्वेद सरल चिकित्सा*

*--------------------------*

प्रकृति ने मनुष्य के लिए अलग अलग क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुसार और वहां की जलवायु में रहने वाले मनुष्य की आवश्यकता के अनुसार तैलीय वृक्ष की सैगात दी है वहां की जलवायु में तिलहनी फसलों को उगाना संभव नहीं है ऐसा ही एक पश्चिमी एशिया और दक्षिणी योरोप तथा उत्तरी पूर्वी अफ्रीका का एक तैलीय वृक्ष है जैतून शुष्क जलवायु और अधिक मांसाहार करने वालों के लिए जैतून का तेल वरदान से कम नहीं है जैतून का वृक्ष जैतून के तेल को वहां खाना पकाने में प्रयोग किया जाता है जैतून का वृक्ष १५से२०फिट ऊंचाई का होता है इसमें बकैन के जैसे फल लगते हैं जिसकी गुठलियों से तेल निकाला जाता है।

 

जैतून के तेल को ऑलिव ऑयल कहते हैं. इसमें कई तरह के पोषक तत्व होते हैं, जिससे यह सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद होता है जैतून के तेल में मौजूद मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (MUFAs) शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाते हैं और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करते हैं जैतून के तेल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी यौगिक धमनियों में प्लाक बनने से रोकते हैं.

जैतून के तेल में मौजूद पॉलीफ़ेनॉल, विटामिन ई, और सायटोस्टेरोल कोशिकाओं को नष्ट होने से बचाते हैं जैतून के तेल में मौजूद विटामिन ई त्वचा को हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाता है जैतून के तेल में मौजूद फैटी एसिड, एंटीऑक्सीडेंट, और विटामिन ई बालों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं जैतून के तेल में मौजूद स्वस्थ मोनो सैचुरेटेड फैट वज़न घटाने में मदद करता है जैतून के तेल में मौजूद पॉलीफ़ाइनल ए कैंसर के खतरे को कम करते हैं.

सुबह खाली पेट पिएं 1 चम्मच जैतून का तेल, मिलेंगे ये चौंकाने वाले फायदे हृदय से लेकर हड्डियों तक को पोषण देता है

पाचन को ठीक करता है जैतून का तेल आपके पाचनतंत्र के लिए बहुत अच्छा होता है।

हृदय के लिए अच्छा होता है

बालों के लिए अच्छा होता है

स्किन को फायदा पहुंचाता है

कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक

मोटापा नहीं होता है

डायबिटीज में पायदेमंद होता है

 

 शुष्क क्षेत्रों में सेहत का खजाना है जैतून का तेल,

 जैतून का तेल में एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो हड्डियों के विकास में सहायक है। अगर आप हड्डियों के दर्द से परेशान हैं, तो जैतून का तेल जरूर इस्तेमाल करें,

जैतून का तेल पेप्टिक अलसर के रोगी को एक चम्मच प्रतिदिन पिलाने से लाभ होता है

कुछ लोग पूछते है जैतून का तेल ठंडा होता है या गरम आपकी जानकारी के लिए बतादें ना गरम होता ना ठंडा सामान्य प्रकृति का होता है।

 

जैतून के तेल में मौजूद पॉलीफाइनल एंटीऑक्सीडेंट्स आपके शरीर में सूजन को कम करने के साथ ही कैंसर के जोखिम को भी कम करते हैं। इसके लिए आपको शुद्ध जैतून के तेल का एक से दो चम्मच रोजाना इस्तेमाल करना चाहिए।

 

 जैतून के तेल के कई स्वास्थ्य लाभ हैं। जैतून के तेल में अधिकांश वसा मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (MUFAs) से बने होते हैं। ये अच्छेकोलेस्ट्रॉल (HDL) के स्तर को बढ़ाते हैं जबकि खराबकोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करता है।

 

जैतून के तेल में विटामिन-ई, आयरन, विटामिन-के, ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। jagran logo. स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां. अगर आप खाने में इस तेल का इस्तेमाल करते हैं, तो आप स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियों से बच जाते हैं

जैतून के तेल के फायदे और नुकसान :  जैतून के तेलमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन ई त्वचा के लिए बहुत गुणकारी हैं। इसे त्वचा पर लगाने से त्वचा की चमक बढ़ जाती है। यह खासतौर पर चेहरे की झुर्रियों और निशानों को भी मिटाने में सहायक है‌

 

 फायदेमंद है जैतून का तेल

जैतून का तेल और लौंग का तेल मिलाकर  जोड़ों के दर्द में मालिश करने से आराम मिलता है

 

 गुणों का खजाना है

 जैतून के तेल में 1. हाई ब्लड प्रेशर को कम करता है जैतून के तेल में पॉलीफेनोल और मोनोसैचुरेटेड फैटी एसिड होते हैं, जो ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करते हैं. · 2. याददाश्तः को बढ़ाता है।

 

 जैतून का तेल पुरुष जननांग की कई समस्याओं को ठीक कर सकता है पुरुष जननांग पर हल्के हाथों से मालिश करना चाहिए महिलाओं के बेस्ट पर मालिश करने से ढीले बेस्ट को सुडोल करता है माताओं में दूध की मात्र बढ़ाता है  जैतून का तेल आंखों-बालों और त्वचा के लिए फायदेमंद, मोटापा भी कम करता है।


अलसी*अलसी का तेल

 

*आयुर्वेद सरल चिकित्सा*

इस आर्टिकल में हम अलसी और अलसी के तेल के औषधीय गुण के विषय में चर्चा करेंगे।

*4 दिन अलसी खाने के बाद के असर से आप चौंक जायेंगे*

*------------------------------------------*

अलसी को भारतीय जैतून कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा बल्कि अलसी और अलसी का तेल कुछ रोगों में जैतून सेबी बेहतर है  जैतून का केवल तेल ही प्रयोग किया जा सकता है अलसी के बीजों को ऐसे ही सम्पूर्ण औषधि गुण के साथ खाया भी जा सकता है।

अलसी के बीज व्यक्ति द्वारा सेवन किये जाने वाले सबसे पुराने खाद्य पदार्थों में से एक हैं। आज अलसी पूरे विश्व में विभिन्न प्रकार के व्यंजनों को बनाने के लिए इस्तेमाल में लाई जाती है। इसका स्वाद अखरोट जैसा और सुगंध बहुत सारे लोगों द्वारा पसंद की जाता है। अलसी के बीज की लोकप्रियता के पीछे का कारण इसके कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने वाले तत्व भी हैं। अलसी के बीज में तीन सबसे महत्वपूर्ण तत्व हैं ओमेगा 3 फैटी एसिड, लिगनन और म्यूसिलेज। इसके अलावा,अलसी के बीज विटामिन बी 1, प्रोटीन, तांबा, मैंगनीज, मैग्नीशियम, फास्फोरस के साथ-साथ दोनों घुलनशीलता और अघुलनशील वाले फाइबर्स होते हैं। अलसी बाज़ार में दो मुख्य रूप से उपलब्ध है पीला और सुनहरा भूरा रंग। यह आसानी से साबुत, पिसे हुए, तेल या पूरक के रूप में बाजार में उपलब्ध है।                

आइए हम आपको बताते हैं की अगर हम अलसी का सेवन प्रतिदिन करते है तो इससे आपको क्या क्या फायदे होते है।

 

*अलसी के बीज के फायदे हृदय रोग के लिए : -*

अलसी हृदय की बीमारियों से आपको बचा कर रखता हैं। इसमें उपस्थित घुलनशीलता वाले फाइबर्स, प्राकृतिक रूप से आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने का काम करता है। इससे हृदय की नसों में जमा कोलेस्ट्रॉल घटने लगता है और रक्त प्रवाह बेहतर होता है। इसके कारण दिल के दोरे की संभावना नहीं के बराबर होती है।

