हरड़ (हरितकी) हर्रे

 

    हरड़ अत्यंत उपयोगी शुद्ध भारती आयुर्वेदिक औषधि है लोक मान्यता है सागर मंथन के समय जब अमृत निकला अमृत को दैत्यों से छिपाने के लिए अमृत कलश लेकर देवता भागे उस भाग दौड़ में  अमृत की बूंदें जो दांई तरफ़ गिरी उससे गिलोय की लता उत्पन हुई जिसे आयुर्वेद में अमृता कहते है बांई तरफ गिर गई उससे हरड़ हरितकी का वृक्ष उत्पन्न हुआ  अमृत की बूंदों से उत्पन्न होने के कारण हरड़ का एक नाम अमृता या प्राणदा भी कहते है हरड़ कषाय रस(स्वाद)और क्षारीय (एल्कलाइन)गुण धर्म की औषधी है आयुर्वेद के सभी आधार ग्रंथों चरक संहिता भाव प्रकाश कश्यप संहिता आदि में हरड़ का उल्लेख मिलता है हरड़ के बारे में मार्कंडेय चिकित्सा सूत्र में विस्तार से लिखा गया है


हरीतकी (वानस्पतिक नाम:Terminalia chebula) एक ऊँचा वृक्ष होता है एवं भारत में विशेषतः निचले हिमालय क्षेत्र में रावी तट से लेकर पूर्व बंगाल-आसाम तक पाँच हजार फीट की ऊँचाई पर पाया जाता है। हिन्दी में इसे 'हरड़' और 'हर्रे' भी कहते हैं। आयुर्वेद ने इसे अमृता, प्राणदा, कायस्था, विजया, मेध्या आदि नामों से जाना जाता है। हरड़ का वृक्ष 60 से 80 फुट तक ऊँचा होता है। [3] इसकी छाल गहरे भूरे रंग की होती है, पत्ते आकार में वासा के पत्र के समान 7 से 20 सेण्टीमीटर लम्बे, डेढ़ इंच चौड़े होते हैं। फूल छोटे, पीताभ श्वेत लंबी मंजरियों में होते हैं। फल एक से तीन इंच तक लंबे और अण्डाकार होते हैं, जिसके पृष्ठ भाग पर पाँच रेखाएँ होती हैं। कच्चे फल हरे तथा पकने पर पीले धूमिल होते हैं। प्रत्येक फल में एक बीज होता है। अप्रैल-मई में नए पल्लव आते हैं। फल शीतकाल में लगते हैं। पके फलों का संग्रह जनवरी से अप्रैल के मध्य किया जाता है।


  हरीतकी की सात जातियाँ होती हैं। यह सात जातियाँ इस प्रकार हैं: 1. विजया 2. रोहिणी 3. पूतना 4. अमृता 5. अभया 6. जीवन्ती तथा 7. चेतकी।

सभी के औषधीय गुण लगभग समान  हैं फिर भी अलग अलग प्रजाति अलग अलग व्याधियों में उपयोगी हैं 


*विजया*

सभी हरड़ की प्रजातियां पाचनतंत्र को दुरुस्त करती है 

विजया हरड़ का रंग पीला होता है यह प्रोटेस्ट की एक उत्तम औषधि है साम को एक हरड़ साफ पानी में भीगोकर रख दें सुबह निहार मुंह हरड़ की गुठली निकाल कर चबाकर या खरल कर काले उपर से जिसमें भिगोया था वह पानी पीलें प्रोटेस्ट की अच्छी औषधी है बच्चों की कोस्ट वदधता कद्दू दाने  मुंह आने में साफ पत्थर पर घिसकर देना चाहिए

*रोहिणी*

हरड़ की अन्य प्रजातियों के गुण के अतिरिक्त रोहिणी ह्रदय रोगो में अति उपयोगी हैयह त्रिफला रासायन का मुख्य घटक है गैस पेटफुलना पेप्टिक अल्सर 

*पूतना*

यह प्रजाति यकृत रोगो की अच्छी औषधी है।

*अमृता(हिमाद्रि)*

यह श्वास नली की सूजन फेफड़ों का शोफ खांसी में उपयोगी है यह थायराइड की प्रारंभिक अवस्था में उपयोगी है

