*सहजन *
सहजन मोरिंगा ओलिफेरा,एक बहु
उपयोगी पेड़ है।यह कड़वा और मिठा दो तरह का होता है मिठे सहजन की फलियों की सब्जी
पूरे भारतवर्ष में बड़े चाव से खाई जाती है और कड़वे सहजन को औषधीय प्रयोग में
लाया जाता है यद्यपि दोनों के गुण और धर्म समान ही है सहजना, सुजना,
सेंजन और मुनगा आदि नामों से भी जाना जाता है। अंग्रेजी में इसे,
"ड्रमस्टिक ट्री" भी कहते हैं। यह तेजी से बढ़ने वाला, सूखा
से प्रभावित न होने वाला, मैरिनोग्रेसी कुल का पेड़ है।
इस पेड़ के विभिन्न भाग अनेकानेक पोषक तत्वों से भरपूर पाये गये हैं,
इसलिये इसके विभिन्न भागों का विविध प्रकार से उपयोग किया जाता है।
इसकी हरी फलियाँ तथा पत्तियाँ सब्जी एवं पारम्परिक औषधि के रूप में प्रयुक्त है।
इसको हम अपने भोजन मे भी शामिल कर सकते हैं
इसकी सब्जी बनाकर या इसकी पत्तियों के पराठे या रोटी बनाकर खा सकते हैं
इसका पौधा लगभग १० मीटर उँचाई वाला होता है
किन्तु लोग इसे डेढ़-दो मीटर की ऊँचाई से प्रतिवर्ष काट देते हैं ताकि इसके
फल-फूल-पत्तियों तक हाथ सरलता से पहुँच सके। इसके कच्ची-हरी फलियाँ सर्वाधिक उपयोग
में लायी जातीं हैं।
सहजन के लगभग सभी अंग (पत्ती, फूल,
फल, बीज, डाली, छाल,
जड़ें, बीज से प्राप्त तेल आदि) खाये जाते हैं।
विश्व के कुछ भागों में नयी फलियाँ खाने की
परम्परा है जबकि दूसरे भागों में पत्तियाँ अधिक पसन्द की जातीं हैं। इसके फूलों को
पकाकर खाया जाता सूप बनाकर पीया जाता है और इनका स्वाद पकने के बाद खुम्भी (मशरूम)
जैसा हो जाता है। भारत तथा अनेक देशों में इसकी छाल, रस,
पत्तियों, बीजों, तेल, और
फूलों से पारम्परिक दवाएँ बनायी जाती है। जमैका में इसके रस से नीली डाई (रंजक) के
रूप में उपयोग किया जाता है। दक्षिण भारतीय व्यंजनों में इसका प्रयोग बहुत किया
जाता है। मोरिंगा ,drumstick या सहजन आदि नामों से जाना जाने वाला
सहजन औषधीय गुणों से भरपूर है।
सहजन की पत्तियों को को पीस कर उसका स्वरस में
५०, ग्राम सुहागा ५०, ग्राम काला नमक २०, ग्राम
हींग मिलाकर उसकी मटर के बराबर गोलियां
गोलियां बना लें एक दो गोली सुबह साम पानी के साथ लेने से प्रसूती ज्वर प्रसूती
माताओं को बारबार दर्द के साथ शौच आने की अनुभूत औषधि है छाया में सुखाकर सहजन के
पत्तों की चूर्ण एक चम्मच प्रतिदिन दूध के
साथ खाने से हड्डियों को मजबूती मिलती है महिलाओं में मोनोपॉज के बाद लो कैल्सियम
हड्डियों के खोखलेपन को ठीक करता है।
सहजन
और भी कई बीमारियों मे खाया जाता है
जैसे
की-
इम्यूनिटी मजबूत करे
पाचन-तंत्र के लिए फायदेमंद है
उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करता है
किडनी के लिए फायदेमंद है
कैंसर के खतरे को कम करता है
लिवर के लिए फायदेमंद है
मधुमेह रोगियों को अपने सेवन पर नजर रखनी चाहिए
क्योंकि सहजन रक्त शर्करा के स्तर को प्रभावित कर सकता है।
सहजन के कई औषधीय गुण हैं:
सहजन के बीजों में पीड़ा नाशक, एलर्जी
नाशक, जीवाणु रोधी, मूत्रवर्धक, और
विषाणु रोधी गुण होते हैं.