 

*मोटापा कम करे :-

अलसी वसा को शरीर से बाहर निकलती है, इसीलिए अगर आप अपने मोटापा कम करना चाहते है और इससे परेशान हैं, तो अलसी का सेवन जरूर करें।

 

*मधुमेह में भी लाभदायक है :-

मधुमेह के रोगी के लिए भी अलसी बहुत लाभदायक होता है। इसमें कार्बोहाइट्रेट अधिक होता है और शक्कर की मात्रा न्यूनतम होती है। मधुमेह के रोगी रोटी बनाने के समय आटे में मिलाकर अलसी का सेवन कर सकते हैं। अलसी इन्सुलिन की आवश्यकता को कम करता है, जिससे मधुमेह से परेशान लोगों को आराम मिलता है।

 

*कैंसर से बचा कर रखे : -*

कैंसर से परेशान लोगों के लिए भी अलसी लाभदायक होती है। इससे शरीर में कैंसर सेल्स नहीं बनते इसीलिए अलसी सेवन करने वाले को कैंसर के खतरे से दूर रखती है।

 

*दमा ठीक करने के लिए उपयोगी :-

दमा के रोगी अलसी का जरूर सेवन करें। आधे गिलास पानी में एक चमच अलसी के पाउडर को 12 घंटे के लिए डाल कर रख दें और उसका सुबह-शाम छान कर सेवन करें। इस तरह से अलसी के सेवन से दमा के रोगी को बहुत फायदा होता है। अलसी के पानी को काँच के बर्तन में सेवन करने से फायदा ज्यादा होता है।

 

*खांसी में लाभदायक :-

खांसी में अलसी की चाय बहुत ही लाभदायक होती है। चाय बनाते समय ध्यान रखें कि चाय का पानी जब तक आधा ना हो जाए उसे गैस से उतार नहीं, इसीलिए पानी में अलसी का पाउडर डाल कर उसे कम आंच में ही पकाएं। इसमें मुलैठी चूर्ण और, गुड़ या शक्कर मिलाकर सेवन करना आपको बहुत फायदा पहुँचाता है।

 

अलसी को दबाकर तेल निकाला जाता है जो अपने औषधि गुण के साथ मानव स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है

 अलसी के तेल में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है. यह कई तरह से सेहत के लिए फ़ायदेमंद होता हैअलसी के तेल में मौजूद एंटी-इंफ़्लेमेटरी गुण सूजन को कम करते हैं यह ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करता है यह वज़न घटाने में मदद करता है यह कब्ज़ से राहत दिलाता है और आंतों के स्वास्थ्य में सुधार करता है यह कोलेस्ट्रॉल को कम करता है यह दिल की सेहत के लिए फ़ायदेमंद होता है यह त्वचा के लिए मॉइस्चराइज़र की तरह काम करता है यह त्वचा की जलन और लालिमा को कम करता है यह उम्र बढ़ने के लक्षणों को कम करता है.

यह मामूली कट और खरोंच को ठीक करता है यह आंसूओं की मात्रा बढ़ाता है।

 

अलसी के तेल का इस्तेमाल

इसे मुंह से खाया जा सकता है खाना पकाने में प्रयोग नहीं करना चाहिए  इसे त्वचा पर लगाया जा सकता है.

इसका इस्तेमाल आंखों में भी किया जा सकता है

* अलसी के तेल के फायदे*

कैंसर के उपचार में कैंसर जैसी गंभीर बिमारियों के उपचार में भी अलसी मुख्य भूमिका निभाता है पाचन में सुधार के लिए अलसी में मौजूद फाइबर हमारे पाचन तंत्र के लिए आवश्यक होता है

त्वचा के लिए प्राकृतिक मसचराइजर का काम करता है

ह्रदय रोग से बचाव करता है

वजन कम करने में सहायक है

बालों के लिए प्राकृतिक पोषण करता है

महिलाओं में रजनोवृत्ति के बाद होने वाले हार्मोनल बदलाव को संतुलित करता है

शुगर के उपचार में सहायक है

1. ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर · 2. कैंसर कोशिका वृद्धि को कम करने में मदद मिल सकती है · 3. हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है · 4. कब्ज और दस्त के इलाज में मदद मिल सकती है · 5. त्वचा के स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।

 

 फ्लैक्ससीड आयल को अलसी के तेल और लीन सीड के रूप में भी जाना जाता है। इस तेल का उपयोग लंबे समय से स्वास्थ्य के लिए किया जा रहा है। यह तेल हजारों वर्षों से दुनिया भर में विभिन्न संस्कृतियों का एक हिस्सा रहा

 

स्तन का आकार कम करने के लिए अलसी के तेल  को ५मिली की मात्र में सेवन करते हैं और अलसी तेल की मालिश की जाती हैयह बेस्ट में रक्त संचार बढ़ा कर सही आकार देता है और स्तन पान कराने वाली महिलाओं में दूध की मात्र बढ़ाता है यह स्त्री जनित हार्मोन्स को बढ़ाता है इसलिए सी पीओडी की चिकित्सा में भी प्रभावी है।

अलसी के तेल के स्वास्थ्य लाभों की इसकी रासायनिक संरचना और अन्य ओमेगा-3 फैटिएसिड का होना है

अलसी के तेल, रेशे और लिग्नान हृदय रोग, एथेरोस्क्लेरोसिस, मधुमेह, कैंसर, गठिया, ऑस्टियोपोरोसिस और ऑटोइम्यून और तंत्रिका संबंधी विकारों में कमी सहित संभावित स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं, जिसके कारण अलसी के बीजों को सूपर सीड कहा जाता है।

 

अलसी का तेल: लाभअलसी के तेल को सूजन कम करने, त्वचा को बेहतर बनाने, हृदय रोग को रोकने और पाचनतंत्र को दुरुस्त करने के लिए जाना जाता है।

अलसी और अलसी का तेल: एक प्राचीन औषधि और आधुनिक कार्यात्मक भोजनहै।

अलसी के तेल, फाइबर और अलसी के लिग्नान में हृदय रोग, एथेरोस्क्लेरोसिस, मधुमेह, कैंसर, गठिया, ऑस्टियोपोरोसिस, ऑटोइम्यून और तंत्रिका संबंधी विकारों को कम करने जैसे संभावित स्वास्थ्य लाभ हैं। अलसी का प्रोटीन हृदय रोग की रोकथाम और उपचार में प्रभावी है ।

 

 अलसी का तेल अपने वात संतुलन और रेचक (रेचक) गुणों के कारण कब्ज को ठीक करने में मदद करता है। सुझावों: 1. 1-2 चम्मच अलसी के बीज या अपनी आवश्यकतानुसार लें। 2. आप इसे कच्चा या हल्का भुना हुआ खा सकते ।

 

खूबियों की खान है अलसी -

 -अलसी का तेल कब्ज, मोटापा, कोलेस्ट्रॉल, हृदय विकार और मानसिक कमजोरी को दूर करने में सहायक है।  बवासीर के लिए 5-7 मिली अलसी के तेल का सेवन करें। इससे कब्ज ठीक होता है, और बवासीर में लाभ होता है। टीबी में अलसी के बीजों के सेवन से लाभ मिलता है ।

 

अलसी के तेल का ज़्यादा सेवन करने से कुछ नुकसान हो सकते हैं. अलसी के तेल के कुछ दुष्प्रभाव ये हैं:

ज़्यादा सेवन करने से पेट में परेशानी हो सकती है.

इससे दस्त हो सकते हैं.

