फलों का राजा आम
*फलों का राजा आम भारतीय उपमहाद्वीप में
होनेवाला ऐसा फल है जिसकी हज़ारों प्रजातियां हैं जिसकी सुगंध मात्र से मन प्रसन्न
हो जाता है गर्मियों में बलप्रद व
स्वास्थ्यवर्धक है
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पका आम बहुत ही पौष्टिक होता है | इसमें
प्रोटीन,विटामिन व खनिज पदार्थ, कार्बोहाइड्रेट तथा शर्करा विपुल
मात्रा में होते हैं |आम मीठा, चिकना,
शौच साफ़ लानेवाला, तृप्तिदायक, ह्रदय को
बलप्रद, वीर्य की शुद्धि तथा वृद्धि करनेवाला हैं | यह वायु
व पित्त नाशक परंतु कफकारक है तथा कांतिवर्धक, रक्त की
शुद्धि करनेवाला एवं भूख बढ़ानेवाला है | इसके नियमित
सेवन से रोगप्रतिकारक शक्ति बढती है |
शुक्रप्रमेह आदि विकारों के कारण जिनको
संतानोत्पत्ति न होती हो, उनके लिए पका आम लाभकारक है | कलमी
आम की अपेक्षा देशी आम जल्दी पचनेवाला, त्रिदोषशामक व
विशेष गुणयुक्त है | रेशासहित, मीठा,
पतली या छोटी गुठलीवाला आम उत्तम माना जाता है | यह
आमाशय, यकृत, फेफड़ों के रोग तथा अल्सर, रक्ताल्पता
आदि में लाभ पहुँचाता है | इसके सेवन से रक्त,मांस
आदि सप्तधातुओं तथा वासा की वृद्धि और हड्डियों का पोषण होता है | यूनानी
डॉक्टरों के मतानुसार पका आम आलस्य दूर करता है, मूत्र
साफ़ लाता है, क्षयरोग (टी.बी.)मिटाता है तथा गुर्दें व
मूत्राशय के लिए शक्तिदायक है |
*औषधि-प्रयोग*
*भूखवृद्धि :* आम के रस में घी और सौंठ डालकर
सेवन करने से जठराग्नि प्रदीप्त होता है| वायु रोग या
पाचनतंत्र की दुर्बलता में आम के रस में अदरक मिलाकर लेना हितकारी है |
शहद के साथ पके आम के सेवन से प्लीहा, वायु
और कफ के दोष तथा क्षयरोग दूर होता है |
*आम का पना :* केरी (कच्चा आम) को पानी में
उबालें अथवा गोबर के कंडे की आग में दबा दें | भून जाने
पर छिलका उतार दें और गूदा मथकर उसमें गुड, जीरा,
धनिया, काली मिर्च तथा नमक मिलाकर दोबारा मथें |
आवश्यकता अनुसार पानी मिलायें और पियें |
*लू लगने पर :* उपरोक्त आम का पना एक-एक कप दिन
में 2 -3 बार पियें |
भुने हुए कच्चे आम के गूदेको पैरों के तलवों पर
लगाने से भी लू से राहत मिलती है |
*वजन बढ़ाने के लिए :* पके और मीठे आम नियमित
रूप से खाने से दुबले - पतले व्यक्ति का वजन बढ़ सकता है |
*दस्त में रक्त आने पर :* छाछ में आम की गुठली
का 2 से 3 ग्राम चूर्ण मिलाकर पीने से लाभ होता है |
*पेट के कीड़े :* सुबह चौथाई चम्मच आम की
गुठलियों का चूर्ण गर्म पानी के साथ लेने से पेट के कीड़े मर जाते है |
*प्रदर रोग :* आम की गुठली का 2 से 3 ग्राम
चूर्ण शहद के साथ चाटने से रक्त-प्रदर में लाभ होता है |
*दाँतों के रोग :* आम के पत्तों को खूब
चबा-चबाकर थूकते रहने से कुछ ही दोनों में दाँतों का हिलना और मसूड़ों से खून आना
बंद हो जाता है | आम की गुठली की गिरी के महीन चूर्ण का मंजन
करने से पायरिया ठीक होता हैl
*घमौरियाँ :* आम की गुठली के चूर्ण से स्नान
करने से घमौरियाँ दूर होती हैl
*पुष्ट और सुडौल शरीर :* यदि एक वक्त के आहार
में सुबह या शाम केवल आम चूसकर जरा-सा अदरक लें तथा डेढ -दो घंटे के बाद दूध पियें
तो 40 दिन में शरीर पुष्ट व सुडौल हो जाता | आम और
दूध एक साथ खाना आयुर्वेद की दृष्टि से विरुद्ध आहार है | इससे आगे
चलकर चमड़ी के रोग होते है |
*सावधानी :*
देशी रसेदार आम अधिक गुणकारी माना जाता है।
आम पेड़ पर पका या सुरक्षित कृत्रिम तरीके से
पका आम ही खायें हानी कारक रासायन से पकाया गया आम खाने से स्वास्थ्य को हानी होती
है।
आम के साथ या आम खाने से पहले या बाद में
पेप्सी कोला या काफी चाय कैफ़ीन युक्त पेय
नहीं पीना चाहिए खाने के पहले आम को पानी में रखना चाहिए | इससे
उसकी गर्मी निकल जाती है | भूखे पेट आम नहीं खाना चाहिए | अधिक
आम खाने से गैस बनती है और पेट के विकार पैदा होते है | कच्चा,
खट्टा तथा अति पका हुआ आम खाने से लाभ के बजाय हानि हो सकती है |
कच्चे आम के सीधे सेवन से कब्ज व मंदाग्नि हो सकती है |
बाजार में बिकनेवाला डिब्बाबंद आम का रस
स्वास्थ्य के लिए हितकारी नहीं होता है | लम्बे समय तक
रखा हुआ बासी रस वायुकारक, पचने में भारी एवं ह्रदय के लिए अहितकर
है |
यशपाल सिंह आयुर्वेद रत्न
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