*देशी गाय का दूध*



भारतीय वांग्मय तथा आयुर्वेद गाय और गाय के दूध में जो गुण हजारों वर्षों पहले भारतीय विद्वानों ने (ऋषियों ने) बताये हैं वहीं सब आज का आधुनिक विज्ञान भी कह रहा है मान रहा है।

*--------------------------*

यह मूल पोस्ट  हमारी नहीं है अमेरिका के कृषि एवं पशुपालन विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तक

THE COW IS A WONDERFUL LABORATORY* पर आधारित है।

 

*भारतीय और विदेशी गायA1 और A2 दूध की पौष्टिकता में अंतर*

*आयुर्वेद सरल चिकित्सा*

*---------------------------*

यह पोस्ट वैज्ञानिक शोधों पर आधारित है।

क्या यह सही है कि A1 दूध पीने से दिल की बीमारियां ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या और बीमारियां होती हैं? क्या सभी विदेशी गायों के दूध में A1 और देसी गायों के दूध में बीटा केसीन होता है।

क्या वाकई A1 और A2 दूध की पौष्टिकता में कोई अंतर है।

*------------------------------------*

गाय के दूध में नस्ल के अनुसार बीटा केसीन पाया जाता है वैज्ञानिक शोध से यह ज्ञात होता है सभी गायों के दूध में आज से 400, वर्ष पहले बीटा केसीन 2नामक प्रोटीन ही पाया जाता था कालान्तर में जलवायु और जनेटिक बदलाव के कारण योरोप अमेरिका आदि देशों में पारी जाने वाली गायों में बीटा केसीन 1के रुप में बदलाव आया जिससे यहां की गाय दूध भी अधिक देने लगी इसके विपरित भारतीय उपमहाद्वीप में पायी जाने वाली गाय की साहिवाल हरयाणा लाल सिंधी गिर पपून  नस्लों में बीटा केसीन 2 पाया जाता है बीटा केसीन 2, प्रोटीन सुपाच्य हल्का और मानव स्वास्थ्य के लिए लाभ कारी है अनावश्यक फैट को जमा नहीं होने देता मस्तिष्क के विकास में सहायक है इस दूध के पीने से एलर्जी नहीं होती।

 

दूध एक संपूर्ण पौष्टिक आहार के रूप में जाना जाता है जिसे शाकाहारी और मांसाहारी दोनों ही वर्ग के लोग एक सामान लेते हैं। दूध के अंदर विभिन्न पोषक तत्व होते हैं जैसे लैक्टोज, प्रोटीन, फैट, कैल्शियम और अन्य विटामिन और मिनरल्स। दूध में दो तरह का प्रोटीन होता है एक वेह प्रोटीन (whey protein) और दूसरा केसिन प्रोटीन (casein protein)। केसीन प्रोटीन भी दो रूपों में मिलता है अल्फा केसीन और बीटा केसीन।

 

बीटा केसीन भी दो रूपों में पाया जाता है एक A1 और दूसरा A2। कुछ वैज्ञानिकों ने रिसर्च करके यह जाना कि जिस दूध में A1 किस्म की प्रोटीन पाया जाता है वह दिल के रोगों को बढ़ावा देता है। इसका सबूत खरगोशों में की गई एक रिसर्च से मिला जिन खरगोशों को बीटा केसीन A2 खिलाया गया उनमें कोलेस्ट्रॉल की मात्रा और ऑर्टिक नस की मोटाई उन खरगोशों से कम मिली जिनको बीटा केसीन A1 खिलाया गया था। इससे यह निष्कर्ष निकला गया कि A2 अच्छा दूध होता है। यही प्रयोग डीजे वैन नाम के वैज्ञानिक ने सन 2005 में इंसानों में किया जिसमें उन्होंने 62 लोगों को अलग-अलग ग्रुप में रखकर 4.5 हफ्तों तक A1 और A2 दूध और चीज़ खिलाया। इसमें उन्होंने कोई ऐसा तथ्य नहीं पाया कि जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि A1 और A2 दूध की वजह से खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा पर कोई प्रभाव पड़ता हो।

 

आखिर A1 और A2 विवाद है क्या?

बीटा केसीन गाय, भैंस और अन्य जानवरों के दूध में मौजूद एक मुख्य प्रोटीन होता है। विभिन्न वैज्ञानिक रिसर्चो से यह बात पता लगी है कि सैकड़ों वर्षों से अधिक दूध और प्रोटीन उत्पादन के लिए की गई सेलेक्टिव ब्रीडिंग और म्यूटेशन की वजह से बीटा केसीन के अलग-अलग प्रकार बन गए हैं। आज हम लगभग 15 अलग-अलग बीटा केसीन के बारे में जानते हैं जिनमें सबसे महत्वपूर्ण A1 और A2 हैं। बीटा केसीन A1 जिसे खराब या बुरा प्रोटीन माना जाता है उसमें और A2 प्रोटीन में सिर्फ 1 अमीनो एसिड का फर्क है। यह बात जानने की ज़रूरत है कि बीटा केसिन एक प्रोटीन है जो अलग-अलग अमीनो एसिड के जुड़ने से बनता है जैसे दीवार को एक-एक ईंट जोड़कर बनाया जाता है । A1 प्रोटीन में 67वीं पोजीशन पर हिस्टीडीन नाम का अमीनो एसिड होता है, जबकि A2 प्रोटीन में उसी जगह पर प्रोलीन होता है । इससे यह फर्क पड़ता है कि A1 बीटा केसिन पेट में पचकर एक नया प्रोटीन बना लेता है जो बायोलॉजिकली और फिजियोलॉजीकली एक्टिव होता है जिसे बीटा केज़ोमोर्फिन कहते हैं। यही प्रोटीन A1 दूध से जुड़ी हुई बीमारियों का एक मुख्य कारक माना जाता है।

 

क्या यह सच है कि देसी गाय A2 टाइप की और विदेशी गाय A1 टाइप की होती हैं?

जीनोमिक स्टडी से पता चला है कि Bos जीनस या वंश जिसमें देशी, विदेशी गाय और याक आते हैं शुरू में A2 A2 टाइप के थे पर अनुवांशिक विलय (जेनेटिक म्यूटेशन) के कारण कुछ जानवरों में A1 टाइप के जीन पैदा हो गए। बाद में जब चयनात्मक प्रजनन या सेलक्टिव ब्रीडिंग शुरू हुई तो अधिक दूध उत्पादन और प्रोटीन के लिए जिन सांडो को चुना गया उनमें अनजाने में उन अनुवांशिक तौर से उन्नत सांडो को चुन लिया गया जिनमें A1 जीन था और उनसे आर्टिफीशियल इनसेमिनेशन की तकनीक की वजह से A1 नस्ल की गायों का उत्पादन तेजी से हुआ।

 

कुछ सर्वेक्षणों में यह भी पता चला है कि A1 और A2 जीन किसी विशेष नस्ल से संबंधित ना होकर क्षेत्र विशेष से जुड़े हैं। जैसे उत्तरी अमेरिका और उत्तरी यूरोप में एचएफ गायों में A1 पाए जाने की संभावना 90% से अधिक है जबकि जर्मन HF में A2 की संभावना 97% से अधिक है। दूसरे देशों की HF में A1 की संभावना 40 से 65% तक होती है। अमेरिका और यूरोप की दूसरी ब्रीड जैसे ग्रुएन्सेय में A2 की संभावना 98 प्रतिशत से भी अधिक होती है लगभग देशी गायों जितनी। जर्सी ब्रीड में A2 की संभावना 80% तक होती है, जबकि हिंदुस्तानी देसी गायों में A2 की संभावना 98% से अधिक है। तो यह तथ्य सही नहीं लगता कि देसी गायों को ज्यादा महिमामंडित किया जाए क्योंकि यदि देखा जाए तो भैंस या बकरी का दूध 100% A2 टाइप का होता है। और इस तर्क के हिसाब से बकरी और भैंस का दूध और भी लाभदायक हो जाता है।

 

भारतीय वैज्ञानिकों का इस विषय में क्या कहना है?