सहजन के बीज कर्नल(फूल)से दमा और जलन से राहत
मिलती है सहजन की फली और बीजों से रक्तचाप नियंत्रित रहता है सहजन की पत्तियों से
अल्सर, अतिगलग्रंथिता (टांसिलाइटिस), फंगस,
मधुमेह, और हाइपोलिपिडेमिया जैसी बीमारियों में आराम
मिलता है सहजन की छाल का सेवन साइटिका, गठिया, और
लिवर के लिए फ़ायदेमंद होता है सहजन की पत्तियों का काढ़ा पीने से गठिया, साइटिका,
पक्षाघात, और वायु विकार में आराम मिलता है सहजन की
पत्तियों की लुगदी बनाकर मोच पर लगाने से जल्दी आराम मिलता है.
सहजन में एंटीफंगल, एंटी
वायरस, एंटी डिप्रेसेंट, और एंटी इंफ़्लेमेटरी गुण होते हैं,सहजन
में प्रोटीन, मिनरल्स, अमीनो
एसिड्स, फ़्लैवोनॉइड्स, और ऐंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं,सहजन
में दूध से चार गुना कैल्शियम और दोगुना प्रोटीन होता है
सहजन पेड़ नहीं मानव के लिए कुदरत का बरदान है
सर्वसुलभ, पोषक व
औषधीय गुणों से भरा हुआ है
सहजन के विभिन्न भागों के औषधीय गुण
बीज पीड़ा नाशक, एलर्जी
नाशक, जीवाणु रोधी, मूत्रवर्धक औषधि, विषाणु
रोधी।
बीज कर्नल दमा रोधी, जलन या
प्रदाहात्मक रोधी।
फली एवं बीज रक्त चाप को नियंत्रित करता है
पत्ती अल्सर रोधी, अतिगलग्रन्थिता,
फंगस रोधी, मधुमेह विरोधी, पोषण का
प्रतिरोधक, हाइपोलिपिडेमिक आदि।
जड़ ...
फूल ...
छाल
सहजन:प्राकृतिक औषधि का भण्डार
सहजन के बीज से तेल निकाला जाता है और छाल,
पत्ती, गोंद, जड़ आदि से
आयुर्वेदिक दवाएं तैयार की जाती हैं। यह कई रोगों को दूर करता है और शरीर के हर
अंग को शक्ति देता है इसकी छाल का सेवन साइटिका, गठिया,
लीवर में लाभकारी होता है। सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वात
और कफ रोग खत्म हो जाते हैं। इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, साइटिका,
पक्षाघात,को ठीक करने में सहायक है
यह
आपके हीमोग्लोबिन को बेहतर बनाने में मदद करता है। · रक्तचाप
और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है। · लीवर और किडनी
को डिटॉक्सीफाई करता है। · रक्त शुद्ध करता है।
सहजन की फलियों की सब्जी खाने के कई फायदे,
BP और आंखों की समस्या में कारगर है हड्डियों को चट्टान जैसा मजबूत बना
देगा सहजन! सहजन की छाल और पत्तों का लेप जलन कम करने वाला, सूजन
नाशक और फोड़ों को नष्ट करने वाला है। सहजन के बीज का तेल . कुष्ठ रोगी में लाभदायक है।
सहजन
में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर
की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं, जिससे
बीमारियों से लड़ने में मदद मिलती है।
इस में 300 से अधिक रोगों के रोकथाम के गुण
हैं। इसमें 90 तरह के मल्टीविटामिन्स, 45 तरह के एंटी
आक्सीडेंट गुण, 35 तरह के दर्द निवारक गुण और 17 तरह के एमिनो
एसिड मिलते हैं।
*सहजन का गोंद*
*सहजन का गोंद हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद
करता है इसमें उच्च मात्र में कैल्सियम और फास्फोरस होता है जो हड्डियों को ताक़त
देता है सहजन के गोंद को सोते समय रात को गरम दूध में मिलाकर पिएं।
*सहजन का गोंद ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है
सुबह खाली पेट पानी के साथ खायें
*सहजन का गोंद कोलेस्ट्रॉल को कम करता है रक्त
संचार को सुधारता इसे देशी गाय के घी और गुड़ के साथ लड्डू बनाकर खायें
*सहजन के गोंद में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और
फ्री रेडिकल्स कैंसर कोशिकाओं को बनने नहीं देती सहजन गोंद को पानी के साथ लें और
कैंसर से बचें।
*सहजन गोंद सूजन और जोड़ों के दर्द को कम करता
है इसे हल्दी वाले दूध में एक चम्मच मिलाकर पिएं
सहजन गोंद लीवर को साफ़ करता है और लीवर की
कार्य क्षमता को बढ़ाता है सुधारता है इसे सहजन और पिपल के पत्तों के क्वाथ के साथ
लें
*सहजन गोंद सर्दी ज़ुकाम वालरल से बचाता है इसे
बादाम अखरोट और खजूर के साथ खायें और इम्युनिटी पॉवर बढ़ाएं
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