नमक*


 

,नमक हमारे भोजन का मुख्य घटक है नमक स्वाद और स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है स्वास्थ्य के लिए सबसे उपयोगी नमक सेंधा नमक होता है सेंधा नमक :  शरीर के लिए Best Alkalizer है :-

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  ज्यादा तर खाने की चीजों में नमक होता है खाने में नमक कम होतो स्वाद नहीं आता और ज्यादा होजाये तो खाना खाया नहीं जा सकता आधुनिक नमक का इतिहास भारत मेंतो हजारों वर्ष पुराना है परंतु शेष दुनिया में 1000साल से अधिक नहीं है हमारे पूर्वज कच्ची सब्जियां कंद मूल फल खाते थे पका भोजन कम ही खाते थे जिससे नमक कम खाया जाता था आयुर्वेद भी यही कहता है नमक का खाने में प्रयोग कम से कम करें और स्वस्थ रहें।

 

आज आधुनिक शोध जो भारत तथा अमेरिका योरोपीय देशों में हुऐ हैं उन का निश्कर्श  यह है खाने के उपर से कच्चा नमक स्वास्थ के लिए हानी कारक है इससे आयु कम होती है जो व्यक्ति खाना पकाने के बाद उपर से नमक डालकर खाते हैं ऐसे पुरुषों की 2से3, वर्ष और स्त्रीयों की 1से2, वर्ष आयु कम हो जाती है।

       

    नमक में मुख्य रूप से सोडियम और क्लोरीन होता है शरीर में  संतुलित मात्रा में सोडियम शरीर में पानी की मात्रा को संतुलित रखता है शरीर की कोशिकाओं को क्रियाशील रखता है नर्व सिस्टम ठीक रहता है आधुनिक शोध कहते हैं एक दिन में एक स्वस्थ और जवान व्यक्ति को 2.3, ग्राम सोडियम से अधिक नहीं खाना चाहिए 5, ग्राम नमक एक छोटा चम्मच स्वास्थ के लिए पर्याप्त है इससे अधिक नमक नहीं खाना चाहिए परन्तु एक सर्वे के अनुसार भारत के लोग 11, ग्राम नमक प्रतिदिन खाते हैं जो स्वास्थ्य मानक से लगभग दोगुना है उसमें भी अधिक तरह नमक आगे डाल कर कच्चा खाया जाता है सलाह और फलों पर डाल कर खाया जाता है जो ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है ह्रदय रोग का कारण बनता है गैस बनाता है  अधिक नमक को शरीर से बाहर निकालने के लिए किडनी को अतिरिक्त काम करना पड़ता है किडनी पर अतिरिक्त दबाव से किडनी रोगों के होने का खतरा बढ़ जाता है  इसलिए नमक कम खायें और कच्चा बिल्कुल न खायें यही स्वास्थ के लिए बेहतर है

 

 आज हम आपको बताता हूं कि नमक मुख्य कितने प्रकार होते हैं। एक होता है समुद्री नमक दूसरा होता है सेंधा नमक (rock salt) । सेंधा नमक काला नमक या सोंचर नमक सेंधा नमक  बनता नहीं है पहले से ही बना बनाया है प्राकृतिक नमक है। पूरे उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में खनिज पत्थर के नमक को सेंधा नमकया सैन्धव नमक’, लाहोरी नमक आदि आदि नाम से जाना जाता है । जिसका मतलब है सिंध या सिन्धु के इलाक़े से आया हुआ। वहाँ नमक के बड़े बड़े पहाड़ है सुरंगे है । वहाँ से ये नमक आता है। मोटे मोटे टुकड़ो मे होता है आजकल पीसा हुआ भी आने लगा है यह ह्रदय के लिये उत्तम, दीपन और पाचन में मदद  करता है त्रिदोष शामक, शीतवीर्य अर्थात ठंडी तासीर वाला, पचने मे हल्का है । इससे पाचक रस बढ़्ते हैं। तों अंत आप ये । काला नमक बनाया जाता है यह जमीन से नहीं निकाला जाता समुद्री नमक को मिट्टी की हांडी में डाल कर उच्च तापमान पर गरम किया जाता है  पर नमक पिंपल कर तरल  हो जाता है तब उसमें  निश्चित मात्रा में सज्जी पिया बांसा और आंवला डाला जाता है ठंडा होने पर यही काला नमक कहलाता है काला नमक औषधीय उपयोग तथा खाने का स्वाद बढ़ाने में काम आता है स्वस्थ के लिए,सेंधा नमक प्रयोग करे, क्यूंकि ये प्रकर्ति का बनाया है ईश्वर का बनाया हुआ है। और सदैव याद रखे इंसान जरूर शैतान हो सकता है लेकिन भगवान कभी शैतान नहीं होता।