मोटे तौर पर यह कहा जा सकता है कि लगभग सभी भारतीय वैज्ञानिक इस विषय पर एकमत हैं। NBAGR (नेशनल ब्यूरोऑफ एनिमल एंड जेनेटिक रिसर्च) देश का सबसे बड़ा पशु अनुवांशिक शिक्षण संस्थान जिसे ICAR ने करनाल में स्थापित किया गया है। यह इस क्षेत्र में सन 2009 से कार्यरत है। इसकी पहली रिपोर्ट में यह कहा गया था कि भारतीय गायों में A2 की मौजूदगी 98 प्रतिशत तक है और कुछ ब्रीड्स में यह सौ प्रतिशत भी वहीं सभी भैंसे पूर्ण रूप से A2 दूध देती हैं।

 

NBAGR ने भारत में मौजूद विदेशी गायों की भी जांच की जिससे पता चला कि उनमें भी अधिकतर A2 दूध का ही जीन है। 2012 में छपी एक रिपोर्ट में NBAGR ने यह बताया गया कि क्रॉसब्रीड गाय के भीतर भी मुख्यत: A2 जीन ही होते हैं, इसलिए हमें इस पर नजर रखनी चाहिए परंतु इस समय ब्रीडिंग रणनीति बदलने की कोई जरूरत नहीं है।

 

क्या A1 दूध पीने से दिल की बीमारियां ब्लड प्रेशर डायबिटीज या और बीमारियां होती हैं?

ये सब झूठी अफवाहें हैं जो कम जानकारी की वजह से मीडिया में फैली हैं। सबसे पहले हमें यह समझना होगा कि कारण (causal factor) और आशंका (risk factor) में फर्क होता है। A1 किसी बीमारी का कारण नहीं है वह सिर्फ बीमारी की आशंका को बढ़ा सकता है। कुछ सर्वेक्षणों में थोड़ा बहुत रिस्क देखा गया है मगर कुछ अति उत्साहित लोगों ने इसे बीमारी की वजह ही बना दिया।

 

यह विवाद 1990 में डॉक्टर एलियट ग्रुप की एक रिसर्च से शुरू हुआ था। इसमें डायबिटीज और दिल की बीमारियों से होने वाली मौतों को उन लोगों के खान-पान से जोड़कर देखा गया था। इन सर्वेक्षणों में दिल की बीमारियों और A1 बीटा केसीन के बीच में काफी गहरा संबंध देखा गया था।

 

भारत इस रिसर्च का हिस्सा नहीं था इसलिए इसे लागू करने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। इस तरह के क्षेत्र विशेष पर आधरित सर्वेक्षण की प्रमाणिकता पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। और इस स्टडी में यह भी माना गया कि हर व्यक्ति पर बीटा केसीन की समान मात्रा मिली जो कि किसी भी तरह मुमकिन नहीं है।

 

इस तरह के सर्वेक्षणों में सबसे बड़ी दिक्कत इनके विवेचन में आती है इंडस्ट्री, मीडिया और वैज्ञानिक इसमें अपने हिसाब से बदलाव कर लेते हैं। इसे लोगों के बीच आधी-अधूरी और कई मामलों में गलत जानकारी जाती है। इसके विपरीत चावल या गेहूं का ग्लाइसेमिक इंडेक्स दूध से कहीं अधिक होता है पर उस पर किसी का ध्यान नहीं जाता इस सब में एक्सपर्ट्स की बात भी कोई नहीं सुनता।

 

कारण और आशंका को बीमारी के साथ जोड़ कर देखने का एक तयशुदा तरीका होता है जिसे मिल्स कॅनन्स भी कहते हैं । जैसे फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया में औसत A1 बीटा केसिन का सेवन 0.3 ग्राम प्रतिदिन होता है, जबकि इन जगहों में दिल की बीमारियो से होने वाली मौतो में बड़ा अंतर है फ्रांस में 88% और ऑस्ट्रेलिया में 33%। और तो और अमेरिका और युरोप में पिछले दशक से अब तक A1 बीटा केसिन के सेवन में कोई बदलाव नहीं आया, जबकि दिल के रोगों से होने वाली मौतें बहुत कम हो गई हैं।

 

डाइयबिटीज़ जैसी बीमारियां काफ़ी जटिल होती हैं और इनकी कोई एक वजह नही होती। यह कहा जाता है कि जिन बच्चों को इन्फेंट फ़ॉर्मूला (जैसे सेरेलेक) दिया जाता है उनमे डाइयबिटीज़ की आशंका बढ़ जाती हैं, जबकि ज़्यादातर इन्फेंट फॉर्मुलास में वेह प्रोटीन इस्तेमाल होता है और केसिन की बहुत कम मात्रा होती है, तो इसका कोई भी ठोस प्रमाण अभी तक नही मिला है

भारतीय संदर्भों में A1 दूध

हमें अपनी भारतीय गायों की नस्लें बचानी चाहिए पर ऐसा नहीं है की बाहरी नस्लों को बिल्कुल ख़त्म कर दें। A1 दूध और बीमारियों के संबंध की अवधारणा विदेशों में की गई रिसर्च और सर्वे पर आधारित है इसे भारत पर लागू करना ठीक नहीं है।

 

काफी गहन रिसर्च के बाद डॉक्टर ट्रेसर और यूरोपियन फूड सेफ्टी अथॉरिटी ने 2009 में यह प्रकाशित किया कि A1 दूध हर तरह से सेफ है और इसे पीया जा सकता है इसलिए आज योरोपीय देश अमेरिका कनाडा तथा अफ्रिका के देश भारतीय गायो को बड़े संख्या में अपने यहां पाल रहे हैं एक अफ्रीकी देश उरुग्वे की अर्थ व्यवस्था तो भारतीय गायों पर ही टिकी है वहां प्रतिएक परिवार को कमसे कम दो भारतीय नस्ल की गाय पालना आवश्यक है यह देश भारतीय नस्ल की गायों का बीटा केसीन प्रोटीन युक्त दूध और मक्खन योरोप और अमेरिकी देशों में ऊंचे दामों पर निर्यात करता है तथा गायों से प्राप्त गोबर से आर्गेनिक फूड सब्जी उगाता है जिसकी मांग योरोपीय और गल्फ देशों में है और ऊंचे दामों पर निर्यात करता है भारतीय नस्ल की गायें भी किसी विदेशी नस्ल से कम दूध नहीं देती परंतु भारत में विदेशी नस्ल को पालने का भूत सवार है मेरा मानना है हमें देशीगाय की नस्लों में सुधार करना होगा पसुपालको में देशी नस्ल की गायों की उपयोगिता बतानी होगी ।