कुछ लोगों को एलर्जी हो सकती है.

रक्त पतला करने का काम करने की वजह से, इससे रक्तस्राव की संभावना बढ़ सकती है.

अगर आप पहले से ही रक्तचाप कम करने के लिए दवा ले रहे हैं, तो अलसी के तेल से आपका रक्तचाप बहुत कम हो सकता है.

गर्भावस्था के दौरान या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को अलसी के तेल का सेवन नहीं करना चाहिए

 

अलसी के तेल को खराब होने से बचाने के लिए, इसे ठंडी और अंधेरी जगह पर रखें.

 

अलसी का तेल: दुष्प्रभाव, उल्टी और मतली भी एलर्जी के लक्षण हो सकते हैं। अगर अलसी के तेल के प्रति आपकी प्रतिक्रिया के कारण आपका गला कस जाता है या सांस लेने में तकलीफ होती है, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।

  शुगर के उपचार के समय इसका इस्तेमाल करने पर अपने रक्त शर्करा के स्तर का जाँच कराते रहें. · अधिक मात्रा में इसके सेवन से बचें

अलसी के तेल का उपयोग हृदय रोग, उच्च रक्तचाप , रक्त में कोलेस्ट्रॉल या अन्य वसा ( लिपिड ) के उच्च स्तर ( हाइपरलिपिडेमिया ) और कई अन्य स्थितियों के लिए किया जाता है,

 सूजन कम कर सकता है. क्रोनिक सूजन हृदय रोग , कैंसर और टाइप 2 मधुमेह जैसी स्वास्थ्य स्थितियों से जुड़ी है।4 शोध से पता चला है कि अलसी का तेल सूजन को कम करने में मदद कर सकता है।

अलसी का तेल | उपयोग, दुष्प्रभाव | गठिया के विरुद्ध

अलसी का तेल प्रभावी है, जिसे कैप्सूल के रूप में काउंटर पर खरीदा जा सकता है, ALA से भरपूर होता है। यह फैटी एसिड जोड़ों की सूजन को कम करने में मदद कर सकता है। सीमित साक्ष्य बताते हैं कि अलसी का तेल रुमेटी गठिया के उपचार में प्रभावी ...

 

अलसी के तेल के दुष्प्रभाव · दवा के अवशोषण में देरी हो सकती है · कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं · गर्भावस्था को प्रभावित कर सकता है · रक्त की हानि बढ़ सकती है.

अलसी के तेल के स्वास्थ्य लाभ वजन घटाने, कब्ज और दस्त से राहत में सहायता करते हैं। यह कैंसर से लड़ने, सेल्युलाईट और एक्जिमा को दूर करने में मदद करता है तेल का सेवन निर्विवाद है परन्तु अलसी का सेवन पुरुषों को आवश्यक होने पर और कम ही करना चाहिए आवश्यक होने पर दसवां भाग कलौंजी मिलाकर करना चाहिए।


बबूना( कैमोमाइल)  चाय  और तेल के लाभ और इसके साइड इफेक्ट्स*

*-----------------------------*

 

 बबूना एक औषधीय वनस्पति है चिकित्सा में इसका प्रयोग हजारों वर्ष से किया जा रहा है बबूना के फूल की चाय(क्वाथ) बहुत से रोगों में उपयोगी है और बबूने के फूल से निकालने वाला तेल उत्तम औषधीय गुण वाला होता है जो अनेक रोगों को ठीक करता है मेरा तो यह मानना है बबूना अतीत की हर्बल औषधि है और इसका भविष्य उज्जवल है यह भविष्य की सफल हर्बल औषधि भी है।

 

बबूने के फूल(कैमोमाइल )का उपयोग सदियों से एक औषधीय जड़ी बूटी के रूप में किया जाता रहा है। इसकी मीठी सुगंध और सुखदायक स्वाद के कारण, लोग इसे चाय के रूप में पीने लगे। ताज़ा और बेहद सुगंधित होने के अलावा, कैमोमाइल चाय विभिन्न पोषक तत्वों के साथ पैक की जाती है जो कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती हैं  कैमोमाइल चाय के स्वास्थ्य लाभ में सेल उत्परिवर्तन, कम सूजन, गुस्सा अवसाद और चिंता को रोकने की क्षमता शामिल है। यह कब्ज, पेट दर्द और ऐंठन से राहत दिलाने में भी मदद करता है। कैमोमाइल चाय छिद्रयुक्त आंत और अन्य आंत संबंधी समस्याओं को ठीक करती है यह स्वस्थ त्वचा को बढ़ावा देता है, कैंसर से लड़ने में मदद करता है, स्वस्थ मसूड़ों और दांतों को बनाए रखता है। कैमोमाइल चाय हृदय के स्वास्थ्य में सुधार करती है, पाचन में सुधार करती है और विभिन्न जठरांत्र संबंधी गड़बड़ी, जैसे कि उल्टी, गैस, अपच दस्त आदि को रोकती है।

 

बबूने के फूल की चाय*

कैमोमाइल एक डेज़ी लुक-अलाइक पौधे का नाम है। व्युत्पन्न रूप से, 'कैमोमाइल' शब्द का अर्थ पृथ्वी सेब (भूमि सेब)है । इसका वैज्ञानिक नाम मैट्रिकेरिया कैमोमिला है। कैमोमाइल को एक चमत्कारी जड़ी बूटी भी माना जाता है जिसमें कई मूल्यवान गुण होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए इस संभावित जादुई जड़ी बूटी का उपयोग हजारों वर्षों से किया जा रहा है।

 

कैमोमाइल चाय आम तौर पर सुनहरे रंग की होती है और इसमें एक अनोखा फूल और मीठा स्वाद होता है। दो प्रकार के कैमोमाइल हैं, जो हैं, रोमन कैमोमाइल और जर्मन कैमोमाइल। यह जर्मन कैमोमाइल है जिसका अध्ययन किया गया है और इसका उपयोग त्वचा या पाचन संबंधी समस्याओं से निपटने में किया जाता है।

 

बबूने का फूल के चाय में कैमोमाइल चाय में 36 फ्लेवोनोइड और 28 टेरपेनॉइड यौगिक होते हैं। इस जड़ी बूटी में विभिन्न उपचार घटक जैसे कि श्लेष्म और कूपमारिन भी होते हैं। ये सभी चिकित्सीय यौगिक कैमोमाइल चाय को प्रतीकवक , एंटीऑक्सिडेंट, प्रज्वलनरोधी , आक्षेपनाशक, कसैले, अल्सर विरोधी गुणों जैसे अद्भुत गुणों का एक बड़ा भंडार बनाते हैं।

 

कैमोमाइल चाय में बिल्कुल भी कैफीन मौजूद नहीं होता है । इसमें कैल्शियम और पोटेशियम , सोडियम , मैग्नीशियम , जस्ता , लोहा , मैंगनीज और विटामिन ए जैसे खनिज और विटामिन भी कम मात्रा में होते हैं । कार्बोहाइड्रेट कैमोमाइल चाय के एक सामान्य कप में मौजूद 10 केजे तक कैलोरी प्रदान करता है।

 

पोषण तथ्य प्रति 1 कप

बबूने का फूल के चाय के फायदे

नीचे उल्लेखित सेब के सबसे अच्छे स्वास्थ्य लाभ हैं

सो विकार रोकता है

कैमोमाइल चाय में एनाल्जेसिक गुण होते हैं जो आराम करने में मदद करते हैं, तंत्रिका तंत्र को शांत करते हैं और नींद को प्रेरित करते हैं। इसलिए, उन लोगों के लिए कैमोमाइल चाय पीना बहुत अनुकूल है जो झपकी के दौरान बेचैनी से पीड़ित हैं। यहां तक ​​कि कैमोमाइल चाय उन लोगों के लिए अद्भुत काम करती है जो अनिद्रा और स्लीप एपनिया जैसे नींद संबंधी विकारों से जूझ रहे हैं । इस प्रकार, नींद की शांतिपूर्ण रात के लिए सोने से ठीक पहले कैमोमाइल चाय का एक गर्म कप रखने की सिफारिश की जाती है।