 

भारत मे 1930 से पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था विदेशी कंपनीया भारत मे नमक के व्यापार मे आज़ादी के पहले से उतरी हुई है , उनके कहने पर ही भारत के अँग्रेजी प्रशासन द्वारा भारत की भोली भली जनता को आयोडिन मिलाकर समुद्री नमक खिलाया जा रहा है,

हुआ ये कि जब ग्लोबलाईसेशन के बाद बहुत सी विदेशी कंपनियो (अनपूर्णा,कैपटन कुक ) ने नमक बेचना शुरू किया तब ये सारा खेल शुरू हुआ ! अब समझिए खेल क्या था ?? खेल ये था कि विदेशी कंपनियो को नमक बेचना है और बहुत मोटा लाभ कमाना है और लूट मचानी है तो पूरे भारत मे एक नई बात फैलाई गई कि आओडीन युक्त नामक खाओ , आओडीन युक्त नमक खाओ ! आप सबको आओडीन की कमी हो गई है। ये सेहत के लिए बहुत अच्छा है आदि आदि बातें पूरे देश मे प्रायोजित ढंग से फैलाई गई । और जो नमक किसी जमाने मे 1से2 रूपये किलो मे बिकता था । उसकी जगह आओडीन नमक के नाम पर सीधा भाव पहुँच गया 8 रूपये प्रति किलो और आज तो 20 रूपये को भी पार कर गया है।

आयोडीन एक खनिज है जो मिट्टी में मिला है  पानी में मिला है मिट्टी से फलों सब्जियों में अनाज में चला जाता है जब मनुष्य फल सब्जी अनाज का उपयोग करता है उसी से हमें जितनी आयोडीन की आवश्यकता है पूरी हो जाती है भारत में केवल उच्च हिमालय क्षेत्र बंगाल और असम का कुछ क्षेत्र में आयोडीन की कमी है आयोडीन की कमी से घेंघा रोग हो जाता है।

 

दुनिया के 56 देशों ने अतिरिक्त आओडीन युक्त नमक 40 साल पहले ban कर दिया अमेरिका मे नहीं है जर्मनी मे नहीं है फ्रांस मे नहीं ,डेन्मार्क मे नहीं , डेन्मार्क की सरकार ने 1956 मे आओडीन युक्त नमक बैन कर दिया क्यों ?? उनकी सरकार ने कहा हमने मे आओडीन युक्त नमक खिलाया !(1940 से 1956 तक ) अधिकांश लोग नपुंसक हो गए ! जनसंख्या इतनी कम हो गई कि देश के खत्म होने का खतरा हो गया ! उनके वैज्ञानिको ने कहा कि आओडीन युक्त नमक बंद करवाओ तो उन्होने बैन लगाया। और शुरू के दिनो मे जब हमारे देश मे ये आओडीन का खेल शुरू हुआ इस देश के बेशर्म नेताओ ने कानून बना दिया कि बिना आओडीन युक्त नमक भारत मे बिक नहीं सकता । वो कुछ समय पूर्व किसी ने कोर्ट मे मुकदमा दाखिल किया और ये बैन हटाया गया।

 

आज से कुछ वर्ष पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था सब सेंधा नमक ही खाते थे ।

 

सेंधा नमक के फ़ायदे:-

 

सेंधा नमक के उपयोग से रक्तचाप और बहुत ही गंभीर बीमारियों पर नियन्त्रण रहता है । क्योंकि ये अम्लीय नहीं ये क्षारीय है (alkaline) क्षारीय चीज जब अमल मे मिलती है तो वो न्यूटल हो जाता है और रक्त अमलता खत्म होते ही शरीर के 48 रोग ठीक हो जाते हैं ।

 

ये नमक शरीर मे पूरी तरह से घुलनशील है । और सेंधा नमक की शुद्धता के कारण आप एक और बात से पहचान सकते हैं कि उपवास ,व्रत मे सब सेंधा नमक ही खाते है। तो आप सोचिए जो समुंदरी नमक आपके उपवास को अपवित्र कर सकता है वो आपके शरीर के लिए कैसे लाभकारी हो सकता है ??