यशपाल सिंह आयुर्वेद रत्न ,983734253

THE COW IS A WONDERFUL LABORATORY ” के अनुसार प्रकृति ने समस्त जीव-जंतुओं और सभी दुग्धधारी जीवों में केवल गाय ही है जिसे ईश्वर ने 180 फुट (2160 इंच ) लम्बी आंत दी है जो की एनी पशुओ में ऐसा नहीं है जिसके कारण गाय जो भी खाती-पीती है गाय शाकाहारी है वनस्पति खाती है लम्बी आंत होने से वनस्पति के सुक्षम औषधिय और जीवन उपयोगी तत्व गाय के दूध में आ जाते हैं इससे वह अधिक  स्वास्थ्य के लिए  उपयोगी और सुपाच्य बनता है |

 

*लाभ :-  जिस प्रकार दूध से मक्खन निकालने वाली मशीन में जितनी अधिक गरारियां लगायी जाती है उससे उतना ही  मक्खन निकलता है , इसीलिये गाय का दूध सर्वोत्तम है |

 

*गो वात्सल्य :-  गौ माता बच्चा जनने के 18 घंटे तक अपने बच्चे के साथ रहती है और उसे चाटती है इसीलिए वह लाखो बच्चों में भी वह अपने वच्चे को पहचान लेती है जवकि भैंस और जरसी अपने बच्चे को नहीं पहचान पायेगी | गाय जब तक अपने बच्चे को अपना दूध नहीं पिलाएगी तब तक दूध नहीं देती है , जबकि भैस , जर्सी होलिस्टयन के आगे चारा डालो और दूध दुह लो | बच्चो में क्रूरता इसीलिए बढ़ रही है क्योकि जिसका दूध पी रहे है उसके अन्दर ममता नहीं है |

 

*खीस :- बच्चा देने के बाद  गाय के स्तन से जो दूध निकलता है उसे खीस, चाका, पेवस, कीला कहते है , इसे तुरंत गर्म करने पर फट जाता है | बच्चा देने के 15 दिनों तक इसके दूध में प्रोटीन की अपेक्षा खनिज तत्वों की मात्रा अधिक होती है , लेक्टोज , वसा ( फैट ) एवं पानी की मात्रा कम होती है | खीस वाले दूध में एल्व्युमिन दो गुनी , ग्लोव्लुलिन 12-15 गुनी तथा एल्युमीनियम की मात्रा 6 गुनी अधिक पायी जाती है | लाभ:- खीज में भरपूर खनिज है यदि काली गौ का दूध ( खीझ) एक हफ्ते पिला देने से वर्षो पुरानी टीबी ख़त्म हो जाती है |

 

*सींग :- गाय की सींगो का आकर सामान्यतः पिरामिड जैसा होता है , जो कि शक्तिशाली एंटीना की तरह आकाशीय उर्जा ( कोस्मिक एनर्जी ) को संग्रह करने का कार्य सींग करते है|

 

*गाय का ककुद्द ( ढिल्ला ) :या थम्ब या ठांठ  गाय के कुकुद्द में सूर्यकेतु नाड़ी होती है जो सूर्य से अल्ट्रावायलेट किरणों को रोकती है , गाये के 40 मन दूध में लगभग 10 ग्राम सोना पाया जाता है जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढती है इसलिए गाय का घी हलके पीले रंग का होता है |

 

*गाय का दूध :-*  गाय के दूध के अन्दर जल 87 % वसा 4 %, प्रोटीन 4% , शर्करा 5 % , तथा अन्य तत्व 1 से 2 % प्रतिशत पाया जाता है | गाय के दूध में 8 प्रकार के प्रोटीन , 11 प्रकार के विटामिन्स , गाय के दूध में कैरोटिन ,और ट्रिपटोकेननामक प्रदार्थ भैस से दस गुना अधिक होता है | भैस का दूध गर्म करने पर उसके पोषक ज्यादातर ख़त्म हो जाते है परन्तु गाय के दूध के पोषक तत्व गर्म करने पर भी सुरक्षित रहता है गाय का दूध मानसिक शांति और बेहतर नींद को बढ़ाता है।

 

गाय के घी में ओमेगा 3फैटि एसिड होता है जो मस्तिष्क के सोचने की शक्ति और याददाश्त को बढ़ाता है देशी गाय का घी नाक के दोनों नथुनों में कुछ दिन तक डालने से कान का पर्दा बिना आपरेशन के ठीक हो जाता है बारबार होने वाला नजला ज़ुकाम नहीं होता आंखों की रोशनी बढ़ती है मानसिक रोगी को ठीक करता है देशी गाय का घी कुछ लोग आंखों में भी डालते है गाय का दी नाभी में लगाने से चेहरे पर कांति आती है होंठ फटना ठीक होते हैं

 

गाय की दही में प्रोबायोटिक्स होते हैं जो आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ा थे हैं हाजमे को दुरुस्त करते हैं मानसिक स्थिति को मजबूत बनाने में सहायक है।

 

*गाय का गोमूत्र : गाय के मूत्र में आयुर्वेद का खजाना है , इसके अन्दर कार्बोलिक एसिड होता है जो कीटाणु नासक है , गौ मूत्र चाहे जितने दिनों तक रखे ख़राब नहीं होता है इसमें कैसर को रोकने वाली करक्यूमिन पायी जाती है | गौ मूत्र में नाइट्रोजन ,फास्फेट, यूरिक एसिड , पोटेशियम , सोडियम , लैक्टोज , सल्फर, अमोनिया, लवण रहित विटामिन ए वी सी डी ई , इन्जैम आदि तत्व पाए जाते है | देसी गाय के गोबर-मूत्र-मिश्रण से प्रोपिलीन ऑक्साइड उत्पन्न होती है जो बारिस लाने में सहायक होती है | इसी के मिश्रण से इथिलीन ऑक्साइड गैस निकलती है जो ऑपरेशन थियटर में काम आता है |

 

*गौ मूत्र में मुख्यतः* 16 खनिज तत्व पाये जाते है जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढाता है कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है बहुत सारी आयुर्वेदिक दवाओं को शुद्ध करने में गऊ मूत्र का प्रयोग किया जाता है|

 

*गाय का शरीर : गाय के शरीर से पवित्र गुग्गल जैसी सुगंध आती है जो वातावरण को शुद्ध और पवित्र करती है | जननी जनकार दूध पिलाती , केवल साल छमाही भर | गोमाता पय-सुधा पिलाती , रक्षा करती जीवन भर ।

यशपाल सिंह आयुर्वेद रत्न 9837342534

07/01/2025, 8:27 am - Yashpal S Barampur: (१२१)

