,*दाल है प्रोटीन का अच्छा स्रोत*
*भारतीय थाली में जब तक दाल न परोसी जाएं तब तक
खाने का मजा ही नहीं आता।*
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दुनिया के
शाकाहारी व्यक्तियों में से 95%भारत में रहते हैं भारतीय संनातन धर्म और
दर्शन जीव हत्या को पाप मानता है और जीवों पर दया करो को मानता है मांस खाना भी
पाप मानते हैं प्रोटीन शरीर के लिए आवश्यक है
मानव शरीर रचना में प्रोटीन मैग्निशियम फास्फोरस आयरन और विटामिन ई ए का महत्व स्थान है और उसकी पूर्ति मांसाहारी
भोजन लेने वालों में पसु पक्षियों के मांस खाने से मछली या अन्य समुद्री उत्पाद से
हो जाती है ।
परन्तु शाकाहारी भोजन करने वाले व्यक्तियों में
प्रोटीन की पूर्ति विभिन्न दालों के खाने से या डेयरी उत्पाद के खाने से होती है
इसमें भी दालों का स्थान सबसे उपर है ।
इसलिए भारतियों को विशेष शाकाहारी व्यक्तियों
को अपने भोजन में दाल को अवश्य समलित करना चाहिए।
हम अपने भोजन में अलग-अलग दालें खाना बेहद पंसद
करते हैं क्योंकि यह दालें आयरन, फॉसफोरस, मैगनीशियम
और विटामिन जैसे कई पौष्टिक तत्त्वों से भरपूर होती हैं। दालों का सेवन करने से
शरीर तंदरूस्त रहता है और साथ ही इसे अपने भोजन में शामिल करने से कई रोगों से
छुटकारा मिलता है लोबिया की दाल में तो मांस और अंडे से भी अधिक प्रोटीन होता है
और उड़द दाल को मांस की दाल कहा जाता है उड़द दाल में प्रोटीन विटामिंस मिनरल्स
मांस के ही समान होते है।
सिद्ध आयुर्वेदा ने
अनुसार दालों का इस्तेमाल दिन के
हिसाब से अपने भोजन में करके ग्रहों को अनुकूल कर भाग्यशाली स्वस्थ बुद्धिमान बना जा सकता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहा
गया है रविवार को भोजन में मसूर की दाल, अदरक और लाल साग
का त्याग करना चाहिए। इस दिन चने की दाल और मूंग की दाल खाने से हैल्दी-वैल्दी
बना जा सकता है।
सोमवार को छिलके वाली उड़द की दाल अथवा अरहर
की दाल खाने से व्यक्ति सेहतमंद रहता है। स्वास्थ्य संबंधी कोई भी परेशानी हो तो
ये दाल खाने से रामबाण सा प्रभाव देखेंगे।
मंगलवार को मसूर की दाल खाना मंगल ग्रह को
सकारात्मकता प्रदान करता है।
बुधवार का दिन ग्रहों के राजकुमार बुध देव से
संबंधित होने के कारण उनकी प्रिय मूंग की दाल, विशेष
रूप से छिलके वाली मूंग की दाल खाने से अच्छी सेहत, कुशाग्र
बुद्धि मिलती है। आर्थिक पक्ष मजबूत होता है।
बृहस्पतिवार को चने की दाल खाने से देवगुरु
बृहस्पति की कृपा से धन, पुत्र और विद्या का शुभ प्रभाव प्राप्त
होता है।
शुक्रवार के रोज मूंग और कुल्थी की दाल खाना
फायदेमंद रहता है लेकिन चने की दाल नहीं खानी चाहिए। इससे गुरु का अशुभ प्रभाव
पड़ता है।
शनिवार को काली उड़द, मटर और
मसूर दाल खाना लाभकारी रहता है।
अंकुरित दालें सुबह बाल आहार (नास्ता) में खाना
अति लाभदायक है।
किडनी के रोगी को मूंग की छिलके वाली दाल के
अलावा कोई दाल नहीं खानी चाहिए वह भी चिकित्सक की सलाह से।
*
चना बहू उपयोगी दलहन है उत्तर भारत में चने से बीसीयों तरस के व्यंजन बनाये जाते
है यदि यह कहा जाये उत्तर भारत में चना सेहत और स्वाद का अनूठा अनाज है तो
अतिश्योक्ति नहीं होगी *
*----------------------*
भारतीय
खाने में चना अपना विशिष्ट स्थान रखता है चना मोटे अनाज में गिना जाता है और
बहुआयामी है चने की की दाल और रोटी दोनों में प्रयोग किया जाता हैतथा देशी चना
प्रोटीन फाइबर कार्बोहाइड्रेट चिकनाई विटामिन्सऔर विभिन्न पोषक तत्त्वों से
परिपूर्ण है और शारीरिक शक्ति चुस्ती फुर्ती रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है*
*सर्दियों में बादाम से ज्यादा असरदार है चना –
नहीं जानते होंगे आप चने के ये लाभ*
सर्दियों में बादाम से ज्यादा असरदार है चना –
नहीं जानते होंगे आप चने के ये लाभ.
सर्दियों में रोजाना 50 ग्राम चना खाना शरीर के
लिए बहुत लाभकारी होता है। आयुर्वेद मे माना गया है कि चना और चने की दाल दोनों के
सेवन से शरीर स्वस्थ रहता है। चना खाने से अनेक रोगों की चिकित्सा हो जाती है।
इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, नमी,
चिकनाई, रेशे, कैल्शियम,
आयरन व विटामिन्स पाए जाते हैं।
चने का गरीबों का बादाम कहा जाता है, क्योंकि
ये सस्ता होता है लेकिन इसी सस्ती चीज में बड़ी से बड़ी बीमारियों की लड़ने की
क्षमता है। चने के सेवन से सुंदरता बढ़ती है साथ ही दिमाग भी तेज हो जाता है।
मोटापा घटाने के लिए रोजाना नाश्ते में चना लें। अंकुरित चना 3 साल तक खाते रहने
से कुष्ट रोग में लाभ होता है। गर्भवती को उल्टी हो तो भुने हुए चने का सत्तू
पिलाएं। चना पाचन शक्ति को संतुलित और दिमागी शक्ति को भी बढ़ाता है। चने से खून
साफ होता है जिससे त्वचा निखरती है।
सर्दियों में चने के आटे का हलवा कुछ दिनों तक
नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। यह हलवा वात से होने वाले रोगों में व अस्थमा में
फायदेमंद होता है।
रात को चने की दाल भिगों दें सुबह पीसकर चीनी व
पानी मिलाकर पीएं। इससे मानसिक तनाव व उन्माद की स्थिति में राहत मिलती है। 50
ग्राम चने उबालकर मसल लें। यह जल गर्म-गर्म लगभग एक महीने तक सेवन करने से जलोदर
रोग दूर हो जाता है।
चने के आटे की की नमक रहित रोटी 40 से 60 दिनों
तक खाने से त्वचा संबंधित बीमारियां जैसे-दाद, खाज,
खुजली आदि नहीं होती हैं। भुने हुए चने रात में सोते समय चबाकर गर्म
दूध पीने से सांस नली के अनेक रोग व कफ दूर हो जाता हैं।
25 ग्राम काले चने रात में भिगोकर सुबह खाली
पेट सेवन करने से डायबिटीज दूर हो जाती है। यदि समान मात्रा में जौ चने की रोटी भी
दोनों समय खाई जाए तो जल्दी फायदा होगा।
चने को पानी में भिगो दें उसके बाद चना निकालकर
पानी को पी जाएं। शहद मिलाकर पीने से किन्हीं भी कारणों से उत्पन्न नपुंसकता
समाप्त हो जाती है।
हिचकी की समस्या ज्यादा परेशान कर रही हो तो
चने के पौधे के सूखे पत्तों का धुम्रपान करने से शीत के कारण आने वाली हिचकी तथा