 

प्रतिरक्षा को बढ़ावा देता है

कैमोमाइल चाय को हमारे शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने के सबसे सस्ते और आसान साधनों में से एक माना जाता है। कैमोमाइल चाय में फेनोलिक यौगिक होता है जो बैक्टीरिया के संक्रमण को दूर करने के लिए एक सुरक्षात्मक गुण है , इसलिए शरीर की प्रतिरक्षा को बढ़ावा देता है।

 

तनाव से लड़ने में मदद करता है

नियमित रूप से कैमोमाइल चाय पीने से चिंता और तनाव की समस्या को दूर रखने में मदद मिलती है। कैमोमाइल चाय में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट एजेंट जैसे एसिटिलीन, चामज़ुलिन आदि तनाव को बढ़ावा देने और तनाव से लड़ने में मदद करते हैं। तनाव और चिंता से निपटने के अलावा, कैमोमाइल चाय अनिद्रा के इलाज में भी मदद करती है। करने के लिए इसी तरह के पुदीना चाय, कैमोमाइल चाय नसों का चिड़चिड़ापन को कम करने में महान आश्चर्यों में काम करता है और मैं तो यह जोर देकर कहूं गा यह मांसपेशियों को आराम देती है।

 

मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद

कैमोमाइल चाय एक सदियों पुरानी चिकित्सीय जड़ी बूटी है जो मधुमेह वाले लोगों के लिए भी बहुत उपयोगी है। कैमोमाइल चाय में कुछ क्यूरेटिव कंपाउंड मौजूद होते हैं जो ब्लड शुगर लेवल में किसी बड़ी गिरावट या उछाल को बनाए रखने में मदद करते हैं , जिससे ब्लड में इंसुलिन की मात्रा बनी रहती है। हालांकि, इस हर्बल शासन को शुरू करने से पहले डॉक्टर से परामर्श करना उचित है।

 

पेट की बीमारियों को रोकने में मदद करता है

कैमोमाइल चाय उन लोगों के लिए एक महान समाधान है जो अक्सर पेट की समस्याओं से पीड़ित होते हैं, जैसे कि आंत्र सिंड्रोम, सूजन की समस्या आदि। कैमोमाइल चाय में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो विभिन्न प्रकार की आंतों की समस्याओं को आराम करने और ठीक करने में बहुत सहायक होते हैं।

 

महिलाओं में मासिक धर्म के दर्दनाक दिनों के दौरान कैमोमाइल चाय महिलाओं के लिए एक जीवनरक्षक हो सकती है। मासिक धर्म के दौरान, ज्यादातर महिलाएं पसीने की बदबू , पेट में दर्द, सूजन, मिजाज, ऐंठन आदि जैसी कई समस्याओं से गुजरती हैं। कैमोमाइल चाय के सुखदायक, एंटीस्पास्मोडिक और विरोधी भड़काऊ गुण सूजन को कम करने और मांसपेशियों में दर्द को कम करने में मदद करते हैं। वे मासिक धर्म की समस्याओं के दौरान शरीर और मस्तिष्क को राहत देने में भी मदद करते हैं।

यह एड्स की एक अच्छी आयुर्वेदिक उपचार है

 

ठंड के दौरान फायदेमंद

ठंड के मौसम में कैमोमाइल चाय बहुत अच्छा उपाय है। जब लोग ठंड, गले में खराश या नाक की भीड़ से पीड़ित होते हैं , तो यह एक दैनिक भयावह मामला बन जाता है, और फिर कैमोमाइल चाय का एक गर्म कप पीना अपने आकर्षण को जल्दी और प्रभावी ढंग से जादू कर सकता है। कैमोमाइल चाय की भाप को अंदर लेना भी ऐसी स्थितियों के दौरान काफी मदद कर सकता है।

 

एलर्जी के दौरान मदद करता है

प्राचीन काल से आज तक कैमोमाइल चाय जादू की तरह काम करती पाई जाती है। उपचारात्मक गुणों का एक फव्वारा होने के नाते, यह चकत्ते , घाव, त्वचा जलने , कटने और एलर्जी के इलाज के लिए एक त्वरित समाधान हो सकता है । ठंडा कैमोमाइल चाय में डूबा हुआ एक कपास की गेंद एलर्जी-ग्रस्त क्षेत्र को शांत कर सकती है। यह प्रभावित क्षेत्रों की चिकित्सा प्रक्रिया को तेज करता है। कैमोमाइल चाय के उपयोग से सन बर्न से होने वाली त्वचा की जलन को भी ठीक किया जा सकता है।

 

मजबूत सफाई एजेंट

कैमोमाइल चाय में मजबूत सफाई एजेंट है। यह टोनिंग है; मॉइस्चराइजिंग और एंटीऑक्सिडेंट गुण समग्र त्वचा की बनावट को बढ़ावा देते हैं और मुँहासे मुक्त, चमकदार त्वचा को बढ़ावा देते हैं। यहां तक ​​कि जब यह मुँहासे के आक्रमण से लड़ने या मुँहासे के धब्बे को दूर करने की बात आती है, तो कैमोमाइल चाय चमत्कार कर सकती है। कैमोमाइल चाय का उपयोग चेहरे पर स्क्रब के रूप में और त्वचा पर ब्लीच के रूप में भी किया जा सकता है। कैमोमाइल चाय के एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा की लालिमा, सूजन और पिंपल्स जैसे नुकसान को कम करने में मदद करते हैं ।

 

बालों के लिए फायदेमंद

कैमोमाइल चाय न केवल त्वचा को लाभ पहुंचाती है बल्कि बालों को भी बेहद लाभ पहुंचाती है। यह डैंड्रफ और खुजली स्कैल्प जैसी समस्याओं को रोकता है। यह बालों के रंग को उज्जवल करने में भी मदद करता है जिससे बालों में अतिरिक्त चमक और चिकनाई आती है। नियमित रूप से कैमोमाइल चाय होने से हमारे बालों को ये सभी लाभ मिल सकते हैं। कैमोमाइल चाय बालों को भीतर से पोषण देने और विभाजन समाप्त होने के जोखिम को कम करने में मदद करती है।

 

बवासीर को रोकने में मदद करता है

कैमोमाइल चाय पीने से बवासीर के उपचार और उसके सुखदायक गुणों के कारण रोकने में मदद मिलती है जो तंत्रिका तंत्र को शांत करते हैं। बवासीर विभिन्न कारकों जैसे कब्ज, दस्त, पोर्टल उच्च रक्तचाप , आदि के कारण हो सकता है । कई शांत और उपचारात्मक गुणों के साथ, कैमोमाइल चाय का नियमित सेवन एंटीस्पास्मोडिक, पाचन और एंटीहाइमैटिक मुद्दों को शांत करने में मदद करता है।

 

कैंसर से लड़ने में मदद करता है

हालिया शोध के अनुसार, कैमोमाइल चाय में कैंसर के इलाज की क्षमता है । हालाँकि, यह जानकारी अभी भी 100% सही नहीं है क्योंकि अनुसंधान अभी भी प्रक्रिया में है। कैमोमाइल चाय पीने से कैंसर के ट्यूमर के विकास के उपचार में उल्लेखनीय परिणाम सामने आए हैं। ऐसा माना जाता है कि यह एक एंटी-ऑक्सीडेंट एजेंट की उपस्थिति के कारण होता है जिसे एपीजेनिन कहा जाता है, कैंसर कोशिकाओं का निषेध संभव हो जाता है।