*गाय का दूध*

*आयुर्वेद सरल चिकित्सा*

मानव द्वारा पीने में प्रयोग किये जाने वाले दुध गाय के दूध को आयुर्वेद और सनातन वांग्मय में सर्वोत्तम बताया गया है जिसमें मानव शरीर के लिए पोषक तत्व समुचित और संतुलित मात्रा में होते हैं इसके अलावा  भैंस और बकरी का दूध भी प्रयोग किया जाता है रेगिस्तानी क्षेत्रों में रहने वाले लोग ऊंटनी के दूध को भी इसते माल किया जाता है उच्च हिमालई क्षेत्र में रहने वाले याक का दूध प्रयोग करते हैं गधी का शेरनी का तथा भेड़ का दूध भी औषधीय गुणों के कारण विभिन्न रोगों की चिकित्सा में प्रयोग किया जाता है।

*-------------------------------*

गाय के दूध के विषय में एक बादशाह अकबर और बीरबल की एक कहानी मशहूर है एक बार अकबर बादशाह ने बीरबल से पूछा बीरबल बताओ सेहत और ताकत के लिए दूध किस पसू का अच्छा है बीरबल ने तपाक से ज़बाब दिया भैंस का बादशाह ने बीरबल से कहा फिर यह हिन्दू गाय की पूजा क्यों करते हैं और वैध रोगी को गाय का दूध क्यों बताते हैं बीरबल ने जबाव दिया हुजुर गाय दूध नहीं होता यह तो अमृत है औषधि है आपने दूध के बारे में पूछा तो दूध तो भैंस का अच्छा है लेकिन गाय का दूध अमृत समान है।

 

गाय का दूध बच्चों और बूढों के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। इसका दूध बच्चों को जल्दी पच जाता है। गाय का दूध पीने से हमारे शरीर को बीमारियों से लड़ने की शक्ति मिलती है। गाय के दूध का सेवन करने से हमारी सेहत ठीक रहती है। गाय का दूध पीला होता है और सोने जैसे गुणों से युक्त होता है। केवल गाय के दूध में ही विटामिन ए होता है, किसी अन्य पशु के दूध में नहीं।

 

*गाय का दूध अत्यंत स्वादिष्ट, स्निग्ध, मुलायम, चिकनाई से युक्त, मधुर, शीतल, रूचिकर, बुद्धिवर्धक, बलवर्धक, स्मृतिवर्धक, जीवनदायक, रक्तवर्धक, वाजीकारक, आयुष्यकारक एवं सर्वरोग को हरनेवाला है।*

 

*आंख की समस्या*

अगर आप की आंख में दर्द, जलन, आंख में कोई कीड़ा या तिनका गिर गया हो तो आप गाय के दूध में रुई भिगोकर अपनी आँख पर रखें या आप दूध की 3 बूंदे अपनी आखोँ में भी डाल सकते हैं। आप को इससे राहत मिलती है।

 

*होठों का कालापन*

कच्चे दूध का एक चम्मच लें और उसमे थोडा सा केसर मिलाकर अपने होठों पर लगायें। ऐसा करने से आपके होठों का कालापन दूर हो जाता है।

 

*बवासीर और गैस में*

250 ग्राम गाय का दूध, 250 पानी, 5 कालीमिर्च डालकर इसे उबालें। जब पानी सूख जाये तब इसे छान लें। इसमे मिश्री मिलाकर पीने से गैस से राहत मिलती है। गर्म दूध में ईसबगोल मिलाकर पीने से कब्ज की समस्या दूर होती है। जिन लोगो को बबासीर की शिकायत होती है उन्हें भी इसका सेवन करना चाहिए।

दुध में कैल्शियम की मात्रा काफी होती हैए जिन लोगो को कैल्शियम की कमी होती है । उन्हें रात को सोने से पहले दूध का सेवन करना चाहिए। इससे हमारी हड्डिया मजबूत होती हैं ।

 

*चेहरे की समस्या में*

चेहरे पर कील, मुहासे, झाई, दाद. धब्बे हटाने के लिए रात को सोने से पहले गाय के दूध को चेहरें पर मलें। फिर आधे घंटे के बाद अपना चेहरा साफ़ पानी से धो लें। ऐसा करने से आप का चेहरा साफ़ हो जाता है।

 

*बच्चों को दस्त लगने पर*

गर्म दूध में चुटकी भर दालचीनी का प्रयोग करने से बच्चों को दस्त से राहत मिलती है। बड़ों को दस्त होने पर इसकी मात्रा दुगनी कर दें।

 

*दमा और फेफड़ों के लिए*

दूध में पीपल के पत्ते डालकर गर्म करें। फिर इसमें शक्कर मिलाकर इसका सेवन करें। इसको पीने से दमाए फेफडो की बीमारी से राहत मिलती है। इसका इस्तेमाल लगातार कुछ दिनों तक करना चाहिए।

 

*माइग्रेन में*

सुबह सूर्य उगने से पहले गर्म दूध के साथ जलेबी या रबड़ी का सेवन करने से आपका आधे सिर का दर्द ठीक हो जाता है।

आधे सिर का दर्द ठीक करने के लिए दूध में बादाम मिलाकर पियें। फिर 2 घंटे तक कुछ न खाएं। बादाम वाला दूध पीने से आपका आधे सिर का दर्द ठीक हो जाता है।

 

*कभी नहीं होगा कैंसर*

देसी गाय की पीठ पर मोटा सा हम्प होता है ! जिसमे सूर्यकेतु नाड़ी होती हैं, जो सूर्य की किरणों के संपर्क में आते ही अपने दूध में स्वर्ण का प्रभाव छोड़ती हैं। जिस कारण गाय के दूध में स्वर्ण तत्व समा जाते हैं। देसी गाय का दूध पीने से कभी भी कैंसर का रोग नहीं होगा।

 

गाय के दूध में कई औषधीय गुण होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। यहाँ कुछ गाय के दूध के औषधीय गुण हैं:

 

1. _प्रोटीन_: गाय के दूध में उच्च मात्रा में प्रोटीन होता है जो शरीर के लिए आवश्यक है।

2. _कैल्शियम_: गाय के दूध में कैल्शियम होता है जो हड्डियों के लिए आवश्यक है।

3. _विटामिन_: गाय के दूध में विटामिन ए, विटामिन बी, और विटामिन सी होते हैं जो शरीर के लिए आवश्यक हैं।

4. _मिनरल्स_: गाय के दूध में मिनरल्स जैसे कि पोटैशियम, मैग्नीशियम, और फॉस्फोरस होते हैं जो शरीर के लिए आवश्यक हैं।

5. _एंटीऑक्सीडेंट_: गाय के दूध में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं।

6. _इम्यून सिस्टम_: गाय के दूध में इम्यून सिस्टम को मजबूत करने वाले तत्व होते हैं।

7. _पाचन_: गाय के दूध में पाचन को सुधारने वाले तत्व होते हैं।

8. _त्वचा और बाल_: गाय के दूध में त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद तत्व होते हैं।

9. _हृदय स्वास्थ्य_: गाय के दूध में हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद तत्व होते हैं।

10. _मानसिक स्वास्थ्य_: गाय के दूध में मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद तत्व होते हैं।

 

गाय के दूध के औषधीय गुणों के कारण, यह कई स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में उपयोग किया जा सकता है, जैसे कि:

 

- हड्डियों की कमजोरी

- पाचन समस्याएं

- त्वचा और बालों की समस्याएं

- हृदय स्वास्थ्य समस्याएं

- मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं

 

यह ध्यान रखें कि गाय के दूध के औषधीय गुणों का लाभ उठाने के लिए, आपको इसे सही तरीके से पीना चाहिए और इसके साथ-साथ स्वस्थ आहार और जीवनशैली का पालन करना चाहिए।

*दूध और गुड*

*आयुर्वेद सरल चिकित्सा*

 

*भारत गांव में बसता है और ग्रामीण भारत में दुध और गुड़ आ आहार ही नही औषधि भी है*

 

*----------------------------*

 

*सर्दियों में गर्म दूध और गुड़ खाने के चमत्कार।

गर्म दूध के साथ गुड खाना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

इन दोनो के मिलाकर पीने से सेहत के लिए किसी वरदान से कम नही है।

गंभीर से गंभीर बीमारियों के सही कर देता है।

 

जानिए इन दोनों चीजों का सेवन से फायदे..