आमाशय की बीमारियों में लाभ होता है।
पीलिया में चने की दाल लगभग 100 ग्राम को दो
गिलास जल में भिगोकर उसके बाद दाल पानी में से निकलाकर 100 ग्राम गुड़ मिलाकर 4-5
दिन तक खाएं राहत मिलेगी।
देसी काले चने 25-30 ग्राम लेकर उनमें 10 ग्राम
त्रिफला चूर्ण मिला लें चने को कुछ घंटों के लिए भिगो दें। उसके बाद चने को किसी
कपड़े में बांध कर अंकुरित कर लें। सुबह नाश्ते के रूप में इन्हे खूब चबा चबाकर
खाएं।
बुखार में ज्यादा पसीना आए तो भूने को पीसकर
अजवायन और वच का चूर्ण मिलाकर मालिश करनी चाहिए।
चीनी के बर्तन में रात को चने भिगोकर रख दे।
सुबह उठकर खूब चबा-चबाकर खाएं इसके लगातार सेवन करने से वीर्य में बढ़ोतरी होती है
व पुरुषों की कमजोरी से जुड़ी समस्याएं खत्म हो जाती हैं। भीगे हुए चने खाकर दूध
पीते रहने से वीर्य का पतलापन दूर हो जाता है।
दस ग्राम चने की भीगी दाल और 10 ग्राम शक्कर
दोनों मिलाकर 40 दिनों तक खाने से धातु पुष्ट हो जाती है।
गर्म चने रूमाल या किसी साफ कपड़े में बांधकर
सूंघने से जुकाम ठीक हो जाता है। बार-बार पेशाब जाने की बीमारी में भुने हूए चनों
का सेवन करना चाहिए। गुड़ व चना खाने से भी मूत्र से संबंधित समस्या में राहत
मिलती है। रोजाना भुने चनों के सेवन से बवासीर ठीक हो जाता है।
*दाल अरहर(तूअर की दाल)*
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तूअर
(अरहर)भारत में सबसे अधिक खाई जाने वाली दाल है उत्तर से दक्षिण तक तथा पूरब से
पश्चिम तक सभी क्षेत्रों में अरहर की दाल पसन्द की जाती है खाई जाती है हां ये बात
अलग है अरहर दाल पकाने का तरीका सभी क्षेत्रों में अलग है आज हम इस लेख मेंअरहर की
दाल खाने के फायदे और नुकसान के बारे में भारतीय आहार विज्ञान आयुर्वेद की
नजर से जानें इस दाल के सेवन से जुड़ी
जरूरी बातें।
अरहर दाल खाने के कई फायदे हैं। इनके सेवन से
कई प्रकार की समस्याओं और पोषक तत्वों की कमी दूर होती है। दरअसल अरहर दाल में
फोलिक एसिड, आयरन, प्रोटीन,
कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस
और पोटैशियम पाया जाता है। साथ ही इसमें जिंक, कॉपर,
सिलेनियम और मेंगनीज जैसे तत्व भी पाए जाते हैं, जिसकी
मदद से शरीर का पाचन तंत्र सही रहता है। साथ ही इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया
जाता है, जिसकी मदद से आपको वजन कम करने में भी मदद मिलती है। इसके अलावा हाई
ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को भी कंट्रोल करने में मदद मिलती है। आप कई तरह से इसका
सेवन कर सकते हैं लेकिन कई लोगों के लिए अरहर की दाल के नुकसान भी इसलिए डॉक्टर की
सलाह के बाद ही ऐसे लोग इस दाल का सेवन करें। अरहर की दाल के फायदे औऱ नुकसान के
बारे में विस्तार से बत करते है आहार विशेषज्ञ और विज्ञान आयुर्वेद के नजरिए से।
अरहर की दाल के फायदे :-
1. वजन कम करने में मददगार
अरहर दाल के सेवन से आपको जल्दी वजन घटाने में
मदद मिलती है। दरअसल अरहर की दाल में भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है,
जिसकी मदद से आपका पेट लंबे समय तक भरा रहता है और शरीर को आवश्यक
तत्व भी मिलते हैं। इसकी मदद से आप जल्दी ही अपना वजन घटा सकती है। साथ ही प्रोटीन
शरीर की कोशिकाओं के विकास के लिए भी काफी महत्वपूर्ण होता है।
2. बीपी करे कंट्रोल
अरहर की दाल में पोटैशियम भरपूर मात्रा में
पाया जाता है, जिसकी मदद से हाई ब्लड प्रेशर को कम किया जा
सकता है। यदि आप हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं, तो आपका
हृदय रोगों का खतरा भी हो सकता है इसलिए अपने बीपी को कंट्रोल करने के लिए आप अरहर
दाल का सेवन कर सकते हैं।
3. पाचन तंत्र बनाए मजबूत
दाल में उच्च मात्रा में फाइबर पाया जाता है,
जिसकी मदद से भोजन का पाचन आसानी से हो जाता है। साथ ही इसके सेवन से
गैस और अपच की शिकायत भी नहीं होती है। यह भोजन के सही पाचन के साथ-साथ ऊर्जा भी
प्रदान करता है, जिससे आपका शरीर पूरे दिन चुस्त-दुरुस्त रहता
है।
4. डायबिटीज को कम करने में सहायक
अरहर की दाल में मौजूद पोटैशिम ब्लड शुगर को भी
कम करने में कारगर होता है। इसमें पाया जाने वाला पोटैशियम एक वैसोडिलेटर के रूप
में काम करता है, जो ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद
करता है। हालांकि अगर डायबिटीज के साथ कोई अन्य समस्या भी है तो डॉक्टर की सलाह के
बाद ही अरहर की दाल का सेवन करें।
5. प्रेग्नेंसी में सहायक
प्रेग्नेंट महिलाएं भी अरहर दाल का सेवन कर
सकती है। दरअसल अरहर दाल में फोलिक एसिड पाया जाता है, जो बच्चे
के विकास के लिए काफी अहम होता है। ऐसे में आप अपनी स्थिति के अनुसार, डॉक्टर
की सलाह पर अरहर दाल का सेवन कर सकते हैं।
अरहर दाल के नुकसान :-
1. अरहर दाल में भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया
जाता है। ऐसे में कुछ खास बीमारियों में अरहर की दाल का सेवन नहीं करना चाहिए। अगर
आपका यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है, तो आपको अरहर दाल का सेवन नहीं करना
चाहिए।
2. किडनी से संबंधित अगर आपको कोई समस्या है,
तो इसमें भी अरहर दाल का सेवन नहीं करना चाहिए। रात में अरहर दाल के
सेवन से बचे क्योंकि रात के समय यह अच्छी तरह से पच नहीं पाता है।
3. अगर आपको दाल खाने के बाद किसी तरह की
एलर्जी महसूस हो रही है, तो इसका सेवन न करें।
4. इसके अलावा इसमें कुछ अमीनो एसिड नहीं पाए
जाते हैं, तो शाकहारी लोगों को अरहर की दाल के साथ रोटी या चावल जरूर लेना
चाहिए ताकि भरपूर मात्रा में एमिनो एसिड मिल सके अरहर दाल प्रेशर कुकर के बजाये खुले बर्तन में पकाना
चाहिए दाल को पकते समय जो झाग उपर आ जाते हैं वह उतार देने से दाल एसिटिक नहीं
रहती ।
अरहर दाल का उपयोग:-
1. दाल बनान के लिए आप साबुत अरहर दाल का
इस्तेमाल कर सकते हैं। इसकी दाल से आपको सेहत और स्वास्थ्य दोनों मिलते हैं।
2. इसकी छिली हुई दाल से तड़का दाल बनाई जा