*अभया *

यह भय का नाशकरने वाली रेचक अर्श रोग भगंदर की उत्तम औषधि है

*जीवंती *

नाम से ही विदित है यह जीवनी शक्ति को बढ़ाती है याददाश्त तेज करती है आंखों की रक्त वाहिकाओं को नियमित करती है  कैंसर रोगियों की एक उत्तम औषधि है किमोथेरेपी के दुष्प्रभाव को कम करती है गठिया अर्थराइटिस कमर दर्द।

*चेतकी*

रक्त वाहिकाओं को शुद्ध कर गुर्दे को शक्ति प्रदान करती है 


   हर के सेवन से समस्त रोगों का नाश होता है इसके सेवन से रक्त मांस अस्थि ताकतवर होते हैं। वीर में वृद्धि होती है। इसके लगातार सेवन से बाल काले हो जाते हैं। सूंघने की क्षमता में वृद्धि होती है और आंखें जल्दी खराब नहीं होती है ।.

हरड़ के फायदे: रोज आधा चम्मच हरड़ के सेवन से शरीर को मिलते हैं बहुत से लाभ, कई बीमारियों से मिल सकता है छुटकारा

  हर मौसम और बिमारी के लिहाज से आप हरड़ के सेवन का सही समय चुन सकते हैं। जैसे कि पेट की समस्याओं के लिए सुबह खाली पेट हरड़ लें तो ब्रेन बूस्ट करने के लिए दूध में मिला कर लें।


हरड़  एक आयुर्वेदिक जड़ीबूटी है जो कि शरीर के लिए कई प्रकार से काम करता है। ये एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर है और इसका एंटीबैक्टीरियल गुण शरीर को कई संक्रामक रोगों से बचाने में मददगार है। इसके अलावा ये पेट की कई समस्याओं के लिए एक रामबाण इलाज के रूप में काम करता है और पेट दर्द, कब्ज और नाभि के दर्द से बचाव में मदद करता है। हरड़ की एक खास बात ये है कि आपप इसे रोज ले सकते हैं, बस ध्यान रखें कि आधा चम्मच ही लें।


1. पाचनतंत्र के लिए फायदेमंद 

दस्त, पेट फूलना, पेप्टिक अल्सर, गैस्ट्रोओसोफेगल रिफ्लक्स रोग, अपच, कब्ज की समस्या, पेट फूलना और पेट दर्द जैसे जठरांत्र संबंधी विकारों की एक विस्तृत श्रृंखला का इलाज करने के लिए एक पारंपरिक उपाय है। इसकी कार्मिनेटिव प्रकृति पेट और आंत में भोजन के कणों को तोड़ने में मदद करती है और डायजेस्टिव एंजाइम्स के प्रोडक्शन को बढ़ाती है और इस तरह आंतों के माध्यम से आवश्यक पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाती है। यह पेट की गैस को खत्म करने में मदद करता है और बदले में सूजन और गैस के कारण होने वाले ऐंठन को कम करता है।


2. गठिया का रामबाण इलाज 

गठिया की समस्या में हरड़ का सेवन बहुत ही फायदेमंद है। हरड़ अपने वात संतुलन गुण के कारण जोड़ों के दर्द को प्रबंधित करने और ऊतकों, मांसपेशियों और हड्डियों की लंबी उम्र को बढ़ाने में मदद करता है। वात संतुलन प्रभाव के लिए हरड़ को घी के साथ लें।


खून में जमा गंदगी को साफ कर देंगी ये आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां, कई रोगों से मिलेगा छुटकारा

फेफड़ों में जमा गंदगी को खींचकर बाहर निकाल देती है हरड़ 

3. डायबिटीज में फायदेमंद 

हरड़ का हाइपोग्लाइकेमिक गुण शरीर में ब्लड शुगप के स्तर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस चमत्कारी फल को लेने में β-अग्नाशय की कोशिकाओं से इंसुलिन का उत्पादन सक्रिय हो जाता है। यह स्टार्च के ग्लूकोज में टूटने को कम करने में मदद करता है। इसलिए, हरीतकी पाउडर का नियमित उपयोग ब्लड शर्करा के स्तर को प्रभावी ढंग से कम करता है और मधुमेह के विभिन्न लक्षणों जैसे बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास लगना, वजन कम होना आदि से राहत देता है


4. दिल की सेहत के लिए हरड़ 

तेज धड़कन और हाई बीपी से पीड़ित रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद है। यह हृदय की मांसपेशियों को मजबूत करने, खून में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने और लिपिड के निर्माण को रोकने में अत्यधिक महत्व रखता है, जो बदले में एथेरोस्क्लेरोसिस, दिल के दौरे, दिल के ब्लॉकेज, खून के थक्कों यानी कि क्लॉटिंग आदि के जोखिम को कम करता है।


