ऋतु राज वसन्त। वसंत ऋतु चर्चा

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वसंत ऋतु की यदि अंग्रेजी महीनो में गणना करें तो 1५ फरवरी से 1५ अप्रैल तक समझी जाती है वसंत ऋतु में आहार और व्यवहार *क्या हो जिससे स्वास्थ की रक्षा हो।

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बसंत ॠतु का नाम ध्यान में आते ही पलास और सेमल के वृक्षों पर लदे लाल केशरीया फूल आम के बागों के आती बौर की मादक सुगंध पतझड़ हो गये पेड़ों पर छोटी छोटी पत्तिय जैसे पेड़ों का पुनर जन्म हो रहा हो जैसे प्रकृति अपने सुंदर तम स्वरूप में परिवर्तित हो रही हो मनुष्य ही नहीं पेड़ पौधों पसु पक्षियों में भी उमंग और मादकता जा जाती है ।

वसंत को ॠतु राज भी कहते हैं मनुष्य और वनस्पतियों के लिए ही यह ॠतु अनुकूल नहीं है यह मौसम हानी कारक विष्णु  के लिए भी अनुकूल है और हम यदि सावधान न रहें तो रोगी हो सकते हैं ।


*चरक संहिता के अनुसार हेमन्त ऋतु में संचित हुआ कफ वसन्त ऋतु में सूर्य की किरणों से प्रेरित (द्रवीभूत) होकर कुपित होता है जिससे वसन्तकाल में खाँसी,सर्दी-जुकाम, टॉन्सिल्स में सूजन, गले में खराश, शरीर में सुस्ती व भारीपन आदि की शिकायत होने की सम्भावना रहती है। जठराग्नि मन्द हो जाती है अतः इस ऋतु में आहार-विहार के प्रति सावधान रहें।


*वसन्त ऋतु में आहार-विहारः*

*इस ऋतु में कफ को कुपित करने वाले पौष्टिक और गरिष्ठ पदार्थों की मात्रा धीरे-धीरे कम करते हुए गर्मी बढ़ते हुए ही बन्द कर के सादा सुपाच्य आहार लेना शुरु कर देना चाहिए। चरक के सादा सुपाच्य आहार लेना शुरु कर देना चाहिये। 


*चरक के अनुसार इस ऋतु में भारी, चिकनाईवाले, खट्टे और मीठे पदार्थों का सेवन व दिन में सोना वर्जित है। इस ऋतु में कटु, तिक्त, कषारस-प्रधान द्रव्यों का सेवन करना हितकारी है। प्रातः वायुसेवन के लिए घूमते समय 15-20 नीम की नई कोंपलें चबा-चबाकर खायें। इस प्रयोग से वर्षभर चर्मरोग, रक्तविकार और ज्वर आदि रोगों से रक्षा करने की प्रतिरोधक शक्ति पैदा होती है।


*यदि वसन्त ऋतु में आहार-विहार के उचित पालन पर पूरा ध्यान दिया जाय और बदपरहेजी न की जाये तो वर्त्तमान काल में स्वास्थ्य की रक्षा होती है। साथ ही ग्रीष्म व वर्षा ऋतु में स्वास्थ्य की रक्षा करने की सुविधा हो जाती है। प्रत्येक ऋतु में स्वास्थ्य की दृष्टि से यदि आहार का महत्व है तो विहार भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है।


*इस ऋतु में उबटन* लगाना, तेलमालिश, धूप का सेवन, हल्के गर्म पानी से स्नान, योगासन व हल्का व्यायाम करना चाहिए। देर रात तक जागने और सुबह देर तक सोने से मल सूखता है, आँख व चेहरे की कान्ति क्षीण होती है अतः इस ऋतु में देर रात तक जागना, सुबह देर तक सोना स्वास्थ्य के लिए हानिप्रद है। हरड़े के चूर्ण का नियमित सेवन करने वाले इस ऋतु में थोड़े से शहद में यह चूर्ण मिलाकर चाटें त्रिफला चूर्ण सुबह शहद के साथ जो शहद नहीं खा सकते वह गुड़ के साथ सेवन करने से स्वास्थ्य उत्तम रहता है ।



यशपाल सिंह आयुर्वेद रत्न 9837342534

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