अश्वगंधा"
*आयुर्वेद मेंअश्वगंधा को रसायन की श्रेणी में
रक्खा गया है यह बल , बुद्धि मेधा आयु स्फूर्ति और पौरुष शक्ति
बढ़ाती है। अश्वगंधा सेवन के लाभ और किन व्यक्तियों को अश्वगंधा का सेवन नहीं करना
चाहिए।
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*अश्वगंधा यानी अश्व की गंध वाला औषधिय पौधा
अश्वगंधा के पौधे के पत्ते को मसल कर सूंघने से अश्व (घोड़े) जैसी गंध आती हैऔर यह
अश्व जैसी शक्ति तथा स्फूर्ति प्रदान करती है- आयुर्वेद के अनुसार अश्वगंधा खुश्क
और गर्म स्वभाव की औषधि है यह अल्प मात्रा में मस्तिष्क के लिए टानिक का काम करती
हैअवसाद को खत्म करती है शरीर को पुष्ट
करती है पिट्यूटरी ग्रन्थि को उद्दीप्त करती है जिससे लम्बाई बढ़ती है वात नाशक है
वात दर्द को मिटाती है और !!!!!अधिक मात्रा मस्तिष्क में उत्तेजना लाती है अनिद्रा
का कारण बनती है त्वचा पर चकत्ते उभर सकते हैं इसके सेवन के समय दूध मलाई मक्खन का सेवन भरपूर
मात्रा में करना चाहिए।
अश्वगंधा के फायदे नुकसान और सेवन विधि :
आमतौर से अश्वगंधा की जड़ का चूर्ण ही औषधि
प्रयोग में लाया जाता है और वह वजन बढ़ाता है शरीर को पुष्ट करता है परंतु वहूत कम
व्यक्ति यह जानते हैं अश्वगंधा के पत्ते भी अति उपयोगी औषधि है इसे प्रकृति का
चमत्कार ही कहा जायेगा जहां अश्वगंधा की जड़ का चूर्ण वजन बढ़ाता है वहीं अश्वगंधा
की ताजी पत्तियां वजन घटाती है फालतू चर्बी को पिघलाकर बाहर निकालती है फर्टिलिटी
बढ़ाती है शरीर में स्फूर्ति लाती हैं।
*अश्वगंधा के पत्तों का उपयोग:
अश्वगंधा के पत्ते वजन कम करने की एक उत्तम
औषधि है रोज सुबह नाहर मुंह ताजे दो अश्वगंधा के पत्ते चबाकर खाएं ऊपर से गुनगुना
पानी पीने से कुछ ही दिनो में वज़न कम होने लगता है पौरुष शक्ति बढ़ती है आत्म
विश्वास ये वृद्धि होती है शरीर में चुस्ती-फुर्ती बढ़ती है फालतू चर्बी पिंघने
लगती है हरे ताजे पत्ते ना मिलने पर अश्वगंधा के पत्तों को छाया में सुखाकर बनाया
गया या एक चम्मच चूर्ण समान मात्रा में चोब चीनी मिलाकर खाना चाहिए।
*अश्वगंधा जड़
के चूर्ण से फायदे :
*. 3 ग्राम अश्वगन्धा चूर्ण में 3-3 ग्राम
मिश्री और घी मिलाकर तथा ऊपर से दूध में मिश्री मिलाकर पीने से अनिद्रा रोग दूर
होकर गहरी (निद्रा आती है)।
*. अश्वगंधा और मिश्री 3-3 ग्राम दूध के साथ
नित्य प्रति (लगातार) सेवन करने से कमजोरी दूर होकर सेवनकर्ता हष्ट-पुष्ट हो जाता
है। उपर्युक्त योग को नित्य सेवन करने तथा भोजन में मात्र दूध लेने से ही मात्र 40
दिनों में धातुगत एवं शारीरिक दुर्बलता नि:सन्देह ही दूर हो जाती है तथा सेवनकर्ता
वीर्यवान और शक्तिशाली हो जाता है।
*. अश्वगंधा, चोबचीनी
और आँवला सममात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर 6-6 ग्राम की मात्रा में नित्य सुबह-शाम
दूध या जल से सेवन करने से 7 से 14 दिनों में ही समस्त प्रकार की वात-व्याधियाँ
(वायु, शरीर निर्बलता, रवत विकार) इत्यादि दूर हो जाती है।
*. बालकों को अश्वगन्धा का चूर्ण 1-3 ग्राम की
मात्रा में दूध के साथ देने से वह 1 महीने में ही सुन्दर, सुडौल और
हष्ट-पुष्ट हो जाता है।
* अश्वगन्धा वातनाशक, पौष्टिक
