अमलतास का गुलकंद

 

गुजराती में ગરમાળો  बोलते हैं ,,बड़ा सुंदर पेड़ होता है  गर्मियों के सीजन में पीले रंग के सुनहरे  फूल आते हैं, पूरा वृक्ष पिले फूलो से बहुत ही मनोहर दिखता है।

उनके फूल  बचपन मे बहुत खाते थे।कुछ मीठे के साथ खट्टा स्वाद रहता है,

आज  हम उसके फूल से गुलकंद  कैसे बनाएं वो  सीखेंगे, गुलकंद  बनाने की विधि 

पहले अमलतास का ताजे  फूल लेकर उसे डाली  से चून कर अलग करें ,और जो भी कचरा है उसको निकाल कर फेंक दे , ओर फूल को अपने पास रख ले,अकेले फूल लेकर ,पानी से  फूलों को साफ करें ,ताकि उस पर लगा हुआ धूल कचरा मिट्टी चला जाए बाद में उसको सुखाले,, उतना ही सुखाना है कि पानी सूख जाए (अगर पानी रह जाये तो फफूंद आएगी।और एकदम सुष्क हो जायेतो गुलकंद नही बनपायेगा )बाद में जितने फूल है उससे दोगुनी शक्कर का पाउडर लेना है, गुलकंद  जिस  तरह से बनाते हैं उसी तरफ से गुलकंद बनाले,,

उपयोग 

पेट की गर्मी कम करता है और बच्चों के लिए जिनको कबज्ज हो  उनके लिए ,,कोमल प्रकृति के लोगों के लिए बड़े स्वादिष्ट औषधि है ,,

हम हर वर्ष बनाते है लीवर,आतॅ,टीबी,सायनस के लिए बहुत ही फायदे मंद है 

एक चम्मच रात को सोते वक्त दूध के साथ या गर्म पानी के साथ बढ़ती गर्मी निकल जाएगी एवं पेट हल्के से साफ हो जाएगा।

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