सकती है। इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है।
3. अरहर दाल को पीसकर, फिर उसे
घी में भुन दें। बाद में उसमें शक्कर मिलाकर, पराठे
बनाए जा सकते हैं।
4. इसके अलावा अरहर की दाल को उबालकर उसकी
रसदार सब्जी बनाई जा सकती है।
5. चावल और सब्जी के साथ मिलाकर इसकी स्वादिष्ट
खिचड़ी भी बनाई जा सकती है।
6,अरहर दाल में सब्जी मिलाकर बनाईं जाती
है जिसे पावभाजी कहते हैं यह दक्षिण भारत में सबसे अधिक लोकप्रिय है।
)
"मसूर दाल"
भारतीय खाने में मसूर की दाल विशेष महत्व रखती
है आज हम मंसूर की दाल के क्या फायदे हैंऔर मसूर की दाल के बारे में फैलाते जा रहे
मिथक क्या है और सच क्या है ।
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सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाया जा रहा है क्या
मसूर की दाल खाने से यूरिक एसिड बढ़ता है? आइए जानें इस
स्पेशल दाल से जुड़े ऐसे ही 5 मिथ्स की सच्चाई
सच क्या है:-
मसूर की दाल उत्तर भारतीय रसोई में सबसे ज्यादा
प्रचलित दालों में से एक है यह दाल अन्य दालों की सहायक भी है अलग अलग दालों और
सब्जियों के साथ मिलाकर भी पकाई जाती है और उन सभी के साथ मिलकर उस दाल या सब्जी
की पोषकता तो बढ़ाती ही है उन के दोष भी कम करती है आयुर्वेद में बताई त्रिदोषनाशक
खिचड़ी चावल मसूर दाल और मूंग दाल बराबर मात्रा में मिला कर पकाई गयी खिचड़ी है
जिसमें सेंधानमक और भुना जीरा डाला गया हो दुनिया का सबसे सुपाच्य और दोष रहित
भोजन है ऐसा कहना वागभट्ट जी का मूंग और
मसूर दाल का सम्मिश्रण तो सभी जानते हैं उड़द की धुली दाल और मसूर दाल साबुत उड़द
और मसूर अरहर दाल और मसूर दाल चना दाल और मसूर दाल लौकी और मसूर दाल बैंगन और मसूर
दाल मेथी की पत्ते या पालक और मसूर दाल परवल।
इसके
बावजूद कुछ लोग इसे खाने से डरते हैं। आज हम उसी डर को दूर करने की कोशिश कर रहे
हैं मसूर दाल का इस्तेमाल लगभग भारत के सभी घरों में होता है विशेष रूप से उतर
भारत में। इसका प्रयोग कई प्रकार के व्यंजनों को बनाने मेंभी किया जाता है। यह
आपकी सेहत के लिए अधिक फायदेमंद है। सिर्फ इतना ही नहीं यह कई तरह की बीमारियों से
लड़ने में भी आपकी मदद कर सकती है। मसूर दाल त्वचा को नमी पहुंचती है इसका बना फेस
पैक लगाने से चेहरे के दाग-धब्बे मिटते हैं चेहरा साफ और कांति मय होता हैऔर आपके
त्वचा के बालों को कम करने में मदद करती है। साथ ही इसके सेवन से हृदय रोगों का भी
खतरा कम होता है गुड़ कोलेस्ट्रॉल के निर्माण सहायक है । इसके बावजूद कुछ लोग इसे
खाने से डरते हैं। उनके मन में इसे लेकर कई मिथ्क हैं। जिन्हें दूर किया जाना बहुत
जरूरी है।
मसूर दाल प्रोटीन, फाइबर,
कार्बोहाइड्रेट, आयरन, विटामिन
सी, बी6, बी2, फॉलिक एसिड,
कैल्शियम, जिंक और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों का खजाना
है।
मसूर
की दाल के फायदे
1. त्वचा रोग
मसूर दाल में मौजूद विटामिन ई त्वचा में नमी
बनाये रखने में मददगार है, जो त्वचा को मुलायम करता है। वहीं इसके
एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण मुहांसों के दाग धब्बों को कम करने में मदद करते हैं। मसूर
दाल में मिनरल्स पाए जाते हैं जो आपकी स्किन के लिए अत्यधिक जरूरी हैं।
2. दांत दर्द
दांत के दर्द में मसूर की दाल का सेवन लाभदायक
होता है। इसे जला कर भस्म के रूप में बना लें। इस भस्म से रोजाना दो बार हल्के
हाथों से मसूड़ों की मसाज करें। ऐसा करने से दांतो के विकार दूर होते है कैंसर के
बचाव से लेकर आपकी स्किन को ग्लो देने तक, हर काम में
उपयोगी है ।
3. आंखों की समस्या
मसूर दाल में विटामिन ई और सी पर्याप्त मात्रा
में पाया जाता है। यह विटामिन आपकी आंखों के लिए फायदेमंद होते हैं। जिनकी आंखों
की रोशनी कम है, उन्हें रोजाना मसूर दाल का सेवन गाय का घी डाल
कर करना चाहिए।
4. कमर और पीठ का दर्द
मसूर की दाल में आयरन, मैग्नीशियम
और पोटेशियम मौजूद होता हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद
करता है। मसूर के दानों को सिरके के साथ पीस कर गुनगुना करके, हल्के
हाथों से पीठ और कमर की मसाज करने से आपको दर्द से राहत मिलेगी।
5. कब्ज की समस्या
मसूर दाल कब्ज की समस्या को ठीक कर सकती है।
मसूर दाल का पानी पेट को साफ रखता है। इसमें लंघन का गुण होने के कारण यह सुपाच्य
होती है। यह आपकी पाचन शक्ति को बढ़ाने में मददगार है।
इतने सारे स्वास्थ्य लाभों के बावजूद कुछ लोगों
को लगता है कि मसृर दाल सभी के लिए नहीं है। इनमें सबसे ज्यादा प्रचलित मिथ है,
उसका यूरिक एसिड से कनैक्शन। क्या यह सच है कि मसूर की दाल खाने से
यूरिक एसिड बढ़ सकता है।
आइए जानते हैं मसूर दाल के बारे में प्रचलित
कुछ मिथ्स और उनकी सच्चाई
1. क्या मसूर दाल शरीर में यूरिक एसिड के स्तर
को बढ़ाती है?
मसूर दाल शरीर मे यूरिक एसिड के स्तर को नहीं
बढ़ाती। इसमें मौजूद प्रोटीन सुपाच्य हल्का
उच्च पाचन शक्ति होने के कारण यूरिक एसिड शरीर मे संचय नही कर पाता। यह एक
मिथ है कि मसूर दाल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है।
2.डायबिटीज के मरीज भी कर सकते हैं मसूर दाल का
सेवन?
मसूर दाल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स जो डाइबिटीज को
बढ़ाता है वह मसूर दाल में अन्य दालों के मुकाबले कम और बहुत कम है। यह विभाजित होकर खून में अच्छी तरह घुल
जाती है, जिसके कारण खून में ग्लूकोज का स्तर नहीं बढ़ता है। इसमें मौजूद
एंटीऑक्सीडेंट आपके पैंक्रियाज की कोशिकाओं को प्रभावित होने से बचाती हैं। साथ
हीं खून में ग्लूकोज के स्तर को प्रबंधित करती है।
3. प्रेगनेंसी के दौरान मसूर दाल का सेवन
स्वस्थ के लिए उपयोगी है मसूर दाल में भरपूर मात्रा में आयरन मौजूद होता है,
जो आपको प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद कर सकता है। यह
औरतों में प्रेगनेंसी के दौरान एनीमिया को रोकती है। इसमें फोलेट होता है, जो
भ्रूण के नर्वस सिस्टम को विकसित करता है।
4.