 

बबूने का फूल के चाय के उपयोग

कैमोमाइल चाय को व्यापक रूप से हर्बल पेय के रूप में उपयोग किया जाता है जिसमें कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं। घर पर या रेस्तरां में, सूखे कैमोमाइल फूलों का उपयोग करके चाय की तैयारी शांति और शांति की भावना प्रदान करने के लिए माना जाता है। एंटीस्पास्मोडिक, एनाल्जेसिक और विरोधी भड़काऊ गुणों को ध्यान में रखते हुए, ओवरमोटर, थकावट, चिंता और बुखार या ठंड की भावना से राहत पाने के लिए कैमोमाइल चाय के एक गर्म कप का उपयोग काफी लोकप्रिय है ।

 

बबूने का फूल के चाय के साइड इफेक्ट और एलर्जी

विशेषज्ञों के अनुसार, कैमोमाइल चाय के सेवन से कोई दुष्प्रभाव या एलर्जी नहीं होती है और यह पूरी तरह से सुरक्षित है। हालांकि, जब बड़ी खुराक में या बार-बार सेवन किया जाता है, तो इससे विभिन्न दुष्प्रभाव और स्वास्थ्य स्थितियां हो सकती हैं।

 

यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकता है। से उनींदापन उल्टी कैमोमाइल चाय, भारी खपत या कैमोमाइल फूलों की अत्यधिक मात्रा का उपयोग करते हुए दोनों उनींदापन और उल्टी में परिणाम कर सकते करने के लिए।

 

उन लोगों के लिए जिन्हें कुछ डेज़ी परिवार से संबंधित पौधों से एलर्जी है, कैमोमाइल चाय का सेवन विभिन्न एलर्जी प्रतिक्रियाओं को ट्रिगर कर सकता है। मजबूत विरोधी भड़काऊ गुण होने पर, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं द्वारा कैमोमाइल चाय से बचा जाना चाहिये।

 

बबूना(कैमोमाइल )तेल के औषधि प्रयोग

 

कैमोमाइल तेल का प्रयोग आमतौर पर कई मानव बीमारियों जैसे कि हे फीवर, सूजन, मांसपेशियों में ऐंठन, मासिक धर्म संबंधी विकार, अनिद्रा, अल्सर, घाव, जठरांत्र संबंधी विकार, आमवाती दर्द और बवासीर के लिए उपयोग की जाती है। कैमोमाइल के आवश्यक तेलों का उपयोग सौंदर्य प्रसाधनों और अरोमाथेरेपी में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

 

कैमोमाइल: अतीत की एक हर्बल औषधि जिसका भविष्य उज्ज्वल है - पी.एम.सी.

 

कैमोमाइल तेल 1. पाचन संबंधी परेशानी · 2. घाव भरना · 3. सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) · 4. अवसाद · 5. त्वचा में जलन को शांत करता है

 

 इस तेल को हिंदी में बबूने का तेल (baboone ka tel) कहा जाता है। कैमोमाइल का तेल कैमोमाइल के फूलों से निकाला जाता है कैमोमाइल का उपयोग हजारों वर्षों से चिंता को शांत करने और पेट को शांत करने के लिए एक पारंपरिक औषधि के रूप में किया जाता रहा है और इसे अक्सर चाय में एक मुख्य घटक के रूप में पाया जाता है.

कैमोमाइल का उपयोग एक औषधि के रूप में सदियों से होता रहा है। खासतौर पर नींद की समस्या को दूर क ...

 

कैमोमाइल तेल को कैमोमिला रिकुटिटा फ्लावर ऑयल भी कहा जाता है और यह कैमोमाइल के फूल से प्राप्त एक फैट है

 

ब्लू कैमोमाइल ऑयल - अल्ट्रा इंटरनेशनल लिमिटेड

औषधीय घटक के रूप में जर्मन कैमोमाइल का उपयोग यात्रा संबंधी बीमारी, हे फीवर, एडीएचडी, बेचैनी, पेट में ऐंठन, शू जन  को कम या ठीक करने में किया जाता है

 

कैमोमाइल तेल-आधारित मरहम, उदाहरण के लिए, त्वचा की सूजन, श्लेष्म झिल्ली की सूजन या जीवाणु त्वचा की स्थिति को साफ कर पुनः नव जीवन देता है

 कैमोमाइल ऑयल को उपयोग करने से अवसाद को कम किया जा सकता है।


लौंग का तेल

दांत दर्द में: लौंग के तेल में मौजूद यूजेनॉल नामक येगुण एक नेचुरल पेन किलर का काम करता है. इससे दांत दर्द में तुरंत राहत मिलती है.

मुंह की बदबू दूर करने में: लौंग के तेल में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण मुंह में बैक्टीरिया को खत्म करते हैं.

सिरदर्द में आराम: नारियल या सरसों के तेल में लौंग का तेल मिलाकर सिर की मालिश करने से सिरदर्द में आराम मिलता है.

त्वचा की देखभाल: लौंग के तेल का इस्तेमाल मुंहासे और मुंहासे के उपचार में किया जाता है.

संक्रमण से लड़ने में: लौंग के तेल में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुण होते हैं.

बालों के लिए: लौंग के तेल में नारियल तेल की मालिश से बालों की जड़ें मज़बूत होती हैं और बालों का झड़ना कम होता है.

पुरुषों के लिए: लौंग के तेल का इस्तेमाल करने से पुरुषों के शरीर में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने में मदद मिलती है.

मांसपेशियों के दर्द में: लौंग के तेल से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और मांसपेशियों के दर्द से भी राहत मिलती है.

 

नाभि में लौंग का तेल लगाने से जोड़ों का दर्द को आराम मिलता है।

लौंग के तेल का प्रयोग पारंपरिक रूप से दांत दर्द को ठीक करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, तनाव से राहत, त्वचा की देखभाल और कीटनाशक के रूप में किया जाता है।

  2. कैंसर से करे बचा ...

दांतों के दर्द से राहत दे सकता है लौंग के तेल में यूजेनॉल नामक गुण होता है, जो एक नेचुरल पेन किलर का काम करता है । इसे दर्द वाले दांत पर लगाने से दर्द में तुरंत राहत मिलती है। यह मसूड़ों की सूजन भी कम होती है।

 लौंग के तेल में यूजेनॉल नामक रसायन होता है जो एनेस्थेटिक और जीवाणुरोधी एजेंट के रूप में कार्य करता है। यह दांत दर्द या दांत दर्द के लिए एक प्रभावी उपइरेक्टाइल डिसफंक्शन में लाभकारी. लौंग का तेल इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या को ठीक करने में मदद कर सकता है. आपको बता दें कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन यानी ईडी पुरुषों में होने वाले बांझपन का मुख्य कारण माना जाता है लौंग के तेल से लाभ होता है

लौंग के तेल में छिपा है जादुई गुण, इन समस्याओं को झट से करता है दूर एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटीबैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुणों से भरपूर होता है जो आपकी कई परेशानियों को दूर कर सकता है. आइए जानते हैं इसके स्वास्थ्य लाभ.

