योग
२१जून 2024 दसवा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर सभी को शुभकामनाएं योग करें स्वस्थ रहें ?
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योग भारतीय ऋषियों द्वारा विकसित किया गया वह विज्ञान जो बिना औषधि के जीवन को आरोग्य प्रदान करता है तथा रोगी होने पर आरोग्य होने में सहायक है मैं योग विज्ञान का विद्यार्थी नहीं हुं योग भारतीय ज्ञान और विज्ञान है तदापि योग का इतना ज्ञान प्रतिएक भारतीय को होना ही चाहिए जिससे वह अपने जीवन को आरोग्य तथा गतिशील बनाये रख सके।
वैदिक विधि से किया गया प्राणायाम और व्यायाम योग कहलाता है जिसमें शवांशन की क्रिया और विभिन्न शारीरिक क्रियाएं सामिल है।
योगा और आयुर्वेद, स्वतः सृजित शरीर को स्वस्थ रखने के लिए और रोगी होने पर रोग मुक्ति के लिए भारतीय मनीषियों द्वारा विकसित की गयी प्राकृतिक व पौराणिक चिकित्सा पद्धति ( थरेपीज) हैं | जब योग और आयुर्वेद का जन्म हुआ तब मनुष्य के शब्दकोश में कुछ गिने-चुने शब्द ही थे, धर्म (Religion) शब्द की तो उत्पत्ति ही नहीं हुई थी, सर्वत्र धर्म-निरपेक्षता यानी सहजता व सरलता व्याप्त थी |
*, योगा और आयुर्वेद ? एक तरह से स्वास्थ चिकित्सा विज्ञान हैं दौनो एक दुसरे के पूरक हैं बिना योग के आयुर्वेद अधूरा है योग, प्रतिएक व्यक्ति के लिये उपयोगी हैं | ये धर्म-निरपेक्षता का प्रतीक हैं, इनका किसी धर्म विशेष से कोई सम्बन्ध नहीं है अर्थात इनके प्रचार-प्रसार के लिये किसी श्रीमान रामकिशन यादव को ‘बाबा रामदेव’ बनने की जरूरत नहीं है ! वो ‘रामकिशन यादव’ बनकर भी इनका प्रचार-प्रसार कर सकता है बशर्ते कोई टीवी चैनल वाला इस हेतु तैयार हो !
यानी के रामकिशन यादव उर्फ़ बाबा रामदेव ने टीवी चैनल वालों के साथ मिलकर भारत की प्राचीन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विज्ञान को जन जन तक पहुंचाने का पुनित कार्य किया है जिस स्वास्थ विज्ञान को ८००, वर्ष की गुलामी में भारतीय मूल से गये थे उन्हें यह अहसास कराया है भारत का अतीत स्वर्णिम था भारतीय ऋषियों ने हजारों वर्ष पहले अपने अनुभव से यह जाना है योग और प्राणायाम मानव को स्वस्थ रखने में तथा रोगी होने पर रोग मुक्त करने में अति उपयोगी और सहायक है अलग अलग व्याधि के लिए अलग-अलग योग क्रिया निर्धारित है ।
योग के विभिन्न योग आसन और उन योग आसनों से शरीर के विभिन्न अंगों की मांसपेशियों को योग से गतिशील और मजबूत बनाया जाता है :
शीर्षासन
सर्वांगासन
उत्तानपादासन
शलभासन
पवनमुक्तासन
हलासन
योग मुद्रासन
पादहस्तासन
यौगिक जॉगिंग
सूर्य नमस्कार
शीर्षासन के फायदे:-
ब्रेन से जुड़ी बीमारियां ठीक होती हैं।
बच्चों का दिमाग तेज होता है।
आंखों की रोशनी बढ़ती है।
मेंटल पीस और मेमोरी पावर बढ़ती है।
डायबिटीज कंट्रोल में रहती है।
सर्वांगासन के फायदे:-
हाथ-कंधों की मसल्स मजबूत बनती है।
बच्चों का कंसंट्रेशन बढ़ता है।
मेमोरी तेज होती है।
ब्रेन में एनर्जी का फ्लो बेहतर होता है।
आंखों की रोशनी बढ़ाता है।
इस आसन से चेहरे पर ग्लो आता है।
लिवर को एक्टिव बनाता है।
डायबिटीज कंट्रोल होती है।
मर्कटासन के फायदे:-
फेफड़ों के लिए अच्छा योगासन।
पीठ का दर्द दूर हो जाता है।
लिवर को मजबूत बनाता है।
कमर का दर्द ठीक करता है।
शलभासन के फायदे:-
आपके फेफड़े सक्रिय होते हैं।