किडनी के रोगी भी मसूर की दाल खा सकते है
मसूर दाल का सेवन किडनी के लिए स्वस्थ हो सकता
है, क्योंकि इसमें नेफ्रोंप्रोटेक्टिव गुण पाए जाते हैं। इसमें मौजूद
एंटीऑक्सीडेंट्स किडनी की कोशिकाओं को मुक्त कणों की क्षति से बचाता है। साथ ही यह
ऑक्सीडेटिव तनाव को भी कम करता है।
5. मसूर की दाल स्किन के लिए उपयोगी है
मसूर दाल विटामिन बी से युक्त होती है, जो
आजकी त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद करती है। मसूर दाल का पेस्ट चेहरे पर लगाने
से उसके एन्टी इन्फ्लेमेटरी गुण मुहांसे और उससे होने वाले दाग को कम करते हैं।
इसमें मौजूद फोलेट और जिंक स्किन टिश्यू की मरम्मत करने में मदद करते हैं। मसूर को
भिगोने के लिए उपयोग किया गया पानी मिनरल युक्त होता है। इस पानी से चेहरा धोना
स्किन के लिए फायदेमंद हो सकता है।
यह आर्टिकल सामान्य जानकारी उपलब्ध कराता है
किसी भी चिकित्सा अथवा आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह अथवा चिकित्सा का विकल्प नहीं
है।
*उड़द दाल*
*आयुर्वेद सरल चिकित्सा*
*-----------------------*
*उड़द की दाल जिसे मास की दाल भी कहा जाता है
उडद की दाल में मांस से भी अधिक प्रोटीन होता है साबूत उड़द में प्रोटीन के साथ ही
आयरनऔर अन्य खनिज की प्रचुरता होती है ।*
दाल तीन रंगों में होती है। सफेद उड़द, हरी
उड़द और काली उड़द की दाल। उड़द की दाल में विटामिन, प्रोटीन,
कैल्शियम और फाइबर होता है। उड़द की दाल पूरी तरह से हर्बल होती है।
आइये जानते हैं आपको क्या फायदे दे सकती है उड़द की दाल।
*उड़द की दाल के स्वास्थवर्धक लाभ*
केवल साबूत उड़द की दाल ही ऐसी दाल है जिसमें
बादाम काजू किशमिश नारियल गिरी जैसे मेवे मक्खन और मांस मिलाकर पकाया जा सकता है।
जिससे इसकी पौष्टिकता और स्वाद बढ़ता है।
गरम मसालों में पकी हुई उड़द की दाल बेहद
स्वास्थवर्धक होती है। यह दिल के रोगों के लिए फायदेमंद और वीर्य वढ़ाने वाली होती
है।
*बालों के लिए उड़द का इस्तेमाल*
उड़द की दाल गंजेपन को दूर करती है। उड़द की दाल
को उबालें और फिर इसे पीसकर रात को सोने से पहले इसके लेप को सिर पर लगाएं। कुछ
दिनों तक नियमित इस उपाय को करने से गंजे सिर में भी बाल आने लगते हैं।
*सुंदरता के लिए उड़द का प्रयोग*
चेहरे को मुलायम बनाने के साथ उड़द की दाल
मुंहासों और धब्बों को दूर करती है। रात के समय में बिना छिलके वाली उड़द की दाल
लें ओर उसे दूध में भिगा लें। और सुबह इसे अच्छी तरह से पीसकर इसमें शहद और नींबू
को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मिलाएं। अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर कम से कम एक घंटे
के लिए लगा रहने दें। बाद में ठंडे पानी से अपने चेहरे को साफ कर लें। आपको असर
दिखने लगेगा।
*दर्द ठीक करने की अचूक दवा है उड़द*
उड़द की दाल से आप जोड़ों के दर्द और मांसपेशियों
के खिचाव के दर्द को ठीक करते हैं।
सरसों के तेल में काली उड़द की दाल को गर्म
करें। और जब यह हल्का गुनगुना हो जाए तब इस तेल से जोड़ों की मालिश करें।
*लकवा रोग में*
लकवा की वजह से यदि शरीर का कोई अंग ग्रसित हो
तो आप सरसों के तेल में उड़द की दाल को गर्म करके इसका लेप लकवा वाली जगह पर लगाएं।
*जोड़ों के दर्द में*
बिना छिलके वाली उड़द की दाल लें और इसे किसी
कपड़े में डालकर बांध लें। अब इसको गरम तवे पर सेकें। इसके बाद आप इसे अपने जोड़ों
के दर्द वाली जगह पर लगाएं। आपको आराम मिलेगा।
*घाव और फोड़े होने पर*
घाव और फोड़े फुन्सियों के होने पर उड़द की दाल
से बने हुए आटे को पट्टी में डालकर बांध लें। इस उपाय को दिन मे दो से चार बार
जरूर करें।
*दिल के रोग में*
उड़द की दाल में मैगनीशियम होता है जो दिल की
धमनियों को ब्लाक होने से रोकता है। इससे दिल में खून का संचार ठीक तरह से हो पाता
है। काली उड़द में कोलेस्ट्राल घटाने की क्षमता होती है।
*पौरूष शक्ति के लिए उड़द*
पौरूष शक्ति को बढ़ाती है उड़द। इसके लिए आप उड़द
की दाल को रात में कम से कम 6 घंटे तक भिगों कर रख दें। और सुबह के समय इसे देशी
घी में फ्राई करें और शहद के साथ इसका सेवन करें। इस उपाय से पुरूषों की कमजोरी
दूर होती है।
*दुबले व पतले लोगों के लिए*
जो लोग दुबले हैं उनके लिए भी उड़द फायेदमंद
होती है। उड़द की दाल इंसान के वजन को बढ़ाती है। जिन लोगों का वजन कम हो वे उड़द की
दाल का सेवन जरूर करें।
*प्रोटीन का सबेस अच्छा स़्त्रोत है उड़द*
प्रोटीन की कमी हर इंसान के अंदर होती है। उड़द
की दाल के अंदर मीट और मछली से अधिक प्रोटीन होता है। उड़द की दाल मांसपेशियों को
मजबूत बनाती है। साथ ही हड्डियों की कमजोरी भी दूर होती है।उड़द की दाल को सप्ताह
में तीन दिन सेवन करने से शरीर के कई रोग ठीक होते हैं।
*खून का संचार ठीक करती है उड़द*
काली वाली उड़द के सेवन से शरीर में खून का
संचार ठीक तरह से होता है।
*यकृत रोगों में में फायदेमंद है हरे उड़द की
दाल
*शरीर के विकास में लाभदायक*
उड़द की दाल का लड्डू या खीर भी शरीर के लिए
फायदेमंद होता है। उड़द की दाल से बना लड्डू शरीर का विकास करता है साथ ही इंसान को
फिर से नवजवान भी बनाता है।
उड़द की दाल खाने से दिमाग तेज होता हैै ।
उड़द दाल के साथ दही नहीं खाना चाहिए।
-----*
मूंग दाल में आयरन, पोटैशियम,
कैल्शियम, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स और प्रोटीन जैसे तत्व
पाए जाते हैं, जो शरीर की कमजोरी को दूर करने और एनर्जी को
बूस्ट करने में मदद कर सकते हैं. शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर मूंग दाल का सेवन
लाभकारी माना जाता है, मूंग दाल के सेवन से अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को
शरीर से हटाने में मदद मिल सकती है.
मूंग
दाल में फाइबर पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है जो पाचन तंत्र में सुधार करता
है। ...
मूंग की दाल को उत्तम आहार माना गया है,
जो पाचन क्रिया को दुरुस्त करती है और पेट में ठंडक ... दालों में
सबसे पौष्टिक दाल, मूंग में प्रचुरता में पौटेशियम, आयरन
फाइबर विटामिन ई होता है यह यूरिक एसिड को को कम करती है, ...
प्रोटीन से भरपूर और सेहत के लिए फायदेमंद हैं,
मूंग दाल,
मूंग दाल खाने के 6 बेमिसाल फायदे · इम्यूनिटी
· इंफेक्शन · ब्लड प्रेशर · पाचन ·
डायबिटीज · वजन.
मूंग दाल खाने के हैं कई फायदे, तेजी
से करती है वजन कम - मूंग दाल से इम्युनिटी भी बढ़ती है और मेटाबॉलिज्म भी बढ़ता
है किडनी रोगी के लिए उत्तम और दोषरहित आहार है छिलके वाली मूंग की दाल और चचिंडे
की सब्जी है यह किडनी को स्वस्थ रखने में सहायक है।
पोषण के मामले में सभी दालों पर भारी है मूंग
दाल,
खाली पेट अंकुरित मूंग खाने से अतिरिक्त फाइबर मिलता है जिससे स्टूल साफ
होता है कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है वजन कम करने में मदद करता है।
*मोठ दाल *
आयुर्वेद सरल चिकित्सा*
*-------------------------*
मोठ
दाल स्वास्थ्य की दृष्टि से फायदेमंद है. नियमित रूप से इसका सेवन कई बीमारियों को
दूर करने में सहायक हो सकता है. जिंक, कैल्शियम व आयरन
जैसे पोषक तत्वों से भरपूर मोठ की दाल हड्डियों को मजबूत बनाने व तनाव कम करने
जैसी शारीरिक समस्याओं को कम करने में फायदेमंद है. वहीं, अगर किसी
तरह की एलर्जी है, तो इसका सेवन नुकसानदायक हो सकता है
मोठ दाल खाने से होने वाले फायदे
*मोटापे से छुटकारा
कब्ज से राहत
हड्डियां होती हैं मजबूत
कोलेस्ट्रॉल करे कंट्रोल
इम्यूनिटी मजबूत करे
तनाव करे कम
*मांसपेशियों को करे ठीक
मोठ दाल खाने के फायदे
मोठ दाल खाने से होने वाले फायदे
मोठ की दाल पौष्टिक तत्वों से भरपूर सुपर फूड
है. इसमें कॉपर, सोडियम, मैग्नीशियम,
कैल्शियम व पोटेशियम जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं. ये कब्ज या
मोटापा कम करने में सहायक है. फिलहाल, इस संबंध में
वैज्ञानिक शोध उपलब्ध नहीं हैं. आइए, मोठ दाल के फायदे
*मोटापे से छुटकारा
कब्ज से राहत
हड्डियां होती हैं मजबूत
कोलेस्ट्रॉल करे कंट्रोल
इम्यूनिटी मजबूत करे
तनाव करे कम
मांसपेशियों को करे ठीक
मोटापे से छुटकारा
कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर मोठ की दाल में
फाइबर भी होता है. इसलिए, इसके सेवन से काफी समय तक भूख नहीं
लगती और डाइट कंट्रोल रहती है. इससे मोटापा या वजन आसानी से कंट्रोल हो सकता है.
