*गुलाब के फायेदे*
*----------------*
* गुलाब को यों ही फूलों का राजा नहीं कहा
जाता। दिखने में यह फूल बेहद खूबसूरत है और इसकी हर पंखुड़ी में समाए हैं अनगिनत
गुण। त्वचा को सुंदर बनाने से लेकर शरीर को चुस्त- दुरुस्त रखने में गुलाब कितने
काम आता है ।
*कुछ लोग मिठाई में तथा खाने में भी अर्क गुलाब
मिलाते हैं इससे मिठाई और खाने की गंध और स्वाद दोनों अच्छे होजाते है।
* सुबह-सबेरे अगर खाली पेट गुलाबी गुलाब की दो
कच्ची पंखुड़ियां खा ली जाएं, तो दिन भर ताजगी बनी रहती है। वह इसलिए
क्योंकि गुलाब बेहद अच्छा ब्लड प्यूरिफायर है।
* अस्थमा, हाई ब्लड
प्रेशर, ब्रोंकाइटिस, डायरिया, कफ,
फीवर, हाजमे की गड़बड़ी में गुलाब का सेवन बेहद
उपयोगी होता है।
* गुलाब की पंखुड़ियों का इस्तेमाल चाय बनाने
में भी होता है। इससे शरीर में जमा अतिरिक्त टॉक्सिन निकल जाता है। पंखुड़ियों को
उबाल कर इसका पानी ठंडा कर पीने पर तनाव से राहत मिलती है और मांसपेशियों की अकड़न
दूर होती है।
* एक शीशी में ग्लिसरीन, नीबू का
रस और गुलाब जल को बराबर मात्रा में मिलाकर घोल बना लें। दो बूंद चेहरे पर मलें।
त्वचा में नमी और चमक बनी रहेगी और त्वचा मखमली- मुलायम बन जाएगी।
*अर्क गुलाब को आंखें डालने से दुखती आंख ठीक
हो जाती है।
* 100मिली गुलाब जल में त्रिफला चूर्ण 10,
ग्राम अर्क चांगेरी का
10मिली लाल चंदन 5, ग्राम लाल फिटकरी 1गराम मिलाकर 24घंटे
के लिए रखदे इसके बाद साफ और बारीक कपड़े में छानकर अर्क को कांच की शीशी में भर लें और आंख में रोज दो दो बुंद डालें आंख का
जाला धुंध रोशनी कमहोने में अति उपयोगी औषधि है चश्मा उतर जाता है अनुभूत प्रयोग
है।
*गुलाब के फूल की पंखुड़ियों से बनी गुलकंद अति
गुणकारी है गुलकंद के साथ सोंफ पाउडर मिलाकर खाने से पेट साफ होता है । पेट की
गर्मी शांत होती है।
*गुलकंद के साथ जहरमोहरा मिला कर खाने से गर्मी
में होने वाला सिरदर्द मानसिक कज्ञजोरी ठीक होती है।
*गुलकंद को आंवले के चूर्ण के साथ खाने से
आंखों की रोशनी बढ़ती है शरीर पुष्ट होता है चेहरे पर कांति अति है किल मुंहासे
ठीक होते हैं आंखों के चारों ओर बनाते काले घेरे ठीक हो जाते हैं ।
*गुलकंद में अश्वगंधा चूर्ण मिलाकर खाने से पोरूष
शक्ति बढ़ती है शरीर पुष्ट होता है ।
*गुलकंद रात्रि को सोते समय गुनगुने गाय के दूध
के साथ खाने से आशातीत लाभ होता है।
गुलकंद बनाने की विधि वैसे तो किसी भी रंग के
गुलाब से गुलकंद बनाया जा सकता है परंतु गुलाबी रंग के गुलाब से बना गुलकंद उत्तम
समझा जाता है। उम्र
ताजे गुलाब के फुल की पंखुड़ियों को फुल से अलग
करले उसमें से फूल के पुंकेसर को अलगकरदें उन साफ की गयी पंखुड़ियों को 2से3,
घंटे धूप में फैला दें इसके बाद 100गुलाब के फूल की पंखुड़ियों को
मसल कर उसमें में शुद्ध शहद 200, ग्राम
मिला कर धूप में रख दें शहद शुद्ध ना मिलने पर धागे वाली मिश्री मिलाकर धुप में
रखदे एक सप्ताह तक रोज धूप में रखें एक सप्ताह बाद आपकी सुर्य तापी गुलकंद प्रयोग
के लिए तैयार हैं।
विधिः 2 गुलाब के फूल की पंखुड़ियों को दोगुनी
मिश्री में मसल कर मिट्टी या , स्टील
कड़ाई अथवा स्टील के भगोने में रखकर आग पर पकायें जब चासनी दोतार की हो जाये उतार कर जार में भर कर रख लें आपकी अग्नी तापी
गुल कंद प्रयोग के लिए तैयार हैं।
Comments
Post a Comment