5. आंखों के लिए फायदेमंद 

आंखों की कई समस्याओं के हरड़ बहुत ही फायदेमंद है। जैसे कि ये ड्राई आई की समस्या को कम करता है, आंखों से पानी आना, आंखों में सूजन और संक्रमण को रोकता है। इसके लिए सूखे हरड़ को चाय में उबालकर और बाद में ठंडा करके आईवॉश या क्लींजर के रूप में इस्तेमाल करें।


6. ब्रेन बूस्टर है हरड़ 

हरड़ के एक एंटी-ऑक्सीडेंट ब्रेन बूस्टर की तरह काम करते हैं। हरड़ के फल, पत्ते और छाल अपने फेनोलिक यौगिकों के कारण शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट लाभ प्रदर्शित करते हैं। हरड़ का अर्क न केवल मुक्त कणोंको बाधित करता है, बल्कि शरीर में ऑक्सीकरण एंजाइम को भी रोकता है। यह शरीर में सूजन को कम करने में मदद करता है। इससे मस्तिष्क स्वस्थ रहता है और इसके काम काज में तेजी आती है


7. फेफड़ों के लिए फायदेमंद है हरड़ 

हरड़ का एंटीबैक्टीरियल और एंटीबायोटिक गुण अस्थमा को रोकने में मदद करता है। यह सामान्य सर्दी, खांसी और फ्लू, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा आदि जैसी विभिन्न श्वसन समस्याओं के इलाज में उच्च महत्व रखता है। यह कफ को पतला और ढीला भी करता है और इसे बाहर निकालने में मदद करता है। इसके अलावा ये छाती और नाक के भीतर श्वास को आसान बनाता है और शरीर को बलगम से छुटकारा पाने मेंमदद करता है। इस जड़ी बूटी का दैनिक सेवन फेफड़ों के ऊतकों को मजबूत करता है और फेफड़ों के स्वास्थ्य को बढ़ाता है।


8. स्किन के लिए फायदेमंद 

विटामिन सी, मैग्नीशियम, पोटेशियम, आयरन और कॉपर जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट और पोषक तत्वों की प्रचुरता इसे स्किन केयर उत्पादों परफेक्ट इंग्रीडिएंट बनाती है। यह प्रभावी रूप से शरीर से मुक्त कणों को हटाता है और ऑक्सीडेटिव क्षति को कम करता है। एक प्राकृतिक टोनर होने के नाते, यह त्वचा की आंतरिक परतों से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है, समग्र त्वचा के स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है और विभिन्न त्वचा संक्रमणों जैसे मुंहासे, फुंसी, चकत्ते, फोड़े आदि का इलाज करता है।


9. बालों के लिए हरड़ के फायदे 

बालों के स्वास्थ्य में सुधार लाने में हरड़ आपकी काफी मदद कर सकता है। यह डैंड्रफ, खुजली और बालों7 के झड़ने जैसे स्कैल्प इन्फेक्शन के इलाज के लिए उपयोगी है। इसके पानी का इस्तेमाल करने से ये बालों के रोम को साफ करता है, गंदगी और अशुद्धियों से छुटकारा दिलाता है और बालों के विकास को बढ़ावा देता है। यह उन्हें जड़ों से मजबूत भी करता है, बालों को टूटने और झड़ने से रोकता है और रेशमी मुलायम चिकने बालों को प्रदान करता है।


10. स्टेमिना और यौन क्षमता बढ़ाता है 

हरड़ पुरुषों और महिलाओं दोनों के यौन स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में बेहद फायदेमंद है। यह मानसिक तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है और कामेच्छा बढ़ाने के लिए हार्मोन को उत्तेजित करता है। यह पुरुष और महिला प्रजनन क्षमता में सुधार करता है, कई प्रजनन मुद्दों का इलाज करता है और पुरुषों में पौरूष और सहनशक्ति को बढ़ाता है।

हर के सेवन से समस्त रोगों का नाश होता है इसके सेवन से रक्त मांस अस्थि ताकतवर होते हैं। वीर में वृद्धि होती है। इसके लगातार सेवन से बाल काले हो जाते हैं। सूंघने की क्षमता में वृद्धि होती है और आंखें जल्दी खराब नहीं होती है ।.


यशपाल सिंह आयुर्वेद रत्न

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