पका हुआ या डब्बा बंद(परिष्कृत) भोजन का प्रयोग कम से कम करें*



 

 ग्रंथ भावप्रवण निरघनटु में बांग भट्ट जी लिखते हैं स्वस्थ रोग रहित शरीर और अधिक जीवन के लिए प्रकृति के साथ रहना प्रकृति के करीब रहना प्रकृति प्रदत्त पदार्थों का ताजा और जैसा जिस रूप में प्रकृति से मिला है उसी रुप में खाद्य अखाद्य का विचार करते हुए सेवन करना स्वास्थ्य के लिए उपयोगी  है ।

     सलाद में जो प्रकृतिक पोषक तत्व होते हैं वह उसे परिष्कृत करने के बाद नही रहते आयुर्वेद कहता है पकने के बाद सब्जी दाल आदि से क्षारीय तत्त्व कम हो जाते हैं और अम्ल की वृद्धि हो जाती है    ।          

यही कारण है जो व्यक्ति प्रकृति से दुर रहता है प्रकृति प्रदत पदार्थों का सेवन कम से कम करता है और परिष्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन करता है वह उतनी ही भयंकर और लाईलाज रोग से ग्रस्त हो जाता है फलों की जगह* डब्बा बंद जूस कभी नहीं ले सकते जूस को लम्बे समय तक सड़ने से बचाने के लिए ( सोडियम बेंजोएट अथवा वाहिटवेनेगर) मिलाया जाता है यह एक रासायनिक योगिक है जो स्वास्थ्य के लिए हानी कारक है इसलिए स्वस्थ रहने के लिए जो भी खायें प्राकृतिक खायें संसलिस्ट नहीं जो व्यक्ति परिष्कृत भोजन अथवा डब्बा बंद भोजन का सेवन अधिक करता है उस  व्यक्ति की रोग प्रतिरोधकता समाप्त हो जाती है माईकल जैक्सन ने अपने जीवन जीने का लक्ष्य १५०साल तय किया था लैबोरेट्री में चैक किया खाना डाईटेशयन की सलाह से खाता था १५योगय और महंगे चिकितसको की टीम अपनी देख भाल के लिये रकखी थी ५०लोगो की एक टीम और थी जिस का ब्लड ग्रुप माईकल जैक्सन से मिलता था जो जरूरत होने पर माईकल को अपने अंग देदेते परन्तु अफसोस कुछ भी काम नहीं आया और १५०साल तक जीने की लालसा रखने वाला ५०,साल में ही चल बसा कारण प्रकृति से दुर हो जाना                        * आज की कड़वी सच्चाई  सोनाली बेंद्रे - कैंसर

अजय देवगन - लिट्राल अपिकोंडिलितिस

(कंधे की गंभीर बीमारी)

इरफान खान - कैंसर से मृत्यु

मनीषा कोइराला - कैंसर

युवराज सिंह - कैंसर

सैफ अली खान - हृदय घात

रितिक रोशन - ब्रेन क्लोट

अनुराग बासु - खून का कैंसर

मुमताज - ब्रेस्ट कैंसर

शाहरुख खान - 8 सर्जरी

(घुटना, कोहनी, कंधा आदि)

ताहिरा कश्यप (आयुष्मान खुराना की पत्नी) - कैंसर

राकेश रोशन - गले का कैंसर

लीसा राय - कैंसर

राजेश खन्ना - कैंसर,

विनोद खन्ना - कैंसर मृत्यु

नरगिस - कैंसर से मृत्यु

फिरोज खान - कैंसर

टोम अल्टर - कैंसर...

 

ये वो लोग हैं या थे-

जिनके पास पैसे की कोई कमी नहीं है/थी!

खाना हमेशा डाइटीशियन की सलाह से खाते है।

दूध भी ऐसी गाय या भैंस का पीते हैं

जो AC में रहती है और बिसलेरी का पानी पीती है।

जिम भी जाते है।

रेगुलर शरीर के सारे टेस्ट करवाते है।

सबके पास अपने हाई क्वालिफाइड डॉक्टर है।

अब सवाल उठता है कि आखिर

अपने शरीर की इतनी देखभाल के बावजूद भी इन्हें इतनी गंभीर बीमारी अचानक कैसे हो गई।

 

क्योंकि ये प्राक्रतिक चीजों का इस्तेमाल बहुत कम करते है ये सभी लोग प्रकृति से दूर चले आते प्राकृतिक हवा भोजन पानी और औषधी ये नहीं लेते।

या मान लो बिल्कुल भी नहीं करते।

जैसा हमें प्रकृति ने दिया है ,

उसे उसी रूप में ग्रहण करो वो कभी नुकसान नहीं देगा रोगों से लडने की शक्ति शरीर में विकसित होगी कितनी भी फ्रूटी पी लो ,

वो शरीर को आम के गुण नहीं दे सकती।

अगर हम इस धरती को प्रदूषित ना करते तो धरती से निकला पानी बोतल बन्द पानी से लाख गुण अच्छा था।

 

आप एक बच्चे को जन्म से ऐसे स्थान पर रखिए

जहां एक भी कीटाणु ना हो।

बड़ा होने से बाद उसे सामान्य जगह पर रहने के लिए छोड़ दो,

वो बच्चा एक सामान्य सा बुखार भी नहीं झेल पाएगा!

क्योंकि उसके शरीर का  तंत्र(रोग प्रतिरोधी तंत्र) कीटाणुओ से लड़ने के लिए विकसित ही नही हो पाया इसलिए अपने बच्चों को खेलने दीजिए धुल और मिट्टी में खाने दीजिए कुछ कच्चा पक्का नहाने दीजिए किचड़ मिट्टी के पानी में इससे उनकी रोगों से लडने का तंत्र विकसित होगा जो उन्हें स्वस्थ जीवन जीने में सहायक होगा।

 

कंपनियों ने लोगो को इतना डरा रखा है,मानो एक दिन साबुन से नहीं नहाओगे तो तुम्हे कीटाणु घेर लेंगे और शाम तक पक्का मर जाओगे समझ नहीं आता हम कहां जी रहे है।

एक दूसरे से हाथ मिलाने के बाद लोग सेनिटाइजर लगाते हुए देखते हैं हम।

  इंसान सोच रहा है- पैसों के दम पर हम जिंदगी जियेंगे।

आपने कभी गौर किया है--

पिज़्ज़ा बर्गर वाले शहर के लोगों की एक बुखार में धरती घूमने लगती है और वहीं दूध दही छाछ के शौकीन गांव के बुजुर्ग लोगों का वही बुखार बिना दवाई के ठीक हो जाता हैक्योंकि उनकी डॉक्टर प्रकृति है क्योंकि वे पहले से ही सादा खाना खाते आए है प्रकृति के साथ सामंजस्य बैठाकर जीवन जी रहे है।

प्राकृतिक चीजों को अपनाओ!

विज्ञान के द्वारा लैब में तैयार

हर एक वस्तु शरीर के लिए नुकसानदायक है!

शुद्ध खाना तो ठीक है परन्तु परिष्कृत हानी कारक चाहे वह परिष्कृत मीठा(चीनी)हो या रिफाइंड ऑयल रिफाइंड नमक आदि।

 

पैसे से कभी भी स्वास्थ्य और खुशियां नहीं मिलती।।

स्वस्थ सरल और लम्बे जीवन के लिए आइए फ़िर से _बढचलें

*प्रकृति की ओर...*

  यशपाल सिंह आयुर्वेद रत्न 

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