)आरोग्य रहने के११ सूत्र"
*सही पाचन होने के लिए यह सरल नियमों का पालन करें... ताकि कब्ज, एसिडिटी या गैस से मुक्ति पायें*
*---------------------------------*
ग्यारह सामान्य-सरल नियमों का पालन जरूरी है....
1. खाने से पहले 30 मिनट की अवधि में पानी न पीयें।
2. खाते के बीच में सिर्फ एक दो घुंट ही पानी पीयें..
खाने में रोटी सब्जी खतम होने के बाद और चावल खाने से पहले बीच में एक दो घुंट पी सकते। खाने के समय उधरस या खांसी आने से एक दो घुंट जरूर पीयें।
खाने के अंत में मुंह साफ करते समय एक दो घुंट ही पानी पीयें..
3. खाने के बाद एक से डेढ़ घंटे (60- मिनट) के बाद पानी पीना उचित है, उसी के बाद जी चाहे ईतना पानी पीयें..
जब भी पेट खाली हो तब याद करके पानी पीयें। खाली पेट (जठर) होने से आंतों का गेस उपर उठकर सिर तक जाने से सिरदर्द होता है।तो उपवास के दिन यादकर के पानी पीयें तो सिरदर्द नहि होगा।
4. सादा पानी या मटके का पानी ही पीयें, परन्तु फ्रिज का पानी गलती से भी न पीयें। सुबह को वासी मुंह जरूर पानी पीये ताकि एसिडीटी से बच पायें।
5. पानी जब भी पीयें तो घुंट घुंट आराम से नीचें बैठकर पीयें, घटाघट कभी पानी न पीयें खड़े हो कर पानी पीने वाले के घुटनों का दर्द दुनिया का कोई डाक्टर,वैध हकीम ठीक नहीं कर सकता।
6. खाना हमेशा जमीन पर बैठकर पालथी बैठकर खाये। दो भोजन के बीच चार घंटे का समय स्वस्थ व्यक्ति को रखना चाहिए...
7. खाना आराम से चौबीस मिनटों तक चबा चबाकर खाएं। खाते समय ना ही टीवी, ना ही मोबाईल, से बातें करें
8. खाने का जथ्था/अनुपात सुबह, दोपहर और शाम का 3:2:1 रखें। ( उदाहरण के लिए सुबह 3 रोटी, दोपहर 2 रोटी तो शाम को एक रोटी)।
9. फलों को सुबह (दोपहर के पहले) खाएं फलों के साथ दूध न पीयें, दही, लस्सी, छाश को दोपहर में पीयें और
दुध शाम को ही लेंगे तो पाचन अच्छा होकर संपूर्ण फायदा मिलेगा।
10. सुबह के भोजन के बाद कार्य प्रवृत्ति करें।दोपहर के खाने के बाद 30 मिनट आराम करना बेहतर हैशाम के खाने के बाद तुरंत न सोयें। खाने के बाद डेढ़ दो घंटे के बाद सोयें। शाम के खाने के बाद 500-1000 कदम (पग) जरूर चले। हर खाने के बाद 5-10 या 15 मिनटें वज्रासन करें ताकि पाचनशक्ति बढें।
11. नींद के समय बालक, संत और संन्यासी पूर्व दिशा में शिर रखें। ताकि दिमागी शक्ति बढे।
सांसारिक लोगों को नींद के समय दक्षिण दिशा में शिर रखें। ताकि धन वैभव बढे।
यह पोस्ट भारतीय वांग्मय तथा लोक प्रचलित सामान्य जानकारी और भारतीय आयुर्वेद के नियमों पर आधारित है किसी भी चिकित्सा अथवा चिकित्सक की सलाह का विकल्प नहीं है।
Comments
Post a Comment