*आयुर्वेद और योग*
*आयुर्वेद केवल रोगों की चिकित्सा ही नहीं करता वह शारीरिक और मानसिक विकास पर भी जोर देता है
योग प्राणायाम तथा विभिन्न शारीरिक क्रियाएं आहार विज्ञान दैनिक दिनचर्या भीआयुर्वेद की वैकल्पिक चिकित्सा के ही अंग है।
*---------------------------*
मानव मस्तिष्क और शारीरिक शक्ति चुस्ती फुर्ती को सतत अभ्यास और शारीरिक तथा मानसिक गति विधि और योग अभ्यास प्राणायाम विभिन्न शारीरिक गतिविधियों ( एक्सरसाइज )द्वारा बढ़ाया जा सकता है इस लिये प्र य बन्धु बच्चों तथा किशोरों के सरवांगीय विकाश के लिये बोद्धिक और शारीरिक क्रियाओं के लिए प्रेरित करें किसी भी कार्य को बार बार करनै से व्यक्ति को उस कार्य में दक्षता प्राप्त हो जाती है तभी तो कहा है।
करत करत अभ्यास के जडमत होत सुजान।
पत्थर आवत जात से सिल पर पडत निशान।।
माध्वाचार्य वैध चिंतामणी में लिखते हैं और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी यही कहता मानव मस्तिष्क के मुख्य भाग को प्रमस्तिष्क कहा जाता है। यह मस्तिष्क का सबसे ऊपरी हिस्सा होता है, जो खोपड़ी के ठीक नीचे पाया जाता है। इसमें करोड़ों – अरबों न्यूरोंस होते है। न्यूरोंस की संख्या ही मनुष्य के बुद्धिमान और बुद्धिहीन होने का निर्धारण करती है। शरीर की ताकत का अनुमान खून की क्रियाशीलता से लगाया जाता है और मस्तिष्क की बुद्धिमत्ता का अनुमान न्यूरोंस की संख्या क्रियाशीलता से लगाया जाता है।
जिनके खून में उबाल -तेजी-(फुर्ती)नहीं होती, क्रियाशीलता नहीं होती, वह लोग अक्सर आलसी और डरपोक किस्म के पाए जाते है। किसी का शक्तिशाली और बुद्धिमान होना उसके अपने हाथ में है। चाहे तो अपने खून और न्यूरोंस को क्रियाशील बनाकर वीर, साहसी और बुद्धिमान बने या फिर डरपोक, मुर्ख और आलसी ही बने रहे व्यायाम करने से शरीर बलिष्ठ होता है योग और प्राणायाम करने से रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ती है ।
सनातन वांग्मय केअथर्ववेद के विद्वान ॠषि का कहना है
मस्तिष्क और मानव शरीर एक चाकू की तरह है चाकू या तलवार को जितना पत्थर पर रगडो उतनी धार तेज और मारक हो जाती है शरीर को एक्सरसाइज योग अभ्यास पोष्टिक आहार वैदिक दिनचर्या द्वारा बलिष्ठ और निरोग बनाया जा सकता है निरंतर अभ्यास से मस्तिष्क की रचनात्मकता कौशल को बढ़ाया जा सकता है वृद्ध अवस्था में शतरंज खेलने वालों को अल्जाइमर या मोनो भ्रंस रोग नहीं होता।
इसी प्रकार मस्तिष्क को योग मस्तिष्क गत एक्सरसाइज से बोद्धिक विकास निर्णय लेने की क्षमता याद दास्त और किसी भी क्षेत्र में दक्षता को विकसित किया जा सकता है।
यशपाल सिंह आयुर्वेद रत्न 9837342534
Comments
Post a Comment