 

सेंधा नमक शरीर मे 97 पोषक तत्वो की कमी को पूरा करता है ! इन पोषक तत्वो की कमी ना पूरी होने के कारण ही लकवे (paralysis)  का अटैक आने का सबसे बढ़ा जोखिम होता है सेंधा नमक के बारे में आयुर्वेद में बोला गया है कि यह आपको इसलिये खाना चाहिए क्योंकि सेंधा नमक वात, पित्त और कफ को दूर करता है।

 

यह पाचन में सहायक होता है और साथ ही इसमें पोटैशियम और मैग्नीशियम पाया जाता है जो हृदय के लिए लाभकारी होता है। यही नहीं आयुर्वेदिक औषधियों में जैसे लवण भाष्कर, पाचन चूर्ण आदि में भी प्रयोग किया जाता है।

 

समुद्री नमक के भयंकर नुकसान :-

 

ये जो समुद्री नमक है आयुर्वेद के अनुसार ये तो अपने आप मे ही बहुत खतरनाक है ! क्योंकि कंपनियाँ इसमे अतिरिक्त आओडीन डाल रही है। अब आओडीन भी दो तरह का होता है एक तो भगवान का बनाया हुआ जो पहले से  पानी में फलों सब्जियों में में नमक मे होता है । दूसरा होता है “industrial iodine”  ये बहुत ही खतरनाक है। तो समुद्री नमक जो पहले से ही खतरनाक है उसमे कंपनिया अतिरिक्त industrial iodine डाल को पूरे देश को बेच रही है। जिससे बहुत सी गंभीर बीमरिया हम लोगो को आ रही है । ये नमक मानव द्वारा फ़ैक्टरियों मे निर्मित है।

 

आम तौर से उपयोग मे लाये जाने वाले समुद्री नमक से उच्च रक्तचाप (high BP ) ,डाइबिटीज़, नपुंसकता त्वचा रोग स्त्रियों में बांझपन आदि गंभीर बीमारियो का भी कारण बनता है । इसका एक कारण ये है कि ये नमक अम्लीय (acidic) होता है । जिससे रक्त अम्लता बढ़ती है और रक्त अमलता बढ्ने से ये सब 48 रोग आते है । ये नमक पानी कभी पूरी तरह नहीं घुलता हीरे (diamond ) की तरह चमकता रहता है इसी प्रकार शरीर के अंदर जाकर भी नहीं घुलता और अतःइसी प्रकार किडनी से भी नहीं निकल पाता और पथरी का भी कारण बनता है ।

 

ये नमक नपुंसकता और लकवा (paralysis ) का बहुत बड़ा कारण है समुद्री नमक से सिर्फ शरीर को 4 पोषक तत्व मिलते है ! और बीमारिया जरूर साथ मे मिल जाती है !

 

रिफाइण्ड नमक में 98% सोडियम क्लोराइड ही है शरीर इसे विजातीय पदार्थ के रुप में रखता है। यह शरीर में घुलता नही है। इस नमक में आयोडीन को बनाये रखने के लिए Tricalcium Phosphate, Magnesium Carbonate, Sodium Alumino Silicate जैसे रसायन मिलाये जाते हैं जो सीमेंट बनाने में भी इस्तेमाल होते है। विज्ञान के अनुसार यह रसायन शरीर में रक्त वाहिनियों को कड़ा बनाते हैं, जिससे ब्लाक्स बनने की संभावना और आक्सीजन जाने मे परेशानी होती है। जोड़ो का दर्द और गढिया, प्रोस्टेट आदि होती है। आयोडीन नमक से पानी की जरुरत ज्यादा होती है। 1 ग्राम नमक अपने से 23 गुना अधिक पानी खींचता है। यह पानी कोशिकाओ के पानी को कम करता है। इसी कारण हमें प्यास ज्यादा लगती है।

 

निवेदन :पांच हजार साल पुरानी आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में भी भोजन में सेंधा नमक के ही इस्तेमाल की सलाह दी गई है। भोजन में नमक व मसाले का प्रयोग भारत, नेपाल, चीन, बंगलादेश और पाकिस्तान में अधिक होता है। आजकल बाजार में ज्यादातर समुद्री जल से तैयार नमक ही मिलता है और समुद्र के पानी में प्लास्टिक कचरा इतना फैला गया है नमक में भी माइक्रो प्लास्टिक कम पाते ग्रे है और अभी दुनिया में कोई भी ऐसी टेक्नोलॉजी विकसित नहीं हुई है जो नमक से माइक्रो प्लास्टिक कणों को अलग किया जा सके प्लास्टिक कणों के कारण समुद्री नमक से कैंसर होने का खतरा 90%तक बढ़ जाता है। जबकि 1960 के दशक में देश में लाहौरी नमक मिलता था। यहां तक कि राशन की दुकानों पर भी इसी नमक का वितरण किया जाता था। स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता था। समुद्री नमक के बजाय सेंधा नमक का प्रयोग होना चाहिए यदि सेंधा नमक  उपलब्ध ना हो तो बिना आयोडीन वाला नमक ही प्रयोग करें इससे आप हाइपर आयोडीन की बिमारीयों बी पी किडनी स्टोन गालब्लैडर स्टोन त्वचा रोग आदि से बचें रहें गे।