 

दांत दर्द ही नहीं, त्वचा संबंधी समस्याओं में भी है कारगर लौंग का तेल,

1. स्किन हेल्थ के लिए फायदेमंद · 2. इम्युनिटी बूस्ट करे · 3. दांत दर्द को करता है ठीक

 

अजवायन  का तेल*

   अजवाइन के तेल से सेहत को मिलते हैं  बेमिसाल फायदे · हार्ट को रखे हेल्दी · फंगल इन्फेक्शन को करे दूर · पाचन तंत्र को करे मजबूत · त्वचा के लिए फयदेमंद · स्ट्रेस करे दूर।

अजवाइन के तेल से संबंधित एक शोध में जिक्र मिलता है कि इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण के साथ एंटीफंगल गुण भी पाया जाता है। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि अजवाइन के तेल के लाभ में बैक्टीरियल इन्फेक्शन के साथ ही फंगल इन्फेक्शन से बचाव भी शामिल है। डाइजेशन को बढ़ावा देकर अजवाइन का तेल अपच की समस्या को ठीक करने में मदद करता है। अजवाइन का तेल बालों पर लगाने से बालों की ग्रोथ बढ़ती है। अजवाइन में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण मौजूद होने की वजह से ये हेयर ग्रोथ में भी मदद करता है।

 

 यह तेल ऐंठन को कम करने और मासिक धर्म के समय दर्द से राहत प्रदान करता है। साथ ही यह थकान से राहत दिलाता है और मतली को ठीक करता है

100% शुद्ध और प्राकृतिक. विवरण: अजवाइन का तेल/अजवायन के बीज का तेल अजवाइन के बीजों से भाप आसवन की प्रक्रिया द्वारा निकाला जाता है। इस तेल का उपयोग आमतौर पर चिकित्सीय और अरोमाथेरेपी उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

 

दर्द का दुश्मन है अजवाइन का तेल, जोड़ों के दर्द का करता है इलाज, गाउट के मरीज सरसों के तेल में डालकर कर  मालिश करें पाचन से जुड़ी कोई परेशानी है तो अजवाइन के तेल का सेवन करें। इसका सेवन करने से गैस,अपच,एसिडिटी और और पेट फूलने में लाभकारी है।

पिपरमिंट का तेल*

पिपरमिंट ऑयल या पुदीने के तेल के कई फ़ायदे हैं:

पेट दर्द, पेट फूलना, दस्त, अपच, मतली, और उल्टी जैसी पाचन संबंधी समस्याओं में फ़ायदेमंद

सिरदर्द के लिए बनी एलोपैथिक दवाओं जितना ही कारगर माना जाता है

बंद नाक को खोलकर सांस लेने में मदद करता है

ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने में मदद करता है

मुंह में इंफ़ेक्शन फैलाने वाले बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता है

तनाव दूर भगाने में मदद करता है

रेस्पिरेटरी सिस्टम के बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता है

बालों की ग्रोथ के लिए भी बेहद फ़ायदेमंद माना गया है

डैंड्रफ़ की समस्या से निजात मिलती है

एग्ज़िमा और सोरायसिस जैसे फ़ंगल इंफ़ेक्शन से छुटकारा दिलाने में मदद करता है

त्वचा की झुर्रियों को दूर करने में सहायक भूमिका निभाता है

मक्खियों, चींटियों, मकड़ियों और कभी-कभी तिलचट्टों को दूर रखने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता ।

 

पुदीन (पिपरमिंट)का तेल*

 

कीड़ों को दूर भगाए पेपरमिंट ऑयल एक प्राकृतिक इंसेक्ट रिपेलेंट भी है और इसका उपयोग मच्छरों, चींटियों और अन्य कीड़ों को दूर रखने के लिए किया जा सकता है। ...

रेस्पिरेटरी हेल्थ सुधारे

बालों और स्कैल्प के लिए गुणकारी ...

मूड अच्छा करे और तनाव दूर क

पेपरमिंट ऑयल का क्या उपयोग है?

एक बीघा में पिपरमेंट का तेल कितना निकलता है?

पिपरमेंट स्प्रे क्या होता है?

पिपरमेंट का तेल व पिपरमेंट के फायदे पेपरमिंट का प्रयोग दांत दर्द में फायदेमंद · सर्दी में फायदेमंद पेपरमिंट

पिपरमेंट की तासीर कैसी होती एक रिपेलेंट स्प्रे बनाने के लिए (उन्हें दूर रखने के लिए), एक स्प्रे बोतल में पानी भरें और उसमें पेपरमिंट ऑयल

पुदीना तेल: उपयोग, लाभ और दुष्प्रभाव

पुदीने के तेल के कई संभावित लाभ हैं, जैसे जठरांत्र संबंधी असुविधा, मतली और दर्द से राहत। यहाँ लाभ, दुष्प्रभाव और शोध के बारे में जानने योग्य बातें बताई गई हैं।

 

पिपरमिंट के फायदे |

पेपरमिंट ऑयल देता है ये 7 फायदे, ऐसे करें इस्तेमाल

पाचन में सुधार. पेपरमिंट ऑयल अपच, सूजन और गैस जैसी पाचन संबंधी समस्याओं के इलाज में भी फायदेमंद होता है। यह मांसपेशियों को आराम देने में मदद कर सकता है।

 

पुदीना का तेल पाचन शक्ति सुधारे: सिरदर्द मिटाए, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करे, ... होता है। इसमें मौजूद मेंथॉल, एलर्जी पर असरदार होती है। पेपरमिंट ऑयल में एंटी-माइक्रोबियल, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल

पिपरमिंट ऑयल में एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण होते हैं, जो आपकी त्वचा से बैक्टीरियो को दूर करने का काम करता है। इसकी वजह से आपकी त्वचा पर मुंहासे का कारण बनने वाले बैक्टीरिया नहीं पनपते हैं। 1पिपपिपरमिंट ऑयल या पुदीने के तेल के कई फ़ायदे हैं:

पेट दर्द, पेट फूलना, दस्त, अपच, मतली, और उल्टी जैसी पाचन संबंधी समस्याओं में फ़ायदेमंद

सिरदर्द के लिए बनी एलोपैथिक दवाओं जितना ही कारगर माना जाता है

बंद नाक को खोलकर सांस लेने में मदद करता है

ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने में मदद करता है

मुंह में इंफ़ेक्शन फैलाने वाले बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता है

तनाव दूर भगाने में मदद करता है

रेस्पिरेटरी सिस्टम के बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता है

बालों की ग्रोथ के लिए भी बेहद फ़ायदेमंद माना गया है

डैंड्रफ़ की समस्या से निजात मिलती है

एग्ज़िमा और सोरायसिस जैसे फ़ंगल इंफ़ेक्शन से छुटकारा दिलाने में मदद करता है

त्वचा की झुर्रियों को दूर करने में सहायक भूमिका निभाता है

मक्खियों, चींटियों, मकड़ियों और कभी-कभी तिलचट्टों को दूर रखने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता

पुदीन

कीड़ों को दूर भगाए पेपरमिंट ऑयल एक प्राकृतिक इंसेक्ट रिपेलेंट भी है और इसका उपयोग मच्छरों, चींटियों और अन्य कीड़ों को दूर रखने के लिए किया जा सकता है। ...

रेस्पिरेटरी हेल्थ सुधारे

बालों और स्कैल्प के लिए गुणकारी ...

मूड अच्छा करे और तनाव दूर क

पेपरमिंट ऑयल का क्या उपयोग है?

एक बीघा में पिपरमेंट का तेल कितना निकलता है?

पिपरमेंट स्प्रे क्या होता है?

