बहेड़ा:(विभीतकी) सेहत के लिए बहुत लाभकारी है


  भारत में ऐसी कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां हैं, जिनका इस्तेमाल वर्षों से तरह-तरह की बीमारियों को दूर भगाने में किया जा रहा है। ऐसी ही एक जड़ी-बूटी है बहेड़ा। सबसे दिलचस्प बात ये है कि बहेड़ा को संस्कृत में विभीतकी कहा जाता है, जिसे अंग्रेजी में 'फीयरलेस' यानी 'निर्भय' कहते हैं, यानी यह बीमारियों का भय दूर करता है। पेट संबंधी कुछ समस्याओं के उपचार और प्रबंधन के लिए इस जड़ी-बूटी का उपयोग सदियों से किया जा रहा है।

 

 बहेड़ा त्रिफला के तीन प्रमुख अवयवों में से एक है, जबकि अन्य दो में आंवला और हरड़ शामिल हैं। इसमें रोगाणुरोधी, एंटी-ऑक्सीडेंट और प्रतिरक्षा विज्ञानी गुण मौजूद होते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि इसके गुण त्रिदोष, जैसे वात, पित्त और कफ को संतुलित करने में सहायक हैं। इसका इस्तेमाल और भी कई तरह की समस्याओं से निजात पाने में किया जाता है। आइए जानते हैं बहेड़ा के इस्तेमाल से होने वाले फायदों के बारे में...

 

लिवर के लिए फायदेमंद है बहेड़ा

बहेड़ा को लिवर के स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है। दरअसल, इस जड़ी-बूटी में हेपेटोप्रोटेक्टिव गुण मौजूद होते हैं। कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि बहेड़ा किसी हानिकारक पदार्थ के संपर्क में आने पर लिवर में सूजन होने से रोकता है और लिवर पर सूजन होने पर उसे उतार कर लिवर को स्वस्थ करता है बहेड़ा अपने हेपेटो प्रोटेक्टिव गुणों के कारण फैटी लिवर से फैट की मात्रा कम कर के लिवर की कोशिकाओं को स्वस्थ और क्रिया शील करता है।

 

डायबिटीज में  है फायदेमंद

बहेड़ा को डायबिटीज में भी फायदेमंद माना जाता है। इसमें एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि इसका अर्क इंसुलिन के स्तर में सुधार  करता है अग्नाशय की क्रिया को बढा कर  खून में शुगर या ग्लूकोज के स्तर को बढ़ने से रोकने में मदद कर सकता है ।

 

पारंपरिक रूप से बहेड़ा का उपयोग गैस्ट्रिक, अल्सर और गैस्ट्राइटिस से निजात पाने के लिए किया जाता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इसका हाइड्रोक्लोरिक अर्क एसिडिटी को कम करने में मदद करता है, जो पेप्टिक अल्सर के जोखिम कारकों में से एक है  वास्तव में त्रिफला की तीनों औषधियां कषाय हैं और अपने क्षारीय गुणों के लिए जानी जाती हैं यह वात पित्त कफ शरीर के तीनों दोषों का समन करती हैं फिर भी हरड़ में पित्त नाशक गुण अधिक है आंवला  कफ नाशक गुणों के लिए जाना जाता है बहेड़ा में वात नाशक गुण अधिक होते यह वात रोगों की एक उत्तम औषधि है ।

 

दिल के लिए है फायदेमंद

अध्ययनों में यह पाया गया है कि बहेड़ा में मौजूद गुण खून के थक्के बनने से रोकते हैं और पहले से मौजूद खून के थक्कों को तोड़ते भी हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि वाहिका में बनने वाले खून के थक्के की वजह से स्ट्रोक और हार्ट अटैक जैसी समस्याएं विकसित हो सकती हैं।

 

यह आर्टिकल जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए लिखा  गया है। उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने  आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श करें।

यशपाल सिंह आयुर्वेद रत्न 9837342534


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