*संतुलित भोजन (Balanced Diet)
*आयुर्वेद सरल चिकित्सा*
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*आज का आधुनिक
विज्ञान जिसे कैलोरी कहता है अथर्ववेद में उसे सुक्ष्म पोषक तत्व कहा गया
है या ये कहें खाद्य पदार्थ में शरीर रूपी इंजन को चलाने के लिए मिलने वाली ऊर्जा
को कैलोरी कहते हैं जिनकी मात्रा अलग अलग खाद्य पदार्थों में कम या अधिक होती है
यदि हम अधिक शारीरिक श्रम नहीं करते तब हमें अधिक ऊर्जा वाले(कैलोरी वाले) खाद्य
पदार्थ नहीं खाने चाहिऐं इससे हमारे शरीर में ऊर्जा का संचय होने लगता है जिससे
मोटापा दिल की बिमारी मधुमेह किडनी डिजीज आदि हो सकता है।
*संतुलित भोजन (Balanced diet) या
बैलेंस डाइट वह है जिससे शरीर को सुचारू रूप से चलने के लिए संपूर्ण पोषण मिल सके।
संतुलित भोजन के लिए हर रोज शरीर की जरूरत के हिसाब से कैलोरी, विटामिन,
प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट लेना जरूरी होता है। पोषक तत्वों के अभाव
में व्यक्ति का शरीर कमजोर होने लगता है और अलग- अलग बीमारियों से घिर जाता है।
अथर्ववेद के विद्वान ऋषि का कहना है हमारे आहार
में ३०%, अम्ल और 80%,क्षार की मात्रा होना चाहिए परंतु आज
हमारी जीवन शैली बदल गयी है मैदा से बने आहार मैगी चाऊमीन पिज्जा बर्गर समोसे सभी
अम्लता बढ़ाते है वैसे तो सभी सब्जियां
क्षारिय होती है परंतु आज सब्जी और फलों में उपयोग होने वाला फर्टिलाइजर और
पेस्टिसाइड उन्हें अमलिय बनाता है दाल और सब्जियां (अधिक उबालने)पकने के बाद अपना
क्षारियता कम हो जाती है अंकुरित अनाज क्षारिय होता है दाल में प्रोटीन होता है
शरीर में जाकर प्रोटीन जब टूट्ता है अम्ल पित्त बनता है चीनी शरीर के लिए उर्जा का
स्रोत है परंतु अम्ल पित्त को बढ़ाती है लौकी का जूस क्षारिय है परन्तु लौकी से बनी
सब्जी क्षारिय नहीं है इस लिए खाने में अधिक से अधिक प्रकृति जैसा दिया है प्रकृति
से जैसा मिला है उसी रुप में खाना लाभदायक है
सलाद और मौसमी फलौ का खाने में प्रयोग तथा अंकुरित अनाज का प्रयोग उत्तम
माना जाता है।
*कैलोरी (Calorie)*
*कैलोरी, भोजन का
वह हिस्सा है जो शरीर को ऊर्जा (Energy) देता है साथ ही
शरीर में ऊर्जा को बचा कर भी रखता है। भोजन में मौजूद कैलोरी से ही शरीर
चलता-फिरता और अपने सब काम करता है। प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 2000
कैलोरी की आवश्यकता होती है जिससे उसका शरीर बिना थके काम कर सके। हालांकि व्यक्ति
की प्रतिदिन की कैलोरी की मात्रा उसकी उम्र, जेंडर और
शारीरिक मेहनत पर भी निर्भर करती है। पुरूषों को महिलाओं की अपेक्षा अधिक कैलोरी
की आवश्यकता होती है।
*संतुलित भोजन में क्या क्या हो (What
to have in Balance Diet)*
*संतुलित भोजन में ऐसे खाद्य पदार्थों को शामिल
करना चाहिए जिनमें विटामिन, मिनरल, और पोषक
तत्व उच्च मात्रा में हों और वसा तथा शुगर कम मात्रा में हो अम्लता न बढायें। नीचे
कुछ खाद्य पदार्थ बताए जा रहे हैं जो संतुलित भोजन का अभिन्न हिस्सा हैं, जिन्हें
