व्यवस्थित दिन चर्या

सनातन वांग्मय में मनुष्य की दिन चर्या को विस्तार और तथ्यों के आधार पर बताया समझाया गया है जिस के अनुसार आचरण करने से मन बुद्धि और शरीर को स्वस्थ रखने में सहायता मिलती है और रोगों से बचा जा सकता है उनमें से एक है।

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  निद्रा   शयन (सोना) जीवन की महत्त्वपूर्ण क्रिया है , जिसका नियमित होना परम आवश्यक है ।  रात्रि 23-00 बजे से 03-00 बजे के दौरान आपके रक्त संचरण का अधिक भाग लीवर की ओर केन्द्रित होता है । जब लीवर अधिक खून प्राप्त करता है तब उसका आकार बढ़ जाता है । यह महत्त्वपूर्ण समय होता है जब आपका शरीर विष हरण की प्रक्रिया से गुजरता है । आपका लीवर शरीर द्वारा दिन भर में एकत्रित विषाक्त पदार्थों को निष्क्रिय करता है और खत्म भी करता है । 


(१) यदि आप रात्रि में 23-00 बजे सो जाते हैं तो आपके पास अपने शरीर को विषमुक्त करने के लिए पूरे चार घण्टे होते हैं । यदि 24-00 बजे सोते हैं तो 3 घण्टे , 01-00 बजे सोते हैं  तो 2 घण्टे और यदि 02-00 बजे सोते हैं तो केवल एक ही घण्टा विषाक्त पदार्थों की सफाई के लिए मिलता है ।कहने का मतलब यह है कि आप इन चार घण्टों को जितना सोने में व्यतीत करोगे , शरीर उतना ही स्वस्थ रहेगा । उतने ही अधिक विषाक्त पदार्थ नष्ट हो सकेंगे और यही विषाक्त पदार्थों का नष्ट होना आपकी स्वास्थ्य रक्षा करेगा । 


(२) अगर आप रात्रि 03-00 बजे के बाद सोते हैं तो दुर्भाग्य से आपके पास शरीर को विषमुक्त करने के लिए कोई समय नहीं बचता । यदि आप इसी तरह से सोना जारी रखते हैं , तो समय के साथ ये विषाक्त पदार्थ आपके शरीर में जमा होने लगते हैं और यही एक समय आपके शरीर में विकराल बीमारी का कारण बनते हैं ।

 (३)  क्या आप कभी देर तक जागे हैं? क्या आपने महसूस किया है कि अगले दिन आपको बहुत थकान होती है , चाहे आप दिन मैं कितने भी घण्टे सो लें , कोई लाभ नहीं मिलने वाला ?


(४) शरीर को विषमुक्त करने का पूरा समय न देकर आप शरीर की कई महत्त्वपूर्ण क्रियाओं से भी चूक जाते हैं । क्योंकि प्रात: 03-00 बजे से 05-00 बजे के बीच का समय में रक्त संचरण का केन्द्र आपके लंग्स ( फेंफड़े) होते हैं । इस समय आपको ताज़ी हवा में साँस लेना चाहिए और व्यायाम करना चाहिए । किसी उद्यान में जाके अपने शरीर में अच्छी ऊर्जा भर लेनी चाहिए , इस समय हवा एकदम ताज़ी और लाभप्रद गुणों से भरपूर होती है । 


(५) प्रात: 05-00 बजे से 07-00 बजे के बीच रक्त संचरण का केन्द्र आपकी बड़ी आँत की ओर होता है । आपको इस समय शौच व स्नानादि करना चाहिए ।अपनी बड़ी आँत से सारा अनचाहा मल बाहर कर देना चाहिए । भगवत्  भजन आदि करें ।अपने शरीर को दिन भर ग्रहण किए जाने वाले पोषक तत्वों के लिए तैयार करें ।


(६) सुबह 07-00 बजे से 09-00 बजे के बीच का समय रक्त संचरण का केन्द्र आपका पेट या अमाशय होता है । इस समय आपको जलपान ( अल्पाहार , बालभोग तथा पाश्चात्य में कहें तो नाश्ता ) करना चाहिए । यह दिन का सबसे जरूरी आहार है । ध्यान रखें कि इसमें सारे आवश्यक पोषक तत्त्व हों | सुबह बालभोग न करना भविष्य में कई स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का कारण भी बनता है । 

      यदि आपके पास अपने दिन की शुरुआत करने का आदर्श तरीका आ गया है । अपने शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी का अनुसरण करते हुए अपनी प्राकृतिक दिनचर्या का पालन करें और हमेशा स्वस्थ रहें , व्यस्त रहें , प्रसन्न रहें , मस्त रहें , आनंदित रहें ।

यशपाल सिंह आयुर्वेद रतन 

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