इसमें प्रोटीन की मात्रा होने के कारण यह मसल्स बिल्ड करने में मदद करता है और फैट
आसानी से बर्न हो सकता है
कब्ज से राहत
मोठ की दाल फाइबर से भरपूर होती है. इस कारण से
इसका सेवन कब्ज की शिकायत को दूर करने में सहायक है।
हड्डियां होती है मजबूत
मोठ के पौधे की फलियों में कैल्शियम और आयरन
पाया जाता है, जो हड्डियों के लिए लाभदायक है. इसमें फास्फोरस
की मात्रा ज्यादा होने की वजह से ये हड्डियों की ओवरऑल हेल्थ के लिए फायदेमंद है।
कोलेस्ट्रॉल करे कंट्रोल
मोठ की दाल के सेवन से ब्लड प्रेशर और
कोलेस्ट्रॉल की समस्या दूर हो सकती है।
रोगप्रतिरोधक क्षमता बढाये
मोठ की फलियों में विभिन्न प्रकार के विटामिन
और प्रोटीन होते हैं. मोठ में जिंक की उपस्थिति होने के कारण यह शरीर की रक्षा
करने में सहायक है. इसको डाइट में शामिल करने से शरीर को बैक्टीरिया, फंगस
व वायरस से सुरक्षित रखा जा सकता है।
तनाव करे कम
मोठ में जिंक की अच्छी खासी मात्रा पाई जाती
है. जिंक में एंटीऑक्सीडेंट गुण होता है, जो तनाव को कम
करने में सहायक है. व्यस्त जिंदगी जीने के कारण लोग अक्सर तनाव से घिरे रहते हैं
और उन्हें स्ट्रेस और एंग्जायटी काफी ज्यादा देखने को मिलती है. उनके लिए मोठ की
फलियों का उपयोग करना लाभदायक हो सकता है।
मांसपेशियों को करे ठीक
जिस प्रकार अन्य दालों में प्रोटीन होता है,
उसी तरह मोठ की दाल में भी ज्यादा मात्रा में प्रोटीन होता है,
जो मांसपेशियों को मजबूत करने में सहायक है. जो लोग बिल्कुल शाकाहारी
जीवन जीते हैं, उनके लिए यह प्रोटीन का अच्छा स्रोत है. मोठ की
दाल या फलियां मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करती हैं.
मोठ दाल के नुकसान
मोठ की दाल पौष्टिक गुणों की वजह से कई प्रकार
से फायदेमंद है, लेकिन इसके अधिक सेवन निम्न प्रकार के नुकसान
भी हो सकते हैं -
एलर्जी
पेट में दर्द
ब्लोटिंग
जी मिचलाना
गैस
सुस्ती
डायरिया
पौष्टिक तत्वों से भरपूर मोठ के सेवन से कई
फायदे होते हैं. कोलेस्ट्रोल में कमी, वजन कम करने में
सहायक व मांसपेशियों को मजबूत करना आदि इससे मिलने वाले कुछ शारीरिक फायदे हैं.
वहीं, मोठ का अधिक सेवन गैस, जी मिचलाना व उल्टी जैसे नुकसानदायक प्रभाव
भी दे सकता है।
यशपाल सिंह आयुर्वेद रत्न 9837342534
26/11/2024, 1:08 pm
- Yashpal S Barampur: (१०३)
*लोबिया*
आयुर्वेद सरल चिकित्सा*
*--------------------------"
लोबिया एक दलहन है जिसकी कच्ची फलियों की सब्जी
खाई जाती है जो विटामिन लोह मैग्नीशियम फाइबर से भरपूर होती है लोबिया को काली आंख
वाले मटर के नाम से भी जाना जाता है। ये एक काले रंग के निशान के साथ अंडाकार आकार
के बीन्स होते हैं, इसलिए ये काली आंख वाले मटर के रूप में जाने
जाते हैं। लोबिया लाल, सफेद, काले और भूरे
रंग के जैसे विभिन्न रंगों में उपलब्ध है। यह स्वाद में अच्छा और विभिन्न खनिजों
और पोषक तत्वों में समृद्ध होने के कारण, इन्हें नियमित
आहार में शामिल किया जा सकता है। इसमें लगभग सभी आवश्यक विटामिन्स, फोलिक
एसिड, लोहा, पोटेशियम, मैग्नीशियम,
कैल्शियम, सेलेनियम, सोडियम,
जस्ता, तांबे, फास्फोरस आदि पाए
जाते हैं।
लोबिया विभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों से भरपूर
होता है पोटेशियम का बहुत ही अच्छा स्रोत हैं। यह वसा और कैलोरी में बहुत कम होता
है। एक कप लोबिया में 11.1 ग्राम फाइबर, 13.22 ग्रा
प्रोटीन, 4.2 9 मिलीग्राम लौह, 475 मिलीग्राम पोटेशियम, 0.91
ग्राम वसा और 198 कैलोरी होती है। इसके साथ ही, विभिन्न
अमीनो एसिड जैसे कि ट्रिपटोपान 0.612 ग्रा, हिस्टिडाइन
0.41 ग्रा, मेथीयोनीन 0.188 ग्राम और 0.894 ग्रा लाइसिन भी
होता है। तो आइये जानते हैं लोबिया से होने वाले लाभों के बारे में विस्तृत
जानकारी
लोबिया हमारे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम रख
सकता है। यह घुलनशील आहार फाइबर और प्रोटीन का एक उत्कृष्ट स्रोत है, जो
हमारे रक्त के प्लाज्मा में मौजूद खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने में
महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसमें स्टेरॉयड यौगिक भी पाए जाते हैं जिनको
फाइटोस्टोरोल कहा है। ये हमारे शरीर में मानक कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बनाए रखने
में बहुत प्रभावी हैं। लोबिया का ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी कई अन्य खाद्य पदार्थों की
तुलना में काफी कम हैं।
लोबिया कैंसर की चिकित्सा में प्रभावी है
लोबिया विशेष रूप से मलाईदार सफेद, हल्के
भूरे, काले और लाल वाले, एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरे होते हैं -
विटामिन ए और विटामिन सी। इसलिए, इन बीन्स का सेवन हमें हानिकारक मुक्त
कणों से छुटकारा दिला सकता है। जिसका मतलब है कि इसके सेवन से आप कैंसर कोशिकाओं
के विकास को रोक सकते हैं।
लोबिया
बचाऐ एनीमिया से
लोबिया में उच्च मात्रा में लौह पाया जाता है
जो कि एनीमिया को समाप्त करता है। आयरन प्रोटीन चयापचय में सहायता करता है जो लाल
रक्त कोशिकाओं और हीमोग्लोबिन उत्पादन के लिए आवश्यक है और एनीमिया को रोकता है।
कम हीमोग्लोबिन और लाल रक्त कोशिकाओं के कारण एनीमिया होता है। एनीमिया शरीर के
अंगों को प्रभावित करता है और ऊर्जा के स्तर को भी कम करता है। विश्व स्वास्थ्य
संगठन सर्वेक्षणों के अनुसार एनीमिया के आधे से अधिक मामलों में लोहे की कमी
एनीमिया का कारण होता है।
लोबिया डायबिटीज के रोगी के लिए वरदान है।
लोबिया में उच्च मात्र में मैग्नीशियम होता है
जो ग्लूकोज और कार्बोहाइड्रेट के चयापचय के लिए आवश्यक होता है। रिसर्च जे अनुसार
मैग्नीशियम से समृद्ध भोजन का सेवन करने से टाइप II मधुमेह
की संभावना 15% तक कम हो जाती है। अध्ययनों से पता चलता है कि मैग्नीशियम का सेवन
इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करता है। घुलनशील फाइबर में उच्च होने के नाते,
लोबिया शुगर (मधुमेह) की समस्या के लिए एक बहुत ही अच्छा उपाय हो
सकता है। इसलिए यह हमारे रक्त में शर्करा के स्तर को नियमित कर सकता है और हमें
मधुमेह मेलेटस से दूर रहने में मदद कर सकता है।
लोबिया कैल्सियम का अच्छा स्रोत है।
लोबिया में कैल्शियम और फास्फोरस होते हैं जो
कि हड्डियों की ताकत और संरचना को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण खनिज होते हैं।
हड्डियों के चयापचय की प्रक्रिया में शामिल एंजाइमों और हार्मोन को नियंत्रित करके