पिपरमेंट का तेल व पिपरमेंट के फायदे पेपरमिंट का प्रयोग दांत दर्द में फायदेमंद · सर्दी में फायदेमंद पेपरमिंट

पिपरमेंट की तासीर कैसी होती एक रिपेलेंट स्प्रे बनाने के लिए (उन्हें दूर रखने के लिए), एक स्प्रे बोतल में पानी भरें और उसमें पेपरमिंट ऑयल

पुदीना तेल: उपयोग, लाभ और दुष्प्रभाव

पुदीने के तेल के कई संभावित लाभ हैं, जैसे जठरांत्र संबंधी असुविधा, मतली और दर्द से राहत। यहाँ लाभ, दुष्प्रभाव और शोध के बारे में जानने योग्य बातें बताई गई हैं।

 

पिपरमिंट के फायदे |

पेपरमिंट ऑयल देता है ये फायदे, ऐसे करें इस्तेमाल

पाचन में सुधार. पेपरमिंट ऑयल अपच, सूजन और गैस जैसी पाचन संबंधी समस्याओं के इलाज में भी फायदेमंद होता है। यह मांसपेशियों को आराम देने में मदद कर सकता है।

 

 पिपरमेंट के यह चमत्कारिक फायदे |

 

पुदीना का तेल पाचन शक्ति सुधारे: सिरदर्द मिटाए, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करे, इसमें मौजूद मेंथॉल, एलर्जी पर असरदार होती है। पेपरमिंट ऑयल में एंटी-माइक्रोबियल, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल

पिपरमिंट ऑयल में एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण होते हैं, जो आपकी त्वचा से बैक्टीरियो को दूर करने का काम करता है। इसकी वजह से आपकी त्वचा पर मुंहासे का कारण बनने वाले बैक्टीरिया नहीं पनपते हैं। पिपरमिंट ऑयल ।

 पेपरमिंट ऑयल के फायदे · 1 प्राकृतिक दर्द निवारक है ऑयल · 2 एंग्जाइटी और स्ट्रेस से राहत दिलाता है · 3 सरदर्द से निजात दिलाता है · 4 इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होती है · 5 एक्सेस ऑयल को खत्म करता है. प्राकृतिक दर्द निवारक है ऑयल · 6 एंग्जाइटी और स्ट्रेस से राहत दिलाता है · 7सरदर्द से निजात दिलाता है · 8इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होती है · 9 एक्सेस ऑयल को खत्म करता है।

 

कपूर का तेल*

कपूर

का तेल+नारियल का

तेल और कपूर+नीम का तेल

और कपूर+तारपीन का

तेल और कपूर+सरसों का

तेल कपूर+तिल का तेल

 

कपूर तेल हर्बल कपूर आवश्यक है जिसेभीमसेनी कपूर भी कहते हैं ।

चेहरे पर नारियल तेल और कपूर

एक ग्रेन प्राकृतिक कपूर (भीमसेनी कपूर )कोएक पके केले में रखकर एक सप्ताह खाने से बबासीर के मस्से सूखकर गिर जाते हैं।

 

कपूर के तेल के ये 8 जादुई फायदे जानकर रह जाएंगे दंग · 1. कपूर के तेल को त्वचा पर लगाने से फोड़े-फुंसी और मुंहासे ठीक होते हैं

कपूर के तेल  फायदे

खांसी और जमाव. कपूर का तेल अरोमाथेरेपी में लोकप्रिय है, क्योंकि यह श्वसन संबंधी जमाव को दूर करने में मदद करता है । इसमें एंटीट्यूसिव गुण भी होते हैं जो बच्चों और वयस्कों में खांसी को कम करने में मदद कर सकते हैं ...

नीलगिरिस कपूर का तेल (100 मिली) कपूर 10, ग्राम

प्रभावित क्षेत्र और मालिश पर तेल की कुछ बूंदों को लागू करें। गर्म पानी और श्वास के लिए कुछ बूंदें जोड़ें। ठंड और खांस ...

 

कपूर अपने एंटीबायोटिक और एंटीफंगल गुणों के चलते पूजा हवन सामग्री के अलावा सेहत और ब्यूटी के लिए भी बेहद फायदेमंद है।

सिर से लेकर पैर तक बेहद फायदेमंद है कपूर का तेल, ऐसे करें इस्तेमाल

चेहरे पर पिंपल आने की मुख्य वजह चेहरे का तैलीय होना है. कपूर का तेल आपकी पिंपल्स की समस्या को दूर करने में बहुत फायदेमंद होता है. कपूर के तेल को चेहरे पर लगाने से यह आपके चेहरे के बंद रोम छिद्रों को खोल ...

 

पैरों के लिए भी कपूर का तेल बहुत ही लाभकारी हो सकता है। इसके लिए एक टब में गुनगुना पानी लें। अब इस में कपूर डाल कर सिकाई करने से दर्द को राहत मिलती है।

 

नीलगिरी(यूकेलिप्टस)तेल

यह यूकेलिप्टस की ही एक प्रजाति है यूकेलिप्टस मूल रूप से आस्ट्रेलिया का वृक्ष है दक्षिणी भारत में यह वृक्ष सर्व प्रथम नीलगिरी की पहाड़ियों की तलहटी में लगाया गया था इस वृक्ष के पत्तों से निकले तेल को नीलगिरी का या यूकेलिप्टस का तेल कहते हैं।

नीलगिरी का तेल नीलगिरी के पत्तों के अर्क से प्राप्त होता है। यह एक हल्के पीले रंग का तेल होता है, जिसमें एक विशिष्ट गंध होती है, जिसे औषधीय प्रयोजनों के लिए उपयोग करने से पहले पतला किया जाना चाहिए। नारियल तेल जैसे वाहक तेल के साथ नीलगिरी के तेल का सामयिक अनुप्रयोग मुँहासे के प्रबंधन के लिए फायदेमंद है।

 

नीलगिरी के तेल के संभावित स्वास्थ्य लाभों में खांसी का इलाज, छाती को साफ करना, घावों को कीटाणुरहित करना और बहुत कुछ शामिल है

 

 नीलगिरी एक लंबा सदाबहार पेड़ है जो ऑस्ट्रेलिया और तस्मानिया में पाया जाता है। यह मायर्टेसी परिवार का सदस्य है। विशेष रूप से, नीलगिरी ग्लोबुलस का व्यापक रूप से लुगदी उद्योग में उपयोग किया जाता है

नीलगिरी का तेल नीलगिरी के पत्ते से आसुत तेल का सामान्य नाम है, जो ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी पौधे परिवार का एक जीनस है और दुनिया भर में खेती की जाती है। नीलगिरी के तेल में एक दवा, एंटीसेप्टिक, विकर्षक, स्वाद, सुगंध और बालों और स्किन की खूबसूरती बढ़ाने में बेहद फायदेमंद है त्वचा के संक्रमण का इलाज करने के लिए नीलगिरी तेल का उपयोग संक्रमित त्वचा पर लगा कर किया जाता है। इसका उपयोग विशेष रूप से छाले, दाद, मुँहासे और चिकन पॉक्स में लिए भी किया जाता है।

नीलगिरी का तेल:- हड्डियों का दर्द+मांसपेशियों की अकड़न जकड़न सर्दी जुखाम की अनेक

नीलगिरी तेल के फायदे बेशुमार - यह तेल लगाने से जलन में आराम मिलता है. यह मांसपेशियों का दर्द दूर करने के साथ ही त्वचा को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से सुरक्षा प्रदान करता है।

 

नीलगिरी का तेल आयुर्वेद और अन्य चिकित्सा प्रणालियों में उपयोगी है, खासकर श्वसन और संक्रमण उपचार में। यह तेल अस्थमा, खांसी, और साइनसाइटिस जैसी श्वसन समस्याओं में राहत देता है।

उपरोक्त

(लौंग तेल,अजवायन तेल,पिपरमेंट तेल,कपूर,नीलगिरी तेल

सभी 10-10मिली लेकर यदि हम 200, ग्राम सफेद वैसलीन में मिला देते हैं यह बाम बन जाता है जो विकस वेपोरब से भी अधिक असर कारक है।)