 

*शरीर में अशुद्ध खून को साफ़ करता है -*

रोजाना गर्म दूध और गुड का सेवन करने से आपके शरीर से अशुद्धियां निकल जाती है। जिससे आपको कोई बीमारी नहीं होगी।

 

*मोटापा को करें कंट्रोल -*

अगर आप दूध के साथ चीनी का इस्तेमाल करते है तो इसकी जगह आप गुड का इस्तेमाल करें। ऐसा करने से आपका वजन कंट्रोल में रहेगा।

 

*पेट संबंधी समस्या को ठीक करता है -*

अगर आपको पाचन संबधी कोई भी समस्या है तो गर्म-गर्म दूध और गुड साथ में दरदरी पिसी आधा से एक चम्मच हरितकी चूर्ण का सेवन करने से आपको पेट संबंधी हर समस्या से निजात मिल जाता है।

 

*जोड़ो के दर्द को दूर करता है -*

अगर रोजाना गुड़ का  दुध दालचीनी तथाएक छोटा पीस अदरक के साथ मिला कर खाया जाए तो जोड़ों में मजबूती आएगी और दर्द दूर होगा।

 

*खूबसूरती को निखार देता है -*

गर्म दूध और गुड  और साथ में आंवले का मुरब्बे का सेवन करने से आपकी त्वचा मुलायम होने के साथ-साथ त्वचा संबंधी समस्या नहीं होती हैं।

साथ ही इसका सेवन करने से आपके बाल भी हेल्दी रहेगे।

 

*थकान को दूर करता है -*

अगर आप अधिक थक गए है तो थोड़ी देर में गर्म दूध और गुड का सेवन करें।

इससे आपको तुंरत आराम मिलेगा।

*इसके अलावा रोजाना 3 चम्मच गुड़ लें।

इससे आपको कभी थकान नहीं होगी।

*यदि आपकी धारन(महा प्रपाचिरा)नाप अपनी जगह से टल गयी तो आप एक्सरसाइज करने के बाद गरम दूध के साथ गरम गुड़ खालें

*चोट लगने पर हल्का गुड़ डाल कर हल्दी वाला दूध चोट को हरता है दर्द को कम करता है शरीर को शक्ति देता है इन्फेक्शन से बचाता है ।

 


*दूध में घी, तुलसी, दाल चीनी , काली मिर्च, हल्दी, सौंफ, लहसुन डालकर  पीने के  बेहतरीन फायदे*

 

*-------------------------------*

गाय के दूध में गाय का  घी मिलाकर पीने से कई स्वास्थ्य लाभ हैं

 

पाचन में सुधार

1. घी में पाचन में सुधार करने वाले गुण होते हैं।

2. दूध में घी मिलाकर पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है पेट साफ होता है आंतों का जमाव निकल जाता है आधा चम्मच सोंठ पाउडर और मिला लें

3. यह पेट की समस्याओं, जैसे कि अपच, गैस, और पेट दर्द, में राहत प्रदान करता है।

 

इम्यून सिस्टम को मजबूत करना

1. घी में इम्यून सिस्टम को मजबूत करने वाले गुण होते हैं।

2. दूध में घी मिलाकर पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

3. यह शरीर को बीमारियों से लड़ने में मदद करता है।

 

हृदय स्वास्थ्य में सुधार

1. घी में हृदय स्वास्थ्य में सुधार करने वाले गुण होते हैं।

2. दूध में घी मिलाकर पीने से हृदय स्वास्थ्य में सुधार होता है।

3. यह रक्तचाप को नियंत्रित करने और हृदय रोगों को रोकने में मदद करता है।

 

त्वचा और बालों के लिए

1. घी में त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद गुण होते हैं।

2. दूध में घी मिलाकर पीने से त्वचा और बालों का स्वास्थ्य बेहतर होता है।

3. यह त्वचा को चमकदार और बालों को मजबूत बनाने में मदद करता है।

 

मानसिक स्वास्थ्य में सुधार

1. घी में मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करने वाले गुण होते हैं।

2. दूध में घी मिलाकर पीने से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।

3. यह तनाव, चिंता, और अवसाद को कम करने में मदद करता है।

 

दूध में घी मिलाकर पीने के लिए कुछ सुझाव हैं:

 

1. 1 गिलास दूध में 1-2 चम्मच घी मिलाएं।

2. दूध को गरम करें और फिर घी मिलाएं।

3. मिश्रण को अच्छी तरह से मिलाएं और फिर पी लें।

 

तुलसी डालकर

1 दमा के मरीजों के लिए यह उपाय फायदेमंद है। खास तौर से मौसम में बदलाव होने पर होने वाली सांस संबंधी समस्याओं से बचने के लिए दूध और तुलसी का यह मिश्रण बेहद लाभकारी होता है।

 

2 सि‍र में दर्द या माइग्रेन की समस्या होने पर यह उपाय आपको रोहत देगा। जब भी माइग्रेन का दर्द हो आप इसे पी सकते हैं, रोजाना इसका सेवन करने से आपकी समस्या भी खत्म हो सकती है।

 

3 तनाव अगर आपके जीवन का भी अभिन्न अंग बन गया है, तो दूध में तुलसी के पत्तों को उबालकर पिएं, आपका तनाव दूर होगा और धीरे-धीरे तनाव की समस्या ही समाप्त हो जाएगी।

 

4 हृदय की समस्याओं में भी यह लाभदायक है। सुबह खाली पेट इस दूध को पीने से हृदय संबंधी रोगों में लाभ पाया जा सकता है। इसके अलावा यह किडनी में होने वाली पथरी के लिए भी अच्छा उपचार है।

 

5 तुलसी में कैंसर कोशिकाओं से लड़ने का गुण होता है, अत: इसका सेवन आपको कैंसर से बचा सकता है। इसके अलावा सर्दी के कारण होने वाली सेहत समस्याओं में भी यह कारगर है।

 

दूध में दालचीनी मिलाकर पीने से कई स्वास्थ्य लाभ

 

1. *मधुमेह नियंत्रण*: दालचीनी में मधुमेह नियंत्रण में मदद करने वाले गुण होते हैं। दूध में दालचीनी मिलाकर पीने से रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

2. *वजन कम करने में मदद*: दालचीनी में वजन कम करने में मदद करने वाले गुण होते हैं। दूध में दालचीनी मिलाकर पीने से वजन कम करने में मदद मिल सकती है।

3. *हृदय स्वास्थ्य*: दालचीनी में हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने वाले गुण होते हैं। दूध में दालचीनी मिलाकर पीने से हृदय स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।