रोज के भोजन में शामिल कर, शरीर को जरूरी पोषक त्त्व दिए जा सकते
हैं।
*फल (Fruits):-*फलों में
न केवल पोषक तत्वों की उच्च मात्रा होती है बल्कि यह जल्दी पचने वाले, आसानी
से उपलब्ध भी हो जाते हैं। भूख लगने पर बिना झंझट तुरंत इन्हें खाया जा सकता है।
फलों को मौसम के अनुरूप ही खाएं जिससे केवल स्वाद ही न मिले आपको ताजे और शरीर को
फायदा पहुंचाने वाले फल मिल सकें।
*सब्जियां (Vegetables):-* सब्जियां
खनिज और विटामिन पाने का सबसे आसान तरीका है। ऐसे में रोज के भोजन में ज्यादा से
ज्यादा सब्जियों को शामिल करें। हरी पत्तेदार सब्जियों के साथ विभिन्न रंगों की
सब्जियों से आपको अलग-अलग पोषक तत्व मिल जाते हैं। पालक, बीन्स,
ब्रोकली आदि ज्यादा से ज्यादा खाएं।
*अनाज (Grain):-*सफेद
चावल और सफेद ब्रेड यानि की मैदा से बने खाद्य पदार्थों की जगह ब्राउन राइस और
ब्राउन ब्रेड (चोकर सहित आटे से बना ब्रेड)आदि को अपने खाने में शामिल करें।
अंकुरित अनाज साबुत अनाज, जैसे दलिया आदि भी शरीर को बेहद फायदा
पहुंचाता है। साबुत दालें भी रोजाना खानी चाहिए।
*प्रोटीन (Protein):-*मीट और
बीन्स, प्रोटीन के प्राथमिक स्रोत हैं, जो शरीर
की मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं साथ ही दिमाग को भी तेज बनाते हैं। लो फैट मीट
जैसे चिकन, मछली आदि स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर होते
हैं। अंडे, दालें, सूखे मेवे,
टोफू, पनीर आदि भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं।
*डेयरी उत्पाद (Dairy product):*- डेयरी
उत्पादों में कैल्शियम, विटामिन डी और दूसरे पोषक तत्व होते हैं हालांकि
वसा भी डेयरी उत्पादों में अधिक होती है। ऐसे मेआप ताज़ा गाय का दूध का इस्तेमाल किया जा सकता है गाय के दूध में
फेट की मात्रा कम होती भैंस का दूध यदि सेवन करना है अधिक आयु के व्यक्ति कम
इस्तेमाल करें।
*वसा और कम मीठा (Less fat and
sugar):-* वसा और चीनी, दोनों ही शरीर को ऊर्जा देते हैं लेकिन
जब हम उन्हें जरूरत से ज्यादा खाते हैं तो हमारे शरीर में ज्यादा मात्रा में ऊर्जा
संचरित हो जाती है, इतनी कि हम खर्च नहीं कर पाते। इसी का नतीजा है
कि शरीर में वसा एकत्र होने लगती है और शरीर मोटा होने लगता है। इस वजह से शरीर
में टाइप 2 डायबिटीज, हृदय संबंधी रोग, कैंसर और
स्ट्रोक जैसी बीमारियां हो जाती हैं गुड़ सुपाच्य है और खनिज लौह कैल्शियम विटामिन
बी कॉम्प्लेक्स से भर पूर है गुड़ भूख बढ़ाता है
गुड़ का सेवन निरापद है खाना पकाने के लिए सरसों राई मूंगफली आदि का कच्ची
घानी का तेल अल्प मात्रा में लाभकारी है देशी गाय का देसी घी खाना उपयोगी है।
यह पोस्ट आयुर्वेद की सामान्य जानकारी उपलब्ध
कराती है किसी भी चिकित्सा अथवा आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह अथवा चिकित्सा का
विकल्प नहीं है।
यशपाल सिंह आयुर्वेद रत्न
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