अभ्यंग, मर्दन,स्नेहन या तेल मालिश*

*आयुर्वेद सरल चिकित्सा*

अभ्यंग भारतीय पौराणिक चिकित्सा है और आयुर्वेद का अभिन्न अंग है वैसे तो तेल मालिश किसी भी मौसम में उपयोगी है परन्तु सर्दियों में तेल मालिश करने से होते हैं अनेक फायदे, जानें किन समस्याओं से मिलती है मुक्ति

*-----------------------------------*

  विभिन्न औषधिय तेलों से मालिश

 

अगर आपके सिर में हल्का दर्द रहता है, तो कोशिश कीजिए कि अगली बार आपको पेनकिलर पिल न लेनी पड़े बल्कि आप तेल मालिश से भी सिरदर्द का ईलाज कर सकते हैं। आयुर्वेद और नैचुरापैथी में मालिश को बेहद अहम माना गया है। इसे कई बीमारियों के ईलाज में प्रभावी माना जाता है। सर्दियों में तेल मालिश के अनेक फायदे होते हैं। आइए, एक नजर डालते हैं तेल मालिश के फायदों पर-

 

सर्दियों में होने वाले त्रिरोगों से मिलती है मुक्ति

सर्दी के मौसम में इसे बेहद गुणकारी माना गया है। सुबह के समय धूप निकलने के बाद मालिश करानी चाहिए। सर्दियों में मालिश के लिए तिल के तेल का इस्तेमाल करें। तिल के तेल से शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। साथ ही यह त्रिरोग (वात, पित्त और कफ) नाशक का भी काम करता है हमारी त्वचा के निचे एक वसा (चर्बी)की एक परत होती है त्वचा पर तेल मालिश करने के बाद जब यह सुरज की रोशनी (गर्मी)के संपर्क में आती है तो तेजी से उस चर्बी को विटामिन डी में वदलने का काम करती है तेल मालिश कर दो घंटे सूर्य की धूप में बैठने से २०००युनिट विटामिन डी का निर्माण होता है जो एक सप्ताह के लिए पर्याप्त है ।

चेहरे पर आता है प्राकृतिक निखार

मालिश करने से शरीर त्वचा के सभी बंद रोम क्षिद्र खुलने लगतें है। इसके साथ ही त्वचा में रक्त का संचार सुचारू रूप से होने लगता है। प्रतिदिन मालिश करने से आपका चेहरा चमकने लगता है। इसके अलावा मालिश करवाने के बजाये मालिश खुद करना भी काफी असरदार होता है। बस इसके लिए आपको मालिश करने का सही तरीका आना चाहिए।

चेहरे पर होने वाले पिम्पल से मिलती है मुक्ति

मालिश से त्वचा की मृत कोशिकाएं साफ होती हैं और त्वचा को जरुरी पोषण तत्व मिलते हैं जिससे त्वचा चमकदार हो जाती है। मालिश से त्वचा के नीचे जमे विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं जिससे त्वचा नर्म और मुलायम हो जाती है। मालिश करने से त्वचा पर कील मुंहासे निकलना बंद हो जाते हैं।

 

बालों में डैंड्रफ की समस्या

बालों में सर्दियों में डैंड्रफ की समस्या बढ़ जाती है, जिससे आपके बाल भी झड़ने लगते हैं। कुछ लोगों को सर्दियों में इतनी समस्या हो जाती है कि डैंड्रफ उनके कपड़ों और बालों में साफ दिखने लगता है। ऐसे में आप सिर में ऑइल मसाज करके इन समस्याओं से मुक्ति पा सकते हैं।

शरीर बनता है ऊर्जावान

अगर आपके शरीर में हमेशा थकावट रहती है, तो आप हफ्ते में दो बार तेल मालिश करा सकते हैं, जिससे न सिर्फ आपको छोटी-मोटी बीमारियों से मुक्ति मिलेगी बल्कि आपके शरीर में ऊर्जा का संचार भी होगा।

 

विभिन्न तेलों की मालिश विभिन्न व्याधियों में की जाती है। यहाँ कुछ तेलों की मालिश और उनके उपयोग के बारे में जानकारी है:

 

1. *तिल का तेल*: तिल का तेल जोड़ों के दर्द, गठिया वात दर्द मांसपेशियों के दर्द, और त्वचा की समस्याओं में मालिश के लिए उपयोग किया जाता है।

2. *सरसों का तेल*: सरसों का तेल जोड़ों के दर्द,थकावट  मांसपेशियों के दर्द, और त्वचा की समस्याओं में मालिश के लिए उपयोग किया जाता है आंखों में काजल आने पर सरसों के तेल की मालिश पैर के नाखूनो पर करने से आंखों में आने वाली खाज बंद हो जाती है सरसों तेल को २०सो नाखूनों पर लगा कर बच्चों को स्नान कराने से ज़ुकाम नहीं होता।

3. *नारियल का तेल*: नारियल का तेल त्वचा की समस्याओं, बालों की समस्याओं, और मांसपेशियों के दर्द में मालिश के लिए उपयोग किया जाता है नारियल के तेल की मालिश प्रति दिन पैरो के तलवों पर पलने से कील मुहांसे निकालना बंद हो जाते हैं आंखों की रोशनी बढ़ती है बुद्धि तेज याददाश्त बढ़ती है त्वचा में निखार आता है नारियल तेल की पैर के तलवों में मालिश करने से हिचकी बंद हो जाती है।

4. *बादाम का तेल*: बादाम का तेल त्वचा की समस्याओं, बालों की समस्याओं, और मांसपेशियों के दर्द में मालिश के लिए उपयोग किया जाता है बच्चों कोबादाम तेल की मालिश करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

5. *अरंडी का तेल*: अरंडी का तेल त्वचा की समस्याओं, बालों की समस्याओं, और मांसपेशियों के दर्द  चोट मोच का दर्द वात दर्द में मालिश के लिए उपयोग किया जाता है।

6. *केशर(लवेंडर का तेल)*: लवेंडर का तेल तनाव, चिंता,सिर में भारीपन स्नायविक सिर दर्द बारी से होने वाला सिर दर्द( माइग्रेन) यकृत दोष से होने वाला माथे और सिर का दर्दे अवसाद में  और नींद की समस्याओं में मालिश के लिए उपयोग किया जाता है।

7. *पेपरमिंट का तेल*: पेपरमिंट का तेल पाचन की समस्याओं, सिरदर्द, और मांसपेशियों के दर्द में मालिश के लिए उपयोग किया जाता है।

8. *ईयूकलिप्टस का तेल*: ईयूकलिप्टस का तेल श्वसन की समस्याओं, जोड़ों के दर्द, और मांसपेशियों के दर्द में सर्दी में हाथों पर आगयी सुजन में नारियल तेल में मिलाकर नाखुनो के लगाने में नाखूनों पर मालिश के लिए उपयोग किया जाता है।

9. *गुलमेंहदी (रोज़मेरी का तेल)*: रोज़मेरी का तेल मानसिक थकान, तनाव, और चिंता से सर दर्द गर्मी से सर में दर्द में मालिश के लिए उपयोग किया जाता है।

10. *गेरेनियम का तेल*: गेरेनियम का तेल त्वचा की समस्याओं, बालों की समस्याओं, और मांसपेशियों के दर्द में मालिश के लिए उपयोग किया जाता है।

 

 यदि आपको कोई एलर्जी या स्वास्थ्य समस्या है तो चिकित्सक की सलाह में तेल मालिश करना चाहिए।

यशपाल सिंह आयुर्वेद रत्न

 


Comments

Popular posts from this blog

अरंडी का तेल

धतूरा

तिल का तेल