4. *पाचन में सुधार*: दालचीनी में पाचन में सुधार करने वाले गुण होते हैं। दूध में दालचीनी मिलाकर पीने से पाचन में सुधार हो सकता है।

5. *इम्यून सिस्टम*: दालचीनी में इम्यून सिस्टम को मजबूत करने वाले गुण होते हैं। दूध में दालचीनी मिलाकर पीने से इम्यून सिस्टम में सुधार हो सकता है।

6. *त्वचा और बालों के लिए*: दालचीनी में त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद गुण होते हैं। दूध में दालचीनी मिलाकर पीने से त्वचा और बालों के स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।

7. *मानसिक स्वास्थ्य*: दालचीनी में मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने वाले गुण होते हैं। दूध में दालचीनी मिलाकर पीने से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।

 

यह ध्यान रखें कि दूध में दालचीनी मिलाकर पीने से पहले अपने आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श करना आवश्यक है, खासकर यदि आप किसी भी स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित हैं या किसी भी दवा का सेवन कर रहे हैं।

 

दूध में काली मिर्च मिलाकर पीने से कई स्वास्थ्य लाभ

 

1. _पाचन में सुधार_: काली मिर्च में पाचन में सुधार करने वाले गुण होते हैं। दूध में काली मिर्च मिलाकर पीने से पाचन में सुधार हो सकता है।

2. _इम्यून सिस्टम_: काली मिर्च में इम्यून सिस्टम को मजबूत करने वाले गुण होते हैं। दूध में काली मिर्च मिलाकर पीने से इम्यून सिस्टम में सुधार हो सकता है।

3. _कफ और सर्दी_: काली मिर्च में कफ और सर्दी को दूर करने वाले गुण होते हैं। दूध में काली मिर्च मिलाकर पीने से कफ और सर्दी में राहत मिल सकती है।

4. _मानसिक स्वास्थ्य_: काली मिर्च में मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने वाले गुण होते हैं। दूध में काली मिर्च मिलाकर पीने से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।

5. _वजन कम करने में मदद_: काली मिर्च में वजन कम करने में मदद करने वाले गुण होते हैं। दूध में काली मिर्च मिलाकर पीने से वजन कम करने में मदद मिल सकती है।

6. _हृदय स्वास्थ्य_: काली मिर्च में हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने वाले गुण होते हैं। दूध में काली मिर्च मिलाकर पीने से हृदय स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।

7. _त्वचा और बालों के लिए_: काली मिर्च में त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद गुण होते हैं। दूध में काली मिर्च मिलाकर पीने से त्वचा और बालों के स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।

 

इसके अलावा, दूध में काली मिर्च मिलाकर पीने के लिए कुछ सुझाव हैं:

 

- दूध में 1/4 चम्मच काली मिर्च पाउडर मिलाएं।

- दूध को गरम करें और फिर काली मिर्च पाउडर मिलाएं।

- दूध में काली मिर्च पाउडर मिलाकर रात में पीने से अधिक लाभ हो सकते हैं।

 

दूध और हल्दी मिलाकर पीने के स्वस्थ लाभ

 

1. _जोड़ों के दर्द में राहत_: हल्दी में कुरकुमिन नामक यौगिक होता है, जो जोड़ों के दर्द में राहत दिलाने में मदद करता है।

2. _इम्यून सिस्टम को मजबूत करना_: हल्दी में इम्यून सिस्टम को मजबूत करने वाले गुण होते हैं, जो शरीर को बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं।

3. _एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण_: हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो शरीर में सूजन को कम करने में मदद करते हैं।

4. _मानसिक स्वास्थ्य में सुधार_: हल्दी में मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करने वाले गुण होते हैं, जो तनाव, चिंता, और अवसाद को कम करने में मदद करते हैं।

5. _हृदय स्वास्थ्य में सुधार_: हल्दी में हृदय स्वास्थ्य में सुधार करने वाले गुण होते हैं, जो रक्तचाप को नियंत्रित करने और हृदय रोगों को रोकने में मदद करते हैं।

6. _कैंसर को रोकना_: हल्दी में कैंसर को रोकने वाले गुण होते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने में मदद करते हैं।

7. _त्वचा और बालों के लिए_: हल्दी में त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद गुण होते हैं, जो त्वचा को चमकदार और बालों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

 

दूध में हल्दी मिलाकर पीने के लिए कुछ सुझाव हैं:

 

- दूध में 1/2 चम्मच हल्दी पाउडर मिलाएं।

- दूध को गरम करें और फिर हल्दी पाउडर मिलाएं।

- दूध में हल्दी पाउडर मिलाकर रात में पीने से अधिक लाभ हो सकते हैं।

 

यह ध्यान रखें कि दूध में हल्दी मिलाकर पीने से पहले अपने आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए यदि आप पेट आंत्र रोगों से पीड़ित हैं

 

दूध और सौंफ मिलाकर पीने से कई स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं। यहाँ कुछ प्रमुख लाभ हैं:

 

पाचन में सुधार

सौंफ में पाचन में सुधार करने वाले गुण होते हैं, जो दूध के साथ मिलाकर पीने से पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करते हैं बवासीर को ठीक करता है ।

 

गैस और अपच में राहत

सौंफ में गैस और अपच को दूर करने वाले गुण होते हैं, जो दूध के साथ मिलाकर पीने से पेट की समस्याओं में राहत मिलती है।

 

इम्यून सिस्टम को मजबूत करना

दूध और सौंफ दोनों में इम्यून सिस्टम को मजबूत करने वाले गुण होते हैं, जो शरीर को बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं।

 

हृदय स्वास्थ्य में सुधार

दूध और सौंफ दोनों में हृदय स्वास्थ्य में सुधार करने वाले गुण होते हैं, जो रक्तचाप को नियंत्रित करने और हृदय रोगों को रोकने में मदद करते हैं।

 

त्वचा और बालों के लिए

दूध और सौंफ दोनों में ऐसे तत्व होते हैं जो बाल और त्वचा को स्वस्थ चमकदार बनाते हैं

 

दूध और लहसुन का मिश्रण के स्वास्थ्य लाभ

 

हृदय स्वास्थ्य

1. *कोलेस्ट्रॉल कम करना*: लहसुन में एलिसिन नामक यौगिक होता है, जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।

2. *रक्तचाप नियंत्रण*: लहसुन रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा कम होता है।

3. *हृदय रोगों से बचाव*: दूध और लहसुन का मिश्रण हृदय रोगों से बचाव में मदद कर सकता है।

 

पाचन तंत्र

1. *पाचन में सुधार*: लहसुन में पाचन में सुधार करने वाले गुण होते हैं।

2. *गैस और अपच में राहत*: दूध और लहसुन का मिश्रण गैस और अपच में राहत प्रदान कर सकता है।

3. *पाचन तंत्र को मजबूत बनाना*: दूध और लहसुन का मिश्रण पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है।

 

इम्यून सिस्टम

1. *इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाना*: लहसुन में इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने वाले गुण होते हैं।

2. *बीमारियों से लड़ने में मदद*: दूध और लहसुन का मिश्रण बीमारियों से लड़ने में मदद कर सकता है।