मैग्नीज हड्डियों के गठन में सहायता करता है। फास्फोरस हड्डियों के खनिज घनत्व में
सहायता करता है जो हड्डी के टूटने, फ्रैक्चर और ऑस्टियोपोरोसिस को रोकता
है। स्वस्थ हड्डियों के लिए, कैल्शियम और फास्फोरस के स्तर को
संतुलित करने के लिए यह आवश्यक है। लोबिया में 4% कैल्शियम, 38%
फॉस्फोरस और 35% मैंगनीज होता हैं।
लोबिया का सेवन करें ह्रदय के स्वास्थ के लिए
लाभ दायक
न्यूरोट्रांसमीटर के उत्पादन के लिए विटामिन बी
1 भी जरूरी होता है जो कि एसिटाइलकोलाइन (acetylcholine) के रूप
में भी जाना जाता है जो मांसपेशियों और नसों के बीच संदेश भेजता है। हाल के
अध्ययनों में यह बताया गया है कि थाइमिन हृदय की विफलता का इलाज करने वाले
वेंट्रिक्ल के स्वस्थ कार्य को बनाए रखता है। इसलिए ह्रदय रोगो से बचने के लिए
आपको आज से ही लोबिया का सेवन शुरू कर देना चाहिए।
पेट के लिए अच्छा होता है लोबिया
बहुत कम खाद्य पदार्थ होते हैं जो प्लीहा,
पेट और अग्न्याशय संबंधित समस्याओं से निपटने में मदद करते हैं।
लेकिन प्लीहा, पेट और अग्न्याशय की समस्याओं से निपटने में
लोबिया बहुत ही लाभकारी होता है। ये इन अंगों को अच्छी तरह से टोन कर सकता है और
उनके कार्यों की सुविधा प्रदान कर सकते हैं। इसके अलावा, ये बीन्स
आपके शरीर में आंत के कार्यों में मदद कर सकते हैं। यह पेशाब की समस्याओं को दूर
करने में उपयोगी होते हैं। इसको नियमित रूप से खाने से ल्यूकोराया या असामान्य
योनि स्राव को ठीक किया जा सकता है।
लोबिया कम वसा वाले और कम कैलोरी वाले बीन्स
होते हैं, जो वजन घटाने के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। इस सब्जी में सोडियम
सामग्री भी बहुत कम होती है। इसके अलावा, लोबिया बिल्कुल
कोलेस्ट्रॉल मुक्त होते हैं। ये अधिक वजन वाले लोगों के लिए बहुत ही पौष्टिक आहार
होता है जिससे वजन को कम करने में मदद मिलती है। ये आहार फाइबर में समृद्ध होते
हैं जो शरीर से विषाक्त पदार्थों और अनावश्यक वसा को शरीर से बाहर निकालने में मदद
करता है।
लोबिया में थ्रेओनीन होता है जो एंटीबॉडी
उत्पादन को बढ़ावा देने के द्वारा प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में सहायता
कर सकता है। थ्रेओनीन सेरीन और ग्लाइसीन का उत्पादन करता है जो मांसपेशी ऊतक और
इलास्टिन उत्पादन के लिए आवश्यक है। यह स्वस्थ और मजबूत संयोजी मांसपेशियों और
ऊतकों का रखरखाव करता है।
लोबिया एंटीऑक्सिडेंट्स में समृद्ध होते हैं।
इनमें विटामिन ए और विटामिन सी होते हैं, जो हमारी त्वचा
के लिए दो सबसे अधिक फायदेमंद तत्व होते हैं। ये दोनों हमारे त्वचा कोशिकाओं को
मुक्त कण द्वारा क्षतिग्रस्त होने से रोक सकते हैं। ये हमारी त्वचा को जीवंत रखने
में मदद कर सकते हैं। लोबिया में मौजूद ऑक्सीडेटिव गुण भी झुर्रियां, धब्बे,
उम्र बढ़ने के विभिन्न लक्षणों को हटाने में मदद कर सकता है। इसमें
मौजूद उच्च प्रोटीन सामग्री हमारी त्वचा के लिए बहुत अच्छी होती है।
लोबिया अवसाद का उपचार है
लोबिया में एमिनो एसिड फेनिलएलनिन डिप्रेशन
(अवसाद) को रोकने में मदद कर सकता है। अध्ययनों से पता चला है कि फेनिलएलनिन अवसाद
के उपचार के लिए प्रभावी उपाय है। रिसर्च के अनुसार उन लोगों की मनोदशा में सुधार
हुआ जिन्होंने फेनिलएलनिन से जुड़ें उत्पादों का उपयोग किया हैं। इसलिए यह निराशा
और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं जैसे कि माइग्रेन और अनिद्रा से राहत के लिए लोबिया का
सेवन बहुत ही लाभकारी हो सकता है।
एंटीऑक्सिडेंट्स का एक उत्कृष्ट स्रोत होने के
नाते, यह हमारे बालों के लिए बहुत प्रभावी है। लोबिया बालों के झड़ने के
लिए एक बहुत ही अच्छे समाधान के रूप में काम करता है। यदि आप अक्सर बालों के झड़ने
की समस्या से पीड़ित हैं, तो लोबिया का सेवन आपके बालों को बढ़ाने
में मदद कर सकता है।
लोबिया के अधिक सेवन से अपच, उल्टी,
दस्त, पेट फूलना, कब्ज
जैसे समस्याएं हो सकती है।
गर्भवती और स्तनपान करने वाली महिलाओं को इसके
सेवन से पहले अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
इसके अलावा कुछ लोगों को इसके सेवन से एलर्जी
हो सकती है।
यह आर्टिकल आप को समान्य जानकारी देता है किसी
भी किसी भी चिकित्सा अथवा आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह या चिकित्सा का विकल्प नहीं
है।
*कुलथी दाल*
*आयुर्वेद सरल चिकित्सा*
*----------------------------*
कुल्थी की दाल को हॉर्स ग्राम के नाम से भी
जाना जाता है. इसे दक्षिण भारत की महत्वपूर्ण फसल माना गया है. इसका रंग गहरा भूरा
होता है और देखने में मसूर की दाल की तरह लगती है. दक्षिण भारत के कुछ प्रमुख
व्यंजनों जैसे रसम आदि बनाने के लिए इसे अधिक प्रयोग किया जाता है.
कुलथी की दाल
को पथरी निकल ने के लिए उपयोगी माना जाता है
गुर्दा गालब्लैडर पेनक्रियाज या यूरिन ब्लेडर
कहने का तात्पर्य यह है मानव शरीर के किसी भी अंग में पथरी कंकड़ी गांठ गुल्म यदि
हैं तो कुलथी की दाल साम दो चम्मच 100मिली साफ पानी में भिगोकर रख दें सुबह को
निहार मुंह छान कर पानी से दाल अलग कर पानी में एक चने बराबर यवक्षार मिला कर कुछ
दिनों तक पीने से मानव शरीर में कंकड़ी निकल जाती हैं गांठ गुल्म होने पर
एक गेहूं के दाने के बराबर पान में खाने वाला चूना और कचनार के पत्तों का
चूर्ण इस के साथ खायेंठीक क हो जाती हैं यह पानी पीने के 1घंटा बाद तक कुछ न
खायें रोज श्री लाल भिगोए पानी छान कर
भीगी हुई दाल को सुखा लें जिसे तड़का दाल
बना सकते हैं।
चोट मोच
जोड़ों की सूजन के लिए।
कुलथी , रूमीमस्तगी ,चोट सज्जी, राई , मेदा लकड़ी ,समान भाग लेकर पाउडर बना लें उस पाउडर में गन्ने का सिरका मिला कर मरहम की तरह बना कर गरम कर चोट मोच की जगह या जोड़ पर बांध दें 3--4दिन बंधा रहने दें इसके बाद खोल कर महूए के तेल की हल्के हाथ से मालिश करने से चोट मोच का दर्द मांसपेशियों में खिंचाव ठीक हो जाता है।
*राजमा के गुण एवम फायदे*
*--------------------------*
*एनर्जी दे*
राजमा (Red Kidney Beans) खाने
से हमें ताकत मिलती है, क्यूंकि इसमें आयरन की अधिकता होती है. शरीर
में मेटापोलिस्म बढ़ाने व एनर्जी के लिए आयरन सबसे जरुरी है. इसके खाने से शरीर में
ओक्सीजन का प्रवाह सुचारू रूप से होता है राजमा को पाखाने से पहले 6घंटा गरम पानी
में भिगो कर रखें और जिस पानी में भिगोकर रक्खा है उसे फेंक दें दाल में प्रयोग न
करें ।.
