आयुर्वेद के चमत्कार। महावीर आजाद शास्त्री
1 अर्कादि तैल आक के पत्तों का रस 1 किलो, सरसों का तैल 250 ग्राम, हल्दी चूर्ण 70 ग्राम, हल्दी चूर्ण को पानी में पीसकर गोला बना लें फिर सभी को एक बर्तन में डालकर अग्नि पर मन्द अग्नि पर पकाएं। जब केवल तैल मात्रा शेष रह जाए, तब उतार छानकर शीशी में सुरक्षित रखें। इस तैल को हल्के हाथ से जहां शरीर में खुजली चल रही हो वहां लगावें। यह तैल खुजली के लिए अति उत्तम है। इससे कोढ़ तथा दाद भी नष्ट हो जाते हैं।
2 - खुजली तथा दाद की अचूक दवा -
हल्दी 50 ग्राम को पानी के साथ पीसकर चटनी बना लें। आक के पत्तों का रस 4 किलो तथा सरसों का तैल आधा किलो लेकर तीनों चीजों को कढ़ाई में मंदाग्नि पर पकाएं। जब केवल तैल शेष रह जाए तो उतार छान लें फिर इसमें मोम 100 ग्राम डालकर अग्नि पर दोबारा गर्म करें। मोम के मिल जाने पर नीचे उतार लें। इसके बाद इसमें पारा तथा गंधक की कज्जली 40 ग्राम, भुना हुआ सुहागा, सफेद कत्था, चोपचीनी, कमेला, काली मिर्च, राल, मुर्दासंग, भुना हुआ नीला थोथा, भुनी हुई फिटकरी, मैनशिल और गंधक ये सभी 20-20 ग्राम लेकर कूट छान कर कज्जली में मिला दें फिर इन सबको अच्छी प्रकार से तैल में मिला सुरक्षित रखें। यह तैल खुजली तथा दाद को जड़ सहित नष्ट करता है। जो व्यक्ति इनकी चिकित्सा करते-करते थक गए हों, निराश हो गए हों, वे इस तैल का प्रयोग करके लाभ लेवें।
3 - चमला दाद की अनुपम औषध ऊंट पेट की 10 मींगन जो गोल-गोल होती हैं, उन्हें लेकर एक साथ रख कर जला लें, जब वे अच्छी प्रकार
से जल जाएं तो उन्हें एक-एक को चिमटे से पकड़कर 70 ग्राम आक के दूध में बुझा दें। इनके ठंडा होने पर नीम के ताजा डंडे से इनकी अच्छी घुटाई करें। साथ-साथ थोड़ा-थोड़ा सरसों का तैल भी डालते जाएं, जब घुटाई करते-करते मरहम सी बन जाए तो दाद व चंबल पर दोपहर बाद लगाएं तथा प्रतिदिन लगाते रहें। यदि बीत्त में कुछ कष्ट होने लगे तो ढ़ाक के पत्तों का व बनाकर उससे साफ कर लें क्योंकि किसी कि व्यक्ति पर आक के दूध का जहर चढ़ जाता है। उस समय औषधि लगाना छोड़ दें। रोगी को घी पिलाएं तथा गर्म करके घी ही लगाएं। यदि दाद चंबल न जाए तो दो-चार दिन के पीछे दाद चंबल पर फिर यही दवाई लगा दें। यह दाद के चंबल कृमियों को जड़ सहित नष्ट करती है। इसके लगाने से कष्ट अवश्य होता है किंतु भयंकर से भयंकर जिद्दी दाद चमला नष्ट हो जाता है।
4 - लाल चूर्ण - आक की जड़ का छिलका 10 ग्राम, गेरू 10 ग्राम, नौसादर 10 ग्राम, काली मिर्च 10 ग्राम, कपूर 5 ग्राम, सबको बारीक पीसकर कपड़ छान करके सुरक्षित रख लें। यह दवा हर प्रकार के पेट के रोगों पर एक ग्राम से तीन ग्राम तक गर्म जल के साथ लेने पर पूर्ण फायदा करती है। यह है उदर पीड़ा, पेट में गोला बनना, कब्जी होना, दस्त लगना, तिल्ली तथा जिगर के रोगों को नष्ट करती है। खांसी, जुकाम, बुखार आदि रोगों को भी दूर करती है। सस्ती तथा सुंदर है। पेट के रोगों पर गर्म पानी, गाय की छाछ या गोमूत्र के साथ प्रयोग कर सकते हैं। 5 देवदारू चूर्ण, ढ़ाक के बीज, आक की जड़ की छाल, गज पीपल, सुहांजना की छाल, अश्वगंधा नागौरी, इन सबको संभाग लेकर बारीक पीसकर पर लेप करने से पेट के रोग नष्ट हो।
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