3. *शरीर को स्वस्थ बनाना*: दूध और लहसुन का मिश्रण शरीर को स्वस्थ बनाने में मदद कर सकता है।

 

अन्य लाभ

1. *त्वचा और बालों के लिए*: दूध और लहसुन का मिश्रण त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

2. *मानसिक स्वास्थ्य में सुधार*: दूध और लहसुन का मिश्रण मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद कर सकता है।

3. *नींद में सुधार*: दूध और लहसुन का मिश्रण नींद में सुधार करने में मदद कर सकता है।

 

दूध और लहसुन का मिश्रण बनाने के लिए:

 

1. 1 गिलास दूध में 2-3 लहसुन की कलियाँ मिलाएं।

2. दूध को गरम करें और फिर लहसुन की कलियाँ मिलाएं।

3. मिश्रण को अच्छी तरह से मिलाएं और फिर पी लें।

 

यह ध्यान रखें कि दूध और लहसुन का मिश्रण बनाने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है, खासकर यदि आप किसी भी स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित हैं या किसी भी दवा का सेवन कर रहे हैं।

 

कुछ रोगों में दूध का निषेध करना चाहिए

1, यदि कफ अधिक बनरहा है कफ वाली खांसी में दूध नहीं पीना चाहिए।

2,पेट ख़राब बार बार शौच होना संगहणी रोग हैजा पेट में दर्द

3, जोड़ों का दर्द सूजन यूरिक एसिड बढ़ा होतो दूध में हल्दी लहसुन दालचीनी पाउडर चिकित्सक की सलाह से मिलाकर पिएं

4, ह्रदय रोगी या जिनका ट्राईकरोसाईड बढ़ा है LDLबढा है या डाइबिटीज है वह दूध ना पीयें पीना ही यदि चाहते हैं टोंड नोन फेट दूध ले सकते हैं।

5, थायराइड या गले के रोगी तथा वह व्यक्ति जिनके शरीर में गांठें पड़ गई है ऐसे व्यक्ति दूध या दूध से बने आहार का सेवन ना करें।

 

*दूध और ब्रह्मचर्य *

काम शास्त्र के विद्वान महॠषि वात्सायन ने कामसूत्र में दूध के विषय में विस्तार से लिखा है और जैन साधू का दूध के विषय में मत है

 

दूध असल में अत्‍यधिक कामोत्तेजक आहार है और मनुष्‍य को छोड़कर पृथ्‍वी पर कोई पशु इतना कामवासना से भरा हुआ नहीं है। और उसका एक कारण दूध है। क्‍योंकि कोई पशु बचपन के कुछ समय के बाद दूध नहीं पीता, सिर्फ आदमी को छोड़ कर। पशु को जरूरत भी नहीं है। शरीर का काम पूरा हो जाता है। सभी पशु दूध पीते है अपनी मां का, लेकिन दूसरों की माताओं का दूध सिर्फ आदमी पीता है और वह भी आदमी की माताओं का नहीं जानवरों की माताओं का भी पीता है।

 

      दूध बड़ी अदभुत बात है, और आदमी की संस्‍कृति में दूध ने न मालूम क्‍या-क्‍या किया है, इसका हिसाब लगाना कठिन है। बच्‍चा एक उम्र तक दूध पिये,ये नैसर्गिक है। इसके बाद दूध समाप्‍त हो जाना चाहिए। सच तो यह है, जब तक मां का स्‍तन से बच्‍चे को दूध मिल सके, बस तब तक ठीक है। उसके बाद दूध की आवश्‍यकता नैसर्गिक नहीं है। बच्‍चे का शरीर बन गया। निर्माण हो गयादूध की जरूरत थी, हड्डी थी, खून था, मांस बनाने के लिएस्‍ट्रक्‍चर पूरा हो गया, ढांचा तैयार हो गया। अब सामान्‍य भोजन काफी है। अब भी अगर दूध दिया जाता है तो यह सार दूध कामवासना का निर्माण करता है। अतिरिक्‍त है। इसलिए वात्‍सायन ने काम सूत्र में कहा है कि हर संभोग के बाद पत्‍नी को अपने पति को दूध पिलाना चाहिए। ठीक कहा है।

 

    दूध संपूर्ण आहार है यह आयुर्वेद कहता है   दूध जिस बड़ी मात्रा में वीर्य बनाता है, और कोई चीज नहीं बनाती। क्‍योंकि दूध जिस बड़ी मात्रा में खून बनाता है और कोई चीज नहीं बनाती। खून बनता है, फिर खून से वीर्य बनता है। तो दूध से निर्मित जो भी है, वह कामोतेजक है। इसलिए महावीर ने कहा है,वह उपयोगी नहीं है। खतरनाक है, कम से कम ब्रह्मचर्य के साधक के लिए खतरनाक है। ठीक से,काम सुत्र में और महावीर की बात में कोई विरोध नहीं है। भोग के साधक के लिए सहयोगी है, तो योग के साधक के लिए अवरोध है। फिर पशुओं का दूध है वह, निश्‍चित ही पशुओं के लिए,उनके शरीर के लिए, उनकी वीर्य ऊर्जा के लिए जितना शक्‍ति शाली दूध चाहिए। उतना पशु मादाएं पैदा करती है।

 

      जब एक गाए दूध पैदा करती है तो आदमी के बच्‍चे के लिए पैदा नहीं करती, सांड के लिए पैदा करती है। ओर जब आदमी का बच्‍चा पिये उस दूध को और उसके भीतर सांड जैसी कामवासना पैदा हो जाए, तो इसमें कुछ आश्‍चर्य नहीं है। वह आदमी का आहार नहीं है सनातन वांग्मय और जैन विद्वानों ने तो पहले ही बता दिया इस पर अब आधुनिक वैज्ञानिक भी काम कर रहे है और आज नहीं कल हमें समझना पड़ेगा कि अगर आदमी में बहुत सी पशु प्रवृतियां है तो कहीं उनका कारण पशुओं का दूध तो नहीं है। अगर उसकी पशु प्रवृतियों को बहुत बल मिलता है तो उसका करण पशुओं का आहार तो नहीं है।

 

      आदमी का क्‍या आहार है, यह अभी तक ठीक से तय नहीं हो पाया है, लेकिन वैज्ञानिक हिसाब से अगर आदमी के पेट की हम जांच करें, जैसाकि वैज्ञानिक किये है। तो वह कहते है , आदमी का आहार शाकाहारी ही हो सकता है। क्‍योंकि शाकाहारी पशुओं के पेट में जितना बड़ा (आहार नाल) इंटेस्‍टाइन की जरूरत होती है, उतनी बड़ी इंटेस्टाइन आदमी के भीतर है। मांसाहारी जानवरों की इंटेस्‍टाइन छोटी और मोटी होती है। जैसे शेर, बहुत छोटी होती है। क्‍योंकि मांस पचा हुआ आहार है, अब बड़ी इंटेस्‍टाइन की जरूरत नहीं है। पचा-पचाया है, तैयार है। भोजन। उसने ले लिया, वह सीधा का सीधा शरीर में लीन हो जायेगा। बहुत छोटी पाचन यंत्र की जरूरत है।

 