*वजन कंट्रोल रखे*
राजमा में कैलोरी पाई जाती है लेकिन औसत रहती
है जिसे कोई भी उम्र का इन्सान आसानी से खा सकता है. राजमा को सूप व सलाद में लंच
में खाना चाहिए ज्यादा फायदा मिलेगा. जो अपने वजन को मेन्टेन रखना चाहते है उन्हें
राजमा जरुर खाना चाहिए क्यूंकि इसमें सभी तरह के पोषक तत्व होते है.
*डायबटीज कंट्रोल*
राजमा में मौजूद फाइबर शरीर में मेटापोलिस्म
मेन्टेन करता है. ये कार्बोहाइड्रेट को कम करते है जिससे ब्लडशुगर कम होता है.
*कोलेस्ट्रोल कम करे*
राजमा (Red Kidney Beans) शरीर
में कोलेस्ट्रोल कम करने में सहायक है. राजमा में मौजूद फाइबर पेट में जाकर gel
जैसा हो जाता है जो कोलेस्ट्रोल कम करता है.
*ब्लडप्रेशर कंट्रोल*
राजमा में मौजूद मैग्नीशियम व पोटेशियम के
आलावा प्रोटीन व फाइबर ब्लडप्रेशर को कंट्रोल करते है, साथ ही
हार्ट बीट को भी सामान्य रखता है. इससे पुरे दिल ही सुरक्षा होती है.
*सोयाबीन*
*------------------------------*
सोयाबीन को सुपर फूड प्रचारित किया जा रहा है
हम पहले भी बताते रहे हैं सोयाबीन वास्तव में अमेरिकी मूल का दलहन है अमेरिका में
बड़ी संख्या में पसु विषेश रूप से
(सूअर)मांस के लिए पाले जाते है उन्हें मोटा करने के लिए सोयाबीन का आहार दिया
जाता है। सोयाबीन पर जो रिसर्च अमेरिका में हुए हैं उस के अनुसार सोयाबीन का
प्रोटीन पसुओं में जल्दी पच जाता है और मोटा करता है मनुष्यों का महा श्रोत सही से
सोयाबीन नहीं पचा पाता हम अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर यह मानना है सोयाबीन
मनुष्यों का आहार नहीं है।
मूल
पोस्ट हमारी नहीं है पोस्ट का आधार वैज्ञानिक शोध पर आधारित है सोयाबीन खाने से
पुरुषों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
क्या पुरुषों के लिए हानिकारक है सोयाबीन?
चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali
Patil की रिपोर्ट पर आधारित।
पुरुषों के लिए हानिकारण सोयाबीन
पुरुषों के लिए हानिकारक सोयाबीन है या नहीं यह
जानकारी लेने से पहले जरूरी है कि सोयाबीन व इससे जुड़ी तमाम जानकारी हासिल की जाए।
सोय सोसाबीन से आता है। इसी को प्रोसेस्ड कर सोय प्रोटीन भी निकाला जा सकता है,
जैसे पाउडर या सोया मिल्क। कई बार इसमें सोयाबीन में पाए जाने वाला
कैल्शियम भी होता है और कई बार नहीं भी पाया जाता। इसके अलावा सोया फाइबर भी तैयार
किया जाता है। सोयाबीन को उबालकर या रोस्ट करके भी सेवन किया जाता है। कई बार सोय
का इस्तेमाल दूध के वैकल्पिक रूप के तौर पर भी किया जाता है। इसका इस्तेमाल खाद्य
पदार्थ के साथ स्किन पर दवा के रूप में भी किया जाता है।
दावा किया जाता है यह हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई
ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, डायबिटीज,
मेनोपॉज के लक्षण दिखने पर, पीएमएस
-प्रीमेंस्ट्रोअल सिंड्रोम (Premenstrual Syndrome) सहित कई
कंडीशन में यह फायदेमंद नहीं है। हालांकि,
इन बातों को साबित करने के लिए किसी प्रकार के साइंटिफिक सबूत मौजूद
नहीं है।
पुरुषों के लिए सोयाबीन का सेवन सही या नहीं?
दुनियाभर में कई लोग सोय का सेवन हाई क्वालिटी
प्रोटीन पाने के लिए करते हैं। इसमें फायटोएस्ट्रोजन तत्व पाया जाता है, जो
महिलाओं के एस्ट्रोजन हार्मोन पर असर डालता है। शोधकर्ता इस बात का पता लगा रहे
हैं कि फायटोएस्ट्रोजन का असर पुरुषों पर किस प्रकार पड़ता है। डब्ल्यूएचओ के
अनुसार सोयाबीन में कई ऐसे तत्व हैं जिसके
कारण प्रोस्टेट समस्या हो सकती है। इसी का
एक प्रकार सोयाबीन तेल भी है। हालांकि,
इसका सेवन करने से हार्ट डिजीज होने की संभावनाएं बढ़ जाती है।
क्योंकि इसमें ट्रांस फैट होता है।
सोयाबीन में पाया जाता है आइसोफ्लेवोंस
सोयाबीन में (isoflavones) आइसोफ्लेवोंस
पाया जाता है। शरीर के अंदर आइसोफ्लेवोंस के जाते ही यह फाइटोएस्ट्रोजेन (phytoestrogens)
में तब्दील हो जाता है। यह एस्ट्रोजेन हार्मोन का ही एक प्रकार है।
बाजार में मिलने वाले सोय के सप्लीमेंट पर किए शोध में यह बात सामने आई कि करीब 25
फीसदी प्रोडक्ट के लेबल पर जितनी बातें होती हैं उतनी उस प्रोडक्ट में नहीं होती।
इन प्रकार की बीमारियों का है खतरा
पुरुषों के लिए हानिकारक सोयाबीन है या नहीं आप
इस बात से समझ जाएंगे कि इसके सेवन करने से कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं।
इसलिए जरूरी है कि इनकी जानकारी रखी जाए।
इनफर्टिलिटी : पुरुषों के लिए हानिकारक सोयाबीन
की जहां तक बात है तो इसका असर फर्टिलिटी पर भी पड़ सकता है। सोयाबीन में
फाइटोएस्ट्रोजन शरीर से निकलने वाले सामान्य हार्मोन पर असर डाल सकता है। शोधकर्ता
इस बात का पता लगाने में जुटे हैं कि सोय का सेवन करने से पुरुषों में कहीं
इनफर्टिलिटी की समस्या तो नहीं होती। अप्रैल 2010 इंटरनेशनल जर्नल एंड्रोलॉजी में
छपे शोध के अनुसार ज्यादा मात्रा में सोयबीन का सेवन करने से पुरुषों के स्पर्म
प्रोडक्शन पर असर पड़ सकता है और इनफर्टिलिटी की समस्या हो सकती है। शोध के अनुसार
बच्चों को भी सोय का सेवन नहीं करना चाहिये।
फेम्नाइजेशन : पुरुषों के लिए हानिकारक सोयाबीन
है या नहीं इसकी बात करें तो कई शोधकर्ताओं ने इस बात पर चिंता जाहिर की है कि
इसके कारण पुरुषों में महिलाओं जैसी प्रवृत्ति तो नहीं आती है। ऐसा इसलिए क्योंकि
महिलाओं में इसके कारण एस्ट्रोजेन इफेक्ट होता है। बता दें कि महिलाओं की तुलना
में पुरुष प्राकृतिक तौर पर ही खुद ब खुद एस्ट्रोजेन प्रोड्यूस करते हैं। 2010 में
लोमा लिंडा यूनिवर्सिटी में छपे शोध फर्टिलिटी एंड स्टेरलिटी के अनुसार इसका