अस्थमा रोग कंट्रोल होता है।
वजन कम करने में मदद करता है।
शरीर को मजबूत और लचीला बनाता है।
कमर दर्द दूर करता है।
पवनमुक्तासन के फायदे:-
पेट के रोगों को दूर करता है।
ब्लड सर्कुलेशन ठीक होता है।
अस्थमा, साइनस में फायदेमंद है।
ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है।
पेट की चर्बी को दूर करता है।
कमर दर्द में आराम मिलता है।
ताड़ासन के फायदे:,-
शरीर को लचीला बनाता है।
पाचन को ठीक रखता है।
थकान, तनाव और चिंता दूर करता है।
बच्चों के शरीर में संतुलन बढ़ता है।
बच्चों का कद बढ़ाता है।
रीढ़ की हड्डी मजबूत बनती है।
पादहस्तासन के फायदे:-
अस्थमा की बीमारी में बहुत कारगर है।
फेफड़ों को स्वस्थ बनाता है।
सांस संबंधी दिक्कत दूर होती है।
पेट की चर्बी कम होती है।
डायजेशन ठीक होता है।
सिर में रक्त संचार बढ़ता है।
सूक्ष्म व्यायाम के फायदे:-
हार्ट को मजबूत बनाता है।
शरीर पूरा दिन चुस्त रहता है।
शरीर में थकान नहीं होती है।
ऊर्जा, स्फूर्ति का संचार होता है।
प्राणायाम तथा विभिन्न शवासन क्रियाएं :-
अनुलोम विलोम
कपालभाति
भस्त्रिका
भ्रामरी
उज्जायी
उद्गीथ
कपालभाति के फायदे:-
बॉडी में इंस्टेंट गर्मी लाता है।
बंद सांस नली कपालभाति से खुल जाती है।
मजबूत बॉडी के लिए फायदेमंद।
शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है।
उद्गीथ के फायदे:-
नर्वस सिस्टम को ठीक रखता है।
वजन घटाने में मदद करता है।
नींद ना आने की समस्या दूर होगी।
अनुलोम विलोम के फायदे:-
शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है।
नर्व मजबूत, शरीर के ब्लड फ्लो में सुधार।
ब्रेन को हेल्दी रखने में मददगार।
सांस लेना आसान हो जाता है।
दुनिया ने योग और प्राणायाम के महत्व और उपयोगिता को पहचाना है बाबा रामदेव और भारत सरकार के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है यह हर भारतीय के लिए गर्व का दिन है।
कुछ लोग योग को हिंदू धर्म का एक कर्म कांड इसलिए मानते हैं क्योंकि इसका प्रचार भगवा वस्त्र धारी बाबा रामदेव ने किया है यदि योग का प्रचार रामकिशन यादव नामक व्यक्ति ने किया होता तो एक विशेष धर्म के लोगों को शायद योग से दुराग्रह न होता इसमें विरोध में भूमिका निभाई है भारत की दलाल मिडिया ने अधूरे व आभासी लोकतंत्र (भीड़तंत्र) की आड़ में योगा व आयुर्वेदी जैसी अति-आवश्यक थेरेपीज को किसी धर्म-विशेष से जोड़ने का दुस्साहस किया है; अभि व्यक्ति की आजादी की छत्र छाया में योगा व आयुर्वेदी के विषय में धर्मान्धता व साम्प्रदायिकता को हवा दी है; आज पूरा विश्व यहां तक कि साउदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे मुस्लिम देश भी योग दिवस मना रहे हैं परंतु भारत में एक तबके के कुछ सिर फिरे लोग और छद्म धर्मनिरपेक्षता का लबादा ओढ़े सेकुलर जमात योग का विरोध कर रहे हैं
इश्वर उन्हें सद बुद्धि दे मैं ऐसे लोगों को जानता हूं जो सार्वजनिक रूप से योग की मुखालिफत करते हैं और खुद सुबह-सुबह प्रतिदिन योग अभ्यास करते है|
अधूरा व आभासी लोकतंत्र एक तरह का अभिशाप है जिसने मानव कल्याण की योग क्रियाओं को भी विरोध करने का रास्ता दे दिया।|
योग अभ्यास योग्य योगाचार्य की देखरेख और सलाह से करना चाहिए।
यशपाल सिंह आयुर्वेद रतन
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