      इसलिए बड़े मजे की बात है कि शेर चौबीस घंटे में एक बार भोजन करता है। काफी है। बंदर शाकाहारी है, देखा आपने उसको। दिन भर चबाता  रहता है। उसका इंटेस्‍टाइन बहुत लंबी है। और उसको दिन भर भोजन चाहिए। इसलिए वह दिन भर चबाता रहता है।

 

      आदमी की भी बहुत मात्रा में एक बार एक बार खाने की बजाएं, छोटी-छोटी मात्रा में बहुत बार खाना उचित है। वह बंदर का वंशज है। और जितना शाकाहारी हो भोजन उतना कम उतना कम कामोतेजक हे। जितना मांसाहारी हो उतना कामोतेजक होता जाएगा।

 

दूध मांसाहार का हिस्‍सा है। दूध मांसाहारी है, क्‍योंकि मां के खून और मांस से निर्मित होता है। शुद्धतम मांसाहार है। इसलिए जैनी, जो अपने को कहते है हम गैर-मांसाहारी है, कहना नहीं चाहिए, जब तक वे दूध न छोड़ दे।

 

      केव्‍कर ज्‍यादा शुद्ध शाकाहारी है क्‍योंकि वे दूध नहीं लेते। वे कहते है, दूध एनिमल फूड हे। वह नहीं लिया जा सकता। लेकिन दूध तो हमारे लिए पवित्रतम है, पूर्ण आहार है। सब उससे मिल जाता है, लेकिन बच्‍चे के लिए, और वह भी उसकी अपनी मां का। दूसरे की मां का दूध खतरनाक है। और बाद की उम्र में तो फिर दूध-मलाई और धी और ये सब और उपद्रव है। दूध से निकले हुए। मतलब दूध को हम और भी कठिन करते चले जाते है, जब मलाई बना लेते है। फिर मक्खन बना लेते है। फिर घी बना लेते है। तो घी शुद्धतम कामवासना हो जाती है। और यह सब अप्राकृतिक है और इनको आदमी लिए चला जाता है। निश्‍चित ही, उसका आहार फिर उसके आचरण को प्रभावित करता है।

      तो तीर्थ कर महावीर ने कहा है, सम्‍यक आहार,शाकाहारी,बहुत पौष्‍टिक नहीं केवल उतना जितना शरीर को चलाता है। ये सम्‍यक रूप से सहयोगी है उस साधक के लिए, जो अपनी तरफ आना शुरू हुआ।

 

      शक्‍ति की जरूरत है, दूसरे की तरफ जाने के लिए शांति की जरूरत है, स्‍वयं की तरफ आने के लिए। अब्रह्मचारी,कामुक शक्‍ति के उपाय खोजेगा। कैसे शक्‍ति बढ़ जाये। शक्‍ति वर्द्धक दवाइयां लेता रहेगा। कैसे शक्‍ति बढ़ जाये। ब्रह्मचारी का साधक कैसे शक्‍ति शांत बन जाए,इसकी चेष्‍टा करता रहेगा। जब शक्‍ति शांत बनती है तो भीतर बहती है। और जब शांति भी शक्‍ति बन जाती है तो बाहर बहनी शुरू हो जाती है साथ यह है गृहस्थ के लिए दूध उपयोगी है पुष्टिकारक आहार है और संन्यासी ब्रह्मचारी के लिए निशेध है।

*दूध के उपयोगी बाहरी प्रयोग और दूध के साथ क्या न खाएं*

आयुर्वेद सरल चिकित्सा*

*-----------------------*

दूध एक पौष्टिक आहार के साथ साथ बेहतरीन सफाई करने वाला भी है आर्गेनिक गुड बनाने में गन्ने के रस को साफ़ करने के लिए दूध का प्रयोग किया जाता है साथ ही शरीर की किसी भी स्थान की त्वचा को साफ करने के लिए दूध एक अच्छा विकल्प है यह त्वचा का प्राकृतिक सफ़ाई करता है ।

कच्चा दूध चेहरे या हाथ पैरों पर लगाने से सांवला रंग गोरा हो जाता है।

आंखों के निचे यदि काले धब्बों पर कच्चे दूध में रुई भिगोकर रखने से दाग़ धब्बे मिट जाते हैं।

कच्चे दूध में नींबू का रस और मसूर की दाल का चूर्ण मिलाकर लायें और एक घंटे बाद साफ़ पानी से धूल दें इससे चेहरे के दाग़ धब्बे कील मुहांसे साफ़ होते हैं ।

 दूध में केसर मिलाकर चेहरे पर मसाज करने से चेहरे पर कांति आती है झूरीयां ठीक होती हैं

दूध में जायफल का चूर्ण मिलाकर चेहरे पर लगाने से झाइयां खतम होती हैं निखार आता है।

दूध में चिरौंजी का चूर्ण मिलाकर लगाने से रंग गोरा होता है।

 

दूध एक पौष्टिक आहार है, लेकिन इसके साथ कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए। यहाँ कुछ खाद्य पदार्थ हैं जिनका सेवन दूध के साथ नहीं करना चाहिए:

 

1. *नमकीन खाद्य पदार्थ*: दूध के साथ नमकीन खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि नमक दूध के पाचन में बाधा डाल सकता है।

2. *मसालेदार खाद्य पदार्थ*: दूध के साथ मसालेदार खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि मसाले दूध के पाचन में बाधा डाल थे हैं।

3. *अम्लीय खाद्य पदार्थ*: दूध के साथ अम्लीय खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि अम्ल दूध के पाचन में बाधक है।

4. *कॉफी और चाय*: दूध के साथ कॉफी और चाय का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि कैफीन दूध के पाचन में बाधा डाल सकता है।

5. *अल्कोहल*: दूध के साथ अल्कोहल का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि अल्कोहल दूध के पाचन में बाधा डाल सकता है।

6. *फिश और मांस*: दूध के साथ फिश और मांस का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह पाचन में बाधा डाल सकता है।

7. *बीन्स और दालें*: दूध के साथ बीन्स और दालों का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह पाचन में बाधा डाल सकता है।

8, सब्ज़ियां मूली,सलजम,कटहल करेला भिंडी की सब्जी दूध के साथ नहीं खाना चाहिए

 *साइट्रस फल*: दूध के साथ दही  नींबू खट्टे आम अमरूद हो सके तो सभी  फलों का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि सभी फलों में साइट्रस  होता है फल दूध के पाचन में बाधा डाल सकते हैं।

यह खाद्य पदार्थ दूध के साथ लेने से आंतों में विष बनता है जिससे त्वचा पर सफेद दाग त्वचा डिज़ीज़ कुष्ठ रोग बवासीर और यहां तक की मृत्यु भी हो सकती है।

 

यह ध्यान रखें कि हर व्यक्ति की पाचन क्षमता अलग-अलग होती है, इसलिए कुछ लोगों को दूध के साथ कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन करने में कोई समस्या नहीं हो सकती है परन्तु पाचनतंत्र को प्रभावित अवश्य करता है। लेकिन यदि आपको पाचन संबंधी समस्याएं हैं, तो दूध के साथ इन खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए।

यशपाल सिंह आयुर्वेद रत्न  9837342534


Comments

Popular posts from this blog

अरंडी का तेल

धतूरा

तिल का तेल