टेस्टोस्टेरोन पर किसी प्रकार का असर नहीं पड़ता है। वहीं जो ज्यादा सोय का सेवन
करते हैं उनमें किसी प्रकार का अंतर नहीं दिखा।
पुरुषों के लिए हानिकारक सोयाबीन: बढ़ सकता है
प्रोस्टेट : इसका सेवन खतरनाक हो सकता है। सोयाबीन के रूप में ही आइसोफ्लेवोंस की
मात्रा लेने से पेशाब संबंधी समस्या का हल नहीं होता बल्कि उल्टा व्यक्ति का
प्रोस्टेट बढ़ सकता है।
दर्द कम करने में नहीं है कारगर : पुरुषों के
लिए हानिकारक सोयाबीन की बात करें तो ऐसे लोग जो एक्सरसाइज करते हैं और उसके दर्द
के निवारण के लिए सोयाबीन व आइसोफ्लेवोंस का खाद्य सामग्री के रूप में सेवन करते
हैं उनको कोई खास फायदा नहीं पहुंचता। एक्सरसाइज करने के पूर्व इसका सेवन करने से
दर्द संबंधी परेशानी कम नहीं होती है।
हार्ट पर इफेक्ट : पुरुषों के लिए हानिकारक
सोयाबीन की जहां तक बात है इसके हार्ट पर इफेक्ट को पता करते हैं। अमेरिका में
हार्ट डिजीज के कारण मरने वालों की संख्या काफी ज्यादा है। डिजीज कंट्रोल
प्रिवेंशन के अनुसार सोय सामान्य तौर पर दिल को स्वस्थ्य रखने वाला खाद्य पदार्थ
नहीं है। इसमें सैचुरेटेड फैट की तुलना में अनसैचुरेटेड फैट होता है। सोयबीन का
सेवन ज्यादातर लोग सोयाबीन तेल के रूप में करते हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ
के डॉ जोसेफ हिब्लेन ने कहा था कि हाइड्रोजेनेटेड सोयाबीन के तेल में ट्रांस फैट
की मात्रा होती है, यह फैट दिल के लिए काफी घातक होता है। अमेरिकल
हार्ट एसोसिएशन के अनुसार कोशिश करनी चाहिए कि हमें ट्रांस फैट जितना संभव हो कम
सेवन करें। सोय प्रोडक्ट का सेवन करने के पूर्व लेबल को ध्यानपूर्वक पढ़ें। सभी सोय
प्रोडक्ट हेल्दी नहीं होते हैं। खासतौर पर हाइड्रोजेनेटेड सोयाबीन ऑयल का सेवन
करने से बचना चाहिए।
थायराॅइड फंक्शन : पुरुषों के लिए हानिकारक
सोयाबीन है ये आप समझ ही गए होंगे। अगर इसका ज्यादा सेवन करें तो हायपोथायराॅइड की
बीमारी हो सकती है। यदि कोई व्यक्ति 30 दिनों तक 30 ग्राम रोजाना के हिसाब से
सोयाबीन का सेवन करता है तो उस पुरुष को थायराॅइड संबंधी बीमारी हो सकती है। जापान
की आइची मेडिकल यूनिवर्सिटी के किए शोध के अनुसार सोय का अत्यधिक सेवन करने से
थायराॅइड होने की संभावना रहती है। रोजाना एक गिलास यदि कोई सोय मिल्क का सेवन करे
तो उसे भी थायराॅइड की समस्या होने की संभावना रहती है।
पुरुषों के लिए हानिकारक सोयाबीन बन सकता है
एलर्जी का कारण : इसका सेवन करने से एलर्जी भी हो सकती है। खुजली, जलन
यहां तक कि जानलेवा एनाफिलिक्स (Anaphylaxis) की
बीमारी हो सकती है। एफडीए रिपोर्ट के अनुसार सोय का सेवन करने से करीब आठ प्रकार
की एलर्जी होने की संभावना भी रहती है। यही वजह है कि एफडीए ने पैकेट में मिलने
वाले खाद्य पदार्थों के पैकेट के पीछे प्रोडक्ट अंदर के यूज किए पदार्थ के बारे
में लिखना अनिवार्य किया। सोय में वो तमाम तत्व हैं जो प्रोसेस्ड किए जा सकते हैं।
रिप्रोडक्टिव रिस्क : पुरुषों के लिए हानिकारक
सोयाबीन के अंतर्गत आप जान लें कि इसका सेवन करने से प्रजन्न शक्ति पर भी असर पड़ता
है। यूनिवर्सिटी आफ जीनिवा मेडिकल स्कूल की ओर से किए शोध के अनुसार सोय के अंदर
आइसोफ्लेवोंस पाया जाता है उसका सेवन करने से पुरुषों का स्पर्म काउंट जहां कम
होता है वहीं सेक्शुअल साइड इफेक्ट भी देखने को मिलते हैं। इंसानों व चूहों पर किए
गए सोय पर आधारित शोध पर कई विशेषज्ञ तर्क देते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि
साइंटिस्ट पुरुषों की तुलना में चूहों को सोय के ज्यादा मात्रा में डोज देते थे।
इससे यह बात तो साबित होती ही है कि यदि चूहों में इसके विपरीत नतीजे दिख रहे हैं
तो पुरुषों में भी इसके विपरीत नतीजे जरूर देखने को मिलें डे।
सोय में पाए जाने वाले न्यूट्रिएंट्स
सोय में नीचे दिए गए तत्वों के अलावा विटामिन ई,
नियासिन (Niacin), विटामिन बी6 और पेंटोथेनिक एसिड पाया
जाता है। वहीं इसमें प्रीबायोटिक फाइबर भी होता है। इसमें प्लांट स्टेरोल्स,
आइसोफ्लेवोंस डेडजिन और जिनिस्टीन जैसे कई लाभकारी फायटोकैमिकल्स भी
होते हैं। उदाहरण के तौर पर 155 ग्राम सोबीन में यह तत्व पाए जाते हैं :
कैलोरी -189
कार्ब- 11.5 ग्राम
प्रोटीन- 16.9 ग्राम
फैट- 8.1 ग्राम
विटामिन सी- रेफ्रेंस डेयरी इनटेक का 16%
विटामिन के- रेफ्रेंस डेयरी इनटेक का 52%
थायामाइन- रेफ्रेंस डेयरी इनटेक का 21%
रिबोफ्लेविन- रेफ्रेंस डेयरी इनटेक का 14%
फ्लोटेट- रेफ्रेंस डेयरी इनटेक का 121%
आयरन- रेफ्रेंस डेयरी इनटेक का 20%
मैग्नीशियम- रेफ्रेंस डेयरी इनटेक का 25%
फासफोरस- रेफ्रेंस डेयरी इनटेक का 26%
जिंक- रेफ्रेंस डेयरी इनटेक का 14%
मैग्नीज- रेफ्रेंस डेयरी इनटेक का 79%
कॉपर – रेफ्रेंस डेयरी
इनटेक का 19%
पुरुषों के लिए हानिकारक सोयाबीन है या नहीं अब
तो आप ये जान ही चुके हैं, लेकिन कुछ मामलों में महिलाओं के लिए यह
फायदेमंद भी हो सकताहै। ऐसा कुछ विद्वानों
का मत है कि यदि इसका नियमित और अल्प मात्रा में सेवन किया जाए तो इससे ब्रेस्ट
कैंसर और ओवेरियन कैंसर होने की संभावना कम हो जाती है। वहीं यदि प्रोटीन पाने के
लिए यदि कोई सोय प्रोडक्ट पर निर्भर करता है और नियमित मात्रा में सोय प्रोडक्ट का
सेवन करता है तो उस स्थिति में उसका वजन भी नहीं बढ़ता है। इसका सेवन करने से जहां
हेल्थ बेनिफिट होते हैं वहीं कई मामलों में समस्या भी हो सकती है। ऐसे में जरूरी
है कि डॉक्टर की सलाह देने के बाद ही इसका सेवन किया जाए हमारा उद्देश्य आप तक
आहार संबंधी सही जानकारी पहुंचाना है ।
अच्छी बातें शेयर करने से जो अनभिज्ञ हैं
उन्हें भी लाभ मिलेगा।
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