दिन चर्या के आयुर्वेद सूत्र


आयुर्वेद दिन चर्या एवं स्वास्थ्य विज्ञान के छोटी-छोटी किन्तु बहुमुल्य सूत्र

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स्वस्थ रहने के तरीक़े * व्यक्ति स्वस्थ रहना चाहता है , कोई भी अपने जीवन में अस्वस्थता के दर्शन नहीं करना चाहता । दुनियाँ के सबसे बड़े सात डाक्टर हैं , जो सदा आपके साथ हैं । कोई शुल्क नहीं , बस समय का सदुपयोग करना है ।

 निम्न बातों का पालन करना है :- (१) सूर्य नारायण भगवान् की किरणें  जो सूर्योदय के समय की हैं , उनका सेवन करें । नेत्रों से दर्शन करें तथा अर्घ्य  प्रदान करें । 


(२) नित्यप्रति रात्रिकाल में 6 से 8 घंटे की नींद अवश्य लें । जल्दी सोना और जल्दी जगाना स्वास्थ्यवर्धक होता है । रात्रि 11 बजे से प्रातः 3 बजे तक का शयन शरीर में अमृत तत्त्व का संचार करता है । 


(३) शुध्द शाकाहारी भोजन समयानुसार लें । जलपान , मध्याह्न , रात्रि व अन्य अल्पाहार का समय निश्चित होना चाहिए । हाथ-पैर धोकर व बैठकर , पालथी लगाकर ही भोजन करें । फलों , हरी सब्ज़ियों व दालों का नित्यप्रति के भोजन में समावेश हो । पतली सब्ज़ीयाँ खाने का अधिक लाभ है । 


(४)अकेला गेहूं की रोटी के सापेक्ष मिश्रीत अनाज का या अनाज बदल कर खाने में प्रयोग करें जैसे मक्का ज्वार बाजरा कोदो मंडवा जौ  साठी चावल आदि  इससे आप डाइबिटीज तथा कोलेस्ट्रॉल से बचें रहेंगे।


(५) नित्यप्रति  व्यायाम अवश्य करें , १ से २ किलोमीटर टहलने जावें तो चेतना शक्ति  व ऊर्जा शक्ति भरपूर प्राप्त होती है ।


 (६) खुद पर विश्वास रखें और हमेशा धनात्मक विचार रखें , नकारात्मक विचारों का

त्याग करें । 


(७) पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें , क्यूँकि जल ही जीवन है । जल पीते रहोगे तो ग्लूकोज़ जनित रोगों से तथा किडनी रोगों से बचे रहोगे । 


(८)खाने के बाद एक डली गुड़ खाने से गैस नहीं बनती।


(९)बोतल बंद पानी  पीनेसे बचना चाहिए यदि उच्च हिमालय क्षेत्र बंगाल असम के दल दली क्षेत्र में नहीं रहते आपको आयोडीन युक्त नमक नहीं खायें 


(१०)४० वर्ष की आयु के बाद नमक और चीनी कम ही खायें तो स्वस्थ रहेंगे  


(११) अच्छे दोस्त , अच्छा वातावरण , अच्छा चिन्तन , सुन्दर स्वभाव व धार्मिक ग्रन्थों शिक्षा प्रद पुस्तकों का पठन-पाठन शास्त्र संगीत परोप कार का कार्य  और किसी पीडित  जरुरत मंद की सहायता करना मन को शांति देता है ।

यशपाल सिंह आयुर्वेद रत्न मो०9837342534

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