 

भारत में उच्च हिमालई क्षेत्र के अलावा आयोडीन की कमी नहीं पाईं गरी है आप इस अतिरिक्त आयोडीन युक्त समुद्री नमक खाना छोड़िए यदि सेंधा नमक उपलब्ध नहीं है तो बिना आयोडीन वाला सादा नमक सेवन करें  बेहतर तो यही है उसकी जगह सेंधा नमक खाइये !! सिर्फ आयोडीन के चक्कर में समुद्री नमक खाना समझदारी नहीं है, क्योंकि जैसा हमने ऊपर बताया आयोडीन हर नमक मे होता है सेंधा नमक मे भी आयोडीन होता है बस फर्क इतना है इस सेंधा नमक मे प्राकृतिक के द्वारा भगवान द्वारा बनाया आओडीन होता है इसके इलावा आयोडीन हमें आलू, अरवी के साथ-साथ हरी सब्जियों से भी मिल जाता है जो हमारे शरीर की आयोडीन की पूर्ति करदेता है ।

सेंधानमक

**आयुर्वेद सरल चिकित्सा*

*सेंधा नमक के ये गुण शर्तिया आपको नहीं पता होंगे, जरूर पढ़ें*

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आयोडीन युक्त नहीं सेंधानमक है स्वास्थ्य के लिए बेहतर सेंधानमक बहुत से रोगों को होने से रोकता है ।

1 सेंधा नमक में लगभग 65 प्रकार के सुक्ष्म खनिज  पाए जाते हैं, जो कई तरह की बीमारियों से बचाने में मददगार होते हैं। वहीं इसका एक बढ़ि‍या फायदा यह है कि यह पाचन के लिए फायदेमंद है। चूंकि यह पाचक रसों का निर्माण करता है, इसलिए कब्ज भी दूर करने में सहायक है।

 

2 यह कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक है, जिससे दिल के दौरे की संभावना को भी कम करता है। इसके अलावा हाई ब्लडप्रेशर को कंट्रोल करने में भी सेंधा नमक फायदेमंद होता है।

 

3 तनाव अधिक होने पर सेंधा नमक का सेवन करना लाभकारी होगा, यह सेरोटोनिन और मेलाटोनिन हार्मोन्स का स्तर शरीर में बनाए रखता है, जो तनाव से लड़ने में आपकी मदद करते हैं।

 

4 मांसपेशियों में दर्द या ऐंठन हो, या फिर हड्ड‍ियों से जुड़ी कोई समस्या, सेंधा नमक का सेवन करने से आपकी यह समस्या धीरे-धीरे पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगी।

 

5 पथरी यानि स्टोन हो जाने पर, सेंधा नमक और नींबू को पानी में मिलाकर पीने से कुछ ही दिनों में पथरी गलने लगती है। वहीं साइनस के दर्द को कम करने में ही सेंधा नमक फायदेमंद है।

 

6 डाइबिटीज और अस्थमा व आर्थराइटिस के मरीजों के लिए सेंधा नमक का सेवन काफी लाभदायक होता है। यह शरीर में शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने में भी फायदेमंद है।

 

8 उच्च रक्तचाप के रोगी को नमक कम ही खाना चाहिए सादा नमक छोड़ कर  सेंधा नमक का प्रयोग करना चाहिए।

 

9 पाचनतंत्र की समस्या गैस बदहजमी में सेंधा नमक अजवायन चूर्ण के साथ दो एक के अनुपात में मिलाकर खाना चाहिए।

 

10 थायराइड ग्लैंड के विकारों में सेंधा नमक खाने से विकारों के नियंत्रित करने में सहायक है।

 

11शवांस के रोगी को सेंधानमक गरम पानी में डालकर भाप लेने से आराम मिलता है।

 

12 मायग्रेन के दर्द में एक गिलास गर्म पानी मैं आधा चम्मच सेंधा नमक और चार लौंग का चूर्ण मिलाकर पीने से दर्द में राहत मिलती है।

 

13चोट मोच मांसपेशियों के दर्द में गरम पानी में सेंधा नमक मिलाकर सिकाई करने से आराम मिलता है।

 

अनिद्रा होने पर सेंधा नमक असरकारी है, वहीं त्वचा रोगों एवं दंत रोगों में भी इसका प्रयोग किया जाता है। मोटापा कम करने के लिए भी सेंधा नमक का प्रयोग करना बेहतर तरीका है।

यह पोस्ट सामान्य जानकारी उपलब्ध कराती है किसी भी चिकित्सा अथवा आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह अथवा चिकित्सा का विकल्प नहीं है।

यशपाल सिंह आयुर्वेद रत्न

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