और बाजीकरण गुणों से भरपूर है । इसके नित्य चूर्ण के सेवन से शारीरिक दर्द,
शिथिलता, निर्बलता, हाथ-पैरों
में जलन इत्यादि निःसन्देह दूर हो जाती है।
* अश्वगन्धा तनाव को कम करने में बेहद मददगार
औषधि है। यह मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाने में भी काफी मददगार है|
* अश्वगन्धा चूर्ण 3 ग्राम, मिश्री
3 ग्राम सतावरी 3, ग्राम तथा घी 5 ग्राम मिलाकर नित्य लगातार सेवन
करने असाध्य गर्भाशय का रक्तस्राव भी रुक जाता है।
* बाल असमय सफेद होने के साथ ही झड़ने भी लगे
हैं, तो आपको अश्वगंधा का 3-3 ग्राम दूध के साथ नित्य सेवन करना चाहिए।
इससे आपकी समस्या का जरूर समाधान हो जाएगा।
* कद बढ़ाने के लिए अश्वगंधा नागौरी ,चंदुसूर
,काले तिल का चूर्ण एक चम्मच
गाय के दूध के साथ मिश्री मिलाकर रोज रात्रि में सोने से पहले लेना चाहिए|
*असगंध
सुरंजान शीरी कुटकीऔर सोंठ बराबर मात्रा में लेकर इनका चूर्ण बना लें।
इसमें से एक चम्मच चूर्ण सुबह-शाम पानी अथवा दूध के साथ सेवन करें। इससे कमर दर्द
से आराम मिलता है।
* अश्वगन्धा नागौरी का चूर्ण 1 से 3 ग्राम शहद
एवं मिश्री मिले दूध के साथ सुबह-शाम खाने से हड्डी की कमजोरी दूर होकर शरीर पुष्ट
और सबल हो जाता है।
*अश्वगंधा का सेवन कैसे करे :
अश्वगंधा को कैसे खाये ये इस बात पर निर्भर
करता है की किस रोग के इलाज के लिए आप इसका सेवन करना चाहते है व आप की उम्र क्या
है। बड़ों के मुकाबले बच्चों के लिए इसकी मात्रा कम होती है।
अच्छी सेहत पाने के लिए अश्वगन्धा चूर्ण को 2
से 5 ग्राम तक प्रतिदिन ले सकते है।
किसी रोग के उपचार के लिए अगर आप इसका उपयोग
करना चाहते है तो अश्वगंधा को खाने का तरीका उस रोग से जुड़े लेख में जाने या
आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श करें।
यह वास्तव में पुरुष प्रधान औषधि है स्त्रीयों
को अश्वगंधा जड़ के चूर्ण का सेवन समान मात्रा में सतावरी मिला कर ही करना चाहिए।
स्त्रियों के लिए गर्भ काल में अश्वगंधा चूर्ण
का सेवन निषेध है
वज़न कम करने के लिए स्त्रियां अश्वगंधा के
पत्तों का प्रयोग कर सकतीं हैं गर्भ काल को छोडकर
स्त्रियों के लिए मासिक काल में अश्वगंधा का
किसी भी रूप में सेवन निषेध है।
*अश्वगंधा के नुकसान :
यदि आपके पेट में उलसर हो या आपको अश्वगंधा से
एलर्जी हो तब आपको इस्तेमाल से बचना चाहियेl
अश्वगंधा का अधिक मात्रा में सेवन आपको फायदा
की बजाय नुकसान कर सकता है, जैसे की दस्त लगना, पेट
मे गैस बनना और उल्टी आना आदि।
*विशेष ::-”अश्वगंधा
चूर्ण ” एक बलवर्धक व पुष्टीदायक श्रेष्ट रसायन है यह मधुर व स्निग्ध होने के
कारण वात शमन करने वाला एवं रस-रक्तादी सप्तधातुओं का पोषण करने वाला है । इससे
विशेषतः मांस व शुक्रधातु की वृद्धि होती है। यह शक्तिवर्धक, वीर्यवर्धक,स्नायु
और मांसपेशियों को ताकत देनेवाला व कद बढ़ाने वाला एक पौष्टिक रसायन है । धातु की
कमजोरी, शारीरिक-मानसिक कमजोरी आदि में लाभदायक है ।बालकों के सर्वांगीन
विकास के लिए यह वरदानस्वरूप है।
यह पोस्ट सामान्य जानकारी उपलब्ध कराती है किसी
भी चिकित्सा अथवा आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह का विकल्प नहीं है
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